
त्रेहान palace,
अश्की ने जो अभी- अभी कहा था, उसे सुनकर अम्मा तो अपनी जगह पर खडी जैसे जम सी गई थी. आज पहली बार अश्की ने अम्मा की किसी बात को टाला था. जिस तरह से अश्की ने डिवोर्स पेपर पर Sign करने से मना कर दिया था. अम्मा ने कभी सोचा भी नहीं था कि अश्की उनके खिलाफ जाएगी. तभी गौरव बीच में बोला, ये क्या बोल रही हो तुम, अश्की? तुम अम्मा की बात को टाल रही हो, अम्मा की. आज तक तुमने अम्मा के आगे आवाज नहीं उठाई और आज. अभी वह बोल ही रहा था कि तभी अम्मा ने उसे हाथ दिखाकर रोक दिया.
लेकिन उनकी नजरें लगातार अश्की पर बनी हुई थी. अम्मा की नजरे अश्की पर बेहद गहरी थी. वह अपनी सख्त आवाज में बोली, हमने अपनी जुबान दे दी है, बेटा. अब तुम्हें हमारी बात माननी होगी. अम्मा की बात सुनकर अश्की की आंखों में नमी उतरने लगी. उसने अपने हाथों की मुट्ठियां कसी और एक बार फिर से बोली, माफ कर दीजिए अम्मा, लेकिन इस बार हम आपकी बात नहीं मान सकते. अश्की की बात सुनकर अम्मा एक पल के लिए स्तब्ध रह गई.
वह अश्की का यह रूप देखकर बेहद हैरान थी. लेकिन इस बार उन्होंने बेहद सख्ती से अश्की के हाथ को पकडा और झकझोरते हुए बोली, हमारी आंखों में देखो, अश्की. अम्मा की बात तो अश्की के कानों में पडी, लेकिन उसने अपनी नजरे उठाकर एक बार भी अम्मा की आंखों में नहीं देखा. दूसरी तरफ हंसिका और गौरव के चेहरे पर इस वक्त बेहद फ्रस्ट्रेशन भरे भाव थे. अब तक तो अश्की को उन पर यकीन हो जाना चाहिए था. ऐसा भी क्या, जो अश्की उन पर यकीन तक नहीं कर पा रही थी.
अश्की ने अपनी नजरें लगातार जमीन की तरफ गडाई हुई थी. उसकी आंखों में आंसू अभी भी थे, जो उसकी आंखों में जमे हुए थे. जब कुछ देर अश्की ने अपना चेहरा ऊपर की तरफ नहीं उठाया, तो अम्मा ने उसकी ठूडी के नीचे अपना हाथ रखा और उसका चेहरा ऊपर की तरफ उठाया. अश्की की आंखों को देखकर एक पल के लिए अम्मा का दिल धक सा रह गया, क्योंकि उसकी आंखों में जैसे एक सैलाब सा उतर आया था. आंसू तो बहने को तैयार थे. जो कि उसकी आंखों में लगभग से जमे हुए थे.
लेकिन अम्मा ने अपना दिल पत्थर किया और उसकी तरफ देखकर बोली, तुम्हें इन पर Sign करना होगा, बिटिया. अम्मा की बात सुनकर अश्की ने रोते हुए ना में सिर हिलाया. अम्मा ने अब उसे देखते हुए कहा, अगर तुमने इस पर Sign नहीं किया, तो तुम हमारा मरा हुआ चेहरा देखोगी. अम्मा की बात सुनकर अश्की का दिल धक सा रह गया. बची खुची जान भी अब अम्मा ने अश्की के बदन से निचोड ली थी. उसके हाथ पूरी तरह से नीचे की तरफ लटक चुके थे.
आंखों में जो आंसू थे, वह तो एक पल के लिए जैसे आंखों में ही सूख गए. लेकिन अब दिल रो रहा था और इतना बुरी तरह रो रहा था कि अंदर तक अश्की को तोड रहा था. अम्मा ने अब उसके हाथ में पेन दिया और बोली, जल्दी Sign करो, बिटिया. इतना कहकर उन्होंने अश्की के आगे पेपर्स बढा दिए. दूसरी तरफ अश्की बिल्कुल बेजान सी अब उनके सामने खडी थी. ऐसा लग रहा था, जैसे उसके जिस्म में जान ही ना बची हो.
उसको इस हालत में देखकर अम्मा को भी तकलीफ हो रही थी. लेकिन वह क्या ही कर सकती थी. अब किसी शादीशुदा मर्द के साथ तो वह अपनी बिटिया को रहने नहीं दे सकती थी. यही सोचकर उन्होंने अश्की का तलाक करने का सोचा था. अब उन्होंने उसकी का हाथ पकडा और उसे डाइनिंग टेबल की तरफ लेकर गई. उन्होंने पेपर डाइनिंग टेबल पर रखा और अपने हाथ में अश्की का हाथ पकडते हुए उसके Sign करवाने को हुई. लेकिन अश्की के हाथ जैसे पेन पकडने को ही तैयार नहीं थे.
लेकिन फिर भी अम्मा ने किसी तरह पेन कसकर पकडा और उस पर Sign करवा दिए. बस यहां अश्की धम्म से घुटनों के बाल नीचे जमीन पर गिर पडी. यह जो डाइवोर्स पेपर थे, इन पर अरमान के Sign पहले ही थे. अब अश्की के Sign पाकर हंसिका और गौरव के चेहरे पर शातिर मुस्कराहट तैर गई. अब हंसिका ने जल्दी से अम्मा के हाथ से वह पेपर लिए और बेहद खुश होते हुए बोली, जल्दी से गौरव और अपनी बेटी को लेकर आइए. हम इसकी शादी करवा देते हैं.
इतना कहते हुए हंसिका और नियति जी और वास्तव जी ने अपने कदम बैकयार्ड की तरफ बढा दिए थे.
तकरीबन बीस मिनट बाद,
मंडप लगा हुआ था और गौरव मंडप में बैठा था. लेकिन अश्की मंडप पर नहीं बैठी थी, क्योंकि उसे अम्मा ने तैयार करने के लिए भेजा हुआ था. दूसरी तरफ गौरव की खुशी तो जैसे संभाले नहीं संभाल रही थी कि आज उसकी मन की मुराद पूरी होने वाली थी. वह मन ही मन बोला, आज मैं पूरी तरह से तुम्हें अपना बनाऊंगा. पूरी रात तुम्हारे जिस्म का जाम चखूंगा. जब तुमसे मन भर जाएगा, तो मेरी तरफ से जो मर्जी करना. लेकिन तब तक तुम्हारे जिस्म से खेलूंगा. कब से तमन्ना थी तुम्हारे जिस्म को निचोडने की, पर आज मौका मिला है. इतना कहते हुए गौरव के चेहरे पर बेहद शातिर मुस्कुराहट थी. सामने खडी हंसिका भी यह चीज देख रही थी. वह भी किसी हवा की तरह उडती ही जा रही थी. इस वक्त वहां खडे हर शख्स के चेहरे पर बेहद कुटिल मुस्कुराहट थी, शिवाय अम्मा के.
अम्मा की आंखों में रह- रह कर नमी आ रही थी. वही जानती थी कि उन्होंने Kiss तरह पत्थर होकर अश्की को अपनी मरने का वास्ता दिया था. वरना अश्की कभी पेपर्स पर Sign नहीं करती. ऐसे ही दस मिनट और बीत गए. पंडित जी गौरव की तरफ देखकर बोले, जजमान, कन्या को बुलाए. शादी का मुहूर्त निकला जा रहा है. जैसे ही पंडित जी ने यह कहा, तो अम्मा ने आगे बढकर हां में सिर हिलाया और बोली, मैं अभी लेकर आती हूं. इतना कहकर वह अपने कदम अंदर की तरफ बढने को हुई कि तभी हंसिका उन्हें रोकते हुए बोली, आप रहने दीजिए, मैं लेकर आती हूं उसे.
इतना कहते हुए लगभग से हंसिका ने अपने कदम अंदर की तरफ बढा दिए थे. तकरीबन पंद्रह बीस मिनट बाद दो सर्वेंट अश्की को लेकर आ रही थी. अश्की का चेहरा पूरी तरह से घुंघट से ढका हुआ था और आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे. इस वक्त ना तो वह चलने की लायक तो बिल्कुल नहीं थी. अश्की के पैर भी लगभग से जैसे जवाब देते जा रहे थे, चलना तो दूर की बात. वह एक अपना पांव तक आगे नहीं रख पा रही थी. वही जानती थी कि वह Kiss तरह से चल रही थी. ऊपर से सर्वेंट जोर से लेकर आ रही थी. उन्हें भी अश्की को संभालने में दिक्कत हो रही थी, क्योंकि वह बहुत ज्यादा लडखडा रही थी.
लेकिन कुछ ही सेकंड में सर्वेंट ने अश्की को गौरव के बराबर लाकर बैठा दिया. वही अम्मा ने यह चीज देखकर अपनी आंखें कसकर बंद कर ली. उनकी आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे. वह रोते हुए मन ही मन बोली, मुझे माफ कर देना बेटी, लेकिन इसी में तेरी भलाई है. मैं तुझे नर्क में रहने नहीं दे सकती. इतना कहते हुए अम्मा को अपने कलेजे में हद से ज्यादा दर्द महसूस हो रहा था. वही जानती थी कि Kiss तरह से अश्की को इस शादी के लिए मजबूर कर रही थी.
दूसरी तरफ मंडप में बैठी हुई अश्की के चेहरे पर कोई भाव नहीं था. पहले जिस तरह से उसके आंखों से आंसू झर झर बह रहे थे, अब उसका चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस था. ऊपर से इतने लंबे चौडे घुंघट की वजह से अश्की का चेहरा पूरी तरह से ढका हुआ था. सामने खडी नियति जी के चेहरे पर इस वक्त बडे ही दिलकश भाव थे. वह खुद में बोली, बहुत गुमान है ना तुम्हें इस लडकी पर अरमान, तो आज यही लडकी तुम्हारा गुमान तोडेगी. क्या कहा था तुमने?
इस लडकी को कोई हाथ नहीं लग सकता. आज यह लडकी पूरी रात किसी और के साथ बिस्तर पर होगी और तुम कुछ नहीं कर पाओगे. इतना कहते हुए नियति जी के चेहरे पर डेविल स्माइल तैर चुकी थी. अभी वह खुद में खुश हो ही रही थी कि तभी उनके कानों में जानवी जी की आवाज पडी. यह किसकी शादी हो रही है मां, और आप सब लोग यहां पर क्या कर रहे हैं? पार्टी तो आगे चल रही है. इतना कहते हुए जानवी जी ने मंडप की तरफ देखा. अश्की के चेहरे पर घूंघट होने की वजह से जानवी उन्हें पहचान नहीं पाई. उन्हें बिल्कुल भी पता नहीं चला कि घुंघट के नीचे इस वक्त अश्की थी.
दूसरी तरफ अश्की तो शुद्ध बुद्ध गंवाए इस वक्त मंडप में बैठी थी, वह क्या ही बोलती. जानवी जी ना तो गौरव को पहचानती थी और ना ही अम्मा को. इसीलिए उसे कुछ खास पता नहीं चला कि इस वक्त Kiss की शादी उस मंडप में हो रही है. वह बस एक टक दुल्हन को देख रही थी. जिसका चेहरा उन्हें साफ दिखाई नहीं दे रहा था. तभी नियति जी दांत पीसकर बोली, तुम्हें इन सबसे क्या लेना देना और तुम यहां पर क्या कर रही हो?
तुम्हें कोई काम धंधा नहीं है. शर्म नहीं आती, आगे पार्टी चल रही है और तुम यहां पर मुंह उठा कर चली आ रही हो. नियति जी की बात सुनकर जानवी जी की आंखों में नमी उतर आई थी. अब उन्होंने हंसिका की तरफ देखा, जो बिना किसी परवाह के उन्हें देख रही थी. दूसरी तरफ अम्मा जी, जोकि अश्की को देख रही थी, उसे तो जैसे इन चीजों से कोई लेना- देना ही नहीं था. लेकिन फिर भी जानवी जी को बहुत ज्यादा बुरा लग रहा था, क्योंकि नियति जी का स्वभाव बहुत ज्यादा गंदा था. जो हर किसी के सामने उन्हें बेइज्जत कर देती थी.
उसका एक कारण यह भी था कि नियति जी जानवी जी को बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी. क्योंकि वह बहुत गरीब घर से थी. जिस वजह से नियति जी लगभग से जानवी जी से नफरत ही करती थी. अब वह एक बार फिर से दांत पीसकर बोली, अब क्या यहीं पर मरी रहेगी, जाएगी नहीं. जाकर पार्टी में देख, किसी चीज की जरूरत तो नहीं. मुंह उठा कर चली आई है. और हां, अपना मुंह बंद रखना. पीछे क्या हो रहा है, क्या नहीं हो रहा है, मेरी रिश्तेदार है, जिसकी शादी हो रही है. तुझे क्या लेना देना है.
अपनी बेटी की शादी नहीं कर पा रही थी, तो मैं उसकी शादी करवा रही हूं. इसलिए अपना मुंह बंद रखो और जाओ जाकर पार्टी देखो. इतना कहकर नियति जी ने अपना चेहरा मंडप की तरफ घूमा लिया था. दूसरी तरफ अम्मा ने यह बात नहीं सुनी थी. अगर सुन लेती, तो हो सकता था कि नियति जी को बेहद खरा जवाब देती. लेकिन इस वक्त वो इस कदर अश्की में डूबी हुई थी कि उन्हें किसी चीज का होश ही नहीं था.
तभी वास्तव जी नियति जी की तरफ देखकर बोले, तेरा दिमाग खराब है, तू ऐसे ही उसे बोलती रहती है. रुला दिया बहू को. इतना कहते हुए वास्तव जी ने अपना हाथ जानवी जी के कंधों पर रखा और बोली, तू चिंता मत कर बहू, कुछ नहीं बस शादी हो रही है. इतना कहते हुए उन्होंने लगभग से जानवी जी के कंधे पर जिस तरह से हाथ रखा था, एक पल के लिए जानवी जी कांप उठी थी. वह पिछले कई सालों से यह चीज बर्दाश्त करती आ रही थी. वास्तव जी का उन पर बुरी नजर रखना तो शुरू से ही था. लेकिन वह किसी को कुछ नहीं बताती थी. अंदर ही अंदर सब कुछ सहती चली आ रही थी. अब इस तरह से वास्तव जी का उसके कंधे पर हाथ रखना उसे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा था. वह जल्दी से वास्तव जी का हाथ अपने कंधे से हटाते हुए बोली, मैं जा रही हूं. इतना कह कर वह जल्दी से वहां पर रुके बिना चली गई.
दूसरी तरफ शादी लगभग से संपन्न होने की कगार पर थी. फेरे पूरे हो चुके थे. तभी पंडित जी ने गौरव से कहा, वधू के गले में मंगलसूत्र डालिए. गौरव ने बडे आराम से मंगलसूत्र उठाकर अश्की के गले में सजा दिया. अश्की, जोकि मंडप में बैठी बार- बार आग को देख रही थी, आग जैसे उसकी आंखों में अब चुभने लगी थी.
तभी पंडित जी ने गौरव से अश्की की मांग भरने को कहा. इस बार गौरव ने अपनी उंगलियों में सिंदूर भरा. तभी अम्मा जी ने उसी वक्त अश्की का घूंघट उसके चेहरे से उठाया. तभी वहां पर लाइट चली गई और इतने में ही गौरव ने अश्की की मांग पूरी तरह से भर दी. अभी उसने अश्की की मांग भरी ही थी कि तभी अश्की जोरों से चीख पडी.
नहीईई.
इसी के साथ वहां पर अंधेरे में ही गन शॉट हुआ, जिससे
वहां पर खडा हर एक इंसान कांप उठा.
To be continue.








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