
शाम के 5 बजे,
अरमान इस वक्त अश्की को बाहों में भरकर सोया हुआ था। 3 घंटे पहले ही अरमान ने अश्की को छोड़ा था। वह कल रात से अश्की के साथ इंटीमेट हो रहा था, जिस वजह से अश्की पूरी तरह से थक गई थी और अब वह पूरी तरह से गहरी नींद में सो रही थी। वह दोनों अभी भी यॉर्ट में ही थे और अरमान ने उसे पीछे से हग किया हुआ था। इस वक्त अश्की की पीठ पूरी तरह से अरमान से सटी हुई थी।
वही अरमान, जिसकी अब नींद खुलने लगी थी, उसने अपनी आंखें हल्की-हल्की खोलनी शुरू की। तभी उसकी नजर अपने सीने से सटी हुई अश्की पर गई। अश्की के बाल उसकी पीठ पर पूरी तरह से फैले हुए थे। उसने अश्की को गहरी नजरों से देखा और उसकी पीठ पर से बाल हटाते हुए उसकी पीठ को एक बार फिर से चूमने लगा। तभी उसके कानों में उसके फोन की रिंग बेल की आवाज सुनाई दी।।
फोन की आवाज सुनकर अरमान के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गए। अब उसने फोन की तरफ देखा, तो उसका चेहरा एक बार फिर से एक्सप्रेशन लेस हो गया। उसने अपना फोन उठाया और अगले ही पल दूसरी तरफ से आवाज आई। "तुम कहां पर हो अरमान, कल रात भी तुम अपने घर पर नहीं थे। तुम अभी भी उस चुड़ैल के साथ हो ना, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई, हाउ डेयर यू? जब तुम्हें पता था, हमारी शादी हो चुकी है, तो किसी तीसरी लड़की को हमारे बीच लाने की।"
उसने इतना ही कहा था कि अरमान ने आगे से फोन डिस्कनेक्ट कर दिया। जैसे ही फोन डिस्कनेक्ट हुआ, वह लड़की, जो कि हंसिका थी, वह गुस्से से कांपते हुए बोली, "तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते अरमान, मैने तुमसे शादी की थी बचपन में, और हाउ डेयर यू, तुमने उस लड़की के लिए मेरा फोन काटा। आई नो कि तुम अभी भी उसे beach के साथ हो।
मैं उस बीच को छोडूंगी नहीं।" इतना कहते हुए हंसिका का चेहरा पूरी तरह से लाल होने लगा था।
दूसरी तरफ,
यॉर्ट पर,,
एक बार फिर से अरमान का फोन दोबारा से बजने लगा था। लेकिन इस बार फोन पर जावेद का फोन कॉल था और जावेद के कॉल को देखकर अरमान ने अगले ही पल फोन उठाया। वह जानता था कि जावेद किसी जरूरी काम से ही फोन करता था। इसीलिए उसने जल्दी से फोन उठाया और कान से लगाया। दूसरे ही पल आगे से कुछ कहा गया, जिसे सुनकर अरमान की आंखें सर्द हो गई। वह गहरी आवाज में बोला,
"मैं आ रहा हूं, शिप रेडी रखो और जितना नुकसान हुआ है, वह तो उन्हें भुगतना हीं होगा।" इतना कहते हुए अरमान के चेहरा डेविल वाइब दे रहा था। अगले ही पल अरमान अब अपनी जगह से खड़ा हुआ और देखते ही देखते उसने कुछ ही पलों में अपने कपड़े पहने और बाहर जाने के लिए रेडी हो गया था। उसकी नजर अब एक बार फिर से अश्की पर गई, जो कि अभी भी गहरी नींद में थी।
अरमान अब अश्की के पास आया और अगले ही पल उसने अश्की को अच्छी तरह से ब्लैंकेट से कवर किया। दूसरे ही पल अश्की को अपनी में गोद उठाया और वहां से निकल गया।
तकरीबन आधे घंटे बाद अरमान की गाड़ी त्रेहान फार्म हाउस के आगे आकर रुकी।
अरमान ने अपनी गोद में लेटी हुई अश्की की तरफ देखा। अरमान इस वक्त पिछली सीट पर बैठा हुआ था और गाड़ी ड्राइवर ड्राइव कर रहा था। अश्की, जोकि पूरी तरह से उसकी गोद में सिमटी हुई थी, उसे किसी चीज का भी होश नहीं था। अब तक छह बज चुके थे। अरमान उसे त्रेहान हाउस नहीं लेकर गया था। वह सीधा ही उसे त्रेहान फार्म हाउस लेकर आया था। क्योंकि वह जानता था कि हंसिका आ चुकी है और हो सकता था कि हंसिका उसकी अब्सेंस में अश्की को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करें। इसीलिए वह उसे फार्म हाउस लेकर आया था। अब उसे कहीं जाना था, इसीलिए वह अब जल्दी से गाड़ी से बाहर निकला। अभी भी अश्की गोद में वैसे ही थी। जैसे ही वह गाड़ी से बाहर निकला, वहां पर खड़े सभी गार्डों ने अपना चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ झुका लिया। किसी की भी हिम्मत नहीं थी कि वह नजरे उठाकर अश्की की तरफ देख ले।
हालांकि अरमान ने उसे पूरी तरह से कवर किया हुआ था। बट फिर भी किसी की भी हिम्मत नहीं थी कि वह नजरे उठाए अरमान अब उसे लेकर पूरी तरह से अंदर की तरफ आया और मास्टर बेडरूम में ले जाकर उसने अश्की को बेड पर लेटा दिया। उसने एक नजर अश्की की तरफ देखा, जो कि अभी गहरी नींद में थी।
अब अरमान ने उसका माथा चूमा और अगले ही पल वहां से निकल गया।
तकरीबन 1 घंटे बाद,
अश्की, जोकि बेड पर सोई हुई थी, अब उसकी आंखें हल्की-हल्की खुलने लगी थी। अगले ही पल उसने जम्हाई लेते हुए धीरे-धीरे अपनी आंखें खोली और अपने बगल में देखा, तो अरमान नहीं था। अपने बगल में अरमान को ना देखकर उसका चेहरा पूरी तरह से मायूस हो गया। लेकिन अगले ही पल उसने अपना चेहरा उठाकर आसपास देखा, तो उसकी आंखें हैरत से फैल गई, क्योंकि जब वह सोई थी, तब यॉर्ट में थी।
जैसे ही अश्की की आंख खुली, वह इस वक्त फार्महाउस में थी। फार्म हाउस को देखकर उसकी आंखें हैरत से फैल चुकी थी। लेकिन अगले ही पल उसके दिमाग में यह बात आ चुकी थी कि अरमान ही उसे यहां पर लेकर आया होगा। इसीलिए उसने अब अपनी हालत देखी, तो उसका चेहरा और भी लाल हो गया, क्योंकि वह अभी भी पूरी तरह से बेलिबास थी।
अब उसकी ब्लैंकेट भी नीचे की तरफ सरक चुकी थी। वही दूसरी तरफ, अरमान, जो कि अपनी गाड़ी में ही था, जो कि अपने सामने खुले हुए लैपटॉप में से अपने रूम की कैमरा की cctv footage देख रहा था। जैसे ही उसने अश्की को इस तरह से देखा, तो उसके चेहरे पर एक कभी ना दिखने वाली मुस्कराहट तैर गई। वही अश्की ने अब खुद को जल्दी से समेटा। उसने जल्दी से अपने सीने को कवर किया और वहां से उठकर बाथरूम में जाने को हुई थी। तभी उसका फोन रिंग करने लगा। अपने फोन को रिंग करता देख उसने फोन की तरफ देखा, जहां पर अरमान का कॉल आ रहा था।
अरमान का फोन अपने फोन पर आते हुए देख उसका चेहरा पूरी तरह से रेड पड़ चुका था। अभी तक अश्की को यह नहीं पता था कि रूम में कैमरास लगे हुए हैं। अगले ही पल उसने फोन की तरफ अपने कांपते हुए हाथ बढ़ाए। उसका दिल इस वक्त इतना तेजी से धड़क रहा था कि उसकी सांसे भी गहरी चल रही थी। किसी तरह कांपते हुए हाथों से उसने अपना फोन पकड़ा। तब तक फोन बज कर बंद हो चुका था, लेकिन एक बार फिर से फोन रिंग किया, तो उसका दिल और भी तेजी से धड़कने लगा।
अब उसने जल्दी से फोन उठाया और अपने कान से लगा लिया। लेकिन उसने एक शब्द भी अपने होठों से नहीं निकाला। उसकी गहरी गहरी सांस अरमान फोन पर साफ महसूस कर सकता था और ऊपर से उसके सामने खुला हुआ उसका लैपटॉप, जिसमें से उसे अश्की पूरी तरह से दिखाई दे रही थी। उसका वह लाल पड़ चुका चेहरा देखकर अरमान के होठों के कोने मुड़े हुए थे। दोनों के हाथों में फोन थे, लेकिन बोल दोनों में से कोई भी नहीं रहा था।
कोई भी अपनी चुप्पी तोड़ने को तैयार नहीं था। अश्की के दिल की धड़कनें, जो कि अरमान के कानों तक साफ पहुंच रही थी। वह उसके दिल की चुगली कर रही थी कि किस तरह अरमान ने उसके दिल में भूचाल मचा रखा था। जब 15-20 मिनट अरमान ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी, तो अश्की अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "वह आप कहां है और हम यहां पर कैसे पहुंचे?"
उसकी बात काटते हुए अरमान ने एक गहरी सांस ली और उसकी तरफ देखते हुए बोला, "भूख लगी है।" उसकी बात पर अश्की बोली, "hmm लगी तो है लेकिन।" उसका लेकिन सुनकर अरमान की आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई। तभी अश्की बोलो, "वह वह, आपने भी तो कुछ नहीं खाया।" उसकी बात पर एक बार फिर से अरमान के चेहरे पर एक छोटी सी मुस्कराहट तैर गई। अब वह गहरी आवाज में बोला, "मुझे जो खाना होगा, मैं रात को जाकर खाऊंगा। जो मुझे खाना है, वह तुम बहुत अच्छी तरह से जानती हो। क्योंकि मेरी भूख तो खाने से नहीं मिटेगी।"
अरमान की बात सुनकर अश्की के रोंगटे खड़े हो रहे थे। उसका दिल ओर भी तेजी से धड़कने लगा। अगले ही पल उसकी पलके पूरी तरह से झुक चुकी थी।
उसे ऐसा लग रहा था, जैसे अरमान उसकी जान उसके बदन से निकाल रहा हो। अभी वह बात कर ही रहे थे कि तभी सर्वेंट वहां पर खाना लेकर आई और उसने टेबल पर खाना लगाना शुरू कर दिया। सर्वेंट जानती थी कि इस वक्त अरमान घर पर नहीं है। ऊपर से अरमान के ही ऑर्डर थे कि कमरे में जाकर अश्की के लिए खाना लगा दिया जाए।
उस सर्वेंट को देखकर अश्की को और भी ज्यादा शर्म आ रही थी, क्योंकि इस वक्त वह सिर्फ एक ब्लैंकेट में कवर थी। तभी अरमान गहरी आवाज में बोला, "खाना खाओ दिलरुबा।" तभी अश्की बोली, "लेकिन आप है कहां पर और आप कहां पर गए हैं मुझे यूं अकेला छोड़कर।" इतना कहते हुए उसका चेहरा एक बार फिर से मायूस हो गया था। उसकी बात पर अरमान कुछ देर चुप रहा और फिर गहरी आवाज में बोला, "लगता है तुम रूल्स भूल चुकी हो। क्या मुझे तुम्हें दोबारा से रूल्स याद दिलाने पड़ेंगे?"
रूल्स वाली बात सुनकर अश्की के कानों में अरमान की कही हुई बातें गूंजने लगी कि वह अरमान के काम में कभी भी टांग नहीं अड़ाएगी। उस बात को याद करते हुए अश्की की आंखें नम होने लगी थी।
वह अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "आप किसी गलत काम से तो नहीं बाहर जा रहे हैं ना, प्लीज, मुझे इतना बता दे क्या आप किसी को?" इतना कहते हुए उसकी आवाज बुरी तरह से कांप रही थी और डर के मारे उसका दिल भी अब कांपने लगा था। अश्की की आवाज सुनकर अरमान की नजरे सर्द हो गई थी। ऊपर से अश्की ने जो कहा था, उसे सुनकर अरमान की भौहें तन गई थी।
वह एक बार फिर से रोते हुए बोली, "प्लीज बताइए ना अरमान जी, क्या आप!" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अरमान सर्द आवाज में बोला, "लगता है तुम रूल्स भूल गई हो, दिलरुबा, और मुझे तुम्हें उन रूल्स को अच्छी तरह से याद करवाना पड़ेगा।"
तभी अश्की रोते हुए बोली, "लेकिन अरमान जी, प्लीज, ऐसा कुछ मत कीजिए। मुझे अच्छा नहीं लगता है, जब आप।"
अभी उसकी बात पूरी होती, उससे पहले ही अरमान सर्द आवाज में बोला, "मेरे काम में टांग अड़ाने की हिम्मत मत करना दिलरुबा, मैं किसी की जान लूं चाहे न लूं।
तुम्हारी इतनी औकात नहीं है कि तुम मेरे काम में टांग अड़ाओ।" इतना कहकर अगले ही पल अरमान ने फोन कट कर दिया था। अरमान की बात पर अश्की की आंखों से आंसू तेजी से बहने लगे थे। अभी कुछ देर पहले अश्की का चेहरा, जो पूरी तरह से खिला हुआ था, अब वह पूरी तरह से मुरझा गया था। उसकी आंखों से आंसू तेजी से बह रहे थे। वह रोते हुए बोली, "क्यों अरमान जी, आखिर क्यों आप मेरी बातों का जवाब नहीं देते?
पता नहीं क्यों, लेकिन मुझे अच्छा नहीं लगता है, जब आप गलत काम करते है। उसे दिन जब मैंने आपको उस इंसान को मारते देखा, तो मेरा दिल कांप रहा था। मैं आपको गलत करते नहीं देख सकती। आखिर पति हैं आप मेरे।" इतना कहते हुए वह लगभग से रोते हुए वहीं पर बैठ चुकी थी। वही सर्वेंट, जो कि खाना लगा रही थी, उसे भी अश्की के लिए बुरा लग रहा था अब वह धीरे से चलकर अश्की के पास आई और उसकी तरफ देखते हुए बोली, "मालकिन, खान लग गया है, खाना खा लीजिए, प्लीज।"
सर्वेंट की बात सुनकर अश्की ने सर्वेंट की तरफ देखा और आंसू साफ करते हुए बोली, "हमें भूख नहीं है।" इतना कहकर वह अपनी जगह से उठी और बाथरूम की तरफ अपने कदम बढ़ाने को हुई। तभी सर्वेंट सिर झुकाते हुए बोली, "लेकिन मेमसाहब, अगर आपने खाना नहीं खाया, तो सर हमें।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अश्की बोली, "कुछ नहीं कहेंगे साहब, मुझे खाना नहीं खाना, मतलब नहीं खाना। ले जाइए खाना यहां से।" इतना कहकर वह बाथरूम में चली गई। वहीं अरमान, जो की सीसीटीवी फुटेज में यह सब कुछ देख रहा था। इस तरह से अश्की को खाना छोड़कर जाते देख अरमान की आंखें लाल होने लगी थी।
अगले ही पल उसने लैपटॉप बंद करके गाड़ी के दूसरी तरफ फेंक दिया। गुस्से से अरमान का चेहरा लाल होने लगा था। उसने अपने गले में पहनी हुई टाई की नोट ढीली की और पीछे गाड़ी की बैक सीट पर सर लगाते हुए बोला,
"तुम मुझे बदलने की कोशिश कर रही हो, दिलरुबा और यह चीज कभी नहीं हो सकती।" इतना कहते हुए अरमान ने अपनी पॉकेट में से सिगरेट निकाली और अपने होठों में सिगरेट फसाते हुए कश भरने लगा।
वहीं दूसरी तरफ,
एक गाड़ी त्रेहान फार्म हाउस के आगे आकर रुकी। उस गाड़ी में एक शख्स ब्लैक कलर की हुडी हुड्डी पहने बैठा हुआ था। उसकी गहरी नजरे त्रेहान फार्म हाउस पर थी। वह शख्स अभी फार्म हाउस की तरफ देख ही रहा था कि तभी उसका फोन बजने लगा। इस वक्त उसके फोन पर हंसिका का कॉल आ रहा था। उस शख्स ने फोन उठाया और दूसरी तरफ से हंसिका ने उस शख्स से कुछ कहा, जिसे सुनकर उस शख्स ने हंसिका से कहा, "आप फिक्र मत कीजिए मेमसाहब, 1 घंटे के अंदर अंदर वह लड़की हमारे अड्डे पर होगी।" इतना कहते हुए उस शख्स की नजरे फार्म हाउस पर गहरी हो गई थी।
To be continue..







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