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Shikha vishisht

इटली,

Ek private Villa,

जिसके एक लग्जरियस रूम में एक लड़की किंग साइज सोफे पर लेटी हुई थी। उस लड़की का सिर पूरी तरह से नीचे की तरफ था, जिस वजह से उसके बाल पूरी तरह से जमीन को छू रहे थे। इस वक्त उस लड़की ने ब्लैक कलर की एक मिडी ड्रेस पहनी हुई थी, जोकि उसकी थाई तक आ रही थी। उस ड्रेस में से उसकी पैंटी भी नीचे से साफ छलक रही थी। ऊपर से उस ड्रेस का गला इतना ज्यादा डीप था कि उसकी क्लीवेज पूरी तरह से ऊपर की तरफ उभर रही थी। जिस तरह से उसने अपना सिर नीचे की तरफ लटकाया हुआ था, उल्टे लटके हुए ही उस लड़की के हाथ में एक वाइन की बोतल थी। उस वाइन की बोतल को उसने जमीन पर रखा हुआ था और उसका एक हाथ भी नीचे जमीन पर ही था।

उस लड़की को आंखों में बेइंतहा आंसू थे। बहुत ज्यादा खूबसूरत काली आंखें, उसकी दाहिनी आंख के ऊपर आइब्रो के नीचे बिल्कुल नोज लाइन के पास एक छोटा सा तिल ओर भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था। ऊपर से उसके वह पतले होंठ, वह लड़की हद से ज्यादा खूबसूरत थी। उसके ऊपर से लंबे घने बाल उसे और भी ज्यादा खूबसूरत बना रहे थे। उसके बाल इतने ज्यादा लंबे थे कि नीचे जमीन पर बिखरने की बजाय पूरी तरह से लेटे हुए थे।

ऊपर से उसकी आंखों में छाई हुई उदासी उसे एक अलग ही मोड़ दे रही थी। ऊपर से उसका गोरा रंग, वह लड़की जहर लग रही थी। यह लड़की है जाने-माने पॉलीटिशियन आदित्य विशिष्ट की बेटी, शिखा वशिष्ठ। शिखा दिखने में जितनी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी, उतना ही ज्यादा उसके अंदर दर्द भरा हुआ इस वक्त लग रहा था। उसने अब वह वाइन की बोतल अपने होठों से लगाई और उठकर बैठ गई।

उठ कर बैठते ही उसने उस बोतल को साइड टेबल पर रखा और अपनी जगह पर खड़ी होकर अपनी मिडी ड्रेस को अपने कंधों से सरकाकर नीचे की तरफ फेंक दिया। अगले ही पल उसने जो नीचे पैंटी पहनी हुई थी, वह भी उतार कर जमीन पर फेंक दी। अब वह पूरी तरह से बेलीबस थी, ब्रा तो उसने पहले ही नहीं पहनी हुई थी। वह रूम इतना ज्यादा लग्जरियस था कि सामने शीशे लगे हुए थे। शीशो के बीच में ही शॉवर लगा हुआ था। वह रूम एक अलग ही एंटीरियर का बना हुआ था। शिखा अब सामने शॉवर के नीचे जाकर खड़ी हो गई। जैसे ही शॉवर के नीचे जाकर खड़ी हुई, उसने अपनी आंखें कस के बंद कर ली।

उसकी आंखों के सामने कुछ हल्की झलकियां घूमने लगी। एक औरत अपने ऊपर तेल छिड़क रही थी और एक बच्ची उसके पल्लू को खींचते हुए जोर-जोर से चिल्ला रही है, "मां मां, मां, क्या कर रही हैं आप मां!" लेकिन उस औरत को कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा था। तभी वहां पर एक शख्स आया। उस औरत, जो अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क रही थी, उसका हाथ पकड़ते हुए उसके हाथ से पेट्रोल की बोतल छीनकर साइड पर रखते हुए उसने एक थप्पड़ वह उस औरत के गाल पर लगाते हुए बोला,

"सेक्स मेरी जरूरत है, समझी तुम। तुम मुझे रोक नहीं सकती। मैं किसी के साथ मर्जी इंटिमेट हूं, तुम्हें उससे क्या? तुम्हें तो हर महीने अपने पैसे मिल जाते हैं ना, तो अपना मुंह बंद रखो।" तभी वह औरत चिल्ला कर बोली, "पैसा ही सब कुछ नहीं होता है। एक पत्नी का हक भी जरूरी होता है।" तभी वह शख्स गुस्से से कांपते हुए उसके बाल पकड़ते हुए बोला, "तुम्हें जो करना है, करो। लेकिन एक पत्नी का हक मुझसे मत मांगो, समझी तुम। मैंने तुमसे जबरदस्ती शादी नहीं की थी। तुमने ही मुझसे प्यार किया था और मेरे मां-बाप के पास रिश्ता लेकर आई थी। अब मैं तुमसे प्यार नहीं करता, वह सिर्फ एक जरूरत थी, जो तुमने पुरी की और मैंने भी पूरी कर ली। अब मैं किसी और को पसंद करता हूं।" इतना कहकर उस शख्स ने उसके बाल छोड़ें, तभी एक लड़की अंदर की तरफ आई।

वह लड़की उस शख्स के पास आकर खड़ी हुई और बोली, "क्या हुआ डार्लिंग, इस औरत की तो आदत ही बन गई है हम दोनों के बीच आने की। मरने दो ना इसे।" उसकी बात पर वह आदमी उसके गाल पर हाथ रखते हुए बोला, "डोंट वरी डार्लिंग, इसके ड्रामा ही है, कुछ नहीं होगा। कितनी देर ड्रामा करेंगी, अपने आप ठीक हो जाएगी।" इतना कहकर उसने बड़े प्यार से उसके गाल को सहलाया। अगले ही पल, उस आदमी ने उसकी कमर को पकड़ कर अपने करीब खींचा और उसके होठों को चूमने लगा। वह औरत, जो अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क बैठी थी, उसकी आंखों में आंसू और भी तेजी से बहने लगे। उसके पास जो बच्ची थी, उसने उसकी आंखों पर जल्दी से हाथ रखा और उसका चेहरा दूसरी तरफ घुमा दिया।

वह गुस्से से कांपते हुए बोली, "आपको शर्म नहीं आती, अपनी ही बच्ची के सामने।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी उस शख्स ने एक और तमाचा उसके गाल पर जड़ते हुए कहा, "मैंने नहीं कहा था इसे जन्म देने के लिए, तुमने खुद से जन्म दिया है। क्या पता, यह मेरी है भी या नहीं।" उसने इतना ही कहा था कि उस औरत ने भी उस शख्स पर हाथ उठाते हुए कहा, "आपके जैसी घटिया सोच किसकी होगी, मिस्टर विशिष्ट।" यह शख्स थे, शिखा विशिष्ट के पिता आदित्य वशिष्ठ। जैसे ही शिखा की मॉम आराध्या ने आदित्य के चेहरे पर थप्पड़ जड़ा, आदित्य का चेहरा गुस्से से कांपने लगा। अगले ही पल, उसने अपने हाथों में माचिस ली। अगले ही पल, जैसे ही उसने माचिस को जलाया, तो शिखा की मॉम आराध्या ने शिखा को दूर धक्का दे दिया।

जैसे ही आराध्या ने शिखा को दूर धक्का दिया, शिखा का सिर सामने टेबल पर लगा और पूरी तरह से मुड़ गया। शिखा जमीन पर गिर पड़ी। शिखा बहुत ज्यादा छोटी थी तब। तभी आदित्य ने आराध्या जी को आग लगा दिया। अगले ही पल, आराध्या जी आग की लपटों में जलने लगी। वहीं जमीन पर लेटी हुई शिखा, जो की बिल्कुल बच्ची थी, वह बस अपनी मां को जलते हुए देखकर चिल्ला रही थी। लेकिन उठ नहीं पा रही थी, क्योंकि उसके सिर पर और पैर पर चोट लगी थी।

Present time,

शिखा, जो इस वक्त शॉवर के नीचे खड़ी थी, उसने अब अपनी आंखें खोली। इस वक्त उसका चेहरा एक्सप्रेशन लैस था। उसके चेहरे पर इस वक्त कोई भाव नहीं थे। अब उसने एक गहरी सांस ली और शॉवर बंद कर बाहर की तरफ आई। जैसे ही शिखा बाहर की तरफ आई कि तभी उसका फोन बजने लगा। अपने फोन को बजता हुआ देखकर शिखा ने अपने फोन की तरफ देखा, जिस पर उसकी फ्रेंड वंशिका का कॉल आ रहा था। वंशिका का कॉल आते देख शिखा सामने सोफे पर जाकर बैठी और पास में पड़ा हुआ सिगरेट का बॉक्स उठाया और उसमें सिगरेट उठाकर अपने होठों में दबाकर लंबे कश भरते हुए उसने अब फोन उठाया। दूसरी तरफ से चीखती हुई आवाज आई।

"शिखा यार, कहां पर है तू सुबह से, कॉल लगा रही हूं, तो कॉल भी नहीं उठा रही है। तुझे पता है, मैं आज अपनी फर्स्ट डेट पर जा रही हूं। मैंने कहा था ना कि तू मुझे वहां तक कंपनी देगी।" दूसरी तरफ शिखा ने अब गहरी सांस ली और अपनी कोल्ड वॉइस में बोली, "मैंने भी तुझे कहा था कि मैं ऐसी फुद्दू फड़क जगह पर नहीं जाती। और रही बात पहली डेट की, तुझे पता है ना कि मुझे कितनी नफरत है डेट और लड़कों से।"

शिखा की बात पर अब वंशिका ने एक गहरी सांस ली और उसके आगे कुछ बोलने को हुई कि तभी शिखा सर्द आवाज में बोली, "तुम जाना चाहती हो, तो जाओ। लेकिन प्लीज, मुझे फोर्स मत करो।" इतना कह कर शिखा ने दोबारा से सिगरेट का कश भरा। वो अभी भी पूरी तरह से नेक्ड थी। तभी वंशिका बोली, "यार हर एक लड़का एक जैसा नहीं होता, तो क्यों।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी शिखा, जो कि सिगरेट पी रही थी, उसका हाथ वहीं पर रुक गया। उसकी आंखें पूरी तरह से सर्द हो गई।

वह दांत पीसते हुए बोली, "सारे लड़के एक जैसे होते है। इन्हें सिर्फ अपनी लस्ट दिखाई देती है। इन्हें सिर्फ अपने dick की आग ठंडी करनी होती है। every guy need only girls fucking hole." इतना कहते हुए शिखा का चेहरा पूरी तरह से कांप रहा था। दूसरी तरफ से वंशिका ने अब गहरी सांस ली और अगले ही पल गहरी आवाज में बोली, "बस कर मेरी बहन, बस कर, अभी 18 साल की है। लेकिन ऐसा लग रहा है, तूने पूरी दुनिया देख ली हो।"

उसकी बात पर शिखा ने कोई जवाब नहीं दिया। बस चुपचाप अपने होठों से सिगरेट लगाकर सिगरेट पीने लगी। तभी वंशिका की गहरी आवाज एक बार फिर से शिखा के कानों में पड़ी। वंशिका गुस्से में बोली, "तू फिर से सिगरेट पी रही है ना, पागल हो गई है शिखू, तेरा दिमाग खराब हो गया है? जब भी मुझे मिलती है, एक ही बात बोलती हूं कि सिगरेट छोड़ दे। नहीं अच्छी है वह, वह चीज बर्बाद कर देगी तुझे।"

उसकी बात पर शिखा व्यंग्य से हंसते हुए बोली, "बचा क्या है जिंदगी में बर्बाद होने के लिए, पहले ही बर्बाद हूं।" इतना कहते हुए शिखा ने एक बार फिर से अपने होठों में सिगरेट फसाई और सिगरेट के लंबे कश भरने लगी। तभी वंशिका चीखते हुए बोली, "देख शिखू, मैं तुझे दोबारा बोल रही हूं, सिगरेट छोड़ दें।अच्छी चीज नहीं है।" वंशिका बोलती रह गई कि तभी शिखा ने आगे से कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया।

शिखा अब अपनी जगह पर से उठी और वार्डरोब की तरफ बढ़ गई। कुछ ही देर में वह ब्लैक कलर की जैकेट और ब्लैक कलर की जींस अपने बदन पर पहन कर बाहर की तरफ आई। कुछ ही देर में शिखा अपने विला से निकल कर बाहर पार्किंग में आई। वहां पर उसकी बुलेट खड़ी थी। वह अब बुलेट पर बैठकर वहां से निकल गई। इस वक्त उसने अपने चेहरे पर हेलमेट डाल रखा था और इस वक्त उसकी बाइक की स्पीड हद से ज्यादा बड़ी हुई थी। वह तेजी से सड़कों पर ड्राइव कर रही थी। उसकी आंखों के सामने एक बार फिर से अपनी मॉम आराध्या जी का चेहरा घूमने लगा। आराध्या जी की बात याद करते हुए उसका चेहरा और आंखें दोनों लाल होने लगी थी।

लेकिन फिर भी वह तेजी से बुलेट चलाते हुए तेजी से सड़कों पर जा रही थी। तभी उसकी बाइक के सामने एक गाड़ी आकर रुकी। जैसे ही शिखा की बाइक के सामने गाड़ी आकर रुकी, शिखा ने एकदम से ब्रेक लगाए। जिस वजह से बड़ी मुश्किल से उसने अपनी बाइक को संभाला। लेकिन जितनी उसकी स्पीड थी, शिखा का बाइक को संभाल पाना बहुत ज्यादा मुश्किल हो गया था। लेकिन फिर भी उसने अपनी बाइक को संभाल लिया था। जैसे ही उसने गाड़ी की तरफ सामने देखा, तो शिखा की नजरे उस पर सर्द हो गई। एक ब्लैक कलर की लैंबॉर्गिनी कार, जोकि उसकी बुलेट के आगे आकर रुकी थी। तभी उस कार में से एक लड़का बाहर निकला और उसने अपने कदम शिखा की तरफ बढ़ा दिए।

जैसे ही वह लड़का शिखा की बाइक के आगे आकर रूका, शिखा, जिसके चेहरे पर हेलमेट था, अब उसने अपना चेहरे पर से हेलमेट हटाया। वह उस लड़के को सर्द नजरों से देखने लगी, लेकिन उसने कहा कुछ भी नहीं।

वही वह लड़का, जो जाने माने बिजनेसमैन का बेटा रोहित अग्रवाल था। उसके पास आया और बड़ी गहरी नजरों से उसे देखते हुए बोला, "क्या बात है, आज तो आग सच में आग बनकर निकली है।" रोहित की बात पर शिखा ने कोई जवाब नहीं दिया। वह सपने हाथों में हाथ डाले खड़े हुए एक्सप्रेशंस चेहरे से रोहित को देख रही थी। तभी रोहित उसके पास आकर खड़ा हुआ और उसने अपना हाथ आगे की तरफ बढ़ाया। वह शिखा के गाल पर रखने को हुआ कि तभी शिखा ने उसका हाथ पकड़ कर हल्का सा मरोड़ दिया। जिससे रोहित की आह निकल गई और आंखें बड़ी हो गई। वह दांत पीसते हुए बोला, "यह क्या बदतमीजी है। मैं तो तुम्हें यहां प्रपोज करने।" उसने इतना ही कहा था कि तभी शिखा व्यंग्य से हंसते हुए बोली, "badtameezi hmm,

मुझे बदतमीज बताने वाले पहले खुद की बदतमीजी तो देख लो। किसी की इजाजत के बिना छुना कहां की समझदारी है। इतनी लड़कियों को अपना lust का शिकार बनाने के बाद अब तुम चाहते हो मुझे अपनी lust का शिकार बनाना।" शिखा की बात पर रोहित उसकी तरफ बस देखता ही रह गया। वही शिखा ने अब उसका हाथ झटका और उसकी तरफ उंगली पॉइंट करते हुए बोली, "आइंदा मेरे रास्ते में कभी मत आना, एक बात याद रखना, शिखा वशिष्ठ को लड़कों से ही नफरत है।

और तुम जैसे लड़कों पर तो शिखा वशिष्ठ थूकना भी पसंद नहीं करती।" इतना कहते हुए शिखा का चेहरा बहुत ज्यादा सख्त था। लेकिन शिखा की बातें सुनकर रोहित का चेहरा अब गुस्से से लाल होने लगा था। शिखा ने अब अपनी बाइक स्टार्ट की और साइड से होते हुए वहां से तेजी से निकल गई। वहीं रोहित अब गुस्से से दांत पीसते हुए बोला, "सही कहा तुमने, lust तो मेरे अंदर बहुत है। जो मैं तुमसे पूरी भी करुंगा।" इतना कहते हुए रोहित के चेहरे पर बहुत ज्यादा गुस्सा झलक रहा था।

वहीं दूसरी तरफ,

शिखा की बाइक एक बार के आगे आकर रुकी। देखते ही देखते शिखा अपनी बाइक से उतरी और बार के अंदर चली गई। अभी सुबह के सिर्फ साढ़े 9 ही बजे थे, लेकिन शिखा को इस चीज से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। अब वह अंदर की तरफ आई और बार काउंटर पर जाकर बैठ गई। अभी तक बार सही तरह से ओपन भी नहीं हुआ था। लेकिन शिखा को देखकर वह बार काउंटर जल्दी से शिखा की फेवरेट वाइन लेकर आ चुका था। क्योंकि वह जानता था कि शिखा, बार सही से खुलता भी नहीं था कि पहुंच जाती थी।

वहीं दूसरी तरफ,

एक आईलैंड पर, एक लग्जरियस होटल में,

एक प्राइवेट रूम में एक शख्स लग्जरियस रूम की बालकनी में खड़ा सिगरेट पी रहा था। उसकी गहरी नजरे इस वक्त समुद्र की तरफ थी। वह लड़का दिखने में काफी ज्यादा हैंडसम था। उसके काले घने बाल बेहद मेसी थे और हल्की बियर्ड, कान में एक डायमंड स्टड और बॉडी के मसल्स तो कोई भी लकड़ी देख कर जैसे पागल ही हो जाए। उस लड़के का राइट हैंड पूरी तरह से एक टैटू से कवर था, जो की एक टाइगर का था। वह टाइगर का टैटू उसके हाथ पर तो फैला ही हुआ था, लेकिन पीछे आधे कंधे पर भी फैला हुआ था, जोकि उस लड़के को और भी ज्यादा हैंडसम बना रहा था। इस वक्त उस लड़के ने सिर्फ एक लोअर पहना हुआ था।

उसकी डार्क ब्राउन आइज तो उसे और भी ज्यादा हैंडसम बनाने पर मजबूर कर रही थी। लेकिन उस लड़के की आंखों के सामने एक लड़की का चेहरा घूम रहा था और वह लड़की दिखने में बहुत ज्यादा कातिलाना थी। उस लड़की को याद करते हुए इस वक्त उसके होठों के कोने हल्के से ऊपर की तरफ उठे हुए थे।

To be continue.....

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