33

Bechani

पठानी हाउस,

अभी-अभी अमानत ने अफसाना को बेड पर पटका था। वह गुस्से से इस वक्त अफसाना को देख रहा था, जो कि उसे खुद से दूर करने की कोशिश कर रही थी। वह नहीं जानता था कि अफसाना ऐसा क्यों कर रही है। लेकिन उसे कुछ ना कुछ गड़बड़ तो जरूर लग रही थी। जब से अफसाना हॉस्पिटल से आई थी, वह अमानत से बेहद वियर्ड तरीके से पेश आ रही थी, जोकि अमानत को भी बहुत अजीब लग रहा था।

अमानत अब अफसाना की तरफ गुस्से में दांत पीसते हुए बोला, "तुमसे प्यार करने से तो मुझे तुम्हारा बाप तक नहीं रोक पाएगा, क्योंकि हक बनता है मेरा तुम पर हर तरीके से।" इतना कहकर उसने अपने शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए। आज तक अमानत ने उसके साथ इस तरह से बिहेव नहीं किया था। अफसाना उसकी तरफ देखते हुए बोली, "प्लीज बाबू साहब, बात को समझने की कोशिश कीजिए। मैं आपको कुछ समझाना चाहती हूं।" तभी अमानत, जोकि अपनी शर्ट के बटन खोल रहा था, उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "समझाओ ना मुझे, मैं समझने के लिए तैयार हूं। लेकिन तुम तो मुझे खुद से दूर करने पर आ गई।"

उसकी बात सुनकर अफसाना ने अपनी नजरों को पूरी तरह से नीचे की तरफ झुका लिया। उसे बहुत हिम्मत चाहिए थी कि वह कुछ अमानत से कह सके। अभी वह बोलने को हुई ही थी कि तभी उसके रूम का दरवाजा नोक हुआ। दरवाजा नोक होता देख अमानत, जिसके हाथ अपनी शर्ट के बटन पर थे, वह बिल्कुल से शांत हो गया था। अब उसने दरवाजे की तरफ पलट कर दरवाजा खोला, तो सामने जो शख्स खड़ा था, उसे देखकर अफसाना के होश पूरी तरह से उड़ चुके थे। क्योंकि सामने रीमा खड़ी थी। अपने सामने रीमा को खड़ा देखकर उसके हाथ पैर पूरी तरह से ठंडे पड़ चुके थे।

अब बात यहां पर आकर खत्म होती थी। जो वह अमानत के सामने बोलना चाहती थी, वह वहीं पर थम गया था। अब वह चाह कर भी अमानत को कुछ नहीं बताने वाली थी। इस वक्त अफसाना के चेहरे पर जो भाव थे, उन्हें देखकर रीमा, जो कि इस वक्त दरवाजे पर पानी लिए खड़ी थी। उसके चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट आ गई थी। दूसरी तरफ अमानत, जिसने दरवाजा खोला था, रीमा को देखकर इस वक्त वह उसे अजीब सी नजरों से देख रहा था। उसके होठों पर तिरछी मुस्कुराहट देख कर उसने अफसाना की तरफ देखा, तो एक पल के लिए उसकी नज़रें रीमा पर सर्द हो गई। वह दांत पीसकर बोला, "तुम यहां पर क्या करने आई हो? दूसरी बात, मेरी पत्नी को इस तरह से क्यों देख रही हो?" जैसे ही अमानत ने यह बात कही, रीमा पूरी तरह से झेप गई।

वह जल्दी से अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "वह मैं बस आपके लिए पानी लेकर आई थी। वह मेम साहब को तबीयत ठीक नहीं थी तो।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अमानत दांत पीसकर बोला, "क्या मैंने तुम्हें पानी लाने को कहा।" अमानत की बात पर रीमा ने अपना चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ झुकाते हुए ना में सिर हिलाया। तभी अमानत गुस्से में दांत पीसते हुए बोला, "अगर मैंने तुमसे पानी मंगवाया ही नहीं, तो यहां क्यों मुंह उठा कर चली आई हो। दफा हो जाओ यहां से। अपनी मर्जी से कुछ भी करने आ जाओगी, निकलो यहां से अभी।" इतना कहते हुए अमानत के चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। उसका गुस्सा देखकर अफसाना को अपना गला सूखता हुआ महसूस हो रहा था।

उसने अपनी नजरे पूरी तरह से झुका ली थी। वह मन ही मन खुद से बड़बड़ाई, "अगर बाबू साहब को मेरी सच्चाई पता चल गई, वह तो मुझे जान से ही मार देंगे। जानती हूं, इस वक्त वह मुझसे प्यार करते हैं। लेकिन मैं उनका प्यार तो बर्दाश्त कर लूंगी, लेकिन नफरत बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी।" इतना कहते हुए उसकी आंखों की नमी उसके गालों पर आ चुकी थी। दूसरी तरफ अमानत, जो कि दरवाजे पर खड़ा था, अब उसने रीमा के चेहरे पर ही दरवाजा बंद किया। उसने पलट कर अफसाना की तरफ देखा, जिसकी आंखों से आंसू लबालब बह रहे थे। उसे यूं रोता हुआ देखकर अमानत की आंखें बड़ी हो गई।

वह जल्दी से अफसाना के पास आया और उसके गालों पर हाथ रखते हुए बोला, "क्या बात है। जान...?

रो क्यों रही हो?" उसकी बात सुनकर अफसाना ने अपना सिर ना में हिलाया। अगले ही पल बिना कुछ कहे अमानत के सीने से लिपट गई और फूट-फूट कर रोने लगी। जिस तरह से वह अमानत के सीने से लिपटी फूट-फूट कर रो रही थी, अमानत को इस वक्त बहुत ज्यादा घबराहट अपने अंदर महसूस हो रही थी। पता नहीं क्यों, उसे अजीब सी बेचैनी अफसाना के रोने में महसूस हो रही थी। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे अफसाना कुछ बताना तो चाहती है, लेकिन बता नहीं पा रही।

अब उसने अफसाना को बड़े प्यार से पीछे की तरफ किया और उसके गालों को हाथों में भरते हुए बोला, "तुम्हें कोई बात परेशान कर रही है, तो तुम मुझे बता सकती हो, जान...।"

उसकी बात पर अफसाना ना में सिर हिलाते हुए बोली, "अगर मैंने आपको बताया, तो आप मुझसे नफरत करेंगे, बाबू साहब। मैं आपकी मोहब्बत के काबिल नहीं हूं।" उसकी बात सुनकर एक पल के लिए अमानत का दिल धक सा रह गया। अब वह बड़े प्यार से उसके गालों पर हाथ फिराते हुए बोला, "एक बार बता कर तो देखो, क्या पता तुम्हारी सोच के मैं उल्टा चला जाऊं।"

उसकी बात पर अफसाना अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली, "मैं नहीं बता सकती हूं। लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगी कि घर में बहुत बुरा होने वाला है, बहुत बुरा। इतना कि आप सोच नहीं सकते।" इतना कह कर वह रुक गई कि तभी अमानत उसकी आंखों में देखते हुए बोला,

"अगर तुम नहीं बता सकती, तो मैं रुक जाऊंगा। लेकिन एक बात याद रखना अफसाना।" उसके मुंह से अपना नाम सुनकर अफसाना के रोंगटे खड़े हो रहे थे। "अगर मुझे बाहर से कुछ तुम्हारे बारे में पता चला, तो मैं कभी तुम्हें माफ नहीं करूंगा। हो सकता है, तो मुझे बोलो। वह दिन हमारे प्यार का आखिरी दिन होगा। तुम सिर्फ दुनिया के सामने मेरी पत्नी कहलाओगी, लेकिन मेरे सामने तुम उस पत्नी का दर्जा खो दोगी। अगर तुम अपनी गलती खुद मुझे बता दोगी, तो हो सकता है, मैं तुम्हें माफी दे दूं।" उसकी बात सुनकर अफसाना का दिल जैसे धक सा रह गया। वही अमानत अब अपनी बात पूरी करके अपनी जगह से खड़ा हुआ और बाहर की तरफ जाने को हुआ। तभी अफसाना ने उसका हाथ पकड़ लिया।

अभी भी अफसाना का चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ झुका हुआ था। अगले ही पल अफसाना ने अमानत को कुछ बताना शुरू किया। जैसे-जैसे अफसाना की बातें अमानत के कानों में पड़ रही थी, अमानत की आंखें बड़ी होती जा रही थी। अमानत के चेहरे के भाव ही बता रहे थे कि अफसाना कुछ ऐसा बता रही है, जिसे सुनकर अमानत को भी झटके लग रहे थे। उसका दिल जैसे बढ़ते पाल के साथ बेचैन हो रहा था। उन बेचैनियों की वजह जैसे उसे पता चलती जा रही थी, वैसे-वैसे उसके चेहरे के भाव बदलते जा रहे थे। अब उसका चेहरा गुस्से से कांपने लगा था।

अफसाना ने अपने सीने में से एक मोबाइल निकाल कर अमानत के आगे रख दिया। उस मोबाइल को देखकर अमानत ने एक नजर अफसाना की तरफ देखा, जो आंखों में नमी लिए अमानत को ही देख रही थी। अब वह उसकी तरफ देखकर बेहद दर्द भरी आवाज में बोली, "आप चाहे मुझे जो सजा देना चाहे, दे दीजिए। चाहे तो मुझसे नफरत कर लीजिए। लेकिन प्लीज, मुझे अपनी जिंदगी से मत निकलिएगा। मैं आपके बिना जी नहीं पाऊंगी।" इतना कहकर वह लगभग से अमानत के आगे हाथ जोड़ने को हुई कि तभी अमानत ने उसको बाजू से पकड़ा और अगले ही पल उसे सीने से लगाते हुए बोला,

"तुमने यह सोच भी कैसे लिया कि मैं तुम्हें छोड़ दूंगा। बस इतनी सी बात थी और तुमने बताने में इतना वक्त लगा दिया। मैंने तुम्हें पहले भी बताया था। अगर यही बात मैं बाहर से सुनता, तो हो सकता था कि मैं हमारे सारे रिश्ते खत्म कर देता। लेकिन सच्चाई तुम्हारे मुंह से सुनकर एक सुकून तो मिला कि तुम सच्ची हो। तुमने जो गलतियां की, मैं जानता हूं कि वह माफी के लायक तो नहीं लेकिन एक बात याद रखना अफसाना, अब जो होगा, उसमें तुम्हें मेरा साथ देना होगा।" उसकी बात सुनकर अफसाना ने अपनी आंखों के आंसू साफ किए और हां में सिर हिला दिया। अगले ही पल वह दोबारा से अमानत के सीने से लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगी। वह रोते हुए बोली, "आप अभी मुझे वैसे ही प्यार करेंगे ना, बाबू साहब?"

जैसे ही उसने यह बात कही, अमानत के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कराहट तैर गई। अब उसने अफसाना को पीछे की तरफ किया और उसके माथे को चूमते हुए बोला, "कहो तो शुरुआत करें।" उसकी बात सुनकर अफसाना शरमा उठी और उसने अपनी आंखें नीचे की तरफ झुका ली। हालांकि उनमें नमी अभी भी थी। अब वह नीचे की तरफ झुकी और अमानत के पैरों में गिरते हुए बोली, "मुझे माफ कर दीजिए बाबू साहब, मैं सच में आपके प्यार के काबिल नहीं हूं। इस नाचीज को आपने इतना प्यार दिया कि अब तो जैसे जिंदगी ही आपके बिना अधूरी अधूरी लगती है।

मैं तो आपके बिना मर ही जाऊंगी।" इतना कहकर वह लगभग से एक बार फिर से रो पड़ी। अब अमानत ने उसे खड़ा किया और उसकी आंखों में देखते हुए बोला, "अगर तुम मेरे बिना नहीं जी सकती, तो क्या मैं तुम्हारे बिना जी लूंगा। तुमने ऐसा कैसे सोच लिया?" इतना कहकर अमानत अफसाना के चेहरे पर झुका और उसके होठों को चूमने लगा। जिस तरह से वह अफसाना के होठों को चूम रहा था, अफसाना को अपने जख्मों पर मरहम लगता हुआ महसूस हो रहा था।

उसकी आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे। उन आंसुओं को पोंछते हुए अमानत आगे बढ़ रहा था। उनके जिस्म के फासले खत्म हो रहे थे।

ऐसे ही 5 दिन बीत गए।

असुर, जोकि हॉस्पिटल में कनिका के साथ था। वह इस वक्त कनिका को गहरी नजरों से देख रहा था, जो कि इस वक्त खिचड़ी खा रही थी। बेड पर बैठे हुए ही वह बड़े प्यार से असुर को देख रही थी। लेकिन असुर की नजरे इस वक्त जिस तरह से कनिका को देख रही थी, कनिका को अपनी बॉडी में गूसबंप्स खड़े होते हुए महसूस हो रहे थे। साथ ही साथ उसका गला पूरी तरह से सूख रहा था। वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "ऐसे क्या देख रहे हैं, असुर बाबू?"

उसकी बात पर असुर ने अपने होठों को अपने दांतों तले दबाया और अगले ही पल उसके होठों की तरफ देखते हुए बोला, "बस 2 दिन है तुम्हारे पास यहां पर और 2 दिन बाद घर ले जाकर तुम्हें बताऊंगा कि मुझे क्या हो रहा है। इस टाइम जिस तरह से तुम खिचड़ी खा रही हो।" उसकी बात पर कनिका ने अपनी नजरें पूरी तरह से झुका ली। वह बेहद प्यार से बोली, "अगर इतना ही है, तो यहीं पर बता दीजिए ना, असुर बाबू।"

"बताऊंगा बताऊंगा, माय डियर।" इतना कहकर वह चुप हो गया। वहीं कनिका की एक आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई। वह अपनी आंखों में उम्मीद लेकर बोली, "माय डियर आगे...।"

असुर बोला, "वह अब तुम्हें बाद में बताऊंगा।" इतना कहकर असुर अपनी जगह से खड़ा हुआ। तभी उस कमरे में अमानत का आना हुआ। अमानत ने असुर की तरफ देखा और उसे बाहर आने का इशारा किया।

अमानत ने जैसे ही असुर को इशारा किया, तो असुर ने हां में सिर हिलाया और बाहर की तरफ चला गया। लेकिन बेड पर बैठी कनिका पता नहीं क्यों बेचैन हो रही थी। उसके चेहरे पर अजीब सी परेशानी झलक रही थी। असुर और अमानत, जो की आमने-सामने खड़े थे, अमानत अब असुर की तरफ देखते हुए बोला, "भाई, इस चीज में बहुत खतरा है। यह इतना आसान नहीं है।" तभी असुर उसकी तरफ देखकर बोला, "तुम्हें कनिका को कुछ नहीं बताना। यह बात याद रखना, बाकी मैं सब कुछ संभाल लूंगा। बस मुझे एक बार और कनिका को तकलीफ देनी है, उसके बाद सारी सच्चाई हमारे सामने होगी।" इतना कहते हुए असुर के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन थे, जो शायद कोई तूफान लाने वाले थे।

To be continue...

Write a comment ...

Write a comment ...