
एयरपोर्ट,
धानी इस वक्त अपना लगेज लिए 3 सीटर कुर्सी पर बैठी हुई थी। उसकी आंखों से इस वक्त तेजी से आंसू बह रहे थे। क्योंकि अभी-अभी कुछ देर पहले उसने यहां से रवाना होने की टिकट करवाई थी। उस टिकट को देखकर उसकी आंखों से आंसू और भी तेजी से बह रहे थे। उसे समझ में यह नहीं आ रहा था कि उसके दिल में इतनी टीस क्यों उठ रही थी, जबकि मृत्युंजय तो उसके लिए कभी वफादार था ही नहीं।
उसकी आंखों के सामने बार-बार वही वीडियो घूम रही थी, जो कल रात उसके फोन पर आई थी। एक बार फिर से उस वीडियो को याद करते ही उसका दिमाग पूरी तरह से घूमने लगा था। उसने अब अपने आंसू साफ किए और अपना मन पक्का करते हुए बोली, "मैं हार नहीं मान सकती। मुझे यहां से जाना होगा। चाहे जितनी मर्जी तकलीफ हो।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी उसकी फ्लाइट की अनाउंसमेंट उसके कानों में सुनाई दी। उसमें बताया जा रहा था कि उसकी फ्लाइट अब रवाना होने वाली है, तो सभी पैसेंजर अपने-अपने प्लेटफार्म पर आ जाए।
आ आ आ आ आ आ आ आ आ........
उस अनाउंसमेंट को सुनकर एक पल के लिए धानी का दिल धक सा रह गया था। सांस इस हद तक गहरी हो गई थी कि बस जैसे रुकने की कगार पर हो। पैर आगे बढ़ाने की गवाही नहीं दे रहे थे। पर किसी तरह वह अपने पैरों को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी। तकरीबन 10 मिनट बाद वह अपने प्लेटफार्म पर खड़ी थी और इस वक्त उसका दिल जोरों जोरों से धक धक कर रहा था।
तेरी मेरी मेरी तेरी प्रेम कहानी है मुश्किल
दो लफ़्ज़ों में ये बयां न हो पाए
एक लड़का एक लड़की की ये कहानी है नयी
दो लफ़्ज़ों में ये बयां न हो पाए,,
धानी जिसकी पीठ इस वक्त लगभग से दरवाजे की तरफ थी और चेहरा प्लेटफार्म की तरफ, सामने से अंदर जाने का दरवाजा था और पीछे बाहर जाने का। अभी भी धानी पूरी तरह से दुविधा में थी। उसे अपने दिल में एक अलग ही टीस उठती हुई महसूस हो रही थी। तभी उसके कान में मृत्युंजय की फुसफुसाती हुई आवाज आई। "जा रही है छोड़कर मुझे?" जैसे ही धानी ने मृत्युंजय की यह आवाज सुनी, एक पल के लिए धानी का दिल जैसे धड़कना ही भूल गया।
तेरी मेरी मेरी तेरी प्रेम कहानी है मुश्किल
दो लफ़्ज़ों में ये बयां न हो पाए
एक दूजे से हुए जुदा जब इक दूजे के लिए बने
तेरी मेरी मेरी तेरी प्रेम कहानी है मुश्किल
दो लफ़्ज़ों में ये बयां न हो पाए
आ आ आ आ आ आ आ......
तुमसे दिल जो लगाया तो जहां मैंने पाया
कभी सोचा न था यूँ मीलों दूर होगा साया
क्यूँ खुदा तूने मुझे ऐसा ख़्वाब दिखाया
जब हकीकत में उसे तोडना था आ आ आ आ आ आ.....
अगले ही पल, धानी ने जल्दी से पीछे पलट कर देखा, लेकिन पीछे सिर्फ एक लेडी खड़ी थी, जो अपना पासपोर्ट हाथ में लिए हुए अपने पति से शायद फोन पर बात कर रही थी। इस वक्त उस लेडी के चेहरे पर उदासी छाई हुई थी। उसकी आंखों में नमी तैर रही थी। ऐसा लग रहा था, जैसे वह अपनी पति से बिछड़ते हुए उदास हो और शायद उसका पति उससे मिलने भी नहीं आया था। उसे देखकर धानी को अपने सीने में एक अलग ही तकलीफ और भी ज्यादा महसूस हो रही थी।
उसकी आंखों से लगभग से आंसू और भी ज्यादा तेजी से बहने लगे थे। उसने अब पलट कर दोबारा से अपना मुंह दूसरी तरफ घूमा लिया था। तभी एक बार फिर से मृत्युंजय की आवाज उसके कानों में पड़ी। "सोच लो, जी नहीं पाऊंगा तुम्हारे बिना, एक बार तो जिंदा लाश बन गया था, लेकिन इस बार तो जिंदा लाश भी नहीं, सच में मर जाऊंगा।" मृत्युंजय की यह आवाज सुनकर एक बार फिर से उसने पलट कर पीछे की तरफ देखा।
एक दूजे से हुए जुदा जब इक दूजे के लिए बने
तेरी मेरी मेरी तेरी प्रेम कहानी है मुश्किल
दो लफ़्ज़ों में ये बयां न हो पाए
तेरी मेरी बातों का हर लम्हा सबसे अनजाना
दो लफ़्ज़ों में ये बयां न हो पाए
हर एहसास में तू है हर एक याद में तेरा अफसाना
दो लफ़्ज़ों में ये बयां न हो पाए
आ आ आ आ आ आ आ आ आ
सारा दिन बीत जाए सारी रात जगाये
बस ख्याल तुम्हारा लम्हा लम्हा तडपाये
ये तड़प कह रही है मिट जाए फासले
तेरे मेरे दरमियाँ है जो सारे
लेकिन इस बार भी पीछे कोई भी नहीं था। अब एक बार फिर से धानी का दिल पूरी तरह से टूट गया। पता नहीं क्यों, उस वीडियो को देखने के बावजूद भी अभी भी धानी के अंदर उम्मीद बाकी थी कि शायद उसने ऐसा कुछ भी ना किया हो। शायद वह उसकी आंखों का धोखा हो। वह एक बार मृत्युंजय के मुंह से सुनना चाहती थी। लेकिन उस दिन जब मृत्युंजय ने यह बात कही, पता नहीं क्यों उसका मन भी इस चीज को मानने से इंकार कर रहा था। अभी भी उसे उम्मीद थी कि शायद मृत्युंजय उसके पीछे आए और उसे सच बता दे। पर यूं बार-बार उसके ख्वाब देखते हुए भी उसे तकलीफ हो रही थी।
एक दूजे से हुए जुदा जब इक दूजे के लिए बने
तेरी मेरी बातों का हर लम्हा सबसे अनजाना
दो लफ़्ज़ों में ये बयां न हो पाए
हर एहसास में तू है हर एक याद में तेरा अफसाना
दो लफ़्ज़ों में ये बयां न हो पाए
तेरी मेरी मेरी तेरी प्रेम कहानी है मुश्किल
दो लफ़्ज़ों में ये बयां न हो पाए........ आआआअ.....
अब धानी ने ना उम्मीद से अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमाया और अब उसने अपने लगेज को कसकर अपने हाथों में पकड़ कर अपना कदम एक आगे बढ़ाया ही था। तभी किसी ने उसका हाथ कसकर अपने हाथ में पकड़ लिया।
जैसे ही किसी ने उसका हाथ अपने हाथ में पकड़ा, धानी की आंखें बड़ी हो गई। एक पल के लिए उसका दिल मानो अपनी जगह पर थम सा गया था और सांसों ने रफ्तार पकड़ ली थी। दिल की धड़कनों ने बवाल करना शुरू कर दिया था। तभी उसके कानों में सर्द आवाज पड़ी।।
"एक बार फिर से मुझे तड़पाने चली हो, उजाड़ने चली हो एक बार फिर से मुझे, लेकिन इस बार मैं ऐसा नहीं होने दूंगा।"
यह कह कर मृत्युंजय ने वह बैग एक झटके से पीछे की तरफ ढकेल दिया। तभी उसके एकदम से करीब आकर उसे कंधों पर उठा लिया। वही धानी की तो आंखें ही बड़ी हो गई। एक पल के लिए उसे यकीन ही नहीं हुआ कि अभी-अभी हुआ क्या।
To be continue.….







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