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Baichani

त्रेहान फार्म हाउस,

अरमान इस वक्त अश्की के ऊपर पूरी तरह से झुका हुआ था। वह खुद को उसके अंदर मूव कर रहा था, जिससे अश्की की हल्की हल्की सिसकियां उस कमरे में गूंज रही थी। उन दोनों की गर्म सांसों का शोर भी उस कमरे में अपनी जगह बना रहा था। अरमान अपनी गहरी नजरों से अश्की के चेहरे की तरफ देख रहा था, जिसके चेहरे पर इस वक्त थकान साफ दिखाई दे रही थी। वह पिछले लगभग 5 घंटे से इंटिमेट हो रहे थे।

जिस वजह से अश्की की थकान उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी। इस वक्त उसका पूरा चेहरा पसीने से लथपथ था। उसके बाल उसके सीने और उसके चेहरे पर चिपके हुए थे। जिस वजह से वह और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी। उसे देखकर अरमान और भी ज्यादा पैशनेट होकर उसके साथ इंटीमेट हो रहा था। वही अश्की, जोकि पिछले 1 घंटे से अरमान को रुकने को बोल रही थी, वह अब मुंह बनाते हुए बोली,

"आप बहुत बुरे हैं मिस्टर त्रेहान, मैं थक गई हूं। बस कीजिए ना।" अरमान ने उसे गहरी नजरों से देखा, लेकिन उसे कहा कुछ नहीं। अगले ही पल वह उसके ऊपर से उठकर साइड में लेट गया। वहीं अश्की हैरानी से अरमान की तरफ देख रही थी। क्योंकि अरमान अभी तक सेटिस्फाइड नहीं हुआ था। लेकिन जिस तरह से वह साइट पर लेटा था, एक पल के लिए अश्की को उस के लिए बुरा लग रहा था। वही अरमान भी लगभग से पीछे होकर अब अपनी जगह पर लेटा, तो उसने अपनी आंखें बंद कर ली। अब उसने एक बार भी अश्की की तरफ नहीं देखा।

अरमान की इस बेरुखी को देखकर अश्की की आंखों में जैसे आंसू उतर आए थे। उसे एक अनकही सी टीस अपने दिल में उठ रही थी। अश्की तकरीबन 5 -10 मिनट अरमान को यूं ही देखती रही, लेकिन ना ही अरमान ने अपनी आंखें खोली और ना ही उसकी तरफ देखा। अब हार कर अश्की अपना हाथ उसकी तरफ रखना को हुई कि तभी अरमान गहरी आवाज में बोला, "अगर तुमने मुझे हाथ लगाया, दिलरुबा, तो अपना हाल पूछ लेना।"

उसकी बात सुनकर एक पल के लिए अश्की के रोंगटे खड़े हो गए और गला सूखता हुआ महसूस होने लगा। लेकिन फिर भी किसी तरह उसने हिम्मत करते हुए अरमान के सीने पर अपना हाथ रखा। वह उसके चेहरे पर झुक गई। जैसे ही वह अरमान के चेहरे पर झुकी, उसके बाल पूरी तरह से अरमान के चेहरे पर आ चुके थे। जैसे ही वह अरमान के चेहरे पर झुकी, अरमान ने अपनी आंखें खोली। उसकी नजरें अश्की पर और भी ज्यादा गहरी हो गई।

अरमान को यूं अपनी तरफ देखता पाकर अश्की ने अपनी नजरें पूरी तरह से झुका ली। इस वक्त अश्की को अपने बदन में से जान निकलती हुई महसूस हो रही थी। अब उसकी हिम्मत जवाब दे रही थी। उसका दिल कांप रहा था। अब उसने अपना हाथ अरमान की चेस्ट पर से हटाकर पीछे की तरफ होकर बैठने को हुई कि तभी अरमान ने उसके हाथ को कसकर पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया। जिससे अश्की का सीना अरमान के सीने से टकरा गया। अगले ही पल अश्की का चेहरा पूरी तरह से लाल पड़ गया।

जिस तरह से उसका सीना टकराया था, अश्की के बदन में एक करंट सा दौड़ गया था। दोनों के सीने पास थे, जिस वजह से आपस में टच करते हुए उनके सीने अंदर एक सेंसेशन सी पैदा कर रहे थे। उसका लाल पड़ता हुआ चेहरा देखकर अरमान के चेहरे पर एक पल के लिए कभी ना तैरने वाली आज पहली बार दिलकश मुस्कराहट तैर चुकी थी।

अश्की, जिसने अपना चेहरा एक बार फिर से नीचे की तरफ झुका लिया था, एकदम से उसने अपनी आंखें ऊपर की तरफ उठाई, तो एक पल के लिए वह अरमान की तरफ देखते ही रह गई। क्योंकि अरमान का वह हंसता हुआ चेहरा आज उसने पहली बार देखा था। उसकी मुस्कुराहट इतनी ज्यादा दिलकश थी कि अश्की का दिल जोरों से धड़क उठा था। इन दो हफ्तों में अश्की ने कभी भी अरमान को हंसते हुए नहीं देखा था। आज उसे यूं हंसता हुआ देखकर एक पल के लिए अश्की की नजरे उसके चेहरे पर थम सी गई थी। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे वक्त रुक गया हो।

उसने अरमान के होठों की तरफ देखा। बिल्कुल डार्क लिप्स, जो कि सिगरेट पीने की वजह से हद से ज्यादा डार्क हुए पड़े थे। लेकिन फिर भी उन पर मुस्कुराहट हद से ज्यादा डार्क लग रही थी। लेकिन अगले ही पल अरमान ने अपना चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस किया और उसकी तरफ देखते हुए बोला, "कमाल करती हो दिलरुबा, पहले खुद से दूर करती हो और फिर खुद पास आकर बेचैन करके फिर से पीछे जाती हो।

अगर पास आई ही हो, तो थोड़ा सुकून भी दे दो।" उसकी बात पर हैरानी से अश्की उसकी तरफ देखते ही रह गई। वह एक पल के लिए सुन्न हो गई थी। आज पहली बार अरमान के मुंह से ऐसी बातें उसने सुनी थी। उसकी बात सुनकर अश्की अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "क्या, मैं आपको सुकून?" इसके आगे वह कुछ कहती, उससे पहले ही अरमान उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "ops, ज्यादा उम्मीदें मत लगाना दिलरुबा.. क्योंकि जब जरूरत पूरी होती है, तो सुकून ही मिलता है और तुम जरूरत हो मेरी...।"

अरमान के मुंह से जरूरत शब्द सुनकर एक पल के लिए अश्की का दिल टूट गया। उसका दिल बुरी तरह से तड़प उठा था। अब वह अरमान के ऊपर से उठने को हुई कि तभी अरमान ने उसे सर्द नजरों से उसे देखा और बोला, "जरूरत सिर्फ जरूरत होती है और उसे बीवी से ही पूरा किया जाता है। इसके अलावा बीवी का और कोई काम नहीं होता।" अब तो जैसे अश्की को ऐसा लगा, जैसे अरमान ने उसके बदन से उसकी रूह तक निकाल ली हो। अपनी जगह पर बैठी बैठी वह कांपने लगी थी। जो नमी वह इतनी देर से अपनी आंखों में संभालने की कोशिश कर रही थी, अब वह गालों पर लुढ़क आई थी।

उसके आंखों में से पानी आता हुआ देखकर एक बार फिर से अरमान का गुस्सा उसके चेहरे पर छलकने लगा था। उसने अपने दांत पूरी तरह से पीस लिए थे। वह गुस्से से कांपते हुए बोला, "एक तुम्हारी यही आदत मुझे बिल्कुल नहीं पसंद, दिलरुबा..

थोड़ी सी बात हुई नहीं कि तुम्हारे आंखों से आंसू ऐसे बहते हैं, जैसे किसी ने तुम्हारी जान बाहर निकाल ली हो।" तभी अश्की तड़प कर बोली, "तो जान ही तो बाहर निकाल रहे हैं आप मिस्टर त्रेहान, एक पत्नी अकेली जरूरत नहीं होती, वह अर्धांगिनी...।"

उसने इतना ही कहा था कि तभी अरमान गुस्से से दांत पीसकर बोला, "एक औरत एक मर्द की जरूरत ही होती है। अगर तुम मेरी जरूरत पूरी नहीं करोगी, तो मैं बाहर जाऊंगा, क्या फायदा?" अरमान की बात सुनकर एक पल के लिए अश्की का दिल धक सा रह गया। अरमान की इस बात ने कि वह अपनी जरूरत बाहर पूरी करने जाएगा, उस बात ने अश्की के दिल को पूरी तरह से निचोड़ कर रख दिया था। अब उसकी आंखों से आंसू और भी तेजी से बहने लगे थे।

उसकी आंखों से आंसुओं को बहता हुआ देखकर अब अरमान का चेहरा और भी सख्त पड़ गया। अगले ही पल, वो अपनी जगह से खड़ा हुआ और गुस्से से कांपते हुए बोला, "डिस्गस्टिंग! अगर मेरी जरूरत पूरा नहीं कर सकती, तो रो कर मेरा वक्त भी बर्बाद मत करो।" इतना कहकर वह अपनी जगह से खड़ा हुआ और अपने कपड़े पहनने लगा। जैसे ही उसने कपड़े पहनना शुरू किया, अश्की की आंखें बड़ी हो गई। इस वक्त अश्की का दिल बुरी तरह से तड़प रहा था।

ऊपर से अब जिस तरह से अरमान ने उठकर कपड़े पहनना शुरू किए थे, उसको देखकर अश्की की सांसों ने भी गहरा होना शुरू कर दिया था। एक पल के लिए डर के मारे उसकी जान उसकी हलक में अटक चुकी थी। उसे ऐसा लगने लगा था कि कहीं अरमान उसे छोड़कर किसी के साथ बाहर वक्त ना बिताने चला जाए। इसलिए वह जल्दी से अपनी जगह से उठी। अगले ही पल, उसने अरमान को अपनी बाहों में भर लिया।

जैसे ही अरमान को अश्की ने बाहों में भरा, अरमान का दिल एक पल के लिए धड़क उठा था। उसके चेहरे पर जो गुस्से वाले भाव थे, वह अब बदलने शुरू हो गए थे। लेकिन अगले ही पल उसने अपना चेहरा अश्की की तरफ घुमाया। वह उसके बालों को मुट्ठी में भरकर उसके चेहरे पर झुकते हुए बोला,

"दूर रहो मुझसे, नहीं तो पछताओगी।" उसकी बात सुनकर अश्की तड़पते हुए बोली, "मुझे पछताना मंजूर है, मिस्टर त्रेहान।" अश्की की बात सुनकर अरमान की नजरे उस पर गहरी हो चुकी थी। लेकिन उसके हाथों की पकड़ उसके बालों पर कसती जा रही थी। जिस वजह से अश्की को अपने बालों में अब तकलीफ होने लगी थी। वह तड़पते हुए बोली, "प्लीज मिस्टर त्रेहान, मुझे छोड़कर मत जाइएगा।" इतना कहकर उसकी आंखों से आंसू एक बार फिर से उसके गालों पर आ गए। यह चीज देखकर अरमान और भी ज्यादा फ्रस्ट्रेटेड हो गया। अब उसने उसे पीछे की तरफ धकेला, जिससे अश्की बेड पर जा गिरी।

अश्की, जिसकी आंखों से आंसू और भी तेजी से बहने लगे थे, उसने अब पलट कर अरमान की तरफ देखा, जो अपने कांपते हुए चेहरे से उसको देख रहा था। इस वक्त अरमान की आंखें लाल हो चुकी थी।

अश्की उसकी तरफ देखते हुए बोली, "आपको जरूरत चाहिए, ठीक है। मैं आपकी जरूरत पूरी करने के लिए तैयार हूं।" इतना कहकर वह अपनी जगह से खड़ी हुई और अगले ही पल अरमान के करीब होने को हुई। तभी अरमान ने उसका हाथ पकड़ कर पूरी तरह से मरोड़ कर उसकी पीठ पर लगा दिया, जिससे अश्की की दर्द भरी आह निकल गई।

लेकिन किसी तरह उसने खुद को नॉर्मल किया और अरमान की आंखों में देखते हुए बोली, "मुझे आपकी हर एक शर्त मंजूर है। आप जैसा करना चाहे, जो करना चाहे, मेरे साथ कर सकते है। लेकिन प्लीज, बाहर मत जाइएगा।" उसको यूं अपने आगे बोलता हुआ देखकर अरमान का चेहरा पूरी तरह से काला पड़ चुका था। वही अश्की ने जैसी ही अपनी बात कही, अगले ही पल जिस तरह से अरमान ने उसकी बाहों को पीछे की तरफ मरोड़ कर लगाया हुआ था, इस वजह से दोनों का सीना आपस में पूरी तरह से चिपका हुआ था।

अश्की अपनी बात कह कर उसके सीने पर झुक कर उसके सीने को बेइंतहा चूमने लगी थी। जिस तरह से अश्की उसके सीने को चूम रही थी, अरमान को अपने अंदर कुछ जलता हुआ महसूस हो रहा था। वह अश्की के करीब तो पहले भी जा चुका था, लेकिन अब उसके वह जज्बात जो पहले होते थे, अब वह बढ़ने लगे थे। जिन्हें महसूस कर अरमान पता नहीं क्यों, फ्रस्ट्रेटेड होने लगा था। जैसे वह यह चीज feel ही ना करना चाहता हो

जो जज्बात अश्की की वजह से उसके अंदर आ रहे थे, वह जैसे उन जज्बातों से भाग रहा था। हर वक्त एक्सप्रेशन लेस रहने वाला अरमान, आज उसका गुस्सा उसके चेहरे पर दिखाई दे रहा था। आज तक वह कभी इस तरह से बेचैन नहीं हुआ था, जिस तरह से वह अब अश्की की वजह से बेचैन होने लगा था। अश्की लगातार उसके सीने को चूमे जा रही थी। उसका यू चूमना उसकी बेचैनियों को और भी ज्यादा बढ़ा रहा था।

उसके वह कोमल होंठ जब-जब अरमान के सीने पर अरमान को महसूस होते, उसके हाथों की नसें तनती जा रही थी और माथे की नसें भी उभरने लगी थी। जैसे वह खुद को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था। उसका चेहरा पूरी तरह से लाल पड़ता जा रहा था। उसे ऐसा लग रहा था, जैसे उसका कंट्रोल खुद पर से छूट रहा था। दूसरी तरफ अश्की बिल्कुल भी पीछे नहीं हट रही थी। वह लगातार उसके सीने को चूमते हुए उसके पेट पर आ चुकी थी। अरमान के हाथ, जो किसके बालों पर थे।

वह लगातार कसते ही जा रहे थे। जिस वजह से अश्की को अपने बालों में दर्द हो रहा था। लेकिन फिर भी वह उफ्फ तक नहीं कर रही थी। जब अरमान की बेचैनियां हद से ज्यादा बढ़ गई, तो अरमान ने अश्की को ऊपर की तरफ किया और उसकी आंखों में देखने लगा।

इस वक्त दोनों की धड़कनों का शोर एक दूसरे को सुनाई दे रहा था। अरमान की पकड़ जो उसके बालों में कसी हुई थी, अब उसने एक झटके से उसे छोड़ दिया। इस वक्त अरमान ने लोअर पहन लिया था। अगले ही पल उसने अपनी शर्ट उठाई और रूम से बाहर निकल गया। वहीं अश्की, जो की पूरी तरह से बेलीबास थी, उसका दिल जैसे धड़कना ही भूल गया। अब तक सुबह के 5 बज चुके थे। इस वक्त हाल में भी कोई मौजूद नहीं था। जिस वजह से अश्की ने जल्दी से बेड पर से चद्दर उठाई और खुद पर लपेटते हुए अरमान के पीछे भागी। लेकिन जब तक वह अरमान तक पहुंचती, तब तक अरमान बाहर जा चुका था।

कुछ ही देर में अरमान गाड़ी में बैठा त्रेहान फार्म हाउस से निकल गया। अरमान को यूं जाता हुआ देखकर अश्की वहीं जमीन पर बैठकर फूट-फूट कर रोने लगी। वह रोते हुए बोली, "आखिर आप ऐसा क्यों कर रहे हैं, मिस्टर त्रेहान?

मैं तो आपके लिए जरूरत भी बनने को तैयार हूं, तो फिर आप क्यों बाहर जाना चाहते हैं।" इतना कहते हुए उसके आंसू उसके गालों को पूरी तरह से भिगो रहे थे। उसके आंसू अब जमीन पर गिर रहे थे। इस वक्त वह पूरी तरह से ब्लैंकेट में लिपटी हुई थी।

दूसरी तरफ,,

तकरीबन आधे घंटे बाद अरमान की गाड़ी एक बार के आगे आकर रुकी। वह बहुत ही हाई-फाई बार था और यहां पर लड़कियां अपने जिस्म की नुमाइश भी करती थी। अरमान अंदर की तरफ आया। सामने ही एक लड़की, जोकि स्टेज पर डांस कर रही थी, उसने उस लड़की को गहरी नजरों से देखा और उसे अपने पास आने का इशारा किया।

वही वह लड़की, जोकि स्टेज पर डांस कर रही थी, जैसे ही अरमान ने उसे इशारा किया, उस लड़की का चेहरा पूरी तरह से खिल गया। वह बेहद सेडक्टिव तरीके से चलते हुए अरमान के पास आई और उसे देखते हुए उसके सीने पर हाथ चलाने लगी। उस लड़की के हाथ अपने सीने पर महसूस कर अरमान को पता नहीं क्यों, कुछ भी महसूस नहीं हो रहा था।

अरमान अपनी लाल आंखों से उस लड़की को देख रहा था। अब उसने उस लड़की की कमर पर हाथ रखा। वह उसकी तरफ देखकर गहरी आवाज में बोला, "would you like spent night with me....?"

To be continue...

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