
अंधेरे भरे कमरे में,
श्यामू, जोकि अश्की के पैरों के पास बैठा हुआ था। जिस तरह से श्यामू अश्की को देख रहा था, अश्की के रोंगटे खड़े हो रहे थे। उसे अपनी जान निकलती हुई महसूस हो रही थी। इस वक्त अश्की के मुंह से आवाज तक नहीं निकल रही थी, क्योंकि उसके होठों पर इस वक्त पट्टी बंधी हुई थी। उसका दिल इस वक्त जोर-जोर से धड़क रहा था। लेकिन अगले ही पल जो हुआ, उससे अश्की पूरी तरह से कांप उठी थी। क्योंकि श्यामू ने उसके थाई पार्ट पर हाथ रखकर उसे कस कर के सहलाना शुरू कर दिया था।







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