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Dil ki tadap

Pathani house,,

अभी-अभी कनिका हॉल से असुर के पीछे आई थी, क्योंकि उसे सीसी से जलन महसूस हो रही थी। पता नहीं क्यों, ना चाहते हुए ही उसकी आंखों में बार-बार नमी सी तैर रही थी। अभी वह असुर के कमरे के बाहर आकर खड़ी ही हुई थी। अब उसने असुर के कमरे का दरवाजा खोला और सामने का नजारा देख कर कनिका का मुंह खुला का खुला रह गया और उसकी आंखें बड़ी हो गई।

क्योंकि इस वक्त असुर बेड पर पूरी तरह से नेक्ड बैठा हुआ था। उसने अपने एक हाथ बेड रेस्ट पर रखा हुआ था और दूसरे हाथ से अपनी लोअर बॉडी को सहला रहा था। जिस तरह से वह अपने पैरों को फैला कर बैठ कर आराम से लोअर बॉडी को सहला रहा था, कनिका के रोंगटे खड़े हो रहे थे। उसे अपना गला सूखता हुआ महसूस हो रहा था। इस वक्त कनिका के हाथ में खाने की प्लेट थी।

कभी वह प्लेट की तरफ देख रही थी, तो कभी सामने बैठे असुर की तरफ। लेकिन अगले ही पल उसे होश आया कि वह दरवाजे को बीचों बीच खड़ी है और दरवाजा खुला है। यह चीज याद आते ही उसने पलट कर दरवाजा बंद किया और अपनी नजरों को झुका कर असुर के सामने खड़ी हो गई।

वही असुर अपनी डेविल वॉइस में बोला, "let's start baby." इतना कहते हुए उसकी आवाज बेहद सेडक्टिव थी, जिसे सुनकर कनिका के रोंगटे और भी तेजी से खड़े होने शुरू हो गए थे। उसका दिल इस वक्त तेजी से धड़क रहा था और उसकी सांसे गहरी होनी शुरू हो गई थी। उसका हाल देखकर असुर के चेहरे की डेविल स्माइल ओर भी लंबी हो चुकी थी। वह अब अपनी लॉलीपॉप को अंदर की तरफ दबाते हुए बोला, "hurry up baby I have no time."

उसकी बात सुनकर कनिका ने अपनी आंखें ऊपर की तरफ उठाई और एक बार फिर से असुर की तरफ देखते हुए लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "लेकिन आपकी शादी..." इतना कहते हुए उसकी आंखें नम हो चुकी थी। वह अपनी बात आगे कह भी नहीं पा रही थी। वही असुर की एक आईब्रो ऊपर की तरफ उठ चुकी थी। अब बेहद डोमिनेटिंग वॉइस में बोला, "लगता है, तुम चाहती हो कि मैं उसके पास जाऊं। ओके, फाइन, अगर तुम मेरी जरूरत पूरा नहीं करती हो, तो मुझे उसी के पास जाना होगा।" इतना कहकर वह अपनी जगह से खड़ा होने को हुआ कि तभी कनिका जल्दी से उसके पास आकर बोली, "मैंने ऐसा तो नहीं कहा।" उसकी बात पर असुर की एक आईब्रो एक बार फिर से ऊपर की तरफ उठ गई। वह गहरी नजरों से कनिका की तरफ देखने लगा। वही कनिका ने अपनी उंगलियां उलझाते हुए अपना चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ झुका लिया।

अब वह पूरी तरह से असुर के पैरों के पास बैठी और उसकी लोअर बॉडी पर झुकने लगी। यह देख असुर की नजरे उस पर और भी गहरी हो गई। अगले ही पल उसने उसके बालों को मुट्ठी में भरा और उसकी आंखों में झांकते हुए बोला, "बहुत जल्दी है लगता है तुम्हें।" उसकी बात सुनकर कनिका पूरी तरह से झेप गई। शर्म के मारे उसका पूरा चेहरा लाल पड़ गया। वह अपना चेहरा इधर-उधर करते हुए बोली, "नहीं, ऐसी बात तो नहीं है। वह आप ही..." इतना कहते हुए उसने अपना चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ झुका लिया था।

वही असुर ने अब उसके बालों को मुट्ठी में भरा और दोबारा से उसका चेहरा ऊपर की तरफ उठाते हुए अपना चेहरा बिल्कुल उसके करीब लेकर गया और अपनी गहरी नजरों से उसके चेहरे को देखने लगा। उसके चेहरे के हर एक नैन नक्श को बेहद ध्यान से देख रहा था। पहले माथा, फिर आंखें, फिर नाक और फिर होंठ, होंठों पर जाकर असुर की नजरे उसके होंठ पर ठहर गई। वह पतले सुर्ख लाल होंठ, जिनके नीचे छोटा सा तिल, उसका वह तिल देखकर असुर की नजरे उसके तिल पर ही ठहर गई।

दूसरी तरफ कनिका, जिसका चेहरा ऊपर की तरफ उठा था, उसका दिल इस वक्त जोरो जोरो से धड़क रहा था। वह अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "वो वो,,,,,,, क्या आप खाना....!"

इससे आगे वह कुछ बोलती कि उसकी आवाज उसके गले में अटक गई, क्योंकि असुर ने उसके होठों को अपने होठों में भर लिया था और passionately चूमने लगा। जैसे ही असुर ने उसके होठों को अपने होठों में भरा, अपने आप ही कनिका की आंखें बंद होने लगी। वह असुर के होठों की तपिश में खोने लगी। इस वक्त कनिका का दिल कर रहा था कि वह भी असुर को किस का रिप्लाई दे। लेकिन चाहते हुए भी वह ऐसा कर नहीं सकती थी, क्योंकि अगर दोबारा से असुर कोई ऐसी बात कह देता, तो कनिका एक बार फिर से जम जाती। वह यह चीज बिल्कुल नहीं चाहती थी। वही असुर अब लगातार उसके होठों को चूमे जा रहा था। चूमते हुए ही उसने कनिका का हाथ अपने हाथ में लिया और अपनी लोअर बॉडी पर रख दिया। जिससे कनिका का दिल धक्क सा रह गया, क्योंकि इस वक्त

असुर का बदन पूरी तरह से अकड़ चुका था। जिसे देखकर, महसूस कर कनिका ने अपनी आंखें खोली और दोनों की आंखें आपस में टकरा गई। कनिका की सांस अब और भी गहरी होने लगी थी। जिसका उफान उसके सीने में दिखाई दे रहा था। जिस वजह से उसका सीना असुर के सीने से टकरा रहा था। वही असुर अब अपनी जगह से खड़ा हुआ और अगले ही पल उसने कनिका को पलटा और तेजी से उसे बेड पर धक्का दे दिया। यह सब इतनी जल्दी हुआ था कि कनिका को संभलने तक का मौका नहीं मिला था।

अब कनिका पूरी तरह से बेड पर लेटी हुई थी। वही असुर अब पूरी तरह से उसके ऊपर झुका और अगले ही पल उसने उसकी साड़ी का पल्लू अपने हाथ से एक साइड कर दिया। जिससे उसका सीना असुर के सामने था। उसकी गहरी सांसों की वजह से जो ऊपर की तरफ उठ रहा था। उसे देखकर असुर को अपना बदन और भी ज्यादा अकड़ता हुआ महसूस हो रहा था। वही कनिका की हालत तो और भी ज्यादा बुरी होने लगी थी। वह खुद में ही सिमटने लगी थी।

वह अपनी गहरी चलती सांसों के साथ बोली, "मत कीजिए असुर बाबू, सीसी का दिल टूट जाएगा।" उसकी बात सुनकर असुर अब पूरी तरह से उसके ऊपर झुका और उसकी आंखों में देखते हुए बोला, "और तुम्हारा दिल नहीं टूटेगा क्या?" असुर की बात सुनकर कनिका की आंखों में नमी आ गई। उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा लिया, लेकिन उसने असुर की बात का कोई जवाब नहीं दिया। वही असुर ने अब उसके चेहरे पर दो उंगलियां रख अपनी तरफ घुमाया और डोमिनेटिंग वॉइस में बोला, "मैं तुमसे कुछ पूछ रहा हूं। क्या तुम्हारा दिल नहीं टूटेगा?" उसकी बात पर अब कनिका की आंखों में जो नमी आई थी, अब वह आंसुओं में तबदील हो चुकी थी।

उसकी नमी अब पूरी तरह से उसके गालों पर आ चुकी थी। वह बोलना चाहती थी कि उसे बहुत फर्क पड़ता है, लेकिन उसने अभी भी अपने मुंह से कोई शब्द नहीं निकाला था। इस वक्त उसका दिल बुरी तरह से तड़प रहा था। उसका दिल कर रहा था कि वह उसको चीख चीख कर बताएं कि वह उसे किस हद तक मोहब्बत करती है। लेकिन अफसोस, वह यह चीज बता नहीं सकती थी। जैसे कि उसे किसी चीज ने बांध रखा हो। वही असुर भी उसकी तड़प साफ महसूस कर रहा था, जो कि उसकी आंखों में दिखाई दे रही थी।

असुर की नजरे उस पर और भी ज्यादा गहरी हो गई। वह अब एक बार फिर से अपनी गहरी आवाज में बोला, "तो तुम मुझे नहीं बताओगी। ठीक है फाइन, मैं जा रहा हूं किसी के पास, अब वही मेरे शरीर की तड़प शांत करेगी, क्योंकि तुम्हें तो मेरी जरूरत है नहीं।" इतना कहकर वह अपनी जगह से उठने ही वाला था कि तभी कनिका उसे अपनी बाहों में भरते हुए बोली, "नहीं... प्लीज असुर बाबू, हमें छोड़कर मत जाइए।" वही असुर अब उसकी तरफ देखते हुए बोला, "मेरे जाने या ना जाने से तुम्हें फर्क पड़ता है?"

आखिरकार कनिका अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बोली, "बहुत फर्क पड़ता है असुर बाबू, बहुत फर्क पड़ता है। तड़प रही हूं आपके प्यार के लिए मैं, बहुत मोहब्बत है मुझे आपसे, इतनी की बता नहीं सकती। इतनी कि जाता नहीं सकती। अगर जताई...." इतना कहकर कनिका चुप हो गई लेकिन उसने आगे के शब्द अधूरे छोड़ दिए।

कनिका की चुप्पी ने वहां पर इस तरह की शांति कर दी थी कि असुर को वह शांति अपने सीने में अलग ही आग का एहसास दिला रही थी। लेकिन कनिका अब चुप हो चुकी थी। वही असुर अब उसे एक बार फिर से गहरी आवाज में बोला, "अगर जताई, तो क्या होगा?" असुर की आवाज अब इतनी ज्यादा ठंडी थी कि उसकी ठंडक कनिका को भी महसूस हो रही थी। उसका बदन अब कांपने लगा था।

कनिका ने अब अपनी नजरें झुकाते हुए बोली, "हमें माफ कर दीजिए असुर बाबू, हम आपको और कुछ नहीं बता सकते।" इतना कहकर वह अपनी जगह से उठने को हुई कि तभी असुर ने उसकी गर्दन पर अपना हाथ रख उसे दोबारा से बिस्तर पर लेटा दिया। वह पूरी तरह से उसके ऊपर झुक कर बोला, "आज तुम्हें बताना होगा, आखिर सच्चाई है क्या? क्यों तुमने ऐसा किया? क्यों तुमने किसी का इल्जाम खुद पर लिया? आखिर क्यों तुमने सुहानी दी के जिंदा होने पर भी मुझे यह नहीं बताया कि सुहानी दी जिंदा है।"

असुर की बात सुनकर कनिका का दिल धक सा रह गया। अब जाकर कनिका को पता चला था कि असुर को यह बात पता चल चुकी थी कि सुहानी जिंदा है। अब कनिका की आंखों के आंसुओं का बांध टूट चुका था। वह अब फूट-फूट कर रोने लगी। अगले ही पल वह असुर को अपने गले से लगाते हुए बोली, "हमें माफ कर दीजिए असुर बाबू, हमें माफ कर दीजिए। हम नहीं बता सकते थे।"

वहीं अब उसकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि उसकी हालत ही नहीं थी कि वह कुछ बता सके या बयान कर सके। वह लगातार रोते हुए असुर की गर्दन में अपना सिर छुपा कर सिसक कर बोली, "हमें करना पड़ा, हमारी मजबूरी थी।" उसकी बात असुर बड़े ध्यान से सुन रहा था। अब वह बड़े प्यार से उसके सिर के पीछे अपना हाथ फेरते हुए बोला, "ऐसी क्या मजबूरी थी मीठी गोली, जो तुमने मुझसे इतनी बड़ी सच्चाई छुपाई।" उसकी बात सुनकर कनिका ने अपना चेहरा पीछे की तरफ किया और कुछ बोलने को हुई कि तभी उसकी आंखों के सामने एक बच्ची का चेहरा घूम गया। उसे चेहरे को याद कर अब कनिका की सांस फिर से उखड़ने लगी। वह रोते हुए बोली, "मैं नहीं बता सकती, मैं नहीं बता सकती।" इतना कहकर उसने अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया और वहां से उठकर बाहर की तरफ भाग गई।

वही असुर तो बस उसकी तरफ देखता ही रह गया। उसकी तड़प असुर को अपने अंदर तक महसूस हो रही थी। वह इतना तो समझ चुका था कि अगर कनिका उसे कुछ बता नहीं रही, तो वजह कुछ बहुत ज्यादा बड़ी है और क्या, यह असुर को समझना बाकी था।

दूसरी तरफ,

कनिका लगातार भागते हुए बाहर की तरफ आई और हाल से होते हुए बाहर निकल गई। इस वक्त हाल में कोई नहीं था। सभी सर्वेंट भी अपने-अपने काम में किचन में लगे हुए थे। अमानत और अफसाना भी शायद अपने कमरे में थे। जिस वजह से हाल इस वक्त पूरी तरह से खाली था। वही कनिका अब भागते हुए बाहर की तरफ आई और सड़क पर भागने लगी। इस वक्त कनिका को अपने दिल में हूक उठती हुई महसूस हो रही थी। चाहते हुए भी वह कुछ भी असुर को बता नहीं सकती थी।

वही असुर, जो कि अपने कमरे में था, उसने भी जल्दी से कपड़े पहने और बाहर हाल में आया। वहां पर अब एक सर्वेंट खड़ी थी। उस सर्वेंट को देखकर असुर ने उससे कनिका के बारे में पूछा, तो सर्वेंट ने साफ मना कर दिया कि कनिका किचन में नहीं है। अब असुर के चेहरे पर परेशानी छलकने लगी। असुर ने उसके रूम की तरफ चेक किया, तो कनिका इस वक्त रूम में भी नहीं थी।

अब असुर की परेशानी और भी ज्यादा बढ़ गई। अब वह बाहर की तरफ आया, तो बाहर खड़ा वॉचमैन, जो कि अभी थोड़ी देर पहले अपने लिए सिगरेट लेने गया था। उसने कनिका को बाहर की तरफ भागते हुए देखा था और उसने रोकने की भी कोशिश की, लेकिन कनिका रुकी नहीं। उसने सारी बात असुर को बताई। असुर उसके चेहरे पर एक जोरदार थप्पड़ मारते हुए बोला, "तुम पीछे क्यों नहीं गए उसके?" इतना कहकर अब वह उस साइड भागा, जहां से कनिका गई थी। अब वह सड़क पर खुद भी भाग रहा था। तभी उसे कनिका नजर आई। कनिका, जो की सड़क के बीचो-बीच भाग रही थी।

असुर अब जल्दी से उसके पास भागने को हुआ कि तभी जो हुआ, उसे देखकर असुर के दिल की धड़कन एक पल के लिए रुक गई। क्योंकि वहां पर कनिका के सामने ही एक वैन आकर रुकी और अगले ही पल कुछ लोग उस वन में से निकले और उन्होंने कनिका को उठाकर वन में डाल दिया। देखते ही देखते वो वैन वहां से चल पड़ी। जैसे ही वह वैन चली, असुर तेजी से उस वन की तरफ भागा। लेकिन वह वैन अपनी स्पीड पकड़ चुकी थी। वही असुर तेजी से उस वैन की तरफ भाग रहा था। जिस वजह से उसके पैरों में पहनी हुई चप्पल भी टूट चुकी थी, जितनी तेजी से असुर भागा था।

अगर वह वैन थोड़ी धीमी स्पीड में होती, तो शायद असुर अब तक उसे पकड़ चुका होता। लेकिन वह वैन की स्पीड बहुत ज्यादा थी।

जैसे ही वैन उसकी आंखों से ओझल हुई, असुर तेजी से चिल्लाया,

"कनिका......."

To be continue...

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