
अरमान का प्राइवेट विला,
अरमान अभी-अभी अश्की को स्विमिंग पूल से बाहर निकाल कर लेकर आया था, क्योंकि वह करिश्मा की हालत देखकर अरमान की बाहों में ही बेहोश हो गई थी। इस वक्त करिश्मा की हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि उसका आधा चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था। आधे चेहरे से ही उसका पता चल रहा था। ऊपर से अरमान ने उसके हाथ भी कटवा दिए थे। अब अरमान इस वक्त अश्की को गोद में लिए हुए करिश्मा को गहरी नजरों से देख रहा था। इस वक्त अरमान की आंखें हद से ज्यादा लाल थी।
अब उसने अश्की को सामने फोल्डिंग टेबल, जो की स्पेशली स्विमिंग पूल के पास लगाए गए थे सन बॉथ लेने के लिए, वहां पर अश्की को लेटाया। एक बार फिर से वह करिश्मा के सामने आकर खड़ा हो गया।
वही करिश्मा, जो उसके सामने खड़ी थी, वह इस वक्त थर थर कांप रही थी। वह अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "मैंने बस इसे छुआ था, इससे ज्यादा।" अभी वह कुछ बोल ही रही थी कि तभी वहां पर गोली चलने की आवाज आई। यह गोली करिश्मा के माथे के बीचो बीच लगी थी। अब करिश्मा की डेड बॉडी अरमान के सामने जमीन पर पड़ी थी। वही अरमान उसे सनकियों की तरह देखते हुए बेहद गहरी आवाज में बोला,
"उसे छूने का हक तो मैंने हवा को नहीं दिया। तेरी हिम्मत यहां तक बढ़ गई कि तूने उसे इस कदर छुआ कि अरमान का पागलपन बाहर आ गया।" इतना कहते हुए उसने एक बार फिर से अपनी आंखें बंद की। वह अपने सिर को पीछे से सहलाते हुए अपना गुस्सा कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन उससे उसका गुस्सा जैसे हैंडल नहीं किया जा रहा था। अब उसने साइड पर देखा, जहां पर बाउंसर खड़े थे। यह वही बाउंसर थे, जिन्होंने अश्की को अंदर की तरफ इंटर करवाया था।
अब अरमान उनके पास आया, तो वह बाउंसर डर से कांपने लगे। अगले ही पल, एक बाउंसर किसी तरह हिम्मत करके कांपते हुए पैरों से आगे की तरफ आकर बोला,
"वो.....वो.....वो...... हम हम.......हमें ये काम बड़ी मेमसाहब ने करने के लिए कहा था।" इतना कहकर वो बुरी तरह कांपने लगा था, क्योंकि उसका बाथरूम उसकी पेंट में निकल चुका था। अभी भी उसकी बॉडी कांप रही थी। वही अरमान, जिसकी नजरे उस पर गहरी थी, वह अपनी लाल आंखों से उसे देख रहा था। उसकी नजर अब नीचे की तरफ गई, तो उसके चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई।
अगले ही पल उसने जावेद को कुछ इशारा किया, तो जावेद ने हां में सिर हिला दिया। वह उन तीनों बाउंसर को वहां से लेकर जाने को हुआ, तो वह चिल्लाते हुए बोले, "लेकिन boss, हमारी कोई गलती नहीं है। हमें तो सिर्फ ऑर्डर मिला था।" वह चिल्ला रहे थे, लेकिन अरमान को उसकी बातों का कोई असर नहीं हो रहा था। वह अपनी ठंडी आवाज में बोला, "कसूर तो मेरी दिलरुबा का भी नहीं था, लेकिन सजा तो उसे भी मिलेगी। तुम तो चीज ही क्या हो? तुमने तो मेरी दिलरुबा को छुआ है।"
इतना कहते हुए उसकी आंखों में शक साफ दिखाई दे रही थी। उसके चेहरे पर जिस तरह से इस वक्त भाव थे, अश्की की आंखें खुली होती, तो एक बार फिर से अरमान की आंखों में उसके लिए शक देख शायद वह बेहोश हो जाती। उसकी नज़रें तो सामने लेटी हुई अश्की पर थी, जिसका चेहरा पूरी तरह से बेजान और पीला पड़ चुका था।
वही अरमान अब उसके पास आया और उसके पास ही उस सन बाथ टेबल पर बैठते हुए उसके चेहरे पर झुका और अगले ही पल पागलों की तरह उसके चेहरे को चूमे जा रहा था। हालांकि अश्की पूरी तरह से बेहोश थी, उसे कोई होश नहीं था। लेकिन फिर भी जिस तरह से रूडली अरमान उसे किस कर रहा था, अरमान के होंठ उसके होठों को जैसे हद से ज्यादा तकलीफ पहुंचा रहे थे।
इस वक्त अरमान की आंखें पूरी तरह से खुली हुई थी और उसकी नज़रें अश्की के चेहरे पर टिकी हुई थी, जो की बेहोशी में भी दर्द उसके चेहरे पर छलक रहा था। वही अरमान नहीं रुका। वह लगातार अश्की के होठों को चूमते हुए उस पर बरसने में लगा हुआ था। तकरीबन 15-20 मिनट उसे यूं ही चूमने के बाद अरमान पीछे की तरफ हुआ और उसने अश्की के होठों की तरफ देखा।
जहां अश्की के होंठ सूज कर लाल हो चुके थे। अब वह बेहद गहरी आवाज में बोला, "तुमने यह अच्छा नहीं किया, दिलरुबा।" इतना कहते हुए उसने अब एक बार फिर से अश्की को अपनी गोद में उठाया और अंदर की तरफ ले जाने लगा। अंदर ले जाते हुए भी एक टक उसकी नज़रें अश्की के चेहरे पर बनी हुई थी। देखते ही देखते वह पूरी तरह से अश्की को अंदर की तरफ लेकर आया और अंदर ले जाकर उसने मास्टर बेडरूम में अश्की को लेटा दिया। इस वक्त अश्की के बदन पर वही कपड़े थे, जो कि उसकर बदन को कहीं से भी सही तरह से ढक भी नहीं पा रहे थे। यह चीज अरमान को ओर भी अंदर तक जला रही थी।
उन कपड़ों को देखकर अरमान की आंखें ओर भी लाल होने लगी थी। अब उसने अगले ही पल अश्की के सीने पर अपना हाथ रखकर, जो कपड़े उसने पहने थे, वह फाड़ कर उसके बदन से अलग कर दिए। लेकिन उसकी लोअर बॉडी पर अभी भी निजी कपड़े पहने हुए थे। भले ही अश्की पूरी तरह से उसके सामने इस वक्त बेलिबास थी, लेकिन उसकी नजरें अश्की के चेहरे पर ठहर चुकी थी।
अब एक बार फिर से उसकी आंखों के सामने एक छोटी सी लड़की, जो रोते हुए एक टेबल के नीचे छुप कर बैठी हुई थी। उस लड़की की ग्रीन आंखों से आंसू लबालब बह रहे थे। वह अपने हाथों से अपनी आंखों को मसलते हुए अपने आंसू साफ कर रही थी। तभी उस लड़की के कानों में एक लड़के की आवाज आई, "delicate toy, where are you?" उस लड़के की आवाज सुनकर वह लड़की मुंह बनाते हुए बोली, "मैं बाहर नहीं आऊंगी, मैं नहीं आऊंगी। आप बहुत गंदे हो, आपने मुझे डांटा।"
उसकी बात पर वह लड़का मुस्कराया और अब वह नीचे की तरफ झुका। उसे पहले ही जैसे पता था कि वह लड़की टेबल के नीचे बैठी हुई है। अब उसे देखकर उस लड़के ने बड़े प्यार से उसके गाल पर हाथ रखते हुए बोला, "नहीं डेलीकेट टॉय, अगर तुम्हें चोट लग जाती तो, इसीलिए मैंने डांटा ना। तुम उस गाड़ी के आगे आकर खड़ी हो गई। अगर मैं ना होता, तो तुम।" इतना कह कर वह लड़का चुप हो गया। तभी वह लड़की बोली, "तो क्या होता, मर जाती ना।"
अभी उसने इतना ही कहा था कि तभी उस लड़के ने उस लड़की की गर्दन पकड़ ली और गुस्से से दांत पीसकर बोला, "तुम्हारी हर एक सांस पर मेरा हक है। तुम मर नहीं सकती।" उस लड़की की सांस उसके गले में अटक गई। अभी वह बच्ची ही थी। वह लड़का, जो उसके सामने बैठा था, वह उससे 8 साल बड़ा था।
वह अपने नन्हे नन्हे हाथों से उस लड़के के हाथ को पकड़कर पीछे की तरफ करने की कोशिश कर रही थी। लेकिन उस लड़के के चेहरे पर उसका गुस्सा अब साफ दिखाई दे रहा था। लेकिन जब उसने उस लड़की का लाल होता चेहरा देखा, तो अगले ही पल उसने अपना हाथ पीछे की तरफ खींच लिया। अब अपना हाथ अपने सिर के पीछे ले जाकर अपने सिर को किसी पागलों की तरह सहलाते हुए अपने गुस्से को कंट्रोल करने की कोशिश करने लगा।
वही वह लड़की अब ओर भी तेजी से रोते हुए बोली, "आप बहुत गंदे है, आप बहुत गंदे है, लिटिल गैंगस्टर, आप बहुत गंदे हो।" इतना कहते हुए वह लगातार रोए जा रही थी। तभी वह लड़का उसके गालों को अपने हाथों में भरते हुए बड़े गौर से उसके चेहरे को देखने लगा। वह मन ही मन बोला, "तुम नहीं जानती कि तुम मेरे लिए क्या हो? लेकिन जिस दिन तुम्हें कुछ हुआ, उस दिन...." इतना कहते हुए उस लड़के की आंखों में एक अलग ही आग दिखाई दे रही थी।
Present time,,
अरमान इस वक्त अश्की के चेहरे की तरफ देख रहा था। वही आग अरमान की आंखों में जल रही थी। अब धीरे-धीरे कर उसकी नजरें अश्की के सीने की तरफ गई, जहां पर करिश्मा ने उसे छुआ था। यह बात उसे वहां पर लगे हुए बेसिक रूम, जहां पर कैमरा लगा हुआ था, जहां पर करिश्मा और अश्की बैठे हुए थे, वहां से पता चली थी। जिस तरह से करिश्मा ने अश्की को छुआ था, इस चीज को देखकर अरमान जैसे पागल सा हो गया था। उसके सीने के पास अपना चेहरा ले जाते हुए किसी साइको की तरह अपने हाथ में उसके सीने को भरकर पागलों की तरह उसे देखने लगा और रगड़ने लगा। जैसे उस पर से करिश्मा की छाप को मिटाने की कोशिश कर रहा था। वह लगातार उसके सीने को रगड़ रहा था।
मानो उस पर से रगड़ने पर भी करिश्मा की छुए के निशान खत्म ही नहीं हो रहे थे। वह उसके सीन की तरफ देखकर बोला, "तुम्हें गंदा कर दिया दिलरुबा, उसने तुम्हें गंदा कर दिया। इतनी घटिया औरत ने तुम्हें छुआ।" इतना कहते हुए वह दांत पीस रहा था और साथ ही साथ उसके सीने को लगातार रगड़ रहा था। तकरीबन 15- 20 मिनट यूं ही उसका सीना रगड़ने से लाल से नीला पड़ने लगा था। लेकिन अरमान रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। वह तो जैसे पागल ही हो चुका था। उसकी स्किन इतनी ज्यादा रेड हो चुकी थी कि अश्की को अब दर्द होने लगा था। अब उसकी आंखें भी खुलने लगी थी।
अश्की की आंखें जैसे ही हल्की-हल्की खुलने लगी, तो उसे अपने सीने पर बेइंतहा दर्द होना शुरू हो गया। उसकी आंखें अगले ही पल बड़ी हो गई और नजरे अरमान पर जा टिकी, जो लगातार उसके सीने को अपने हाथों से रगड़ते हुए साफ करने की कोशिश कर रहा था। दर्द के मारे उसकी जान निकलने लगी। वह अब अरमान के कंधों पर हाथ रखते हुए उसे खुद से दूर करने की कोशिश करते हुए बोली, "क्या कर रहे है, अरमान जी, मुझे दर्द हो रहा है। छोड़ दीजिए, प्लीज।" लेकिन अरमान का पागलपन तो बढ़ता ही जा रहा था।
वह सनकी की तरह बोला, "उस गंदी औरत ने तुम्हें छुआ, बेबी, वह भी यहां पर। उसने मेरे टॉय को छुआ, उसकी हिम्मत कैसे हो गई। डियर, मैं तो उसे दोबारा जिंदा करके मारना चाहता हूं।" अरमान की पागलों भरी बातें सुनकर अश्की का दिल रुकने की कगार पर आ गया। उसकी सांसे हद से ज्यादा गहरी होने लगी। इस वक्त उसे अरमान से हद से ज्यादा डर लग रहा था। उसका बदन एक बार फिर से कांपने लगा था।
वह रोते हुए ना में सिर हिला कर बोली, "प्लीज, प्लीज, छोड़ दीजिए मुझे, मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मुझे नहीं पता कि आप।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अरमान ने उसके होठों पर उंगली रखते हुए कहा,
"मैंने कहा ना,,, शीईईईईई.....,
एकदम चुप रहो। मुझे उसके हाथ के निशान तुम्हारे बदन पर से हटाने है। चाहे किसी तरह भी हटाओ।" इतना कहते हुए उसने गहरी नजरों से एक बार फिर से अश्की के सीने की तरफ देखा और अपने हाथ को अपने बालों के पीछे ले जाते हुए सनकियों की तरह सहलाया।
पर यह चीज देखकर अश्की के रोंगटे खड़े हो रहे थे। अरमान अब अपनी जगह पर से खड़ा हुआ और अगले ही पल वह अश्की को गोद में उठाकर बाथरूम की तरफ बढ़ गया। वहीं अश्की डरते हुए बोली, "कहां लेकर जा रहे हैं आप मुझे?"
अरमान ने अब अपना चेहरा एक्सप्रेशंसलेस करते हुए अश्की की तरफ देखा, लेकिन उसने अश्की से कुछ नहीं कहा। वहीं अश्की भी आगे से कुछ बोल नहीं पाई, क्योंकि इस वक्त उसे अरमान से हद से ज्यादा डर लग रहा था। इस वक्त उसका दिल जोरो से धक-धक करने लगा।
कुछ ही सेकंड में अरमान उसे शावर के नीचे लेकर खड़ा था। अश्की की पीठ इस वक्त दीवार से लगी हुई थी। दोनों के ऊपर शावर का पानी गिर रहा था। अश्की की अप्पर बॉडी पर इस वक्त कुछ भी नहीं था और लोअर बॉडी पर अभी भी कपड़े थे। अश्की इस वक्त मासूमियत से अरमान की तरफ अपनी आंसू भरी आंखों से देख रही थी। लेकिन अरमान की नजरे अभी भी उसके सीने पर ठहरी हुई थी।
To be continue.....







Write a comment ...