
S industries,
काजल इस वक्त AS के प्राइवेट रूम के बाथरूम में बैठी फूट फूट कर रो रही थी। उसको ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने उसके शरीर में से उसका पूरा खून निचोड़ लिया हो। इस वक्त उसका पूरा चेहरा सफेद पड़ चुका था। उसे रोते हुए तकरीबन 2 घंटे से ज्यादा हो चुका था, लेकिन वह अपनी जगह से हिल तक नहीं रही थी।
दूसरी तरफ बाहर रूम में,
AS आराम से बैठा सोफे पर सिगरेट पी रहा था। उसके सामने ही एक वाइन की बोतल खुली पड़ी थी और साथ में कई सारी बोतल भी पड़ी थी, जो कि खाली हुई पड़ी थी। जो कि उसी ने ही खत्म की थी। लेकिन फिलहाल के लिए सिगरेट उसके होंठों में दबी हुई थी और उसकी गहरी नजरे बाथरूम के दरवाजे पर टिकी हुई थी। इस वक्त काजल की रोने की आवाज उसके कानों में पड़ रही थी, जो कि उसे हद से ज्यादा राहत पहुंचा रही थी। वह सिगरेट के लंबे कश भरते हुए ऊपर की तरफ छोड़ रहा था। इस वक्त उसका चेहरा एक डेविल की तरह वाइब दे रहा था।
इस वक्त रूम में काफी अंधेरा था। जिस वजह से AS का चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था। धूप की हल्की रोशनी, जो की पर्दों से छानकर अंदर की तरफ आ रही थी, वह भी बहुत ज्यादा कम थी। पर्दे काले होने की वजह से वह रोशनी भी नाम मात्र की लग रही थी। इस वक्त सुबह के 12 बज चुके थे। AS जोकि गहरी कश भर रहा था, वह सिगरेट उसके सीने को भले ही जला रही थी, लेकिन उसके कानों में एक अजीब सा सुकून पहुंच रहा था या फिर वह खुद पहुंच रहा था, यह भी कहा जा सकता था।
तकरीबन 1 घंटे बाद,
काजल बाथरूम के दरवाजे से सट कर अपनी सूनी आंखों से सामने की तरफ देख रही थी। रो-रो कर उसका हाल बेहाल हो चुका था और आंखें सूज चुकी थी। वह अपनी जगह से खड़ी हुई। उसने वही कपड़े पहने और बाहर की तरफ आई। बाहर अभी भी AS सोफे पर बैठा हुआ था और उसकी गहरी नजरे अब काजल पर पड़ी, जो बाथरूम से बाहर निकल रही थी। काजल को साफ कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। रूम में इतना अंधेरा था कि पास में खड़े हुए इंसान का चेहरा भी साफ नजर ना आए। वही AS तो बैठा ही बहुत ज्यादा अंधेरी जगह पर था, तो उसका चेहरा तो कैसे ही काजल को नजर आता।
लेकिन उसे वहां पर किसी के बैठे होने का एहसास तो हो गया था। जैसे ही उसे यह एहसास हुआ, उसके हाथ पैर ठंडे पड़ने शुरू हो गए। पहले ही वह बहुत ज्यादा रो चुकी थी, लेकिन अब उसे हद से ज्यादा डर लग रहा था। वह जल्दी से अपने कदम दूसरी तरफ लेते हुए सामने दरवाजे तक पहुंचने को हुई कि तभी उस शख्स ने यानी कि AS ने उसके हाथ को पकड़ा और उसकी कलाई को मोड़कर उसकी पीठ पर लगा दिया। अब काजल की पीठ AS के सीने से लगी हुई थी।
जैसे ही काजल की पीठ AS के सीने से लगी, तो उसकी आंखें बड़ी हो गई। उसे एक जानी पहचानी सी खुशबू अपने पास महसूस हुई और उस खुशबू को वह अपने अंदर तक समा चुकी थी, तो वह कैसे ही उस खुशबू को भूल सकती थी। इस खुशबू को उसने अपने अंदर समाया था, महसूस किया था और इस खुशबू में वह हर बार पागल थी। वह इस खुशबू के पीछे तो पागल थी, तो कैसे नहीं पहचानती कि यह कौन था। अगले ही पल उसने कांपते हुए होठों से जो कहा, उसे सुनकर AS की आंखें बड़ी हो गई।
काजल कांपते हुए होठों से बोली, "डेविल....."
वहीं दूसरी तरफ,,
Kapoor industries,,
Dhaanishk इस वक्त अपने केबिन में बैठा हुआ था और अपनी लाल आंखों से सामने ग्लास विंडो की तरफ देख रहा था। इस वक्त उसकी आंखें हद से ज्यादा लाल थी। तभी उसके केबिन का दरवाजा खुला और अब एक बार फिर से उसके जबड़े पूरी तरह से कस गए। वह गुस्से से कांपते हुए बोला, "how dare you, तुम फिर से मेरे पीछे आ गई। तुम्हें शर्म नहीं आती, इतनी तुम्हारी बेज्जती हो रही है। लेकिन तुम्हें तो जैसे।" अभी वह बोल ही रह रहा था कि तभी सौम्या, जो की केबिन के अंदर आ चुकी थी, अब वह सीधा ही उसकी गोद में जाकर बैठ गई। यह चीज देखकर Dhaanishk हैरानी से सौम्या के चेहरे की तरफ देखने लगा।
वही सौम्या, अब उसके शर्ट के बटन को अपने हाथों में पकड़कर अपनी उंगलियों से खेलते हुए बोली, "बस कीजिए ना मिस्टर कपूर, कितना तड़पाएंगे, कितना रुलाएंगे, कितना जलाएंगे मुझे अपनी आग में?" उसकी बात पर Dhaanishk व्यंग्य से हंसा और बोला, "मैंने तो अभी आग लगाई ही नहीं मिस सौम्या शेखावत और तुम जल भी गई। तुमने तो मुझे जलाकर खाक कर दिया, उसका क्या करूं? मै खाक हो गया। जो इंसान जिंदा ही ना हो, तुम उसमें क्या ढूंढ रही हो?" इतना कहते हुए उसकी आवाज में जो तड़प थी, उसे सुनकर सौम्या का कलेजा पूरी तरह से जल उठा था।
अब उसकी आंखों में एक बार फिर से नमी उतरने लगी। वह रोते हुए बोली, "बस कीजिए ना मिस्टर कपूर, आखिर कब तक यूं ही खुद को सजा देते रहेंगे।" तभी Dhaanishk एक्सप्रेशन लैस होकर बोला, "जब तक मुझे यह एहसास नहीं हो जाता कि तुम कभी मेरी थी ही नहीं।" उसकी बात सुनकर सौम्या पूरी तरह से तड़प उठी। उसने Dhaanishk के चेहरे को अपने हाथों में थमा और उसकी आंखों में देखते हुए बोली, "क्या इतनी नफरत हो गई है मुझसे?"
उसकी बात पर एक बार फिर से Dhaanishk व्यंग्य से हंसा और बोला, "यही तो तकलीफ है सौम्या शेखावत कि मैं तुमसे नफरत ही तो नहीं कर पाता और ना ही शायद कभी कर पाऊंगा। लेकिन अफसोस की बात यह है, मैं जिंदा भी कहां बचा हूं तुमसे नफरत करने के लिए। नफरत तो वह करते है, जो जिंदा होते हैं। मैं तो मर चुका हूं।" उसकी बात पर सौम्या उसके गालों को अपने हाथों में भरकर लगभग से घुटते हुए बोली, "बस कीजिए, चुप हो जाइए मिस्टर कपूर, चुप हो जाइए। प्लीज, भगवान के लिए ऐसी बातें मत कीजिए।"
वही Dhaanishk अब अपनी जगह पर से खड़ा हुआ, जिस वजह से सौम्या, जो कि उसकी गोद में बैठी हुई थी, वह अगले ही पल लड़खड़ा कर पीछे की तरफ हो गई। अगर वह पीछे की तरफ नहीं होती, तो संभाल नहीं पाती। हो सकता था कि वह गिर भी जाती। सौम्या अब Dhaanishk को देख रही थी। वही Dhaanishk अपनी जगह से खड़ा हुआ और बार काउंटर में जाकर एक और बोतल उठाकर अपने ग्लास में डालने लगा। तभी सौम्या उसके हाथ से बोतल लेते हुए बोली, "बस कीजिए मिस्टर कपूर, कितना पियेंगे आप?" उसकी बात पर Dhaanishk ने उसके हाथ को झटकते हुए कहा,
"जब तक मेरे कलेजे को ठंडक नहीं मिल जाती, तब तक पियूंगा।" इतना कह कर अब उसने बोतल को गिलास में नहीं डाला, बल्कि बोतल ही होठों से लगा ली। सौम्या को अपनी लाल आंखों से देखते हुए गटागट वह पूरी वाइन की बोतल अपने अंदर उड़ाने लगा। Dhaanishk को यूं बोतल अब पूरी तरह से अपने अंदर उड़ेलता देखकर सौम्या का दिल तड़प रहा था। वह रोते हुए बोली, "किस बात की सजा दे रहे हैं आप खुद को, जबकि गलती तो मेरी थी और मेरी है। मैं मानती हूं, मुझसे गलती हो गई। मुझे एक चांस तो देकर देखिए, मिस्टर कपूर।"
तभी Dhaanishk ने अपने हाथ में पकड़ी हुई वाइन को जमीन पर फेंक दिया, जिससे चारों तरफ कांच उस जमीन पर फैल गया। अब वह सौम्या की तरफ देखते हुए बोला, "दफा हो जाओ, मेरी जिंदगी से निकल जाओ। हाथ जोड़ता हूं मैं तुम्हारे, तुम कहो तो पैर पड़ लूं।" Dhaanishk की बात सुनकर एक पल के लिए सौम्या को ऐसा लगा, जैसे कि किसी ने उसके दिल पर खंजर चला दिया हो। उसके आंसू और भी तेजी से बहने लगे। वह अपने होठों पर हाथ रखते हुए पीछे की तरफ होने लगी। आज उसे ऐसा लग रहा था कि सच में उसने Dhaanishk को को जैसे खो दिया हो।
तभी सौम्या तड़प कर बोली, "वह अकेला आपका बच्चा नहीं था, मेरा भी बच्चा था, मिस्टर कपूर।" तभी Dhaanishk गरज कर बोला, "वह सिर्फ मेरा बच्चा था, तुम्हें उसकी कोई जरूरत नहीं थी। तुम्हें सिर्फ रूद्र।" उसने इतना ही कहा था कि तभी सौम्या उसके पास आकर उसे कॉलर से पकड़ते हुए झकझोर कर बोली, "मुझे उससे कोई देना देना नहीं था मिस्टर कपूर, वह सिर्फ मेरा बेस्ट फ्रेंड...।"
सौम्या ने इतना ही कहा था कि Dhaanishk उसे गर्दन से पकड़ते हुए पीछे की तरफ लेकर गया और दीवार से लगाकर उसका गला कसकर पकड़ते हुए बोला, "अगर चाहती हो ना कि मैं जिंदा रहूं, तो चली जाओ यहां से। नहीं तो मैं खुद को कुछ कर दूंगा। एक बात याद रखना, मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना।" इतना कहकर उसने सौम्या का गला छोड़ दिया और कांपते हुए एक बार फिर से बार काउंटर पर आया और वाइन पीने लगा।
Dhaanishk की बात सुनकर सौम्या का दिल तो जैसे धक सा रह गया था। उसके हाथ पूरी तरह से नीचे की तरफ लटक चुके थे और आंखें सुन्न हो चुकी थी। आज उसे अपनी गलती का एहसास हो रहा था कि उसने अपने हाथों से अपनी दुनिया उजाड़ ली थी । सौम्या अब अपने कदम बाहर की तरफ बढ़ाने लगी। कुछ ही देर में वह दरवाजे के पास पहुंची, तभी Dhaanishk पीछे से उसे रोकते हुए बोला,
"1 मिनट मेरी बात सुनो।" जैसे ही Dhaanishk ने उसको आवाज लगाई, एक पल के लिए सौम्या का दिल धड़क उठा। उसे लगा, शायद कुछ उम्मीद बाकी है। लेकिन जैसे ही Dhaanishk ने अपनी बात कही, उसका दिल पूरी तरह से टूट गया। Dhaanishk इशारा करते हुए बोला, "वही साइड काउंटर में तलाक के पेपर है, उन पर साइन करती जाओ।
और एक बात और, मेरी परसों शादी है, इनविटेशन सबसे पहले तुम्हें दे रहा हूं, आना जरूर।" उसकी बात सुनकर सौम्या के पैरों तले से जैसे जमीन खिसक चुकी थी। एक पल के लिए उसके पैर पूरी तरह से लड़खड़ा गए। वह पीछे की तरफ गिरने को हुई कि तभी Dhaanishk एक्सप्रेशन लेस होकर बोला, "संभाल कर, सौम्या शेखावत, हर बार मैं संभालने नहीं आऊंगा। आपको खुद संभालना होगा।" इतना कहते हुए Dhaanishk का चेहरा बहुत ज्यादा सख्त था। सौम्या अब तड़पकर नम आंखों से उसकी तरफ देखते हुए बोली, "आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते, मिस्टर कपूर।
Please please, forgive me once, only that time is forgive me."
इतना कहते हुए लगभग से वह Dhaanishk के आगे गिड़गिड़ा रही थी। अब इतना कहते कहते वह पूरी तरह से घुटनों के बल आ चुकी थी। वही Dhaanishk, जिस तरह से सौम्या उसके पैरों में आकर गिर रही थी, उसकी आंखें हद से ज्यादा लाल होने लगी थी। कोई भी सौम्या को इस तरह से गिड़गिड़ाते हुए देखता, तो शायद उसका कलेजा फट जाता। लेकिन Dhaanishk ने तो आज खुद को जैसे पत्थर ही कर लिया। सौम्या की तड़प तो जैसे उसे आज दिखाई दे ही नहीं रही थी या फिर वह देखना चाहता ही नहीं था।
Dhaanishk ने अब उसकी तरफ से अपना मुंह फेरते हुए कहा, "मिस शेखावत, प्लीज साइन कीजिए और जाइए यहां से।" Dhaanishk का यू दोबारा से सौम्या को मिस शेखावत कहना उसे जैसे अंदर तक जला रहा था। सौम्या एक बार अपनी जगह पर खड़ी हुई और अगले ही पल पीछे से तेजी से Dhaanishk को अपनी बाहों में पीछे से भर लिया।
वह रोते हुए बोली, "मैंने भी अपना बच्चा खोया है मिस्टर कपूर, आपने अकेले ने अपना बच्चा नहीं खोया है। वह मेरा भी बच्चा था। प्लीज, एक मौका, सिर्फ एक....." तभी Dhaanishk सख्त आवाज में बोला, "वह तुम्हारा बच्चा नहीं था। और सेकेंड्ली, प्लीज साइन कीजिए और जाइए यहां से मिस शेखावत, आज से हमारा कोई रिश्ता नहीं। भूल जाइए कि कभी आपकी जिंदगी में Dhaanishk कपूर नाम का इंसान भी आया था।"
तभी सौम्या तड़पकर बोली, "मैं सांस लेना भूल सकती हूं, लेकिन आपको नहीं...."
सौम्या का इतना कहना था कि Dhaanishk का दिल तेजी से धड़क उठा। लेकिन उसने पलट कर सौम्या की तरफ नहीं देखा। उसने आज अपने दिल को पत्थर का नहीं, बल्कि अपने जज्बातों को भी पूरी तरह से काबू में रखा हुआ था। अब Dhaanishk सख्त आवाज में बोला, "भूल जाइए सांस लेना, लेकिन अब यह Dhaanishk कपूर सौम्या शेखावत का तो कभी हो ही नहीं सकता।"
Dhaanishk की बस इतनी सी बात ने ही जैसे सौम्या की जान ही उसके बदन से खींच ली।।
वहीं दूसरी तरफ,
राणा मेंशन में,
त्रियांशु और नेहा इस वक्त अकेले डाइनिंग टेबल पर बैठे खाना खा रहे थे। जहां त्रियांशु हेड चेयर पर बैठा था, वही नेहा उससे 5 चेयर छोड़कर बैठी हुई थी। उन दोनों के बीच काफी ज्यादा फासला था। त्रियांशु की सर्द नजरे इस वक्त नेहा
पर ही थी और गुस्सा उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था।
To be continue...







Write a comment ...