
Shekhawat farmhouse,,
सौम्या इस वक्त शेखावत फार्महाउस में थी और उसकी आंखों से आंसू लबालब बह रहे थे. वह जमीन पर इस तरह से लेटी हुई थी, जैसे उसमें जान ही ना बची हो. उसके हाथ में कुछ पेपर्स थे. उन पेपर्स को देख- देख के उसकी जान उसके हलक में अटकी हुई थी.







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