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Chamunda

Pathani house,

अफसाना इस वक्त अपने कमरे में इधर से उधर चक्कर लगा रही थी। इस वक्त उसके चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी। उसे बार-बार परसों का दिन याद आ रहा था, जब उसने अमानत को सारी सच्चाई बताई और अपना फोन भी अमानत को थमा दिया था। उसे वह पल याद आया, जब उसने डस्टबिन में फोन डाला था। कुछ सेकंड वह उस फोन को घूरती रही, लेकिन फिर वह दो कदम ही वहां से चली थी कि उसके दिमाग में पता नहीं क्या आया, उसने वह फोन उठा कर दोबारा से अपने सीने में छुपा लिया।

वह खुद में ही बड़बड़ाई, "अगर डस्टबिन में ही अमानत के हाथ में वह फोन लग गया, तो उसका हाल क्या होगा? क्योंकि उस फोन में बहुत सी चीज थी, जो अमानत को पता चल जाती, तो शायद वह अफसाना से नफरत कर बैठता।" लेकिन अब अफसाना ने खुद वह फोन अमानत के हाथ में थमा दिया था। उसे घबराहट यह हो रही थी कि अगर अमानत ने वह फोन चेक कर लिया, तो उसका क्या बनेगा? कहीं अमानत उसे छोड़ तो नहीं देगा? यह सोच-सोच कर उसका दिमाग खराब हुए जा रहा था। तभी उसे अपने रूम के बाहर से किसी के कदमों की आवाज आई। कदमों की आवाज सुनकर अफसाना की नजरे दरवाजे की तरफ उठ गई, तो दरवाजे पर इस वक्त रीमा खड़ी थी।

रीमा को अपने रूम में देखकर अफसाना की आंखें बड़ी हो चुकी थी, क्योंकि कहीं ना कहीं उसे अब डर लग रहा था। रीमा अब उसे अच्छा खासा सुनाएगी। वही रीमा उसे देखकर तिरछा मुस्कुराई और उसकी तरफ कदम बढ़ाते हुए बोली, "च.... च.….. च..... च........

मुझे ना तुझ पर तरस आ रहा है। ना तू उसे सच बता सकती है, ना तू अपनी सच्चाई बता सकती है कि एक टाइम पर तू एक तवायफ थी। अगर उसे पता चल गया कि तू एक टाइम पर तवायफ थी, तो बेचारा क्या ही करेगा? हो सकता है, तुझे छोड़कर चला जाए। वैसे क्यों ना यह बात मैं ही बता दूं।" अभी उसने इतना ही कहा था कि तभी अफसाना ने उसका गला पकड़ते हुए दांत पीसकर बोली, "अपनी बकवास बंद रखो। मैं इतने सालों तक तुम्हारी बकवास बर्दाश्त की है, लेकिन अब बस बहुत हो गया, अब और नहीं।"

जिस तरह से अफसाना ने उसका गला पकड़ा था, एक पल के लिए रीमा तो हैरानी से उसकी तरफ देखते ही रह गई। क्योंकि आज तक अफसाना ने उसके साथ ऐसा बिहेव नहीं किया था। वह सिर्फ रीमा से डरती थी, लेकिन जिस तरह से आज उसने अमानत के लिए रीमा की गर्दन पकड़ ली थी, एक पल के लिए रीमा भी हैरान रह गई थी। वही अफसाना कांपते हुए बोली, "अगर तुमने मेरी सच्चाई सामने लाने की कोशिश की, तो एक बात याद रखना कि मैं तुम सब की पोल भी अमानत जी के सामने खोल कर रख दूंगी।" उसकी बात सुनकर रीमा के चेहरे पर डर झलकने लगा। जबकि अफसाना ने रीमा की सारी सच्चाई अमानत के सामने तो खोल कर रखी दी थी। लेकिन अभी तक अमानत को अफसाना के बारे में इतना ज्यादा कुछ पता नहीं था।

अब अफसाना ने उसकी गर्दन छोड़ी और उसकी तरफ अपनी पीठ कर ली। वही रीमा उसे गुस्से से देखती हुई अब वहां से चली गई। इस वक्त उसे अफसाना पर इतना ज्यादा गुस्सा आ रहा था कि वह बता नहीं सकती थी।

कुछ ही देर में, रीमा बाहर आई और बाहर आते ही उसकी नजर सामने एक घूंघट वाली औरत पर पड़ी, जोकि पठानी हाउस के बाहर ही खड़ी थी। उस औरत को देखकर रीमा की आंखें बड़ी हो गई। अगले ही पल, वह बाहर की तरफ आई और उस औरत का हाथ पकड़ कर उसे जल्दी से एक साइड ले गई। फिर दांत पीसकर बोली, "तुम यहां पर क्या कर रही हो? तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है। तुम यहां पर क्यों आई हो?" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी रीमा के गाल पर एक जोरदार थप्पड़ उस औरत ने जड़ दिया। जिससे रीमा के चेहरे पर गुस्सा और भी ज्यादा झलकने लगा।

वह गुस्से से कांपते हुए बोली, "how dare you, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई?" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी उस औरत ने एक बार फिर से उसके गालों पर एक थप्पड़ रसीद दिया। अब तो रीमा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उस औरत को नफरत भरी निगाहों से देखते हुए बोली, "तुम मुझ पर यूं हाथ नहीं उठा सकती, चामुंडा?" तभी वह औरत, जोकि चामुंडा थी, वह दांत पीसकर बोली, "तुझे कितनी बार कहा था कि मुझे वह लड़की चाहिए। लेकिन तूने, तूने अभी तक इतने दिनों से किया क्या?

उस लड़की को अपने कोठे पर लाने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं किया। आज वह लड़की उस अस्पताल में है, लेकिन फिर भी हम उस तक पहुंच नहीं पा रहे हैं। अस्पताल की सिक्योरिटी इतनी टाइट क्यों हो गई है? मुझे हॉस्पिटल में घुसने क्यों नहीं दिया गया आज?" चामुंडा की बात सुनकर सामने खड़ी रीमा के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गए। तभी चामुंडा गुस्से से दांत पीसकर बोली, "कहीं उन्हें सब कुछ पता तो नहीं चल गया?"

तभी रीमा बोली, "नहीं, वह अपनी सच्चाई ऐसे नहीं बता सकती। क्या पता कोई और वजह हो।" इतना कहते हुए उसने सामने खड़ी औरत की तरफ देखा, जिसे अब अपना घूंघट अपने चेहरे पर से उठा लिया था। अब वह रीमा को अपनी घूरती हुई नजरों से देखते हुए बोली, "देख ले रीमा, अगर उस करम जली अफसाना ने कुछ भी अपने मुंह से बक दिया, तो हमारी प्लानिंग पर पानी फिर जाएगा।"

तभी रीमा भी गुस्से से बोली, "ऐसा कुछ नहीं होने वाला, बस आप अपने पैसे तैयार रखना। कल तक वह लड़की आपके कोठे पर होगी।" इतना कहते हुए वह अंदर की तरफ बढ़ने लगी। तभी चामुंडा उसका हाथ पकड़ते हुए बोली, "पिछले 6 महीने से तू उस लड़की को पकड़वाने की कोशिश कर रही है। लेकिन तेरे हाथ अब तक कुछ नहीं आया, तो अब क्या आएगा खाक?"

चामुंडा रीमा की तरफ देखकर बोली, "मुझे अब तुझ पर भरोसा नहीं रहा। मैं नहीं जानती कि तू कब तक उस लड़की को मेरे कोठे पर भेजेगी, लेकिन मुझे अब उस लड़की को किसी भी हालत में अपने कोठे पर लाना है। उसके लिए चाहे मुझे किसी की मदद लेनी पड़े।" इतना कहकर चामुंडा ने उसका हाथ छोड़ा और वहां से चली गई। वहीं रीमा बस चामुंडा की तरफ देखते हुए दांत पीसकर बोली, "अगर यह मेरे हाथ से चली गई, तो मेरे 50 लाख रुपए मेरे हाथ से निकल जाएंगे। यह मैं हरगिज नहीं होने दूंगी। आखिर अफसाना को भी मैं ही इस कोठे पर लालच लेकर आई थी। अब बारी है कनिका की...।"

कहते हुए रीमा के चेहरे पर शातिर एक्सप्रेशन आ चुके थे।

वहीं दूसरी तरफ,

चामुंडा अभी वहां से थोड़ी दूरी पर गई ही थी कि तभी उसके आगे आकर एक गाड़ी रुकी। गाड़ी रुकते ही चामुंडा की आंखें बड़ी हो गई। अगले ही पल उस गाड़ी का दरवाजा खुला और चामुंडा को किसी ने खींचकर उस गाड़ी के अंदर ले लिया। देखते ही देखते दरवाजा बंद हुआ और गाड़ी वहां से ओझल हो गई।

दूसरी तरफ,

असुर इस वक्त कनिका को खाना खिला रहा था और कनिका आराम से बैठकर खाना खा रही थी। वह बार-बार असुर से पूछ रही थी कि आखिर असुर उसके साथ कोई बात क्यों नहीं कर रहा है। लेकिन असुर का ध्यान तो कहीं और ही था। तब से जब से अमानत उसके पास होकर गया था, तब से कनिका से कोई बात नहीं की थी। उस बात को तकरीबन 3 घंटे बीत चुके थे। अब कनिका को गुस्सा आ रहा था। वह असुर की तरफ गुस्से में देखते हुए बोली, "आप कुछ बोलेंगे या नहीं। 1 घंटे से एक ही सवाल पूछ रही हूं, लेकिन आप कुछ बता ही नहीं रहे है। कुछ बोलेंगे या फिर मुझसे किसी बात से नाराज हैं। एक बार भी आपने मेरी किसी बात का जवाब नहीं दिया है।"

कनिका की बात पर असुर ने अब गहरी सांस ली और अपनी जगह से उठते हुए कनिका के गाल पर हाथ रखा। कुछ देर उसने कनिका के चेहरे की तरफ देखा, जो कि उसे सवालिया नजरों से देख रही थी। लेकिन अभी भी असुर ने कुछ नहीं बोला और बेहद प्यार से कनिका के गाल को सहलाते हुए उसकी तरफ पीठ की और वहां से जाने को हुआ।

तभी कनिका रोते हुए बोली, "बहुत हो गया आपका, अगर इतना ही तड़पाना है, तो ठीक है, मैं चली जाती हूं यहां से।" इतना कह कर वह अपने कदम पलंग से नीचे उतारने को हुई, तभी असुर की सर्द आवाज उसके कानों में पड़ी।

"अगर तुम्हारा एक कदम भी नीचे जमीन पर लगा, आई स्वेर कनिका, जो चीज मैं एक हफ्ते बाद करने वाला हूं, वह आज इसी वक्त इस अस्पताल में होगा। तुम्हारे पूरे कपड़े इस अस्पताल में बिखरे पड़े होंगे और तुम इस बिस्तर पर अभी के अभी सिसकियां ले रही होगी।"

जैसे ही उसने यह बात कही, कनिका की आंखें बड़ी हो गई। उसका चेहरा पूरी तरह से लाल पड़ गया। उसका लाल सुर्ख चेहरा देखकर एक पल के लिए असुर की नजरे उसके चेहरे पर टिक गई और उसके होठों के कोने मुड़ गए। दूसरी तरफ कनिका का तो दिल कर रहा था कि काश यहां पर एक गड्ढा हो जाए और वह उसी में समा जाए। इस वक्त उसका हाल कुछ ऐसा था। वह जल्दी से अपनी जगह पर सीधी होकर बैठ गई। फिर असुर उसकी तरफ देखते हुए अब बाहर की तरफ चला गया। वहीं कनिका अब मुंह बनाते हुए बोली, "बस ऐसी बातें जितनी मर्जी करवा लो।"

तभी दरवाजे से आवाज आई है, "मैं सिर्फ ऐसी बातें ही नहीं करता हूं, अगर कहो, तो लाइव एग्जांपल दे दूं। तुम्हें तो मजा आए ना आए, लेकिन मुझे बहुत मजा आने वाला है तुम्हें तड़पाने में।" उसकी बात सुनकर कनिका का दिल तेजी से धक-धक करने लगा। वही असुर, जो कि अब दरवाजे पर खड़ा था, अब उसने अपने कदम कनिका की तरफ बढ़ाने शुरू कर दिए थे। जैसे-जैसे असुर अपने कदम कनिका की तरफ बढ़ा रहा था, कनिका का दिल और भी तेजी से धड़कने लगा था। उसकी पलकें पूरी तरह से झुक गई थी। वह अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "कैसी बातें कर रहे हैं असुर बाबू, हम इस वक्त अस्पताल में हैं। मेरी हालत भी कुछ।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी असुर बिल्कुल ही उसके पास आकर खड़ा हुआ और पूरी तरह से उसके ऊपर झुकने लगा। जिस तरह से असुर उसके ऊपर झुक रहा था।

कनिका के रोंगटे खड़े हो रहे थे। दिल तो जैसे चिल्ला चिल्ला कर कह रहा था कि मुझे हार्ट अटैक मत दे देना। दूसरी तरफ असुर तो जैसे पूरी तरह से कनिका की जान निकालने पर तुला हुआ था। वह लगभग से पूरी तरह से उसके ऊपर झुका और अब उसने कनिका के गाल पर अपना हाथ रखा और लगभग से उसके गाल को सहलाते हुए बेहद गहरी आवाज में बोला, "तुमसे एक बात पूछूं क्या, सच-सच जवाब दोगी मुझे?"

इस बात पर कनिका, जो अब अपने होश खोने लगी थी। असुर के इतने नजदीक होने की वजह से वह अब धीमे से बोली, "क्या कहना चाहते हैं आप, असुर बाबू?" इस वक्त कनिका की सांस बेहद गहरी चल रही थी। असुर की गर्म सांसे भी उसे अपने होठों पर साफ महसूस हो रही थी दोनों के होंठ इस वक्त इतने ज्यादा करीब थे कि हवा तक निकलने को राजी नहीं थी। तभी असुर उसके होठों के और नजदीक हुआ, जिससे दोनों के होंठ आपस में चिपक गए। लेकिन उन दोनों में किस बिल्कुल नहीं हो रही थी। वह वैसे ही होंठ चिपकाए हुए धीमे से बोला,

"सच-सच बताओ कि सुहानी दी तुम्हें किस चीज के बेस पर इतना ब्लैकमेल कर रही हैं।" जैसे ही असुर ने यह बात कही, एक पल के लिए कनिका का दिल धक सा रह गया। उसे ऐसा लगा, जैसे असुर ने न जाने क्या ही पूछ लिया हो। वह पूरी तरह से अपने होश में आई और अगले ही पल उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया। जिसे देखकर असुर का चेहरा पूरी तरह से सख्त पड़ गया।

To be continue....

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