
पठानी हाउस,
अफसाना का गृह प्रवेश पूरा हो चुका था। अब असुर और अमानत एक दूसरे के सामने खडे थे। असुर इस वक्त अमानत को अपनी गहरी नजरों से देख रहा था। वहीं अमानत जो कि असुर से अभी तक गुस्सा था, उसने अब आई डोंट केयर वाले एक्सप्रेशन दिए और वहां से जाने को हुआ कि तभी असुर ने उसका हाथ पकड़ लिया। वह एक बार फिर से उसके सामने जाकर खडा हो गया।
जैसे ही असुर अमानत के सामने खडा हुआ, अमानत मुंह बनाकर बोला, "मेरे सामने से हटिए भाई, मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी।" अमानत की बात सुनकर असुर की एक आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई। दूसरी तरफ कनिका और अफसाना यह चीज देख रहे थे।
अमानत को असुर के साथ इस तरह से बात करता देख कनिका भी हैरान थी। तभी वहां हाल में एक तमाचे की आवाज गूंज गई। यह तमाचा असुर ने अमानत के गाल पर जड़ा था और अमानत का चेहरा नीचे की तरफ झुक गया था। लेकिन अगले ही पल अमानत के चेहरे पर डेविल स्माइल आ चुकी थी। कुछ ऐसा ही हाल असुर के चेहरे का भी था। इस वक्त उसके भी चेहरे पर डेविल स्माइल थी।
जैसे ही तमाचे की आवाज वहां पर गूंजी, तो अफसाना और कनिका दोनों ने चिहुंक कर अपने मुंह पर हाथ रख लिया। उन दोनों की तो जैसे सिटी पीटी गुल हो चुकी थी। वहीं अफसाना का दिल तो एक पल के लिए धक सा रह गया। अगले ही पल उसकी आंखों में नमी तैरने लगी थी। वहीं अमानत, जिसका चेहरा दूसरी तरफ था, उसके चेहरे पर अभी भी डेविल स्माइल थी।
लेकिन अब उसने अपना चेहरा एक्सप्रेशंस लैस किया और दोबारा से अपनी नजरें असुर की तरफ उठाई, जो अभी भी उसे डेविल स्माइल के साथ देख रहा था। वही अमानत अब एक्सप्रेशन लैस होकर बोला, "हो गया आपका।"
इतना कहते हुए अब वह अपने कदम दूसरी तरफ बढ़ाने को हुआ कि तभी असुर ने उसकी बाह पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया और अगले ही पल उसने एक और तमाचा उसके चेहरे पर जड़ दिया। अब एक बार फिर से अमानत का चेहरा दूसरी तरफ लुढ़क गया। लेकिन एक बार फिर से उन दोनों के चेहरे पर डेविल स्माइल तैर गई थी। दूसरी तरफ अफसाना अब और बर्दाश्त नहीं कर पाई। अगले ही पल, वो भागते हुए असुर के कदमों में गिर कर फूट फूट कर रोते हुए बोली,
"प्लीज बड़े मालिक, उन्हें कुछ मत कहिए। उनकी कोई गलती नहीं है। गलती सारी मेरी है, मैंने उन्हें फसाया था। मैं यहां से बहुत दूर चली जाऊंगी उन्हें छोड़ कर, प्लीज आप उनको।" अभी अफसाना बोल ही रही थी। वही असुर हैरानी से अपने पैरों में गिरी हुई अफसाना की तरफ देख रहा था। दूसरी तरफ अमानत का चेहरा अब सख्त हो गया था।
अफसाना, जो की असुर के पैरों में गिरी हुई थी। उसे इस वक्त ऐसा लग रहा था कि अमानत को असुर इसलिए मार रहा था कि अमानत उससे शादी करके घर ऐसे आया था।
यह चीज सोचकर उसकी जान निकल रही थी। वह नहीं चाहती थी कि अमानत को उसकी वजह से कोई भी दुख हो। यहां तो असुर उसे मार रहा था और यह चीज देखकर उसकी जान निकल रही थी। वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली, "देखिए बड़े साहब, इनकी कोई गलती नहीं है। मैं ही इनको।"
अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अमानत उसके ऊपर झुका और अगले ही पल उसने अफसाना के बालों को मुट्ठी में भरा और अपने बराबर खड़ा करते हुए उसे गहरी नजरों से देखने लगा। वही अफसाना की तो सांस ही जैसे उसके हलक में अटक गई। वहीं असुर की आंखें अब अमानत पर सर्द हो गई। वह गुस्से में जबड़े कसते हुए बोला, "यह क्या तरीका है बहू से पेश आने का?"
जब असुर ने इतनी बात कही, तो अफसाना का दिल एक पल के लिए धक सा रह गया। वह तो हैरानी से असुर की तरफ ही देखे जा रही थी। दूसरी तरफ अमानत की सर्द नजरे अफसाना पर थी। वह दांत पीसते हुए बोला, "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई किसी के पैरों में गिरने की।" उसकी बात सुनकर अफसाना की आंखें बड़ी हो गई। वह अमानत की तरफ देखकर सिर झुका कर बोली, "लेकिन वह आपके बड़े।"
अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अमानत ने उसके बालों को और भी कसकर मुट्ठी में भरा, जिससे अफसाना का चेहरा ऊपर की तरफ उठ गया।
उसकी सिसकी उसके होठों से बाहर निकल गई। वही असुर अब दांत पीसकर बोला, "छोड़ो बहू को, मैंने कहा ना।" तभी अमानत सर्द आवाज में बोला, "यह मेरे और मेरी पत्नी के बीच का मामला है भाई, आप बीच में नहीं आ सकते।" अभी वह बोल ही रहा था कि असुर एक बार फिर से उसके ऊपर हाथ उठाने को हुआ।
वही अफसाना, जो कि उसके आगे ही खड़ी थी, उसने अब एक बार फिर से अमानत के सीने पर हाथ रख उसे दूर करते हुए असुर की तरफ घूमी और हाथ जोड़ते हुए बोली, "प्लीज, उन्हें मत मारिए, प्लीज...
वह, वह हमसे गुस्सा है इसीलिए।" अभी वह बोल ही रही थी कि तभी असुर उसके आगे हाथ करते हुए बोला, "तुम्हें सफाई देने की जरूरत नहीं है बहू, इसकी हिम्मत कैसे हुई तुम्हारे साथ इस तरह से पेश आने की। तुम मुझे बड़े साहब नहीं बोलोगी, तुम मुझे बड़े भैया कह कर बुलाओगी, समझ में आई बात।"
उसकी बात सुनकर अफसाना की आंखें नम हो गई। असुर के मुंह से अपने बड़े भाई वाली बात सुनकर उसका तो जैसे कलेजा एक पल के लिए फटा जा रहा था। अपने रिश्तों ने उसे कभी भी मान नहीं दिया था और आज बेगाने रिश्ते उसे किस तरह से अपने पन का एहसास दिला रहे थे।
अब असुर एक बार फिर से अमानत की तरफ घुमा और गुस्से से बोला, "तुम तमीज भूल गए हो क्या कि किसी के साथ कैसे बिहेव करना चाहिए।" तभी अमानत मुंह बनाते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमा कर बोला, "मैं अभी भी आपसे नाराज हूं।" जैसे ही उसने यह हरकत की, असुर की एक बार फिर से हंसी छूटने को हुई। लेकिन उसने खुद को कंट्रोल किया। वह गुस्से से दांत पीसकर बोला, "यह कोई हरकत है तेरी, बच्चा है क्या तू, जो मुझसे नाराज है।"
तभी अमानत मुंह बनाकर बोला, "आपने हमेशा बच्चा ही कहा है मुझे, और आज बड़ा कब से हो गया मैं आपके लिए।"
जैसे ही उसने ये कहा, असुर उसके चेहरे की तरफ गौर से देखने लगा। अगले ही पल सख्त आवाज में बोला, "अब शादी हो गई है तेरी, बच्चों वाली हरकतें छोड़ दे।" तभी अमानत मुंह बनाकर बोला, "मैं हमेशा आपका बच्चा था और बच्चा ही रहूंगा। आपको जो कहना है, कह सकते हो।" इतना कहकर मुंह बनाकर वहां से जाने को हुआ कि तभी असुर ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसे गले से लगा लिया।
जैसे ही असुर ने उसे गले से लगाया, अमानत ने भी अपनी बाहें उस पर लपेट दी। दूसरी तरफ अफसाना अपनी आंखों में आंसू लिए वहीं पर खड़ी थी। कोई था, जो कि यह सब देखकर जल रहा था। एक तरफ रीमा थी, जो कि यह सब कुछ देखकर आग बबूला हुए जा रही थी। उसे अंदर ही अंदर हद से ज्यादा जलन महसूस हो रही थी। वहीं दूसरी तरफ सुहानी, जो की कैमरा से लाइव यह सब कुछ देख रही थी, उसका खून जल जलकर राख हो चुका था।
इस वक्त वह मन ही मन सोच रही थी कि अब उसे क्या करना है, क्योंकि उसे किसी तरह से अमानत और असुर को अलग करना था। वह ऐसा क्यों करना चाहती थी, यह तो अब वक्त ही बताने वाला था।
दूसरी तरफ,,
तकरीबन आधे घंटे बाद,
असुर और अमानत डाइनिंग टेबल पर बैठे खाना खा रहे थे। अफसाना और कनिका उनको खाना परोस रही थी। अफसाना की नजरें बार-बार अमानत पर जाकर ठहर रही थी। वही अमानत, जो कि अपने ध्यान में खाना खा रहा था। उसे भी पता था कि अफसाना उसी की तरफ देख रही है, जिसे महसूस कर उसके होठों के बार-बार कोन मुड़ रहे थे।
लेकिन मुस्कुराहट तो नाम मात्र की भी नहीं थी। तभी असुर की बात उन दोनों के कानों पर पड़ी। "अब शादी कर ली है, तो इस शादी को ऑफिशियल भी करना होगा। इसीलिए कल रात को तुम दोनों के ऑफीशियली फेरे करवाए जाएंगे।"
असुर की बात सुनकर अमानत के हाथ वहीं पर रुक गए। अब उसकी नजरें असुर पर गहरी हो गई। अमानत की नजरे खुद पर पाकर असुर का चेहरा, जो की पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस था। अब उसने अपनी नजर उठाकर अमानत की तरफ देखा, तो अमानत बेहद गहरी आवाज में बोला, " शादी तो हम कर लेंगे भाई, लेकिन आपकी शादी से पहले नहीं। यह शादी ऑफिशियल तभी होगी, जब आपकी शादी होगी।"
इतना कहते हुए उसकी नजरें अब कनिका पर आ चुकी थी। लेकिन जैसे ही उसकी नजरें कनिका पर आई, असुर का चेहरा एक पल के लिए फिर से सख्त पड़ गया। वह गुस्से में दांत पीसकर बोला, "तू अपनी शादी देख, मेरी चिंता मत कर।"
असुर की बात सुनकर अमानत भी बेफिक्री से बोली, "आप भी अपनी शादी की चिंता करिए। आपके बाद ही हमारी शादी होगी अब।" उसकी बात सुनकर असुर की हाथों की मुट्ठियां कस गई। अगले ही पल, वह उस जगह से खड़ा हुआ और सीसी, जो कि सीढ़ियों से उतरकर अभी-अभी नीचे आई थी, वह उसकी तरफ देखकर बोला, "मेरा खाना ऊपर ले आओ। यहां कुछ लोगों को मेरे खाने से कुछ ज्यादा ही दिक्कत हो रही है।"
इतना कहते हुए उसकी सख्त नजरे अमानत पर थी। वही अमानत के चेहरे पर अब डेविल स्माइल आ चुकी थी। वह बेहद गहरी आवाज में बोला, "यहां पर लोगों को लगता है कि हम उनके खाने के दुश्मन है। लेकिन इतना तो वह लोग भी नहीं जानते कि हम उनके बिना खा ही कहा सकते हैं।"
इतना कहते हुए अमानत के चेहरे पर जो एक्सप्रेशन थे, वह बेहद दिलकश थे। वही असुर ने अब उसकी तरफ से अपना चेहरा मोड़ लिया। जैसे ही उसने अपना चेहरा मोड़ लिया, उसके चेहरे पर भी एक तिरछी मुस्कराहट तैर गई। अब वह अपना ना में सिर हिलाते हुए ऊपर की तरफ चला गया।
दूसरी तरफ सीसी, जो की सीढ़ियां उतरते हुए नीचे की तरफ आई थी। जैसे ही असुर ने उसे प्लेट लाने को कहा, पता नहीं क्यों, कनिका को एक अलग ही जलन हुई। वह जल्दी से प्लेट उठा कर बोली, "हम ले जाते है, आप खाना खा लीजिए।" उसकी जलन को देखकर सीसी को भी हंसी आ रही थी।
अब वह मुंह बनाकर बोली, "तुम क्यों जाओगी, शादी तो मेरी उसके साथ होने वाली है। पकड़ाओ मुझे प्लेट।" इतना कहकर उसके हाथों से प्लेट लेने को हुई। अमानत की भी हंसी छूट रही थी इस चीज को देखकर। अब वह भी एक बार फिर से सीसी की तरफ देखकर बोला, "क्या भाभी, आप भी मजे लेती रहती है जब देखो। अगर भैया ने कह दिया, तो आप सच्ची में उनके लिए खाना लेकर चले जाएगी।"
उसकी बात पर सीसी को भी हंसी आई, क्योंकि वह जानती थी कि अमानत कनिका की मदद कर रहा है। इसीलिए उसने उस प्लेट से हाथ हटा लिए और बोली, "जाओ, जल्दी खाना दे आओ।" इतना कहकर वह अब डाइनिंग टेबल पर आकर बैठ चुकी थी। वही कनिका, जो कि चोर नजर से अब सीसी को देख रही थी। वह अपना सिर झुका कर वहां से चली गई।
कनिका के जाते ही अमानत और सीसी जोर-जोरों से हंसने लगे। अमानत और सीसी को इस तरह से हंसता हुआ देखकर अफसाना का चेहरा अजीब सा बन गया। वह तो बस अमानत और सीसी को ही देखे जा रही थी। पता नहीं क्यों अफसाना को भी अमानत का उस के साथ हंसना बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। उसका चेहरा जलन से जैसे भरता जा रहा था।
वही अमानत जिसकी नजरे फिलहाल सीसी पर थी। अगले ही पल, जब उसकी नजर अफसाना की तरफ उठी, तो उसकी आंखें छोटी हो गई, क्योंकि अफसाना की आंखों में नमी तैरने लगी थी अब वह खाना रखकर वहां से जाने को हुई कि तभी अमानत ने उसकी बाह पकड़ ली।
वह गहरी आवाज में बोला, "कहां जा रही हो बीवी।" उसकी बात सुनकर अफसाना का दिल जोरो से धक-धक करने लगा।
वहीं दूसरी तरफ,,
कनिका असुर की प्लेट लेकर उसके रूम में आई और सामने का नजारा देखकर उसका दिल तेजी से धड़क उठा, क्योंकि असुर पूरी तरह से न्यूड इस वक्त बेड पर बैठा हुआ था। वह अपने सीने को सहला रहा था। गहरी नजरों से अब वह कनिका को देख रहा था। असुर को इस तरह से देखकर कनिका के पसीने छूटने लगे थे।
To be continue....







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