
शेखावत पैलेस,
दिव्यांश ने अभी- अभी सौम्या और कल्याणी जी को एक खुशखबरी दी थी, जिसे सुनकर दोनों की आंखों में नमी आ चुकी थी. सौम्या जो की दादी के गले लगी हुई थी वह रोते हुए बोली. कितनी देर बाद शेखावत पैलेस में खुशियां आई है. वहीं कल्याणी जी ने भी रोते हुए हां में सिर हिला रही थी कि तभी पीछे से किसी की डोमिनेटिंग आवाज सौम्या के कानों में पडी, और तुम्हें नहीं लगता की खुशियां अकेले- अकेले मनाई जा रही है. यह आवाज सुनकर सौम्या के रोंगटे खडे होते हुए महसूस हो रहे थे, वही कल्याणी जी की भी आंखें बडी हो चुकी थी, उन्होंने अब पीछे मुडकर देखा तो, वहां धानिष्क खडा था जो अपनी गहरी नजरों से सामने सौम्या की तरफ देख रहा था.







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