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Dard

राठौर फार्म हाउस,,

अगली सुबह,,

धानी की नींद अपने बदन के दर्द की वजह से खुली,,, जिस वजह से उसकी आंखें और भी तेजी से खुली उसे अपने बदन के हर एक हिस्से में हद से ज्यादा दर्द महसूस हो रहा था। आंखें खुलती ही उसकी नजर अपने ऊपर झुके हुए मृत्युंजय पर थी। मृत्युंजय को अपने ऊपर देखकर धनी का चेहरा एक बार फिर से सख्त पड़ चुका था।

उसके ऊपर झुका हुआ था। उसकी नजर इस वक्त इसके होठों पर थी। क्योंकि इस वक्त धानी के झगड़ा पूरी तरह से फंसे हुए थे। क्योंकि रात को मृत्युंजय ने उसे बहुत तड़पाया था और बीच में ही अधूरा छोड़कर उसके बगल में लेट गया था। और ऊपर सिंह मृत्युंजय से पहले से बहुत ज्यादा नाराज थी।

गुस्से भरी निगाहों से देखते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा दिया और उसको यूं चेहरा घूमते देखकर मृत्युंजय की नजर पर गहरी हो गई थी। वही धानी के इस वक्त रोंगटे खड़े हो रहे थे क्योंकि वह दोनों इस वक्त पूरी तरह से मेरी बात लेटे हुए थे। और उन दोनों के ऊपर सिर्फ एक ब्लैंकेट था जो उनको कर कर रहा था और जिस तरह से मृत्युंजय उसके ऊपर झुका हुआ था इस वक्त उसे मृत्युंजय का लोअर पार्ट अपनी लोअर सेंसिटिव बॉडी पर महसूस हो रहा था।

जो की पूरी तरह से अपनी अकड़न में था। जिस वजह से धानी के रोंगटे खड़े हो रहे थे। खाने का दिल जोर से धक धक कर रहा था। लेकिन मैं तुझे तो उसे तड़पाना में लगा हुआ था। सबसे पहले से ही वह इतनी नाराजगी मीठी की मृत्युंजय को देखना तक पसंद नहीं कर रही थी। क्या कहोगी देखना तो चाहती थी लेकिन मृत्युंजय की एक हरकत में उसका दिल तोड़ दिया था। और आंखों देखा सच था। यहां कानून में पड़ा हुआ झूठ यह तो अब मृत्युंजय ही जाने,,

मृत्युंजय आप उसके ऊपर झुकाव अगले ही पर उसके गले को चूमने लगा जैसे ही मृत्युंजय नहीं उसके गले को चूमना शुरू किया धानी की आंखें नम हो गई। धानी खुद को बहुत ज्यादा कंट्रोल करने की कोशिश कर रही थी उसे अपने दिल में एक अनचाहा दर्द महसूस हो रहा था जो की मृत्युंजय का दिया हुआ था। उसने उसकी तरफ चेहरा घुमाया तो मृत्युंजय ने अपना चेहरा पीछे की तरफ करके उसके चेहरे के ऊपर जाकर उसे गौर से देखने लगा,,

धनी जिसकी आंखों में नमी छाई हुई थी उसे देखकर मृत्युंजय को कुछ-कुछ हो रहा था लेकिन फिलहाल के लिए उसने गहरी सांस ली और उसके ऊपर से उठने को हुआ कि तभी धानी उसका हाथ पड़कर उसे रोक लिया,, जैसे ही धनी ने मृत्युंजय का हाथ पकड़ के रोका,, तुम मृत्युंजय ने अगले ही फल गहरी सांस लेकर बोला मैं तुम्हें हर्ट नहीं करना चाहता और जो तुम पूछना चाहती हो...

मृत्युंजय चुप हो गया और अब उसने पलट कर धानी की तरफ देखा जो अपनी लाल आंखों से मृत्युंजय को तरफ देख रहीथी। धानी में मृत्युंजय का हाथ अपने हाथ में दिया और अपने सर पर रखकर बोलिए का दीजिए कि यह झूठ है। मेरा दिल इस चीज को मारने को तैयार नहीं है मिस्टर राठौर की आप ऐसे हैं।

बाथरूम मृत्युंजय ने अपने ही पल अपना हाथ पीछे की तरफ खींचते हुए सख्त आवास में बोला,, जो सच है वह सच है झूठ में पहले भी कभी नहीं बोलता था इतना कहकर वह अपनी जगह से खड़ा हुआ और बाथरूम में चला गया वहीं धानी चुकी बिस्तर पर अभी-अभी बैठी थी उसका दिल धक सा रह गया और उसकी आंखों में आंसू और भी तेजी से बहने लगे,,

वहीं पर बैठे-बैठे कुछ देर ऐसे ही रोती रही और अगले ही पल उसने अपनी आंखों की आंसू साफ किए,, और सट्टा बाजार में खुद से ही बोली अगर यह सच है मिस्टर राठौर तो अब जो होगा,, उसे आप चाह कर भी नहीं रोक पाएंगे इतना कहते हुए धानी के चेहरे पर इस वक्त बेहद सख्त भाव आ चुके थे।

धनी अपने बिस्तर से खड़ी हुई और अगले ही पल में वह वार्डरोब की तरफ पड़ गई कुछ ही देर में उसने वार्डरोब से कपड़े उठाने और उन्हें पहन कर फार्महाउस से सीधा बाहर निकल गई,,

वहीं दूसरी तरफ मृत्युंजय इस वक्त शावर के नीचे खड़ा था वह इस वक्त शावर ले रहा था शावर लेते हुए ही उसकी आंखें इस वक्त हद से ज्यादा लाल हो चुकी थी। उन लाल आंखों में कुछ तो था जो शायद वह बयान नहीं कर सकता था। उन लाल आंखों तड़प किस हद तक थी कि शायद धानी भी उसे तड़प को पहचान नहीं पाई थी। उसका तड़पना अगर कोई देखता तो एक पल के लिए,,,

इसका ही रह जाता पर शायद मृत्युंजय को खुद पर ही तरस नहीं आ रहा था। ऐसा भी क्या जो वह अपने दिल में दफनाया बैठा था। और अब तो जैसे वह पत्थर बन चुका था धानी तक को कुछ पता नहीं रहा था। उसके चेहरे से देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसे अंदर ही अंदर घुटन हो रही हो,,

और उसे घुटन को वह और भी ज्यादा बढ़ावा दे रहा था। तकरीबन आधे घंटे बाद वह शावर लेकर बाहर की तरफ आया तो उसने बिस्तर की तरफ देखा जहां पर धानी इस वक्त नहीं थी। धानी को बिस्तर पर न देखकर मृत्युंजय के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गई अब उसने अपने कदम वार्डरोब की तरफ बढ़ा दिए जैसे ही उसने वार्डरोब की तरफ देखा तो उसका चेहरा पूरी तरह से सख्त पड़ गया क्योंकि धानी वहां पर भी नहीं थी।

अभी वह वार्डरोब में जाकर अपने कपड़े पहन ही रहा था कि तभी उसका फोन रिंग करने लगा अपने फोन की रिंगिंग की आवाज सुनकर मृत्युंजय दिन जल्दी से बाहर की तरफ आया। बाहर आते ही उसकी नजर अपने फोन पर गई जहां पर उसके पर्सनल असिस्टेंट आरव का फोन आ रहा था। आरव का फोन आते देखा मृत्युंजय जल्दी से अपना फोन पिक किया। और कहीं पर जो आरंभ नहीं कहा उसे सुनकर मृत्युंजय की आंखें बड़ी हो गई,,

और वह गहरी आवाज में बोला मैं अभी आ रहा हूं।

दूसरी तरफ,,

धानी जो कि इस वक्त कब में बैठी हुई थी कुछ ही देर में उसकी कब एक एयरपोर्ट पर आकर रुकी एयरपोर्ट को देखते ही ढाणी की आंखों में आंसू तेजी से बहने लगे और अब वह गहरी सांस लेकर खुद में ही बोली मुझे यह कदम उठाना होगा नहीं तो मेरे लिए जीना तक मुश्किल हो जाएगा,,

आपकी बेवफाई मुझे अंदर तक तोड़ रही है और अब मैं इस हवा में सांस तक नहीं दे पा रही हूं अगर मुझे सांस लेनी है तो मुझे आपको छोड़कर जाना होगा इतना कहकर धनी अब गाड़ी से बाहर निकली और अपने कदम एय

रपोर्ट की तरफ बढ़ा दिए,,

To be continue...

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