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Taqleef hoti hai

यॉर्ट पर,

अरमान, जो कि यॉर्ट के दरवाजे पर खडा सिगरेट पी रहा था. अब उसने अपने होठों में से सिगरेट निकाली और अपने पैरों तले मसलते हुए उसने अपने कदम अश्की की तरफ बढा दिए. दूसरी तरफ अश्की, जोकि यॉर्ट की रेलिंग पर खडी कब से अरमान की गहरी नजरे खुद पर महसूस कर, अभी- अभी उसकी नजरें अरमान पर उठी थी. जिस तरह से अरमान उसके नजदीक आ रहा था, उसे देखकर एक पल के लिए उसका दिल तेजी से धडकने लगा. लेकिन अगले ही पल उसने अपनी नजरों को चुराते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया.

हालांकि अरमान को करीब आता देख उसकी धडकनों ने बवाल करना शुरू कर दिया था. पर उसने इस चीज को अपने चेहरे पर अब आने नहीं दिया, क्योंकि वह इस वक्त अरमान से नाराज थी. वह नहीं जानती थी, कब, क्यों, कैसे, लेकिन इस वक्त वह अरमान से हद से ज्यादा गुस्सा थी. उसकी आंखों में आंसू अभी भी बार- बार तैर रहे थे. अब अरमान का उसके करीब आना जैसे एक बार फिर से उसके दिल को बेकाबू करने लग गया था.

भले ही उसने अपना चेहरा समुद्र की तरफ कर लिया था, लेकिन उसकी सांस इस वक्त गहरी चल रही थी. अरमान अब बिल्कुल उसके पीछे आकर खडा हुआ. अब एक बार फिर से उसने अपनी पॉकेट में से सिगरेट का बंडल निकाला और उसमें से एक सिगरेट निकाल कर होठों से लगाकर लंबे कश भरने लगा. अश्की को उसकी सिगरेट की स्मैल बहुत अच्छे से महसूस हो रही थी. उसे पता चल गया था कि अरमान उसके पीछे खडा सिगरेट पी रहा है. उसने कुछ ज्यादा रिएक्ट नहीं किया. वही अरमान अब उसे गहरी आवाज में बोला, अंदर चलो. उसकी बात पर अश्की जिद्द पर अडते हुए बोली, नहीं जाऊंगी, मुझे आपके साथ कहीं नहीं जाना.

उसकी बात पर अरमान की नजरे उस पर और भी गहरी हो गई. अब उसने एक बार फिर से अपनी डोमिनेटिंग वॉइस में कहा, मैंने कहा, अंदर चलो. अश्की भी पूरी तरह से जिद पर अडती हुई बोली, मैंने कहा, मैं कहीं नहीं जाऊंगी आपके साथ. उसकी बात पर अब अरमान ने अपने हाथों में पडी हुई सिगरेट अपने दोनों उंगलियों में लगभग से मसलते हुए बुझा दी और जमीन पर फेंक कर अब एक ही झटके से अश्की का हाथ पकड कर अपनी तरफ घुमाया.

जिस तरह से अरमान ने अश्की को घुमाया था, एक पल के लिए अश्की की सांस उसके गले में अटक चुकी थी. अरमान अब उसके चेहरे के ऊपर पूरी तरह से झुका और उसके कान के पास बेहद सेडक्टिव वे में चूमते हुए अपनी गर्म सांस उसके कानों के पास छोड, बेहद सेडक्टिव वॉइस में बोला, चलना तो तुम्हें होगा ही, दिलरुबा.

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अरमान की बात सुनकर एक पल के लिए अश्की का तन बदन सिहर उठा. उसे अपने बदन में एक अलग ही कंपकपी सी महसूस हो रही थी. जिस वजह से उसके पूरे बदन के रोंगटे खडे हो रहे थे. लेकिन जल्दी ही वह खुद को संभालते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली, लेकिन मुझे आपके साथ कहीं नहीं जाना. अश्की की इस बात पर अरमान की आईब्रो ऊपर की तरह उठ गई. आज पहली बार अश्की उसके साथ जिद पर अडी हुई थी. अश्की की जिद को देखकर अरमान के होठों के कोने मुड चुके थे. अब उसने एक गहरी सांस ली और वह अश्की की तरफ देखकर बोला, Ok फाइन, तुम नहीं आना चाहती, तो रहो यहां पर सारी रात. इतना कहकर अरमान अंदर की तरफ चला गया. वहीं अश्की यॉर्ट की रेलिंग पर खडी रह गई. यह चीज देखकर उसकी आंखों में नमी आ गई.

पता नहीं क्यों, लेकिन उसे अरमान की बातों से अब अपने दिल में कुछ टूटता हुआ महसूस हो रहा था. वह चाहती थी कि अरमान उसे प्यार से मनाए और अंदर की तरफ लेकर जाएं. लेकिन अरमान को तो जैसे इन चीजों से कोई फर्क ही नहीं पडता था कि अश्की उससे नाराज एक साइड पर खडी है. दूसरी तरफ, अरमान अब अंदर की तरफ आया और उसने अपने कपडों को रिमूव करना शुरू कर दिया. कुछ ही देर में, वह पूरी तरह से belibaas बिस्तर पर बैठा हुआ था और इस वक्त वह बेहद दिलकश लग रहा था. ऊपर से वहां पर हर तरफ फ्रिडरोसिस जो बिखरे पडे थे. उस पूरे कमरे में रेड रोजेस की खुशबू हद से ज्यादा लुभाने वाली थी.

अगर अश्की इस वक्त उसके सामने होती, तो पक्का उसका दिल जैसे धडकना ही भूल जाता. लेकिन फिलहाल अश्की इस चीज से बेखबर यॉर्ट की रेलिंग पर खडी थी. उसकी आंखों से आंसु तेजी से बहने लगे थे. वह सुबकते हुए बोली, आप बहुत बुरे हैं अरमान जी, आपको एक बार तो मुझे मानना चाहिए. लेकिन आपको तो जैसे मेरी नाराजगी, मेरे गुस्से से कोई फर्क ही नहीं पडता.

हां पडेगा भी कैसे, आपके लिए तो मैं सिर्फ एक जिस्म हूं और जिस्म बनकर आपके नीचे आती है और जिस्म बनकर ही चली जाऊंगी. पता नहीं कब आपका इस जिस्म से मन भर जाए और आप मुझे छोड दें. इतना कहते हुए उसकी आंखों से आंसू अब तेजी से बहने लगे थे. उसकी बातों से साफ पता चल रहा था कि उसे अपने दिल में इस वक्त कितना ज्यादा दर्द महसूस हो रहा था. वह दर्द उसे अंदर तक चीर रहा था.

वह इस चीज से बेखबर कि उसे कोई दो आंखें बडी शिद्दत से निहार रही थी. दूसरी तरफ अरमान, जो की बेड पर बैठा हुआ था, वह अब गहरी नजरों से सामने की तरफ देख रहा था. जहां पर उसका Room था, वहां पर एक विंडो ओपन हो गई थी और उस विंडो में मिरर लगा हुआ था. उसका उतना हिस्सा, जो कि पूरा लोहे का था, वह पूरी तरह से नीचे की तरफ हाइड हो गया था.

अब वह सिर्फ एक मिरर था, जो कि पूरा का पूरा ब्लैक Color का था. उसे अंदर से बाहर तो देखा जा सकता था, लेकिन बाहर से अंदर नहीं देखा जा सकता था. वही अश्की, जो कि सामने ही खडी थी, अरमान उसे अपनी लाल आंखों से देख रहा था. इस वक्त उसने हाथ में एक वाइन का गिलास पकडा हुआ था, जो उसके हाथों में पूरी तरह से कस चुका था. उसे अश्की की बात अब साफ- साफ सुनाई दी थी.

अगले ही पल उसके हाथों में पकडा हुआ गिलास उसके हाथ में टूट चुका था. उसका हाथ से खून बह रहा था. लेकिन उसके चेहरे पर एक भी शिकन दिखाई नहीं दे रही थी. अब वह दांत पीते हुए बोला, तुमने यह बात सही नहीं की, दिलरुबा और अब इसकी पनिशमेंट भुगतने के लिए तैयार हो जाओ. जो पनिशमेंट अब तुम्हें मिलेगी, वह तुम्हें जिंदगी भर याद रहेगी. तुम अपने मुंह से ऐसी वार्डिंग्स दोबारा निकालने लायक नहीं बचोगी. इतना कहते हुए अरमान की सर्द नजर इस वक्त सामने खडी अश्की पर थी.

दूसरी तरफ अश्की अभी भी यॉर्ट की रेलिंग पर खडी सामने की तरफ देख रही थी. अब ठंड बढने लगी थी, क्योंकि रात के बारह बजने को हो गए थे. ऊपर से समुद्र था, समुद्र में तो वैसे भी रात को ठंड बढ जाती थी. अब अश्की के हाथ खुद ब खुद अपने बदन पर लिपटने लगे थे. उसे अपनी किस्मत पर इतना ज्यादा रोना आ रहा था कि रात के बारह बज चुके थे, लेकिन अरमान अभी तक उसे मनाने नहीं आया था. उसका दिल इस वक्त बुरी तरह से तडप रहा था कि अरमान एक बार तो उसके पीछे आए. लेकिन एक घंटा ऐसे ही और बीत गया, रात का एक बज गया, लेकिन अरमान अभी भी नहीं आया.

अब तो उसके पैर भी जवाब दे गए थे, क्योंकि वह काफी देर से वहां पर खडी थी. अब थक हार कर उसने हार मान ली और अपने कदम अंदर कमरा की तरफ बढा दिए. लेकिन जैसे ही वह Room में पहुंची, उसके दिल की धडकन एक पल के लिए जैसे स्किप हो गई, क्योंकि सामने अरमान अभी भी वाइन पी रहा था और बेहद sexy वे में वह बेलीबास अपने पैरों को अलग कर बैठा था. इस वक्त कोई भी लडकी उसे देख लेती, तो उसके लिए अपनी जान ही दे देती.

वहीं अश्की का भी आज कुछ ऐसा ही हाल था. उसकी नजरें एक टक अरमान के ऊपर ठहर चुकी थी. इस वक्त अरमान को देखकर उसका दिल जोरों जोरों से धडक रहा था. दूसरी तरफ अरमान, जो कि अपने हाथ में पकडी हुई वाइन को पी रहा था. उसके हाथ में, जो खून लगा हुआ था, वह अब सूख चुका था. लेकिन हाथ में पकडे हुए गिलास के कारण वह सही से दिखाई नहीं दे रहा था. ना ही अश्की की नजर अभी उसके हाथ पर पडी थी. वह बस अरमान को देखे जा रही थी. उसको इस तरह से देखकर अश्की का चेहरा सुर्ख लाल हो चुका था.

उसने अब अपनी नजरें पूरी तरह से झुकाई और अपने कदम अंदर की तरफ बढा दिए और सामने पडे सोफे पर जाकर बैठने को ही हुई. तभी उसकी नजर सामने मिरर पर पडी, जहां से यॉर्ट की रेलिंग साफ दिखाई दे रही थी. वहां से आने वाली आवाज भी साफ सुनाई दे रही थी. अब अश्की का दिल और भी तेजी से धडकने लगा. मतलब इतनी देर से अरमान उसे देख रहा था. अब जाकर उसे इस चीज का एहसास हुआ था.

उसने पलट कर अरमान की तरफ देखा, जिसकी अभी भी इंटेंस निगाहे उस पर थी. वह अब खुद को नीचे से सहलाते हुए बडे सेडक्टिव वे में बोला, रिमूव योर क्लॉथस, बेबी. उसने बस इतना ही कहा था कि अश्की के रोंगटे खडे होने लगे. अब उसने अपने कोट को और भी कसकर पकड लिया और लडखडाती हुई आवाज में बोली, नहीं करूंगी.

उसने इतना ही कहा था कि अरमान के होठों के कोने मुड गए. अब एक बार फिर से वहां पर कांच टूटने की आवाज सुनाई दी. उस आवाज को सुनते ही अश्की का दिल जैसे धक सा रह गया और उसकी आंखों से एक बार फिर से तेजी से आंसू बहने लगे. वह रोते हुए जल्दी से अरमान की तरफ भागी और उसके हाथ को पकडने को हुई कि तभी अरमान ने अपना हाथ पीछे की तरफ खींच लिया.

जिस तरह से अरमान ने अपना हाथ पीछे की तरफ खींचा था, अश्की पूरी तरह से बेचैन हो गई थी. अब वह जल्दी से आगे की तरफ आकर एक बार फिर से अरमान का हाथ पकडने को हुई, लेकिन इससे पहले अरमान ने अपना हाथ पीछे खींचा. इस बार अश्की ने उसका हाथ कसकर अपने हाथ में पकड लिया और रोते हुए बोली, ऐसा भी कोई करता है क्या? कितना दर्द हो रहा होगा आपको? इतना कहते हुए अश्की की आंखों में बेहिसाब आंसू थे. उसके चेहरे को देखकर पता चल रहा था कि अरमान के हाथ का दर्द जैसे अश्की अंदर तक महसूस कर रही थी.

उसने अरमान के हाथ की तरफ देखा, जहां पर कांच अंदर की तरफ धस चुका था. अब वह उस धसे हुए कांच को अपने कांपते हुए हाथों से बाहर की तरफ निकालने की कोशिश करने लगी. जैसे ही उसने अपनी दो उंगलियों से उसके हाथ का कांच पकडा, अश्की अपनी आंखें कसकर बंद करते हुए खुद से ही सिसकियां भरने लगी. जैसे अरमान के हाथों से निकलता हुआ कांच अरमान के हाथ से नहीं, बल्कि उसके हाथ से निकल रहा हो. दूसरी तरफ अरमान एक्सप्रेशन लैस होकर उसका चेहरा देखे जा रहा था.

वह अब गहरी आवाज में बोला, हाथ छोडो मेरा. तभी अश्की तडपते हुए बोली, नहीं छोडूंगी, दर्द हो रहा है आपको. उसकी बात पर अरमान एक बार फिर से सख्ती से बोला, मुझे कभी दर्द नहीं होता. अश्की भी व्यंग्य से हंसते हुए बोली, अच्छा, एक काम करती हूं, खुद का हाथ काट के देखती हूं. कितना दर्द होता है, कितना नहीं. उसने इतना ही कहा था कि अरमान का चेहरा और भी सख्त पड गया. अब उसने उसके बालों को मुट्ठी में भरा और दांत पीसते हुए बोला,

एहसासों को मेरे अंदर भरने की कोशिश मत करो, पछताओगी, टूट जाओगी, लेकिन मुझे तरस नहीं आएगा. उसकी बात पर अश्की नम आंखों से बोली, अगर पछताना और टूटना ही मेरी किस्मत है, तो मंजूर है मुझे.

उसकी बात पर एक पल के लिए अरमान की नजरे उसके चेहरे पर ठहर गई, जहां पर दुनिया जहां की मासूमियत ने पहरा दे रखा था. वह अब एक बार फिर सख्त आवाज में बोला, पति- पत्नी के रिश्ते तक रखो, आगे बढाने की कोशिश मत करो. जिस राह पर तुम चल चुकी हो, उस राह में सिवाय पत्थर और कांटों के कुछ नहीं मिलेगा. अगर आपको इतना ही था कि मुझे सिवाए पत्थर और कांटों के कुछ नहीं मिलने वाला, तो मुझसे शादी नहीं करते ना.

उसकी बात सुनकर अरमान अब चुप हो गया. उसने अब अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया और अपनी जगह से उठने को हुआ कि तभी अश्की ने एक बार फिर से हाथ पकड लिया और रोते हुए बोली, प्लीज, मुझे अपना हाथ साफ करने दीजिए. प्लीज, मुझे इस पर पट्टी करने दीजिए. बहुत दर्द हो रहा है, अरमान जी, प्लीज.

उसकी बात पर अरमान एक्सप्रेशंस लेस होकर अपना हाथ छुडाते हुए बोला, मैं पहले भी कह चुका हूं और अभी भी कहता हूं कि मुझे दर्द नहीं होता. तभी अश्की चिल्ला कर बोली, मुझे होता है, मुझे दर्द हो रहा है यह देखकर, मुझे दर्द हो रहा है. आप में तो दिल नहीं है, लेकिन मुझ में एक दिल है, जो धडकता है. मुझे तकलीफ होती है. कितना, कितना खून बह रहा है आपके हाथ से और आप कह रहे हैं कि आपको दर्द नहीं होता. अरे! ऐसा भी कोई पत्थर होता है क्या? कोई इंसान इतना पत्थर मैंने तो नहीं देखा.

तभी अरमान अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमाते हुए बोला, तो अब देख लो. इतना कहते हुए अब वह बाथरूम में चला गया और शॉवर के नीचे जाकर खडा हो गया.

अरमान आराम से शॉवर के नीचे खडा था और इस वक्त भी उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे. अब उसने अपने हाथ की तरफ देखा, जहां से खून अभी भी बह रहा था. शॉवर के पानी की वजह से वह सारा खून जमीन पर गिर रहा था और नाली में बह रहा था.

अरमान अब खुद से ही बडबडाया, जो मर चुके है, उन्हें दर्द नहीं होता दिलरुबा और तुम एक मरे हुए में जज्बात डालने की कोशिश कर रही हो. यह चीज तुम्हें भारी पडेगी. मत करो, तडपती रह जाओगी, लेकिन मुझ में जज्बात नहीं आएंगे. इतना कहते हुए उसकी आंखें बहुत कुछ बयां कर रही थी. उसकी वह पत्थर सी आंखें ऐसा लग रहा था, जैसे उनमें जज्बातों का किसी ने कत्ल कर दिया हो. यह जज्बातों का कत्ल किसने किया था, यह तो अब अरमान ही जाने.

वहीं दूसरी तरफ,

त्रेहान पैलेस में,

नियति जी इस वक्त बेड पर गहरी नींद पर सोई हुई थी और साथ में वास्तव जी भी गहरी नींद में सो रहे थे. इस वक्त रात के ढाई बजे थे कि तभी वहां पर किसी के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी. यह कोई और नहीं, एक लडकी थी, जो कि लगभग से चिल्लाते हुए बोली, अरमान, where are you? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे धोखा देने की. तुमने शादी कर ली, हमारी शादी ऑलरेडी पहले हो चुकी है. बचपन में हमारी शादी दादू ने करवा दी है और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई, कोई और लडकी लाने की. इतना कहते हुए वह लडकी लगातार चिल्लाते हुए अंदर की तरफ आ रही थी. उस लडकी की आवाज सुनकर वास्तव जी और नियति जी, जो की गहरी नींद में सो सो रही थी, एकदम से उनकी नींद खुल गई. अब उन्होंने आंखें मलते हुए एक दूसरे की तरफ देखा. तभी वास्तव जी ने दूसरी तरफ से लैंप ऑन किया और लैंप ओं होते ही उनके कमरे में रोशनी फैल गई. अब नियति जी और वास्तव जी दोनों उठकर बाहर की तरफ आए. बाहर का नजारा देखकर एक पल के लिए उनकी आंखें हैरत से फैल गई, लेकिन अगले ही पल,

उनके चेहरे पर अब डेविल स्माइल आ चुकी थी. पहले उनके चेहरे पर नींद से उठने की वजह से फ्रस्ट्रेशन भरे भाव थे, लेकिन अब उनके चेहरे पर अजीब सी सेटिस्फेक्शन थी. वहीं दूसरी तरफ नियति जी के चेहरे पर भी इस वक्त डेविल स्माइल थी. तभी वहां पर जानवी जी और अत्यंत जी भी आए. इस वक्त अत्यंत जी और जानवी जी के चेहरे पर बेहद परेशानी झलक रही थी. उन्हें डर था कि कहीं अरमान सच में घर ना हो. लेकिन अरमान इस वक्त घर नहीं था. यह बात नियति जी और वास्तव जी बहुत अच्छी तरह जानते थे.

वह लडकी, जो दिल्ली के जाने- माने मिनिस्टर की लडकी हंसिका कपूर थी. हंसिका अब जानवी जी के सामने आकर खडी हुई और दांत पीसकर बोली, अब कहां है आपका पोता, मुंह दिखाने लायक तो उसने पहले ही करतूत नहीं की. अब कहां मुंह छुपाए बैठा है, उसे शर्म नहीं आई मेरे होते दूसरी बीवी लाते हुए. जानते हैं ना आप, हमारी शादी बचपन में हो चुकी है. तो how dare him, क्या वह थोडी देर वेट नहीं कर सकता था कि मैं बाहर से वापस आ जाऊं? इतनी भी क्या आग लगी थी उसे कि उसने शादी कर ली दूसरी. इतना कहते हुए वह लगभग से चिल्ला रही थी.

तुमने साबित कर दिया कि तुम त्रेहान खानदान का खून हो. दूसरी औरतों में मुंह मारना तो उनकी खासियत है. अभी वह बोल ही रही थी कि तभी वास्तव जी हंसिका के पास आते हुए बोले, अरे! ऐसी बात नहीं है बेटा, वह कोई शादी है, हमें तो पता नहीं कि वह शादी हुई भी है कि नहीं. हम नहीं मानते उस शादी को, तुम चिंता क्यों करती हो. उसकी बात पर हंसिका फ्रस्ट्रेटेड होते हुए बोली, यह कैसी बात हुई, आपके बेटे ने शादी कर ली और अखबार में भी यह चीज आ चुकी है. आप कह रहे हैं कि आपको पता ही नहीं.

उसकी बात पर वास्तव जी के चेहरे का रंग पीला पड गया. वह हल्का सा हंसते हुए बोले, अरे नहीं नहीं बेटा, वह लगता है, गलती से हो गया होगा. अरमान उस लडकी को लेकर तो आया है, पर हम इस शादी को नहीं मानते. तुम चिंता मत करो, बहुत जल्द वह उस लडकी को डिवोर्स भी दे देगा. उसकी बात सुनकर हंसिका गुस्से में गरजते हुए बोली, यही आप लोगों के लिए अच्छा है. अगर अरमान ने उस लडकी को डाइवोर्स नहीं दिया, तो आई स्वेयर मैं आप लोगों की इज्जत की धज्जियां उडा दूंगी. यह बात याद रखना. इतना कहकर हंसिका अब वहां से चली गई थी.

उसके जाते ही वास्तव जी ने गहरी सांस ली, लेकिन अब उनके चेहरे पर एक अजीब सी डेविल स्माइल थी. वहीं दूसरी तरफ जानवी जी और अत्यंत जी भी यह चीज देख रहे थे. उन्हें एक अजीब सा डर लग रहा था. पता नहीं क्यों, लेकिन वास्तव जी का चेहरा ही बता रहा था कि वह अंदर ही अंदर कुछ ना कुछ तो करने वाले थे.

तभी नियति की जानवी जी की तरफ देखकर मुंह बनाकर बोली, अब तू क्या यहां पर जमी खडी है, चाय भी नहीं पिलाएगी. आधी रात हो गई है, एक तो वह लडकी सिर पर चढ गई आकर और तू यहां खडी- खडी हमारा मुंह ताक रही है. जा जाकर चाय बनाकर पिला. इतना कहते हुए जानवी जी हाल में पडे हुए सोफे पर जाकर बैठ चुकी थी. वह अपने सिर पर हाथ रखकर बैठी थी. पता नहीं कब यह तमाशा खत्म होगा. इस अरमान ने तो पूरे घर में गंद मचा रखा है. इतना कहते हुए नियति जी के चेहरे पर फ्रस्ट्रेशन भरे भाव थे.

वहीं दूसरी तरफ,

यॉर्ट पर,

अरमान, जो कि इस वक्त शॉवर के नीचे खडा था, वह अपनी सर्द नजरों से अभी भी अपने हाथ को देख रहा था. इस वक्त उसका चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लेस था. तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और दरवाजा खुलते ही अरमान की आंखें बडी हो गई, क्योंकि अश्की अंदर की तरफ आई थी. इस वक्त अश्की जिस तरह से अंदर आई थी, वह देखकर एक पल के लिए अरमान की निगाहे अश्की पर ठहर चुकी थी. क्योंकि अश्की के जिस्म इस वक्त पूरी तरह से बेलीबास था.

यह चीज देखकर अरमान के दिल में एक अलग ही खलबली सी मच गई थी. वह एक टक अश्की और अश्की के बदन की तरफ देखने लगा. उसके बदन को देखते हुए अरमान को अपने बदन में एक अकडन सी महसूस होने लगी थी. जो कि उसकी लोअर बॉडी में साफ दिखाई दे रही थी. उसको इस तरह से देखकर अश्की खुद में ही सिमटने लगी थी. उसे अपने पेट में एक अलग ही सेंसेशन फील हो रही थी.

वही अरमान अब उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, चली जाओ यहां से. तभी अश्की भी अपनी इंटेंस वॉइस में बोली, नहीं जाऊंगी. इतना कहते हुए उसने अपने कदम अरमान की तरफ बढा दिए. तभी अरमान उसकी तरफ पीठ करते हुए बोला, पछताओगी, निकल जाओ बाथरूम से. तभी अश्की उसके पीछे जाकर उसको पीछे से उसकी बैक को हग करते हुए बोली, मैं पछताना चाहती हूं. फिजिकल डिजायर शुरू से ही अरमान की कमजोरी रही थी. जिस तरह से आज अश्की ने उसे बाहों में भरा था.

उसे नहीं पता, उसे क्या हो रहा था. लेकिन एक अलग ही बेचैनी ने आज अरमान को घेर लिया था. अब उसने पलट कर अश्की की तरफ देखा और उसके बालों को मुट्ठी में भर लिया. जिससे अश्की का चेहरा पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठ गया और शॉवर का पानी अश्की के चेहरे पर गिरने लगा. उस शॉवर में भीगते हुए अश्की सच में इश्क ही लग रही थी. उसका चेहरा पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठने की वजह से होंठ हल्के से खुल गए थे. उसके होठों को देखकर अरमान की बेचैनी और भी बढ चुकी थी. उसका दिल कर रहा था कि उसके होठों पर अपने होंठ रखकर उसके होठों का रस निचोड ले. लेकिन किसी तरह से उसने खुद को कंट्रोल किया और उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला,

क्यों जिद कर रही हो? क्यों अपने अस्तित्व को मिटाना चाहती हो? तभी अश्की भी गहरी आवाज में बोली, मेरा अस्तित्व तो तभी मिट गया था, जब आप मुझे मिले थे. उसकी बात पर एक पल के लिए अरमान उसकी तरफ देखता ही रह गया. अरमान अब गहरी आवाज में बोला, असली चेहरा देखा है ना मेरा, नफरत नहीं हुई मुझसे मेरा असली चेहरा देखकर. तभी अश्की उसकी तरफ गहरी नजरों से देखते हुए बोली, हुई थी, लेकिन क्या करती, दिमाग को हुई थी, दिल को नहीं हुई. दिल कहां दिमाग की सुनता है.

तभी अरमान गहरी आवाज में बोला, कहना क्या चाहती हो! मैं नहीं जानती, मुझे क्या हुआ है. लेकिन इतना पता है, बस कुछ हो गया है. अश्की की बात सुनकर अरमान की नजरे उस पर इंटेंस हो गई थी. अब अरमान अपना हाथ उसकी पीठ पर ले जाते हुए बोला, जल जाओगी, आग हूं मैं. क्या फर्क पडता है, एक न एक दिन तो इस शरीर को जला कर खाक होना ही है. क्यों ना अब जल जाऊं. अश्की की बात सुनकर अरमान का दिल तेजी से धडक उठा.

आज पहली बार था कि अरमान को अपने दिल में एक अलग एहसास महसूस हो रहे थे. जिन्हें वह पूरी तरह से दबाने की कोशिश कर रहा था. जब से अश्की आई थी, उसे अपने आप में बहुत से changes होते हुए महसूस हो रहे थे, जो वह करना नहीं चाहता था. वो अश्की को सिर्फ एक डिजायर के तौर पर रखना चाहता था, लेकिन यहां अश्की उसकी आदत बनती जा रही थी और

शायद आदत से कुछ ज्यादा. दोनों ही एक दूसरे को गहरी निगाहों से देख रहे थे.

अश्की अब आगे की तरफ हुई और अपनी एडियों को ऊपर की तरफ उठाकर उसने अरमान की चेस्ट पर अपना हाथ रखते हुए उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए. जैसे ही अरमान को उसके होंठ अपने होठों पर महसूस हुए, एक पल के लिए अरमान की पकड उस पर कस गई. उसकी गहरी नजरे अश्की के चेहरे पर बन गई. जहां अरमान की आंखें खुली थी, वही अश्की की आंखें पूरी तरह से बंद हो चुकी थी. तभी अरमान ने उसे पलटा और उसे दीवार की तरफ धक्का देते हुए उसके ऊपर झुका. अब बेहद गहरी आवाज में बोला, तो जलो अब. इतना कहकर उसने खुद को अश्की की तरफ पुश किया. जैसे ही उसने अश्की की तरफ खुद को पुश किया, अश्की की एक दर्द नाक चीख उस बाथरूम में गूंज गई.

तकरीबन सुबह के सात बजे,

अरमान अश्की को लेकर बाथरूम में से बाहर निकला. इस वक्त अश्की का चेहरा पूरी तरह से लाल पड चुका था और उसके चेहरे पर एक अलग ही ग्लो दिखाई दे रहा था. अरमान ने उसे अब लाकर बेड पर लेटाया और उसे गहरी नजरों से देखने लगा. वही अश्की अब करवट लेते हुए बोली, सो जाइए अरमान जी, मैं थक चुकी हूं. उसकी बात पर अरमान के होठों के कोने मुड गए.

उसने अपने निचले होंठ को दांतो तले दबाते हुए कहा, लेकिन मेरी डिजायर तो अभी भी बाकी है, दिलरुबा. उसकी बात सुनकर अश्की की आंखें बडी हो गई. उसने पलट कर देखा, तो अरमान एक बार फिर से उसके ऊपर टूट पडा. वहीं अश्की की सांस तो बस उसके गले में ही अटक गई.

वहीं दूसरी तरफ,

एयरपोर्ट पर,

एक लडका अपने कंधे पर एक बडा सा बैग उठाए बाहर की तरफ आ रहा था. उस लडके ने फौजी की यूनिफॉर्म पहनी हुई थी. उस यूनिफॉर्म को देखकर ही पता चल रहा था कि वह लडका आर्मी से है. यह लडका कोई और नहीं, बल्कि गौरव था, जो कि अपनी गहरी नजरों से मुंबई की तरफ देख रहा था. अब वह लडका

मुंबई की तरफ देखते हुए बोला, मैं आ गया हूं अश्की.

अब तुम्हें मेरा होने से कोई नहीं रोक सकता.

To be continue.

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