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Abhay ka gussa

City hospital,

प्रतीक की गाड़ी हॉस्पिटल के आगे आकर रुकी। अस्पताल को देखकर एक पल के लिए ध्वनि के चेहरे पर परेशानी झलकने लगी। उसने अपनी एक नजर उठाकर प्रतीक की तरफ देखा, जो कि उसे ही देख रहा था। प्रतीक गाड़ी से बाहर निकला और अगले ही पल घूम कर ध्वनि की तरफ आया और उसने ध्वनि की साइड का दरवाजा खोला। उसने ध्वनि की तरफ अपना हाथ बढ़ाया। वही ध्वनि, जो की बेचैन सी नजरों से हॉस्पिटल की तरफ देख रही थी, जैसे ही प्रतीक ने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया, उसका दिल और भी बेचैनी से भर गया।

अब उसने अपना सलाइवा गटका और अपने कदम बाहर की तरफ रखें। प्रतीक के हाथ पर हाथ रखा और जैसे ही उसने प्रतीक के हाथ पर हाथ रखा, किसी की जलती हुई नजरे उन दोनों के हाथ पर पड़ रही थी। उस शख्स के हाथ अपनी गाड़ी में बैठे हुए ही स्टीयरिंग व्हील पर कस रहे थे। यह शख्स प्रतीक और ध्वनि की गाड़ी से कुछ ही दूरी पर अपनी गाड़ी रोक कर खड़ा था। यह शख्स कोई और नहीं, बल्कि आदर्श था। आदर्श अपनी गाड़ी में बैठा हुआ जलती नजरों से प्रतीक और ध्वनि को देख रहा था। अब उसके जबड़े और भी ज्यादा कसते जा रहे थे। वह गुस्से में कांपते हुए बोला, "कितने यार बना लिए ना मेरे पीछे से तुमने।

तुम लड़कियां होती ही ऐसी हो। जिसे सिर्फ एक ही चीज चाहिए होती है, और वह है सिर्फ पैसा।" इतना कहते हुए आदर्श का चेहरा सख्त हो गया था। वहीं प्रतीक अब ध्वनि को लेकर अंदर की तरफ आया। कुछ ही देर में, वह दोनों डॉक्टर के सामने बैठे हुए थे। डॉक्टर ने ध्वनि को कुछ ब्लड सैंपल्स देने को कहा था और अब उन्होंने कुछ ही देर में ध्वनि का ब्लड सैंपल लिया और कुछ टेस्ट वगैरह किए। वही प्रतीक बस एक साइड पर बैठा उन दोनों की तरफ देख रहा था। अब ध्वनि की बात बीच में काटते हुए बोला, "यह बहुत दिनों से बहुत ज्यादा कमजोर फील कर रही है। दूसरी बात यह सही से खाती पीती भी नहीं है।" तभी डॉक्टर हल्का सा मुस्कुराए और प्रतीक की तरफ देखकर बोले, "आप चिंता मत कीजिए, मिस्टर खन्ना, हम कुछ ही देर में उनके सारे टेस्ट कर लेंगे और उसके बाद सब क्लियर हो जाएगा। रिपोर्ट शाम तक आपको मिल जाएगी। तब तक चाहे तो आप यहां पर वेट कर सकते हैं या फिर शाम को मैं डायरेक्ट आपके फोन पर भी रिपोर्ट भिजवा सकता हूं।"

डॉक्टर की बात सुनकर ध्वनि का रंग पूरी तरह से उड़ गया। वह अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "नहीं डॉक्टर, आप मेरे नंबर पर रिपोर्ट भिजवा दीजिएगा।" इतना कहते हुए वह अपना नंबर देने को हुई कि तभी प्रतीक उसे देखते हुए गहरी आवाज में बोला, "और मेरे नंबर पर रिपोर्ट क्यों नहीं आ सकती, क्या मैं पूछ सकता हूं?" उसकी बात पर अब ध्वनि उसकी तरफ देखते हुए बोली, "क्योंकि यह मेरी प्रॉब्लम है। मैं बीमार हूं, यह मेरी headache है।" ध्वनि की बात सुनकर प्रतीक के चेहरे पर गुस्सा छलकने लगा। लेकिन ध्वनि ने उसकी बात एक बात नहीं सुनी। उसने जल्दी से अपना फोन नंबर दिया और डॉक्टर की तरफ देखते हुए बोली, "आप इसी नंबर पर मुझे रिपोर्ट भेजेंगे।" इतना कहकर ध्वनि ने अब प्रतीक की तरफ देखा, जो गुस्से से उसे ही घूर रहा था।

कुछ ही देर में वह दोनों अब फिर से एक बार गाड़ी में थे। अब प्रतीक की गुस्से भरी नजरे ध्वनि पर थी। वही ध्वनि भी उसकी नजरें खुद पर महसूस कर सकती थी। लेकिन उसने अपना चेहरा प्रतीक की तरफ नहीं घुमाया। वह लगातार बाहर की तरफ देख रही थी।

तकरीबन आधे घंटे बाद,

एक बार फिर से उनकी गाड़ी होटल पैराडाइज में आकर रुकी। गाड़ी रुकते ही ध्वनि जल्दी से गाड़ी से निकलने को हुई कि तभी प्रतीक ने उसका हाथ पकड़ लिया। यह चीज होते ही एक पल के लिए ध्वनि की बेचैनियां एक बार फिर से बढ़ने लगी। प्रतीक अब उसकी तरफ देखकर बोला, "तुम ऐसी क्यों हो? मैं कौन सा तुम्हारी रिपोर्ट देख कर तुम्हें कोई बीमारी लगा देता।" उसकी बात पर ध्वनि फीका सा मुस्कुराई और बोली, "ऐसी कोई बात नहीं है मिस्टर प्रतीक, बस मैं नहीं चाहती कि मुझे कोई तकलीफ अगर हो और उसकी हवा भी किसी तक पहुंचे।" तभी प्रतीक गुस्से में बोला, "लेकिन क्यों?

अगर तुम्हें कोई इंफेक्शन है, कोई प्रॉब्लम है, उसमें मैं तुम्हारी हेल्प कर दूंगा, तो क्या प्रॉब्लम हो जाएगी।" तभी ध्वनि बोली, "मिस्टर प्रतीक, यह आप भी जानते हैं कि मुझे किसी की हेल्प लेना नहीं पसंद और मैं बार-बार यह बात दोहराऊंगी नहीं। अगर आपको इतना ही है, तो कोई बात नहीं, मैं कहीं और जॉब ढूंढ लेती हूं।" जैसे ही ध्वनि ने यह बात कही, प्रतीक का रंग पूरी तरह से उड़ गया। वह उसकी तरफ देखते हुए बोला, "कैसी बात कर रही हो तुम, एक रिपोर्ट के मामले में तुम जॉब छोड़ कर चली जाओगी। मैं तो सिर्फ तुम्हारी हेल्प करना चाहता था।" वही ध्वनि अब उसकी तरफ देखकर बोली, "नो थैंक्स मिस्टर प्रतीक, मैं जैसी भी हूं, मैं खुद अपने लिए सब हूं।"

इतना कहकर उसने प्रतीक का हाथ अपने हाथ से हटाया और अंदर की तरफ चल गई। वहीं प्रतीक अपने बालों में हाथ फेरते हुए फ्रस्ट्रेटेड होते हुए बोला, "यह लड़की है क्या आखिर, क्यों नहीं मुझे अपनी हेल्प करने देती? प्यार करता हूं मैं इससे, समझती क्यों नहीं है मेरी फिलिंग्स को।" इतना कहते हुए प्रतीक के चेहरे पर एक अलग ही बेचैनी और दर्द छलक रहा था। प्रतीक अब बाहर की तरफ आया और कुछ ही देर में अंदर चला गया।

वहीं दूसरी तरफ,

रात के 8 बजे,

अभय का कमरा,

सावरी इस वक्त बेड पर अभी भी वैसे ही लेटी हुई थी और उसके बदन में जैसे बिल्कुल भी जान नहीं थी। अभी भी वह इसी तरह बेजान उस ब्लड वाली चद्दर पर लेटी हुई थी। उसकी ass से जो ब्लड निकला था, जो नीचे की तरफ बह रहा था। वह वैसे ही सूख चुका था। उसका चेहरा इस वक्त पूरी तरह से बेजान नजर आ रहा था। रो-रो कर उसकी आंखों से जो आंसू निकले थे, वह आंसू उसके गालों पर जम से गए थे। अभी दोपहर 1 बजे का टाइम हो गया था, लेकिन वह अपनी जगह से हिली तक नहीं थी। उसकी छोटा सा सिर, जिसमें मांग में भरा हुआ सिंदूर, उसे खूबसूरत तो बना रहा था, लेकिन उसे अभागन भी बता रहा था।

तभी रूम का दरवाजा खुला और अभय अंदर की तरफ आया। इस वक्त उसने हद से ज्यादा ड्रिंक की हुई थी। उसने जैसे ही सावरी को सामने लेटे हुए देखा, तो उसकी आंखें एक बार फिर से सर्द हो गई। जाहिर सी बात थी, जिस तरह से अभय उसके साथ इंटीमेट हुआ था, वह बहुत ज्यादा ब्रूटल था। जिस वजह से जब अभय ने उसे छोड़ा, कुछ ही देर में सावरी बेहोश हो चुकी थी। तब से सावरी को होश नहीं आया था। अभी को ऐसा लग रहा था कि सावरी पूरी तरह से गहरी नींद में है। अभय अंदर की तरफ आया और अगले ही पल उसने साइड पर रखा हुआ पानी का जग उठाकर सावरी के चेहरे पर उड़ेल दिया।

जैसे ही अभय ने पानी का जग सावरी के चेहरे पर उड़ेला, सावरी एकदम से गहरी सांस लेते हुए होश में आई। अगले ही पहले उसका शरीर एक पल के लिए कांप उठा। उसने जब अभय को अपनी आंखों के सामने देखा, तो एक बार फिर से उसके हाथ पैर ठंडे पड़ने लगे। वही अभय अब उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, "साली बहनचोद, ऐसा कौन सा तेरी गांड़ सोने के लिए फुदक रही थी। तुझे छोड़ कर चार घंटे बाहर क्या गया, तू साली भड़वी सो गई। तुझे कमरा साफ करने का नहीं पता, हरामजादी।" इतना कहते हुए अभय का चेहरा गुस्से से लाल था।

उसकी गालियां सुन कर सावरी को बहुत तकलीफ हो रही थी। अभय एक बार फिर से उसे देखते हुए बोला, "उठ जा बहन की लोड़ी, गांड़ चोदूं दोबारा, तब जाकर उठेगी। चल जल्दी साफ कर ये सारा।" इतना कहते हुए उसने पूरे रूम की तरफ इशारा किया। सावरी ने भी अब किसी तरह खुद को संभाला और बेड से उठकर चद्दर उठाकर खुद को ढकने लगी। तभी अभय ने उसके हाथ से चद्दर लेकर खींचते हुए बोला, "चल बहन की लोड़ी, किसी पराए मर्द के सामने है, जो तू नंगी होकर यह सब कुछ नहीं कर सकती, चल सफाई कर।"

इतना कहते हुए वह पूरी तरह से सावरी के हाथ से चद्दर खींचने लगा हुआ था। अभय की हरकत देखकर सावरी को अपने अंदर कुछ टूटता हुआ महसूस हो रहा था। वह रोते हुए बोली, "इसे मत खींचिए, मेरे कपड़े भी आपने फाड़ दिए। मैं काम कैसे करूंगी।" इतना कहते हुए सावरी ने चद्दर पकड़ ली थी। सावरी के ऐसे चद्दर पकड़ने से अभय का गुस्सा और भी बढ़ गया। अब वह सावरी के बालों को मुट्ठी में भरते हुए बोला, "साली कुतिया, अब तू मुझे बताएगी कि मुझे क्या करना है क्या नहीं..?

साली, मेरे जाने के बाद बहन चोद पूरी तरह से बेड पर गांड फैला कर सोई है। अब मादर चोद, मेरे आगे जुबान लड़ा रही है।" इतना कहते हुए अभय का चेहरा गुस्से से कांप रहा था। अभय को इतना गुस्से में देखकर सावरी का दिल जोरो से धक धक कर रहा था। वह रोते हुए बोली, "माफ कर दीजिए कुंवर सा, गलती हो गई। हम आपको नहीं रोकेंगे।" इतना कहते हुए सावरी ने लगभग से हाथ जोड़ लिए थे। उसकी आंखों से आंसू लबालब बहे जा रहे थे। सावरी को इस तरह से हाथ जोड़ता देखकर एक पल के लिए अभय की नजर उसके हाथों पर ठहर गई। अब अभय के हाथों की मुट्ठियां बन चुकी थी।

उसकी नजर सावरी के हाथों से होकर उसके चेहरे पर पड़ रही थी, रो-रो कर लाल पड़ चुका चेहरा। सांवरी बहुत ज्यादा मासूम लग रही थी और उसकी आंखें रो-रोकर सूज भी चुकी थी। उसको इस तरह से देखकर अभय ने अपना चेहरा घुमाया और सामने सोफे पर जाकर बैठ गया। अब वह सावरी को गहरी निगाहों से देख रहा था। वही सावरी अपना मुंह नीचे की तरफ झुका कर एक टक वहीं पर खड़ी रही।

सावरी को यूं शांति से खड़ा देखकर अभय फिर से दांत पीसते हुए बोला, "साली, अब क्या लंड लेकर तेरे पीछे आऊ, जल्दी कर।" इतना कहकर वह सावरी को गहरी निगाहों से देखने लगा। वही सावरी का दिल अब तेजी से धड़कने लगा था। उसने अब अपने हाथों में पकड़ी हुई चद्दर को फोल्ड करना शुरू किया। जिसे देखकर अभय की नजरे चद्दर के पीछे खड़ी सावरी पर थी। उसके वह छोटे-छोटे हाथ, जिस तरह से वह चद्दर को संभालने की कोशिश कर रही थी। उससे सही से blanket संभाली नहीं जा रही थी। वह ब्लैंकेट सांवरी से बहुत ज्यादा बड़ी थी और ऊपर से वह पूरी तरह से नेक्ड थी।

अब जिस तरह से सावरी ने चद्दर को पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठाया था, उस वजह से अभय को सावरी दिखाई नहीं दे रही थी। ऊपर से सावरी से वह चद्दर सही तरह से फोल्ड भी नहीं हो रही थी। उसको यूं चादर फोल्ड करते देख एक पल के लिए अभय के चेहरे पर फ्रस्ट्रेशन साफ दिखाई दे रही थी, क्योंकि वह सावरी को पूरी तरह से देखना चाहता था।

लेकिन सावरी उस चद्दर से उलझी हुई थी, जिस वजह से उसे वह साफ दिखाई नहीं दे रही थी। लेकिन कुछ देर अभय ने खुद को कंट्रोल किया और अपने हाथों में सिगरेट बॉक्स लिया और सिगरेट को अपने होठों मैं लगाते हुए अपनी फ्रस्ट्रेशन को दूर करने की कोशिश कर रहा था। वही सावरी, जो की लगातार उस ब्लैंकेट को समेटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उससे ब्लैंकेट फोल्ड नहीं हो रही थी। तभी अभय अपनी जगह से खड़ा हुआ और उसने अपने कदम सावरी की तरफ बढ़ा दिए।

वही सावरी, जो कि अपने ही ध्यान ब्लैंकेट को समेटने में लगी हुई थी, जैसे ही अभय उसके पास आकर खड़ा हुआ, उसका बदन पूरी तरह से कांप उठा। उसको यूं कांपता हुआ देखकर अभय की नजरे उस पर और भी गहरी हो गई। अगले ही पल, उसने उसके हाथ से ब्लैंकेट छीनी और बेड के दूसरी तरफ देखते हुए उसे ज़ोर से बेड पर धक्का दिया।

वह उसकी तरफ में देखते हुए अपनी डोमिनेटिंग वॉइस में बोला, "अब इससे ज्यादा कंट्रोल मै नहीं कर पाऊंगा।" इतना कहते हुए उसने एक ही झटके से अपनी शर्ट के बटन तोड़ते हुए अपने बदन से अपनी शर्ट को अलग कर दिया।

यह चीज देख कर सावरी की सांस उसकी गले में अटक गई।

To be continue..

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