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Divorce paper

त्रेहान फार्महाउस,

अश्की इस वक्त गहरी बेहोशी में थी और उसे इस बेहोशी में गए हुए लगभग से दो घंटे हो चुके थे. दो घंटे से अरमान अभी तक घर नहीं आया था. वह अभी तक गहरी बेहोशी में थी, क्योंकि अरमान जाते वक्त उसे इंजेक्शन देकर गया था. जिस वजह से वह अभी भी गहरी नींद में थी. लेकिन उसके सामने ही नियति जी टेबल के साथ लगकर खडी हुई थी और अपनी गहरी नजरों से अश्की को देख रही थी.

इस वक्त नियति जी के जबडे पूरी तरह से कसे हुए थे. नियति जी अभी अश्की को देख ही रही थी कि तभी एक सर्वेंट उनके पास आकर खडी हुई और उसके हाथ में ट्रे थी. उस ट्रे एक पानी का गिलास था. नियति जी ने उस पानी के गिलास को अपने हाथ में लिया और अगले ही पल अपने पर्स में से एक tablet निकाली और उस tablet को पानी में मिक्स कर दिया. दूसरी तरफ सर्वेंट भी यह चीज देख रही थी. नियति जी को ऐसा करते देखकर सर्वेंट के हाथ पैर फूलने लगे. क्योंकि वह अरमान को बहुत अच्छे से जानती थी. वह काफी पुरानी सर्वेंट थी, जिस वजह से उसे अरमान के गुस्से का भी पता था. इस तरह से अब नियति जी को पानी में टैबलेट मिक्स करते देख सर्वेंट के चेहरे पर पसीना छलकने लगा था.

वही नियति जी ने उसे तिरछी नजरों से देखते हुए बोली, अपना मुंह यहीं पर बंद रखना. अगर बात बाहर गई, तो तुम्हें जिंदा गडवा दूंगी. नियति जी की बात सुनकर सर्वेंट और भी ज्यादा परेशान होने लगी. अगले ही पल वह वहां से चली गई. लेकिन उसे नियति जी से ज्यादा डर अरमान का था.

वह सर्वेंट जल्दी से वहां से किचन में चली गई. दूसरी तरफ नियति जी की गहरी नजरे अब दोबारा से अश्की पर आ चुकी थी. इस वक्त उनके चेहरे पर एक डेविल स्माइल थी. नियति जी ने अब वह हाथ में पकडा हुआ पानी अश्की के पास लाया और उसके सिर को थोडा सा ऊपर उठाकर उसके होठों से लगा दिया. जिससे थोडा- थोडा पानी अश्की के मुंह में जाने लगा. चार- पांच घूंट पानी पिलाने के बाद नियति जी ने वह वहीं टेबल पर रख दिया. वह एक बार फिर से वही टेबल के साथ टिक कर खडी हो गई. अब उनकी घूरती हुई नजरे अश्की पर टिकी हुई थी. तकरीबन पाँच दस मिनट बाद अश्की की आंखें हल्की- हल्की फडफडाने लगी.

अश्की की आंखों को फडफडाता हुआ देखकर नियति जी के चेहरे पर डेविल स्माइल और भी लंबी हो गई. क्योंकि वह समझ चुकी थी कि अश्की अब होश में आने लगी है. पाँच मिनट में ही अश्की की आंखें पूरी तरह से खुल चुकी थी. अब उसकी नजर पहले सीलिंग पर गई, तो उसकी आंखें बडी हो गई. सीलिंग की तरफ देखकर ही वह समझ चुकी थी कि वह अरमान के फार्म हाउस में है. अब उसने कंफर्म करने के लिए इधर- उधर नजरे दौडाई, तो सच में इस वक्त वह फार्म हाउस में थी. लेकिन अगले ही पल उसकी नजरें नियति जी पर गई, जो की पास में टेबल से टिककर खडी थी. नियति जी को यूं देखकर अश्की को पता नहीं क्यों एक अलग ही वाइब आ रही थी. नियति जी की स्माइल कोई नार्मल स्माइल अश्की को लग नहीं रही थी. इसीलिए उन्हें देखकर अश्की को अजीब सा फील हो रहा था.

वही नियति जी अब टेबल से सीधी खडी हुई और अपने कदम अश्की की तरफ बढा दिए. नियति जी को अपनी तरफ आता देखकर अश्की को एक अलग ही बेचैनी होने लगी. वह पीछे की तरफ खिसकने लगी. अश्की को यूं पीछे खिसकता देख नियति जी हंसी और उसकी तरफ देखकर बोली, इतना घबरा क्यों रही हो, बेटा और यह पीछे की तरफ क्यों जा रही हो? अरे! आखिर अरमान की दूसरी बीवी हो तुम. मैं तो तुम्हारी दादी हूं ना.

जैसे ही नियति जी ने अश्की को यह बात कही, अश्की की आंखें बडी हो गई. एक पल के लिए उसका चेहरा पूरी तरह से सुन्न पड गया था. उसकी धडकने जैसे थम सी गई थी उसे ऐसा लग रहा था, जैसे उसकी सांस ही रुक गई हो और आंखों में नमी तैरने लगी थी. वही नियति जी अब उसे और भी गहरी नजरों से देखते हुए बोली, अरे अरे! रो नहीं बेटा, अरमान ने तुम्हें बताया नहीं कि वह पहले से शादीशुदा है.

देखना चाहोगी, उसकी बीवी बडी खूबसूरत है. हां, वह बात अलग है कि तुम भी खूबसूरत हो. लेकिन उसके जितनी खूबसूरत नहीं हो. इतना कहते हुए नियति जी ने अपने जैकेट की पॉकेट में से एक फोटो निकाली और अश्की के आगे रख दी. यह फोटो किसी और की नहीं, बल्कि हंसिका की थी. हंसिका की फोटो देखकर अश्की का दिल कांप रहा था. उसे ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने उसका दिल ही उसके सीने से बाहर निकाल दिया था.

अभी डेढ हफ्ता ही हुआ था उनकी शादी को, लेकिन एक अलग ही जज्बात उसे अरमान के साथ महसूस होने लगे थे. हालांकि उसे अपने जज्बात कंफर्म नहीं थे कि वह सच में अरमान से प्यार करती है या नहीं. लेकिन फिर भी उसे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था. यह चीज सुनकर कि अरमान की पहले से शादी हो चुकी थी और यह चीज उसे अंदर तक तोड रही थी. वही नियति जी अब उसे देखते हुए बोली, क्या हुआ बेटा, रो मत, फिर क्या हुआ? वैसे भी अमीर की दो- दो बीवी तो होती है, वैसे तो बीवी एक ही होती है, दूसरी तो रखेल होती है ना.

नियति जी के मुंह से रखैल सुनकर अश्की का दिल टूट सा गया था. उसकी आंखों से आंसू अब तेजी से बहने लगे थे लेकिन फिर भी खुद को हिम्मत दिलाते हुए वह धीमे से बोली, मैं आप पर कैसे यकीन कर लूं? क्या पता, आप झूठ भी बोल रहे हो. मुझे अरमान जी ने नहीं बताया कि वह शादीशुदा है. मैं आपकी बातों पर ऐसे ही यकीन नहीं कर सकती.

अश्की की बात सुनकर नियति जी के चेहरे पर डेविल स्माइल और भी ज्यादा लंबी हो गई. वह बेहद गहरी आवाज में बोली, good, यही एक्सपेक्ट किया था मैंने तुमसे. वैसे सच बता दिया तुमने, तुम हो तो रखेल ही. बीवी बनने लायक तो तुम हो नहीं उसकी. पता नहीं क्या देखकर उसने तुमसे शादी कर ली. नियति जी की रखैल वाली बात सुनकर अश्की का चेहरा गुस्से से भरने लगा था. वह गुस्से से मुंह फूलाते हुए बोली, मैं उनकी बीवी हूं.

तभी नियति की व्यंग्य से हंसी और बोली, Kiss भ्रम में जी रही हो तुम बेटा, तुम्हें अरमान का सच मालूम भी है कि वह क्या है? जानना चाहती हो कि वह क्या काम करता है? तुमने शादी तो उससे कर ली, लेकिन उसकी सच्चाई जानती हो. काली दुनिया का बेताब बादशाह है वह, गैंगस्टर है वह और उसकी एक पहले शादी हो चुकी है. देखना चाहती हो उसकी मैरिज के सर्टिफिकेट को, देखना चाहती हो. उसकी बात सुनकर अश्की को ऐसा लगा, जैसे किसी ने उसके बदन का खून पूरी तरह से निचोड लिया हो.

उसके हाथ पैर पूरी तरह से ठंडे पडने लगे थे और दिल बुरी तरह से कांप रहा था. अब तो उसकी पूरी बॉडी जैसे शिवर करने लगी थी. वही नियति जी अब हंसी और उन्होंने अपने कोट की जेब में से कुछ पेपर्स निकाले और उन पेपर्स को खोलकर अश्की के आगे रख दिया. जैसे ही अश्की ने उन पेपर्स को देखा, तो वह अपनी जगह पर बैठी बैठी जाम सी गई. क्योंकि वह सच में हंसिका और अरमान के मैरिज सर्टिफिकेट के पेपर थे. उन पर अरमान और हंसिका की फोटोस भी लगी हुई थी. अब उन दोनों की पिक को देखकर शक की कोई गुंजाइश ही नहीं रह गई थी कि वह अरमान और हंसिका की शादी के पेपर्स हैं.

अश्की का दिल बुरी तरीके से टूट चुका था. आंखों से आंसू बहने बंद हो चुके थे. लेकिन अब दिल रो रहा था. पहले वह अरमान को छोडने का सोच रही थी, लेकिन उसने सोचा था कि वह अरमान को सुधारने की कोशिश करेंगी. लेकिन नियति जी ने उसका वह भ्रम भी तोड दिया. जिस तरह से उन्होंने अरमान को गैंगस्टर बताया था, अब तो अश्की का दिमाग ही सुन्न पड चुका था. अश्की की हालत देखकर नियति जी ने उसका और भी फायदा उठाया. अब उन्होंने एक और पेपर्स अश्की के हाथों में रखते हुए बोला, अगर थोडा बहुत भी लाज शर्म बची है ना, किसी की मिस्ट्रेस बनने से अच्छा उसे डिवोर्स दे दो. इस पर Sign करो और दफा हो जाओ यहां से.

अश्की तो अभी भी अपनी जगह पर बैठी सुन्न पड चुकी थी. उसे तो जैसे नियति जी की बात सुनना ही बंद हो चुकी थी. वह अपनी सूनी आंखों से हाथों में पकडे हुए तलाक के पेपर्स को देख रही थी, जो की नियति जी ने ही उसे पकडाए थे. तभी नियति जी ने अपनी जेब में से पैन निकाल कर बोली, अब भी शर्म है, तो Sign कर दो और निकलो. मैंने कहा निकल जाओ.

इतना कहकर नियति जी ने पेन उसके आगे फेंका. अश्की, जो कि इतनी देर से सुन्न हो कर बैठी थी, उसने अपने कांपते हुए हाथों से वह पेन उठाया और धीरे- धीरे कर उसने उन डाइवोर्स पेपर पर अपना हाथ कस दिया. एक बार फिर से उसकी आंखों से आंसू बहने लगे थे, जो कि अब डायवोर्स पेपर्स पर गिर रहे थे. उसे अरमान के साथ बिताए हुए पल एक बार फिर से याद आने लगे थे. डायवर्स पेपर्स पर Sign करने की उसकी अभी भी हिम्मत नहीं पड रही थी. पता नहीं क्यों, उसे नियति जी की बातों पर यकीन करने का बिल्कुल भी मन नहीं कर रहा था. उसके दिल की धडकनें जैसे उसका साथ छोड रही थी.

लेकिन उसने अपने हाथ में पेन कसा और अगले ही पल उन पेपर्स पर Sign कर दिया. जिन्हें देखकर नियति जी का दिल खुश हो गया. अगले ही पल उसने उन पेपर्स को हाथ में लिया और अश्की को गहरी नजरों से देखते हुए बोली, now गेट लॉस्ट, तुम जैसे भिखमंगो की ना तो कल हमें जरूरत थी, ना आज. इतना कहते हुए उनका चेहरा सख्त हो चुका था.

दूसरी तरफ दरवाजे पर खडी सर्वेंट सारी बातें सुन रही थी और उसके हाथ में कुछ था. जब नियति जी की सारी बातें खत्म हो गई, तो उस सर्वेंट ने वह चीज अपने पॉकेट में डाली और वहां से चली गई.

वहीं दूसरी तरफ,

रेहान इंडस्ट्रीज के बेसमेंट में,

अरमान के हाथ में फोन था और वह फोन उसने कानों में लगाया हुआ था. इस वक्त उसका चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस था. सामने उसके हंसिका एक चेयर पर बंधी हुई थी. इस वक्त हंसिका के होठों से खून बह रहा था और उसकी आंखें पूरी तरह से बंद थी. चेहरा नीचे की तरफ लटका हुआ था. ऐसा लग रहा था कि उसके चेहरे पर किसी ने जोर से थप्पड बरसाई हो. क्योंकि उसके दोनों गाल पूरी तरह से सूज चुके थे. पास में पांच छ लडके थे, जिन्हें हंसिका के सामने खडा किया गया था. वह लडके पूरी तरह से बेलिबास थे.

अरमान अभी भी फोन पर लगा हुआ था. कुछ ही देर में उसने अपना फोन अपनी जेब में डाला और अभी भी उसका चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस था. उसने अब उन चारों लडकों को देखा और उन्हें गहरी नजरों से देखते हुए बोला, काम शुरू किया जाए. इतना कहते हुए उसने अपने पास ही के टेबल पर रखा हुआ पानी का गिलास उठाया और हंसिका के चेहरे पर उडेल दिया. जैसे ही उसने हंसिका के चेहरे पर वह पानी उडेला,

हंसिका हडबडा कर उठ गई. जैसे ही हंसिका हडबडा कर उठी, तो उसकी आंखें बडी हो गई. क्योंकि उसके आसपास काफी ज्यादा लडके खडे थे और वह भी अपने हाथों में ग्लव्स पहने, और उनके हाथ में इस वक्त एक फर थी. यह चीज देखकर हंसिका के रोंगटे खडे हो गए थे. उसकी सांसे उसके हलक में अटक चुकी थी. लेकिन तभी उसकी नजर अरमान पर गई. वह चिल्लाते हुए बोली, अरमान, तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते. उसकी बात पर अरमान व्यंग्य से हंसा और बोला, अब तुम मुझे बताओगी कि मैं क्या कर सकता हूं और क्या नहीं? इतना कहते हुए उसके चेहरे पर सारकास्टिक एक्सप्रेशन थे.

उसके एक्सप्रेशन देखकर हंसिका समझ चुकी थी कि अरमान क्या करने की सोच रहा है. वह रोते हुए बोली, मै ये बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी मेरा पेट फट जाएगा. प्लीज, ऐसा मत करो अरमान. तभी अरमान उसके करीब आया और अगले ही पल उसने उसके सिर के पीछे हाथ रख मुट्ठी को कस कर वह उसके गालों को अपने हाथों में भींचते हुए बोला, तुम जैसे गंदी नाली के कीडे को मैंने अब तक जिंदा क्यों रखा, मुझे इस बात का अफसोस सारी उम्र रहेगा. तुम्हारी वजह से मेरी दिलरुबा को किसी ने छुआ और वह भी इतने गंदे तरीके से. अभी तो तुम्हें सजा ही मिल रही है. अगर मेरी दिलरुबा के साथ कुछ हो जाता, तो तुम्हें ऐसी मौत देता कि तुम्हारी सात पुश्तों की रूह तक कांप जाती.

इतना कह कर उसने उसके गालों को छोड दिया. उसने उन लडकों की तरफ देखा, तो लडकों ने हां में सिर हिला दिया. अगले ही पल, वहां पर हंसिका की चीखों की आवाज गूंजने लगी, कभी वो जोरों से पागलों की तरह हंसती तो कभी रोने लग जाति उसका हंसना कंट्रोल ही नहीं हो रहा था आंखों से पानी बहने लगा था. अरमान उन्हें गहरी नजरों से देख रहा था. वह लडके लगातार हंसिका के बदन से उसके कपडे अलग कर रहे थे. अगले ही पल उन्होंने हंसिका के साथ जो किया, हंसिका की दर्द भरी आवाज अरमान के कानों में गूंज रही थी. यह चीज सुनकर अरमान को जैसे सुकून पहुंच रहा था. अगले ही पल, अब अरमान उनकी तरफ देखकर बोला, यह सिलसिला रूकना नहीं चाहिए कल सुबह तक.

इतना कहकर अरमान वहां से निकल चुका था और अब अरमान की आंखें बहुत ज्यादा लाल थी.

इस वक्त उसका चेहरा भले ही नॉर्मल लग रहा था, लेकिन अब एक और तूफान अरमान का इंतजार कर रहा था. क्या वह तूफान अरमान संभाल पाएगा, यह तो अरमान ही जाने.

तकरीबन आधे घंटे बाद अरमान की गाडी फॉर्म हाउस के आगे आकर रुकी. अभी भी अरमान का चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस था. जैसे ही अरमान फार्महाउस के अंदर आया और उसने सीधा सर्वेंट की तरफ देखा, जो कि उसका ही इंतजार कर रही थी. अब उसने अपना चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ झुकाया हुआ था. इस वक्त सर्वेंट का चेहरा पीला पड चुका था और हाथ पैर ठंडे हो चुके थे. अरमान ने एक नजर सर्वेंट की तरफ देखा, लेकिन उसने सर्वेंट को कुछ नहीं कहा. अब उसने अपने कदम कमरे की तरफ बढा दिए. जैसे ही उसने अपने कदम कमरे की तरफ बढाए, तो कमरे में कोई नहीं था. यह चीज देखकर अरमान के होठों के कोने मुड चुके थे.

टेबल पर एक पेपर पडा हुआ था. उस पेपर को देखकर अरमान की स्माइल और भी लंबी हो चुकी थी. उस पेपर पर अश्की के सिग्नेचर थे और यह डाइवोर्स पेपर थे. अरमान ने डोमिनेटिंग वॉइस में बोला, यह तुमने अच्छा नहीं किया, दिलरुबा.

अब इसकी पनिशमेंट तो तुम्हें मिलनी जरूरी है. इतना कहते हुए अरमान की नजरे उन पेपर्स पर और भी गहरी हो गई थी. अब देखते ही देखते अरमान ने उन पेपर्स को हाथ में लिया और पूरी तरह से फाड कर हवा में उछाल दिया.

वहीं दूसरी तरफ,

एक लडकी रेलवे स्टेशन पर बैठी हुई थी और इस वक्त उस लडकी का चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ झुका हुआ था. आंखों से आंसू लबालब बहे जा रहे थे. लडकी के हाथ में ट्रेन की टिकट थी. लेकिन उसके अलावा उस लडकी के पास कोई लगेज, कोई भी सामान वगैरा नहीं

था. वह लगातार उस टिकट को देखकर रोए जा रही थी.

To be continue.

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