
त्रेहान इंडस्ट्रीज,
अभी- अभी डॉक्टर ने अश्की के बारे में जो बात कहीं थी, उसे सुनकर अरमान के चेहरे पर इस वक्त कोई भाव नहीं था. उस कमरे में पूरी तरह से सन्नाटा पसरा हुआ था. अरमान की नजरे इस वक्त अश्की के चेहरे पर ठहरी हुई थी और उसके हाथों की मुट्ठियां पूरी तरह से बंधी हुई थी. वही डॉक्टर अब अपना बैग पैक करने को हुई कि तभी पीछे से किसी की आवाज उनके कानों में पडी. जिसे सुनकर डॉक्टर ने पीछे की तरफ देखा, तो उसके चेहरे पर सवालिया एक्सप्रेशन आ गए. वही अरमान, उसे इस शख्स से भी जैसे कोई फर्क ना पडा हो. वह अभी भी लगातार अश्की की तरफ ही देख रहा था.
यह शख्स कोई और नहीं, बल्कि अम्मा थी. अम्मा अब डॉक्टर की तरफ देखते हुए बोली, यह क्या बोल रही हैं आप? तभी मिसेज जिंदल उनकी तरफ देखकर बोली, आप कौन? मिसेज जिंदल की बात पर अम्मा बोली, मैं इसकी मां हूं. मुझे बताइए, क्या हुआ है मेरी बच्ची के साथ? मिसेज जिंदल ने अम्मा की बात तो सुनी, लेकिन अगले ही पल उसकी नजरें सामने खडे अरमान की तरफ गई, जो अभी भी लगातार अश्की को ही देख रहा था. उसने एक बार भी मिसेज जिंदल की तरफ नहीं देखा था.
मिसेज जिंदल को अरमान की तरफ देखता पाकर अम्मा गुस्से से उनकी तरफ देखते हुए बोली, मैंने पूछा, क्या हुआ है मेरी बेटी के साथ? मेरा हक बनता है जानने का। अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अरमान मिसेज जिंदल को बिना देखे बोला, गेट लॉस्ट नाउ। जैसे ही अरमान ने यह बात कही, अम्मा की आंखें बडी हो गई. वही मिसेज जिंदल यह चीज समझ चुकी थी कि यह बात उसके लिए है लेकिन अम्मा का चेहरा अरमान को देखकर सर्द हो गया था. क्योंकि उन्हें नहीं पता था कि अरमान ने यह बात किसके लिए कही थी. वह अब बिना मिसेज जिंदल की तरफ देखे बोली, बडे बदतमीज हैं आप दामाद जी। Amma जी की बात पर अरमान ने कोई रिएक्शन नहीं दिया. वह बस लगातार अभी भी अश्की के चेहरे की तरफ देखे जा रहा था. इस वक्त उसकी जो लाल आंखें थी, उनमें उसकी तकलीफ आज साफ दिखाई दे रही थी. लेकिन फिर भी उसने अपने चेहरे को पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस रखा हुआ था. दूसरी तरफ मिसेज जिंदल ने जल्दी से अपना सामान पैक किया और वहां से जाने को हुई. तभी अम्मा ने उसका हाथ पकड कर अपनी तरफ घुमाया और बोली, मैंने तुमसे कुछ पूछा है?
अम्मा की बात पर मिसेज जिंदल पूरी तरह से घबरा गई. उन्होंने जल्दी से अरमान की तरफ देखा, जो अब सर्द नजरों से मिसेज जिंदल की तरफ देख रहा था. जैसे ही उसने अरमान की नजरे खुद पर पाई, मिसेज जिंदल जल्दी से अम्मा से अपना हाथ छुडाते हुए बोली, देखिए, मुझे इस बारे में आपसे कोई बात नहीं करनी है. मुझे जिन्हें बताना था, मैंने बता दिया. आप उनसे जाकर पूछ सकती हैं। इतना कह कर उसने जल्दी से अम्मा से अपना हाथ छुडाया और अपना सूटकेस लेकर वहां से चली गई. वही जावेद, जो कि दरवाजे पर खडा था, वह भी यह सब चीज देख रहा था. उसे तो यह समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर अरमान अम्मा के साथ ऐसा बिहेवियर क्यों कर रहा था. और अश्की, अश्की से उसका इतना रुखा रहना तो उसे समझ में आता था कि आखिर क्या वजह थी. लेकिन अम्मा के साथ रुखा रहना उसे अच्छा नहीं लग रहा था. हालांकि बेकसूर तो अश्की भी थी, कसूरवार तो सिर्फ उसका पिता था. तो अरमान क्यों अश्की को सजा दे रहा था? यह बात भी जावेद को बिल्कुल भी अच्छी नहीं लग रही थी, लेकिन वह क्या ही कर सकता था.
उसने अब गहरी सांस ली और वहां से चला गया, क्योंकि वह जानता था कि अरमान को रोक तो सकता नहीं. आखिर था तो उसका बॉस, इसके अलावा उसका क्या ही रिश्ता था. भले ही उसने बचपन से अरमान के साथ काम किया था. अरमान के लिए वह हर जगह वफादारी से खडा रहा था. लेकिन फिर भी था तो वह नौकर ही. यही सोच कर जावेद अब वहां से चला गया था.
दूसरी तरफ अम्मा, जो अब गुस्से से तमतमा गई थी. उन्होंने अब अपनी जलती हुई नजरों से अरमान की तरफ देखा. जिसने अब दोबारा से नजरे अश्की की तरफ घूमा ली थी. वह अपनी जगह पर खडा- खडा जैसे जमा पडा था. ना कोई रिएक्शन दे रहा था, ना उसके चेहरे पर कोई भाव था. एकदम एक्सप्रेशंस चेहरा, लेकिन आंखों में दुनिया जहां की उदासी. लेकिन फिर भी किसी के सामने उदासी को आने नहीं देना चाहता था. उसका दिल जो महसूस कर रहा था, वह नहीं चाहता था कि कोई उसके दिल में झांक कर देखे. लेकिन अश्की यह काम कर रही थी. वह हर बढते पाल के साथ उसके दिल में झांकते जा रही थी. वह जितना अश्की को रोक रहा था, जितनी अपने दिल के पास दीवारें बना रहा था, अश्की उन दीवारों को तोडकर अंदर घुस रही थी और यह चीज उसे पसंद नहीं आ रही थी.
जब उसने अश्की से शादी की थी, उसने एक ही बात सोची थी कि सिर्फ अश्की को शारीरिक जरूरत के लिए रखेगा और उसे उसकी हर वक्त औकात याद दिलाएगा. लेकिन वह ऐसा चाह कर भी नहीं कर पा रहा था. भले ही वह बात- बात पर उससे गुस्सा रह रहा था, उससे ठीक से बात नहीं करता था. कहीं ना कहीं यह चीज उसे खुद भी जैसे अंदर तक जला रही थी.
दूसरी तरफ अम्मा अब उसके सामने आकर खडी हुई. अम्मा उसके सामने खडी तो हो गई थी, लेकिन अरमान ने अभी भी अपनी नजरें अश्की पर से नहीं हटाई थी.
अम्मा ने अब उसे गहरी नजरों से देखा और अगले ही पल उसने अरमान के चेहरे पर अपना हाथ रख दिया. जैसे ही अम्मा ने अरमान के चेहरे पर अपना हाथ रखा, एक पल के लिए अरमान अपनी जगह पर खडा- खडा जैसे freez हो चुका था. उसने इस चीज की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी, क्योंकि अभी कुछ देर पहले जिस तरह से अम्मा ने उसे बदतमीज कहा था, उसे लगा था कि शायद अम्मा को भी उस से नफरत हो गई होगी लेकिन अम्मा ने जिस तरह से उसके पास आकर उसके गाल पर हाथ रखा था, वह हैरानी से अम्मा की तरफ एक पल के लिए देखने लगा था. लेकिन अगले ही पल उसने अपने चेहरे के भाव बदले और एक बार फिर से अपना चेहरा एक्सप्रेशन लेस कर लिया. अम्मा का हाथ पकड कर अपनी गाल से हटाते हुए बोला,
जरा अपने हाथों को अपने कंट्रोल में रखिएगा. मुझे यह चीज बिल्कुल नहीं पसंद कि कोई मुझे मेरी इजाजत के बिना छुए। तभी अम्मा एक बार फिर से उसके हाथ से अपना हाथ छुडाते हुए उसके गाल पर हाथ रखते हुए बडे प्यार से बोली, रहेगा तो सारी उम्र, खट्टा नींबू। जैसे ही अम्मा ने यह बात कही, अरमान की आंखें बडी हो गई. उसने अब अम्मा की तरफ देखा और सर्द आवाज में बोला, आज बोल दिया है, दोबारा से यह लफ्ज अपने होठों से मत निकालिएगा.
मैं अरमान त्रेहान हूं, किसी का कोई खट्टा नींबू नहीं। तभी अम्मा व्यंग्य से हंसी और बोली, कितना पत्थर बनाओगे खुद को? तुम्हें इस पर तरस नहीं आ रहा? बच्चा खो दिया तुमने अपना। तभी अरमान भी सख्त आवाज में बोला, मुझे चाहिए भी नहीं था। उसकी बात सुनकर अम्मा का दिल तडप उठा और उनकी आंखों में नमी तैर गई. लेकिन वह अपने आप को कंट्रोल करते हुए बोली, जानती हूं, तुम पहले भी पत्थर थे और अभी भी पत्थर हो. लेकिन इस पत्थर को पिघलाने वाली पहली लडकी जो थी, आज भी वहीं पिघलाएगी। इतना कहते हुए उन्होंने अश्की की तरफ देखा. अम्मा की बात पर अब अरमान व्यंग्य से हंसा और बोला, गलतफहमी है आपकी, तब मैं बच्चा था. लेकिन अब मैं बच्चा नहीं रहा. सही गलत की पहचान है मुझे, धोखे की पहचान है मुझे।
तभी अम्मा उसकी तरफ देखकर बोली, इतना भी पत्थर मत बनो उसके सामने कि जब तक तुम्हें एहसास हो, दूसरे को फर्क पडना ही बंद हो जाए। तभी अरमान भी एक्सप्रेशन लेस होकर बोला, फर्क पडना बंद होता है, तो हो जाए. आई डोंट केयर। उसकी बात पर अब अम्मा एक बार फिर से उसके गाल पर हाथ रखते हुए बोली, मैं जानती हूं बेटा, तुम टूटे हुए हो. लेकिन किसी को अपने दर्द पर मरहम लगाने की इजाजत तो दो. क्या पता, इस मरहम से जो जख्म तुम्हारे अंदर हुए है, वह भर जाए।
इस बार अरमान ने दोबारा से अम्मा का हाथ पकडा और उनकी तरफ देखकर दांत पीसकर बोला, दुश्मन कभी भी जख्म भरता नहीं है, उन्हें कुरेदता है. यह लडकी मेरे जख्म कुरेद रही है. यह सिर्फ मेरी शारीरिक जरूरतों के लिए थी। अरमान की बात सुनकर एक पल के लिए अम्मा को अरमान की बात पर उस पर गुस्सा आ रहा था. लेकिन उन्होंने फिर से गहरी सांस ली और उसकी आंखों में देखते हुए बोली, सब जानती हूं मैं, तुम्हारी आंखों में तुम्हारा दर्द दिखाई देता है कि तुम कितनी उससे नफरत करते हो और कितना प्यार.
उसकी बात पर अरमान अब व्यंग्य से हंसा और बोला, तो आपको भी उसकी तरह भ्रम हुआ है क्या, बडी मां? उसके मुंह से बडी मां सुनकर अम्मा के चेहरे पर दर्द भरी मुस्कराहट तैर गई. वह बोली, चलो तुम्हें याद तो आया कि मैं तुम्हारी बडी मां हूं। उसकी बात सुनकर अरमान एक पल के लिए चुप हो गया. लेकिन वह अब अपना चेहरा दूसरी तरफ मोडते हुए बोला, लेकिन क्या फायदा, आप भी कौन सा कुछ कर पाई थी मेरी मां के लिए। उसकी बात पर अम्मा ने अपनी आंखें कसकर बंद कर ली और बोली, इसी बात का मलाल है बेटा कि मैं कुछ नहीं कर पाई।
अरमान की हाथों की मुट्ठियां कस गई. वह दांत पीसकर बोला, प्लीज बडी मां, यहां से चली जाइए. मैं कुछ नहीं सुनना चाहता। तभी अम्मा बोली, अश्की को मेरी जरूरत है, बेटा, उसका मिसकैरेज हुआ है। तभी अरमान उनकी तरफ देखकर बोला, उसे आपकी जरूरत नहीं है, उसे मेरी.
इतना कहकर वह चुप हो गया. वहीं अम्मा तकलीफ भरा मुस्कुराई और बोली, अगर अपनी बात पूरी कर देते, तो शायद मेरे दिल को भी सुकून मिल जाता. जब उस दिन घर पर आए थे, तो इतना बवाल किया था. अगर इसे पता चल जाता कि तुम मुझे जानते हो, तो शायद वह आज मुझसे नफरत करती। उसकी बात पर अरमान अब अम्मा की तरफ और भी गहरी नजरों से देखते हुए बोला, आपको किसने कहा कि मैं आपको जानता हूं।
तभी अम्मा एक बार फिर से तकलीफ भरा मुस्कुराई और बोली, बडी मां भी बोलते हो और बोलते हो कि मैं तुम्हें पहचानता भी नहीं. वाह बेटा! आप एक वक्त पर मेरी बडी मां थी, लेकिन अब आप मेरे लिए कुछ भी नहीं है. सो प्लीज, आप यहां से जा सकती हैं और अश्की का ख्याल मैं खुद रख सकता हूं. जब से उसकी शादी मेरे से हो गई, तब से आपके साथ उसका कोई लेना देना नहीं है, तो अब आप जा सकती हैं। इतना कहते हुए उसने दरवाजे की तरफ इशारा किया. अरमान की बात सुनकर अम्मा को बुरा तो बहुत लग रहा था, लेकिन वह कर भी कुछ नहीं सकती थी.
क्योंकि अरमान को पत्थर बनाने के पीछे कहीं ना कहीं अम्मा खुद का भी हाथ समझती थी. अब तो उम्मीद सिर्फ अश्की थी कि कहीं ना कहीं अरमान को पिघला दे, क्योंकि जो आशा की किरण आज उन्होंने अरमान की आंखों में देखी थी, इतना तो साफ था कि एक न एक दिन अरमान अश्की के लिए पागल तो जरूर होगा. लेकिन डर इस बात का था कि कहीं देर ही ना हो जाए और अश्की ही खुद अरमान से दूर चली जाए. लेकिन क्या अरमान उसे खुद से दूर जाने देगा तब तक, अभी यह तो वक्त ही बताने वाला था.
अम्मा अब अपने आंसू, जो कि उनके गालों पर लौट आए थे, उन्होंने अपने साफ किए और अपने कदम दरवाजे की तरफ बढाने को हुई. तभी उनकी नजर अश्की पर गई, जो बेजान सी अपनी जगह पर लेटी हुई थी. अभी तक उसने अपनी आंखें नहीं खोली थी. अश्की को इस तरह से देखकर अम्मा को अपने दिल में हुक उठती हुई महसूस हो रही थी. कहीं ना कहीं उन्होंने ही अरमान के पल्ले अश्की को बांधा था. सब कुछ जानते हुए कि अरमान इस वक्त Kiss तरह से पत्थर बना हुआ था. लेकिन फिर भी उनके दिल में आज उम्मीद कायम थी कि शायद वह अपना बेटा वापस पा सके, वह भी अश्की के रास्ते से.
लेकिन इस वक्त जिस तरह से अश्की की हालत थी, उसे देखकर उन्हें हद से ज्यादा तकलीफ हो रही थी. उन्होंने अब अपने कदम अश्की की तरफ बढाए ही थे कि तभी अरमान अपनी सर्द आवाज में बोला, लगता है आपको यहां से जाने में तकलीफ हो रही है. तो ऐसा करता हूं कि मैं अपनी Wife को ही यहां से ले जाता हूं। इतना कहकर बीजी तेजी से अपने कदम अश्की की तरफ बढाने को हुआ कि तभी अम्मा उसकी तरफ देखते हुए बोली, बस करो अरमान, इतना भी क्या गुस्सा तुम्हारा, सच्चाई जाने बिना ऐसे कैसे तुम हम सबको सजा दे सकते हो। इससे आगे वह कुछ बोलती कि तभी अरमान के कदम वहीं पर रुक गए. अब उसने एक बार फिर से अपनी लाल आंखों से अम्मा की तरफ देखा.
अब उसने कुछ देर अम्मा के चेहरे की तरफ देखा, जो अब अरमान को गुस्से से देख रही थी. लेकिन अगले ही पल अम्मा हैरानी से अरमान की तरफ देखने लगी, क्योंकि अरमान अब जोरो जोरो से हंसते हुए तालियां बजाने लगा. उसको यूं तालियां बजाते हुए देखकर एक पल के लिए अम्मा उसकी तरफ देखते ही रह गई. कुछ सोच कर वह बोला, बेकसूर और यह। इतना कहते हुए उसने अश्की की तरफ उंगली पॉइंट की. भूल गई Kiss तरह मेरे दिल को छलनी करके गई थी.
और Kiss सच्चाई की बात कर रही हैं आप, बोलिए. हां बताइए ना, मैं भी तो जानू कि आखिर सच्चाई क्या है इसकी इस तरह से मुझे छोडने की. आखिर है तो यह भी अपने बाप का खून ही ना। अभी वह बोल ही रहा था कि तभी अम्मा जी का हाथ अरमान पर उठ गया. लेकिन उन्होंने अरमान के गाल को छुआ नहीं, बल्कि उनका हाथ हवा में ही रुक गए. ना ही अरमान ने उनके हाथ को रोका. अम्मा अब अपने हाथों की मुट्ठी करते हुए अपना हाथ नीचे लेकर गई. इस वक्त उनकी आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे थे. लेकिन अगले ही पल उन्होंने गहरी सांस ली और अपनी आंखों के आंसू साफ करते हुए बोली,
गलती तुम्हारी नहीं है, गलती मेरी है. लेकिन किसी बेकसूर पर इल्जाम लगाने से पहले उसके बारे में पूरी तरह जान तो लिया होता, अरमान.
तभी अरमान सख्त आवाज में बोला, यह आप भी जानती हैं बडी मां कि यह कितनी कसूरवार है और कितनी बेकसूर. अगर इतनी ही यह बेकसूर है, तो आप ही मुझे इसकी सच्चाई बता दीजिए। इसके आगे अम्मा जी कुछ कहने को हुई, लेकिन उनकी आंखों के सामने एक हल्की सी झलकी घूमने लगी, जो की शायद अश्की की थी. अश्की के सिर पर काफी चोट लगी हुई थी और वह लगभग से अपनी हल्की- हल्की आंखें खोल कर अम्माजी की तरफ देख रही थी. उसमें अश्की लगभग से शायद पंद्रह साल की होगी. अश्की अम्मा जी की तरफ देखकर लडखडाती हुई आवाज में बोली, आप उन्हें कुछ नहीं बताएगी, आपको मेरी कसम बडी मां. इतना कह कर वह पूरी तरह से बेहोश हो गई. वही अम्मा, जो कि यह चीज सोच रही थी, उन्होंने अब होठों पर एक बार फिर से लगाम लगा ली थी. उन्होंने कुछ देर अरमान की तरफ देखा और अगले ही पल तेजी से अपने कदम बाहर की तरफ बढा दिए. यह चीज देखकर अरमान की मुट्ठियां एक बार फिर से कस गई.
क्योंकि कहीं ना कहीं कुछ तो था, जो अम्मा छुपा रही थी. यह चीज अब अरमान पूरी तरह से समझ चुका था. उसने अश्की की तरफ देखा, जो अभी भी बेहोश थी. उसे बेहोश देखकर अरमान के चेहरे पर परेशानी झलकने लगी थी. अब वह वैसे ही सामने सोफे पर जाकर बैठ गया और गहरी नजरों से अश्की को देखने लगा. लेकिन अब उसके दिमाग में अम्मा की बातें भी घूम रही थी. कुछ सोचते हुए उसने अब जावेद को Call लगाया और जावेद ने एक Call पर ही अरमान का फोन रिसीव किया. अरमान ने जावेद से कुछ कहा, जिसे सुनकर जावेद की आंखें बडी हो गई और वह लडखडाती हुई आवाज में बोला, लेकिन बॉस.
उसकी बात पर अरमान सर्द आवाज में बोला, जो कहा है, वह पूरा करो और इसी वक्त. तुम्हारे पास सिर्फ चौबीस घंटे का वक्त हैं। इतना कहकर अब उसने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया और अब उसकी नजरें अश्की पर थी. वह अश्की के होश में आने का वेट कर रहा था. ऐसे ही रात के नौ बज गए, लेकिन अश्की को अभी तक होश नहीं आया था. यह चीज देखकर अब अरमान का दिल अब और भी ज्यादा बेचैन होने लगा था. बढते पल के साथ वह अब अपना कंट्रोल खोने लगा था. लेकिन तभी उसका इंतजार खत्म होते हुए अश्की की आंखें हल्की- हल्की फडफडाई. जैसे ही अश्की की आंखें फडफडाई, अरमान की नजर जो एक टक उसके चेहरे पर टिकी हुई थी, उसकी आंखें बडी हो गई.
दूसरी तरफ अब अश्की धीरे- धीरे अपनी आंखें खोलने लगी थी. तभी उसकी नजर सामने अरमान पर गई. अरमान पर नजर जाते ही उसकी आंखें एक बार फिर से नम हो गई. उसकी आंखों को देखकर एक पल के लिए अरमान का दिल धक सा रह गया, क्योंकि कहीं ना कहीं वह समझ गया था कि अश्की को पता चल चुका था कि उसका मिसकैरेज हो चुका है. इसीलिए उसकी आंखों में नमी तैर रही थी.
इस बार अश्की की आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे थे. लेकिन अरमान ने उसके आंसुओं को रोकने को नहीं कहा. आज उसने एक बार भी उसे कुछ नहीं कहा. वही अश्की अब लगभग से रोते हुए बोली, आप जो चाहते थे, वह हो गया, मान.
अब तो आप खुश है ना. अब तो आप मुझे कहीं छोडकर नहीं जाएंगे ना। उसकी बात सुनकर अरमान का चेहरा एक बार फिर से एक्सप्रेशन लेस हो चुका था. हाथों की पूरी तरह से मुट्ठियां कस चुकी थी. पर बोला कुछ भी नहीं था वह. तभी अश्की धीमे से अपनी जगह से उठते हुए बैठने को हुई, लेकिन उससे बैठा तक नहीं जा रहा था. दूसरी तरफ अरमान भी किसी जिद्दी पत्थर की तरह उसके सामने खडा था. वह एक बार भी उसे उठाने के लिए पास नहीं आया. किसी तरह अश्की लडखडाते हुए बेड पर बैठ तो गई थी, अब वह अपना सिर पूरी तरह से रेस्ट पर लगाते हुए गहरी गहरी सांस भरते हुए बोली, अब तो कुछ बोल दीजिए, मान.
अब क्यों मुझसे खफा होकर खडे हैं। इससे आगे वह कुछ बोलती कि तभी अरमान ने अपने फोन पर कुछ किया और फोन पर कुछ करते हुए ही वहां से बाहर की तरफ निकल गया. यह चीज देखकर अश्की का दिल एक बार फिर से टूट गया. अरमान की इतनी ज्यादा बेरुखी जैसे अब उसे टूटने पर मजबूर कर रही थी.
किसी तरह खुद को पत्थर की तरह बनाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अरमान की बेरुखी हर पल उसे तोड रही थी. पर आज भी अरमान किसी पत्थर की तरह उसके आगे से चला गया था. उसने उसकी एक भी बात का कोई जवाब नहीं दिया था. अब उसकी आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे थे. कोई भी औरत हो, वह कभी नहीं चाहेगी कि जब उसका गर्भपात हुआ हो, तो उसका पति उसे छोडकर जाए. गर्भपात के समय का दर्द और एक बच्चा होने से पहले का किया हुआ व्यवहार स्त्री हमेशा याद रखती है.
लेकिन आज अरमान ने भी वही हरकत की थी. उसका इस तरह से छोडकर जाना अश्की को जैसे अंदर ही अंदर खल गया था. लेकिन वह अपने आंसुओं को पोंछते हुए बोली, कोई बात नहीं, कितनी देर नहीं पिघलेंगे आप मैं पिघलाऊंगी आपको. अगर मेरा इश्क सच्चा है, तो एक न एक दिन आपको पिघलना होगा. पत्थर कहते हैं ना आप खुद को.
तो मैं भी देखती हूं, यह पत्थर कब तक नहीं पिघलता, गलता. इस पत्थर को पिघलने के लिए खुद भी पत्थर बनना पडे ना, तो भी बनूंगी। इतना कहते हुए लगभग से उसकी आंखों में आंसू आ चुके थे. अब उसने अपने आंसू पूरी तरह से पोंछे. तभी अरमान एक बार फिर से Room में आया और अरमान को Room में आता हुआ देखकर उसकी नजरें एक बार फिर से अरमान की तरफ उठ गई थी. लेकिन अरमान ने उसकी तरफ अब नहीं देखा. वह सीधा बालकनी में गया और अपनी जेब में से सिगरेट निकालकर अपने होठों में दबाकर उसे जलाकर लंबे कश भरने लगा.
उसकी नजरें इस वक्त आसमान की तरफ उठी हुई थी और दिमाग में ऐसा लग रहा था कि बहुत कुछ चल रहा है, लेकिन अब आंखें बिल्कुल शांत. उसकी आंखों में देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे कोई तूफान आने को हो. लेकिन क्या, अब यह तो वक्त ही बताएगा. दूसरी तरफ अश्की, जो कि सामने बालकनी की तरफ देख रही थी, वह किसी तरह अपनी जगह से खडे होने को हुई. उसमें तो इतनी जान नहीं थी कि वह अपनी जगह से खडी हो सके. क्योंकि पिछले दो दिन से कुछ ना खाने की वजह से उसके शरीर में इतनी ज्यादा कमजोरी आ चुकी थी कि वह अपने पैरों पर खडी नहीं हो पा रही थी, उसके पैर भी कांप रहे थे.
लेकिन फिर भी किसी तरह से वह अपनी जगह से खडी हुई और उसने अपने कदम धीरे- धीरे कर अरमान की तरफ बढा दिए. उसके जिस्म में जैसे जान बिल्कुल भी नहीं थी. लेकिन फिर भी गहरी गहरी सांस भरते हुए किसी तरह बालकनी तक पहुंची. तभी उसके कदम पूरी तरह से लडखडा गए एक बार फिर से वह गिरने को हुई, लेकिन उसने खुद को खुद ही संभाल लिया. दूसरी तरफ अरमान, जो की बालकनी में खडा था, वह समझ चुका था कि बालकनी के दरवाजे पर अश्की आकर खडी हो चुकी है. लेकिन उसने इस पर भी पलट कर अश्की की तरफ नहीं देखा.
तभी अश्की अपनी तडपती हुई आवाज में बोली, कितना तडपायेंगे मान. कीजिए ना बात।
उसकी बात अरमान ने साफ सुनी, लेकिन कोई भी रिएक्शन नहीं दिया, ना ही पलट कर देखा. अब एक बार फिर से अश्की पीछे आकर खडी हुई. तभी अरमान ने सिगरेट को नीचे की तरफ फेंका और अब वह Room की तरफ अंदर चला गया. इस तरह अरमान को जाता देख अश्की के हाथ जैसे हवा में ही रह गए. एक बार फिर से उसकी आंखों में आंसू उतर आए.
उसने सोचा भी नहीं था कि अरमान उसकी जिद से ज्यादा पत्थर था और उसका पत्थर दिल तो जैसे पिघलने का नाम ही नहीं ले रहा था. या फिर पिघल तो रहा था, लेकिन वह दिखाना ही नहीं चाहता था. अश्की ने अब बालकनी की तरफ देखा और आसमान की तरफ देखने लगी. ठंडी हवाएं उसके चेहरे को छू रही थी, उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. इतना खूबसूरत चेहरा, लेकिन बेरंग और आंखों में सच्चाई, पर एक अलग सा सूनापन और उदासी. उसने तो जैसे सूनेपन को अपनी जिंदगी बना लिया था. दूसरी तरफ अरमान दीवार से सटा हुआ उसे ही देख रहा था, लेकिन अश्की को इस चीज का बिल्कुल भी नहीं पता था. वह लगातार उसे देखते हुए एक जगह पर खडा सिगरेट पी रहा था. अश्की तो अपने ही ख्यालों में घूम अरमान के साथ जीना चाहती थी. लेकिन जब वह अरमान को देखती थी. उसका दिल करता था कि अरमान के साथ जिए, पर अरमान कहां ही पिघल रहा था.
अभी वह अपने ख्यालों में गुम सामने आसमान की तरफ देख रही थी कि तभी उस Room का दरवाजा एक बार फिर से नोक हुआ. इस बार सर्वेंट एक बार फिर से खाना लेकर आई और सर्वेंट ने टेबल पर खाना लगाया. अश्की ने पलट कर सर्वेंट की तरफ देखा, जो कि खाना लगा रही थी. अश्की ने खाने की तरफ देखा और अगले ही पल अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया. उसको इस तरह से अपना चेहरा घुमाते देखा अब अरमान की नजरे उस पर सर्द हो गई थी.
लेकिन अश्की इस चीज से बिल्कुल ही अनजान थी कि इस वक्त अरमान उसे अपनी जलती हुई नजरों से देख रहा था. जैसे ही सर्वेंट ने खाना लगाया, वह अपना खाना लगाकर वहां से अगले ही पल निकल गई. दूसरी तरफ अश्की, जो अभी भी बालकनी में खडी थी. उसके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था. अब तो उसकी आंखें भी जैसे जवाब दे गई थी. उसकी आंखों में आंसू सूख चुके थे. तभी अरमान बालकनी के दरवाजे पर आकर खडा हुआ और अपनी सर्द आवाज में बोला, अंदर चलो।
अरमान की बात अश्की के कानों में साफ सुनाई दी थी. लेकिन अब उसने अरमान को पूरी तरह से इग्नोर किया जिस तरह से उसने अरमान को इग्नोर किया था, अरमान का चेहरा काला पड गया. अब वह अगले ही पल अश्की के पास आया. वो बेहद गहरी आवाज में उसके पीछे खडे होकर बोला, मैंने कहा, अंदर चलो। उसकी बात पर इस बार भी अश्की ने कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप सामने देखते रही.
अश्की का कुछ ना बोलना अरमान को हद से ज्यादा गुस्सा दिला रहा था. अब उसने अश्की का हाथ पकडा और उसे अपनी तरफ एक झटके से घुमाया, तो अश्की ने उसकी आंखों में देखा. लेकिन कुछ खास रिएक्ट नहीं किया. इस वक्त अश्की की आंखें पूरी तरह से खाली थी. उन सूनी आंखों से अश्की उसकी आंखों में देख रही थी, लेकिन कह कुछ नहीं रही थी हालांकि उसे अपने हाथ में हद से ज्यादा दर्द हो रहा था, जिस तरह से अरमान ने उसके हाथ को कसकर पकड हुआ था.
लगभग से उसकी आंखों में पानी आने लगा था. लेकिन वह पानी भी जैसे जिद के कारण बाहर नहीं आ पा रहा था. तभी अरमान गुस्से से कांपते हुए बोला, मैंने कहा, अंदर चलो। उसकी बात पर अश्की ने उसका हाथ अपने हाथ से हटाया और बोली, मेरा मूड नहीं है अंदर जाने का। इतना कहकर वह एक बार फिर से बालकनी की तरफ घूम गई.
जैसे ही वह बालकनी की तरफ घूमी, इस बार अरमान ने उसके सिर के पीछे अपना हाथ रखा और उसके बालों को मुट्ठी में भरते हुए अपनी तरफ एक बार फिर से घुमाया. उसका चेहरा पूरी तरह से अरमान के चेहरे के करीब हो गया. अरमान उसके चेहरे के ऊपर झुकते हुए बोला, एटीट्यूड hmm.
बट अरमान त्रेहान को यह चीज बिल्कुल नहीं पसंद कि कोई उसे एटीट्यूड दिखाएं। उसकी बात पर अश्की अब दर्द भरा मुस्कुराई और बोली, अरमान त्रेहान को तो मैं ही नहीं पसंद, तो मेरा एटीट्यूड क्या ही पसंद आएगा. खैर, मेरे बालों को छोडिए, मुझे दर्द हो रहा है। उसकी बात पर अरमान का गुस्सा और भी ज्यादा बढ गया. उसकी पकड अश्की के बालों पर कस गई.
तभी अरमान गुस्से से कांपते हुए बोला, मैंने तुमसे सिर्फ इतना कहा है कि अंदर चलो। तभी अश्की भी एक बार फिर से कैजुअल बोली, मैंने भी आपसे कहा है कि मुझे अंदर नहीं जाना. मेरा दिल नहीं कर रहा अंदर जाने को। बस इसी बात से अरमान अब बेकाबू हो गया. अगले ही पल उसने अश्की को गोद में उठाया और अंदर की तरफ ले जाने लगा. जिस तरह से अरमान ने अश्की को गोद में उठाकर अंदर की तरफ ले जाना शुरू किया था, अश्की ने भी अरमान से कुछ नहीं कहा. वह बस एक्सप्रेशन लेस होकर अरमान की तरफ देखे जा रही थी. दूसरी तरफ अरमान भी उसकी नजर खुद पर बखूबी महसूस कर रहा था, लेकिन उसने कुछ कहा नहीं. अब कुछ इस सेकंड में वह उसे सोफे पर लेकर आया और खाने के सामने उसे बैठा दिया. वह उसे देखते हुए कोल्ड वॉइस में एक बार फिर से बोला, खाना खाओ।
उसकी बात पर अश्की ने उसे कुछ नहीं कहा. बस अपनी जगह से खडी होकर दोबारा से वहां से जाने को हुई. इस बार अरमान ने उसका हाथ कसकर पकडा और उसे अपनी तरफ खींच लिया. जिससे अश्की पूरी तरह से उसके ऊपर झुक गई. दोनों के चेहरे एक दूसरे के इतने करीब आ चुके थे कि दोनों को एक दूसरे की सांस साफ अपने होठों पर महसूस हो रही थी. अश्की अरमान की आंखों में देख रही थी, जिसकी आंखें इस वक्त आग उगल रही थी. अश्की इस वक्त अरमान को हद से ज्यादा गुस्सा दिला रही थी.
अरमान अब उसे दांत पीसकर बोला, मैंने कहा, बैठो और खाना खाओ। तभी अश्की भी कैजुअली उसके ऊपर से उठते हुए बोली, मैंने भी आपसे कहा है, मुझे भूख नहीं है। तभी अरमान गुस्से से बोला, तीन दिन से तुमने कुछ नहीं खाया, अभी भी तुम्हें भूख नहीं है। उसकी बात पर अश्की फीका सा मुस्कुराई और बोली, क्या फर्क पडता है, मैंने खाया हो या ना खाया हो. आपने कौन सा खा लिया? अगर मैंने नहीं खाया, अगर मैं तीन दिनों से भूखी रही हूं, आपने भी शराब और सिगरेट के सिवा कुछ खाया पिया है क्या?
उसकी बात पर सुनकर अरमान एक पल के लिए सुन्न हो गया. वह हैरानी से अश्की की तरफ ही देखे जा रहा था. उसे इस बात की बिल्कुल भी भनक नहीं थी कि अश्की उसे इतनी करीबी से अब्जॉर्ब कर रही थी. लेकिन अब अश्की अपनी जगह पर खडी हुई और उसकी तरफ देखकर एक्सप्रेशन लेस होकर बोली,
आप खाना खा लीजिए Mister त्रेहान, मुझे भूख नहीं है। उसके मुंह से अपने लिए Mister त्रेहान सुनकर अरमान के चेहरे पर अजीब सी फ्रस्ट्रेशन उतर आई. लेकिन उसने अश्की पर यह चीज जाहिर नहीं होने दी. पर अब उसने एक बार फिर से उसका हाथ पकडा और गुस्से से उसे घूरते हुए बोला, मैंने कहा, खाना खाओ।
अश्की भी बेहद नॉर्मल वे में बोली, मैंने भी आपसे कहा Mister त्रेहान, मुझे भूख नहीं है। तभी अरमान गुस्से से कांपते हुए बोला, देन फाइन, तुम्हें भूख नहीं है ना। उसकी बात पर अश्की ने ना में सिर हिलाया. लेकिन अगले ही पल, जो अरमान ने कहा, उसे सुनकर अश्की की सांस उसके गले में अटक गई.
To be continue.








Write a comment ...