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Gun shot and ashki armaan amne samne

Red velvet casino,

एक Room में बहुत सी लडकियां बंद की गई थी जो कि लगभग से बीस तेईस साल की होगी। कुछ तो उससे भी कम की थी। कुछ तो सोलह सत्रह साल की भी थी। उन लडकियों में से एक लडकी बेहद खूबसूरत एक साइड पर खडी थी। उस लडकी की आंखों से आंसू लबालब बहे जा रहे थे। उसका दिल कर रहा था कि कमरे की दीवारों में छेद हो जाए और वह उसी में गड़ जाए। इस वक्त उस लडकी को जबरदस्ती एक ड्रेस पहनाई गई थी, जो वह पूरी तरह से नीचे खींच रही थी। वह शर्म से डूब कर मरे जा रही थी।

उस लड़की की गहरी ग्रीन आइज में लबालब आंसू भरे हुए थे। वह आसपास देख रही थी। दूसरी लड़कियों को इस चीज से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ रहा था। कोई मिरर में खुद को निहार रही थी, तो कोई अपने बालों को सवार रही थी और कोई अपने गले को ओर भी डीप करने की कोशिश कर रही थी, ताकि मर्दों को फसाया जा सके।

उनमें से एक लड़की, जो कि अपनी ड्रेस को मेंटेन करने की कोशिश कर रही थी, तभी उस लड़की की नजर सामने खड़ी हुई लड़की, जो अपनी ड्रेस को नीचे की तरफ कर रही थी, उस पर गई। वह उसकी तरफ देखकर बोली, "हे यू तुम इस तरह से अपनी ड्रेस क्यों नीचे कर रही हो। लगता है इस स्ट्रीट में नई आई हो।"

वहीं दूसरी लड़की मेघा, जो उसके पास ही खड़ी थी, वह हंस कर बोली, "कोई बात नहीं वर्षा, बहुत जल्दी इस स्ट्रीट में घुल मिल जाएगी। वैसे है तो बहुत ज्यादा खूबसूरत, इसकी आंखें देख, हरी हरी कितनी खूबसूरत है।" तभी वर्षा मुंह बनाकर बोली, "इतनी भी खूबसूरत नहीं है।" तभी मेघा बोली, "हां, तुझे कहां खूबसूरत लगेगी, तुझे तो अपने सिवा कोई खूबसूरत लगता ही नहीं।"

मेघा की बात पर वर्षा इतराते हुए बोली, "यह बात तो तूने सही कही। दुनिया में वर्षा से खूबसूरत कोई भी नहीं।" इतना कहते हुए इतराते हुए सामने मिरर के आगे जाकर खड़ी हुई और अपने होठों पर लिपस्टिक एप्लाई करने लगी।

दूसरी तरफ जो लड़की खड़ी थी, यह लड़की कोई और नहीं अश्की थी। वह डर के मारे इधर-उधर देख रही थी। कुछ देर पहले जिस तरह से वह यहां पर पहुंची थी, उस मंजर को याद कर रही थी। उसे मंजर को याद करते हुए ही उसका दिल जैसे धड़कने से इंकार कर रहा था। कुछ देर पहले ही उसकी गाड़ी रेड वेलवेट कसीनो के बाहर आकर रुकी थी। उसे इस गाड़ी में किसी और ने नहीं, बल्कि नियति जी ने भेजा था।

नियति जी जिस तरह से उसके साथ बिहेव कर रही थी, उसे बहुत ज्यादा अजीब लग रहा था। क्योंकि पहले उन्होंने खाना बनाने को कहा और फिर बाद में जब उन्होंने अश्की को अरमान के पास जाने को कहा, तो अश्की को भी थोड़ा अजीब लगा। लेकिन उसके दिमाग में इस वक्त यही चल रहा था कि अरमान को चोट लगी है। जिसे सोचकर उसे बहुत ज्यादा अजीब लग रहा था। इसीलिए वह खिंची चली आई थी लेकिन यहां पर पहुंचते ही,

वह गाड़ी से बाहर निकली। अभी वह गाड़ी से बाहर निकली ही थी कि तभी गाड़ी का दरवाजा बंद हुआ और दूसरे ही पल गाड़ी वहां से चली गई। यह चीज देखकर अश्की हैरान रह गई। उसे डर लग रहा था कि पता नहीं वह कहां पर आ गई थी। वहां का इलाका काफी पिछड़ा हुआ लग रहा था, जहां पर कोई-कोई बिल्डिंग नजर आ रही थी।

उस कसीनो के आसपास दो-तीन बिल्डिंग थी, जो की काफी ज्यादा बड़ी-बड़ी थी। उसके आसपास कुछ बाउंसर थे। हर बिल्डिंग के पास दो-तीन बाउंसर जरूर थे। वही अश्की, जोकि अब अकेली खड़ी थी। उसको अकेला देखकर एक बाउंसर, जो की कसीनो के बाहर खड़ा था। उसकी नज़रें अश्की पर गहरी हो गई और अब उस बाउंसर का फोन बजा। जैसे ही उस बाउंसर का फोन बजा, तो दूसरी तरफ से कुछ कहा गया। उसे सुनकर बाउंसर के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई।

इस वक्त बाउंसर के चेहरे पर इतनी ज्यादा क्रीपी स्माइल थी कि अश्की को भी वह बहुत ज्यादा अजीब लग रहा था। इसीलिए उस बाउंसर को देखकर अब वह दूसरी तरफ बढ़ गई, क्योंकि उसे वहां पर खड़ा होना कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। वह तो इधर-उधर सिर्फ अरमान को ढूंढ रही थी कि कहीं अरमान उसे नजर आए, क्योंकि उसे यही एड्रेस दिया गया था कि अरमान का यहां पर एक्सीडेंट हुआ था और उसके हाथ पर चोट लगी थी।

अब यहां पर पहुंच कर अश्की की हालत खराब हो रही थी। जिस तरह से वह बाउंसर उसे देख रहा था, उसके रोंगटे खड़े हो रहे थे। इस वक्त उसके दिल की धड़कन धीमी पड़ती जा रही थी। इसीलिए वह जल्दी से वहां से निकलते हुए सड़क पर आई। तभी उस बाउंसर ने पीछे से उसके मुंह पर हाथ रखकर दबा लिया और उसे उठाकर अंदर की तरफ ले आए, क्योंकि उसे अश्की को उठाने का ही आर्डर मिला था।

अश्की को लाकर एक रूम में पटक दिया। जिस रूम में उसे पटका गया था, वहीं पर एक लड़की सोफे पर बैठी हुई थी, जो कि अपने पैर पर पैर चढ़ाकर बैठी हुई थी। वह लड़की अपने नेल्स को पॉलिश कर रही थी और अपने होठों को गोल कर अपने नाखूनों पर हवा blow कर रही थी।

जब बाउंसर ने अश्की को वहां पर लाकर पटका उस लड़की को और करिश्मा के चेहरे पर अब डेविल स्माइल आ गई। वह उस लड़की को गहरी नजरों से देखने लगी। करिश्मा की नजरे इस वक्त अश्की के बदन पर थी। वह अश्की के बदन के हर एक हिस्से को तराशने में लगी हुई थी। वही अश्की डर के मारे पीछे की तरफ खिसकने लगी। वह रोते हुए बोली, "मुझे छोड़ दीजिए प्लीज, आप लोग मुझे यहां पर क्यों लेकर आए हैं।"

इस वक्त अश्की का चेहरा पूरी तरह से पसीने से भर चुका था। वह लगातार रोए जा रही थी और कुछ बोलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसके मुंह से शब्द ही नहीं निकल रहे थे। इस वक्त अश्की का कलेजा उसके मुंह को आ रहा था। तभी करिश्मा उस बाउंसर की तरफ देखकर बोली, "कहां से लेकर आया है इस चिड़िया को, बड़ी खूबसूरत है। यह माल बवाल करने वाला है।"

इतना कहते हुए उसकी नजरें अश्की पर बेहद गहरी हो गई थी। वही उसकी बातों का मतलब समझने की अश्की पूरी तरह से कोशिश कर रही थी। अश्की का बदन इस वक्त कांप रहा था और दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था।

अब करिश्मा अपनी जगह से खड़ी हुई और उसने सामने टेबल से सिगरेट बॉक्स उठाया। उसने अपने सिगरेट बॉक्स में से एक सिगरेट निकाल कर होठों में दबा ली। जैसे ही करिश्मा ने अपने होठों में सिगरेट दबाई, दूसरी तरफ से बाउंसर ने एक लाइटर निकाला और करिश्मा की सिगरेट को सुलगा दिया। करिश्मा ने सिगरेट का लंबा कश भरा और ऊपर की तरफ छोड़ते हुए एक बार फिर से अश्की को देखा। फिर अपने पास ही सोफे पर पड़ी हुई ड्रेस में से एक ड्रेस उठाई और अश्की की तरफ फेंकते हुए बोली, "जल्दी पहन चिड़िया इसको।" उसकी बात पर अश्की ओर भी ज्यादा कांपने लगी।

वही करिश्मा अब डेविल स्माइल के साथ बोली, "अगर तूने यह कपड़े नहीं पहने ना, तो मेरे यह बाउंसर देख रही है, यह तेरे जिस्म से हर एक कपड़ा उतार कर फिर तुझे यह कपड़े पहनाएंगे।" उसकी बात सुनकर अश्की का दिल धक सा रह गया। इस वक्त उसका बदन पूरी तरह से ठंड पड़ गया था। वह ड्रेस की तरफ देख रही थी, जो की बहुत ज्यादा छोटी थी। जिससे उसके सिर्फ नाम मात्र के अंग ही ढके जा सकते थे। उस ड्रेस को देखकर अश्की का रोना छूट गया।

वह रोते हुए बोली, "मैंने तुम लोगों का क्या बिगाड़ा है, जो आप।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी करिश्मा उसके पास आई और उसके बालों को मुट्ठी में भरते हुए उसका चेहरा ऊपर की तरफ किया। जैसे ही उसने आशिकी का चेहरा ऊपर की तरफ किया, अश्की की दर्द से आह निकल गई, क्योंकि करिश्मा ने बड़ी बेरहमी से उसके बालों को पकड़ लिया था।

वह उसके चेहरे पर झुकते हुए बोली, "ऐ चिड़िया, ज्यादा रोने धोने का नहीं, अगर रोई ना, यह जो तेरा खूबसूरत थोबाडा है ना, इसको मैं बिगाड़ के रख देगी, समझी।" इतना कहते हुए उसके चेहरे पर ओर भी ज्यादा झुक चुकी थी। करिश्मा के होंठ इस वक्त अश्की के होठों के बिल्कुल पास थे। करिश्मा की गर्म सांसे उसे अपने होठों पर महसूस हो रही थी। अश्की को इस वक्त इतना ज्यादा डर लग रहा था कि कहीं करिश्मा कोई गलत हरकत ना कर दे।

वही करिश्मा अब उसे बड़े गौर से देखते हुए बोली, "वैसे तू है तो बड़ी खूबसूरत।" इतना कहते हुए करिश्मा ने अपना हाथ उसके चेहरे पर से ले जाते हुए उसके गले और उसके कॉलर बोन पर ले जाते हुए उसके सीने पर लेकर गई। वह उसके सीने को सहलाने लगी। जिस तरह से वह उसके सीने को सहला रही थी, अश्की के रोंगटे खड़े हो रहे थे। उसे अपने बदन से ही घिन महसूस हो रही थी। कहने को करिश्मा लड़की थी, लेकिन करिश्मा की हरकत बहुत ज्यादा गंदी थी।

अब करिश्मा ने उसके बालों को छोड़ा और बोली, "जल्दी कर, नहीं तो यह बाउंसर जो करेंगे ना, वह मैं भी कर सकती हूं। और मैं सिर्फ ऊपर ऊपर से लड़की हूं, हूं तो अंदर से मैं लड़का ही।" उसकी यह बात सुनकर अश्की तो जैसे अंदर तक कांप उठी। करिश्मा अब बाहर की तरफ चली गई और बाउंसर भी अब वहां से जा चुके थे। करिश्मा के जाते ही अब अश्की फूट-फूट कर रोने लगी। अब उसे यहां पर आने का हद से ज्यादा पछतावा हो रहा था।

Present time,,

अश्की की आंखों में इस वक्त हद से ज्यादा आंसू बह रहे थे और इस वक्त उसके दिल में हद से ज्यादा दर्द उठ रहा था।

वहीं दूसरी तरफ,,

बेसमेंट के ही दूसरे हाल में, जहां पर लड़कियों का रैकेट चलाया जाता था, सबसे आगे चेयर पर अरमान बैठा हुआ था। जहां पर लड़कियों की बोली लगने वाली थी। पीछे ही कुछ अलग-अलग देशों से आए हुए गैंगस्टर बैठे हुए थे, जो कि यहां पर लड़कियों को खरीदने आए हुए थे। तभी अरमान ने वहां पर खड़े जावेद को इशारा किया, तो जावेद ने अब बोली स्टार्ट करने का इशारा कर दिया। वहां पर एक तरफ करिश्मा खड़ी थी और उसने हां में सिर हिला दिया। कुछ ही देर में लड़कियों को स्टेज पर बैक साइड से भेजा गया। एक-एक कर लड़कियां स्टेज पर जाने लगी। वह चलते हुए आगे की तरफ आई। इस वक्त उन लड़कियों ने जिस तरह के कपड़े पहने हुए थे, उनमें से उनका बदन पूरी तरह से छलक रहा था। वहां पर खड़े हर गैंगस्टर की हवस भरी नजरे उन लड़कियों पर थी।

उन लड़कियां आने के बाद एक आखिरी लड़की आनी बाकी रह गई थी। वह स्टेज पर चढ़ ही नहीं पा रही थी। वह लड़की और कोई नहीं, अश्की थी। जिसकी आंखों से अब आंसू लबालब बह रहे थे। जब दसवीं लड़की ऊपर नहीं आई, तो अरमान की सर्द नजरे करिश्मा पर पड़ी।करिश्मा अंदर तक कांप गई। वह डरते हुए जल्दी से स्टेज के बैक साइड पर गई और गुस्से में दांत पीसकर बोली, "अरे ओ चिड़िया, जल्दी चल स्टेज पर, नहीं तो मैं तेरे को कमरे में जाकर बिछा देगी अभी।" उसकी बात सुनकर अश्की अब और भी ज्यादा कांप उठी।

अश्की रोते हुए करिश्मा के आगे हाथ जोड़कर बोली, "देखिए प्लीज, मुझे वहां पर नहीं जाना। मुझे अच्छा नहीं लग रहा। प्लीज, आपने एक तो यह गंदे कपड़े मुझे पहना दिए और ऊपर से आप।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी करिश्मा उसके बालों को मुट्ठी में भरते हुए बोली, "तेरे को समझ नहीं आता है क्या? अभी अपने बाउंसर को बुलाऊं क्या? अभी वह तेरे को कमरे में ले जाकर अच्छी तरह से तुझे बताएंगे।" उसकी बात सुनकर अश्की कांप उठी। वह करिश्मा के आगे हाथ जोड़ते हुए बोली, "नहीं नहीं प्लीज, ऐसा मत कीजिए।" उसकी बात सुनकर करिश्मा दांत पीसकर बोली, "तो चल निकल, ऊपर जल्दी चल, नहीं तो मैं तेरी टांगे तोड़ देगी अभी। दिमाग की मां बहन कर रही है, चल निकल।"

इतना कहकर उसने अश्की को स्टेज की तरफ धक्का दिया। अब ना चाहते हुए भी अश्की को स्टेज की तरफ जाना पड़ा। अब अश्की धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ रही थी। अश्की ने इस वक्त गोल्डन कलर की थाई तक आने वाली ड्रेस पहनी हुई थी, जिसमें से उसका गोरा पेट और उसका सीना, जो की काफी हद तक रिवेल हो रहा था। इस वक्त उसने जो कपड़े पहने थे, वह उसके अंगों को ठीक तरह से ढक भी नहीं पा रहे थे। अब अश्की पूरी तरह से स्टेज पर आई और स्टेज के केंद्र में आकर आगे आकर खड़ी हो गई।

जैसे ही अश्की स्टेज के केंद्र में आकर खड़ी हुई, तभी वहां पर सबसे आगे बैठे अरमान की आंखें सर्द हो गई। उसके हाथ में वाइन का गिलास, जो उसने पकड़ा हुआ था, उसने उस पर मुट्ठी कस दी। जिससे अगले ही पल वाइन का गिलास टूट कर उसके हाथ में उसके कांच के टुकड़े धंस गए। जिससे अरमान के हाथों से खून लबालब बहने लगा। वही अश्की, जो की स्टेज के सेंटर में आकर सिर झुका कर खड़ी हुई थी। उसने जैसे ही कुछ टूटने की आवाज सुनी, तो उसने ऊपर की तरफ देखा। उसकी नज़रें अरमान से जा मिली और अरमान को देखकर अश्की का दिल धक्क सा रह गया। वहीं अरमान भी उसे अपनी लाल आंखों से देख रहा था।

दूसरी तरफ वहां पर बैठे अलग-अलग कंट्रीज से आए गैंगस्टर की नजर जब अश्की पर गई, तो हर किसी ने नजरे अश्की को देखकर चौंधिया गई। उनमें से एक रसिया के गैंगस्टर ने एक पोलिंग कार्ड उठाकर अश्की की बोली लगाने को हुआ ही था कि तभी वहां पर गोली की आवाज गूंज गई। यह गोली रसिया के गैंगस्टर के माथे के बीचो-बीच लगी थी। अश्की, जो की स्टेज पर खड़ी थी, इस वक्त उसके हाथ पैर ठंडे पड़ चुके थे और दिल कांप रहा था।

To be continue....

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