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Niyati ji ka jaal

त्रेहान पैलेस,

अरमान और अश्की का कमरा,

अश्की ने इस वक्त अपने हाथ में फोन थाम रखा था और वह हाथ उसका बुरी तरह से कांप रहा था. इस वक्त उसका दिल जोरो जोरो से धक धक कर रहा था. आंखों से आंसू लबालब बहे जा रहे थे. वह लडखडाती हुई आवाज में बोली, मैं मैं अभी आ रही हूं। इतना कहकर उसने जल्दी से फोन काटा और बिना इस चीज का सोचे कि अरमान ने उसे चाहे कुछ भी हो जाए, कमरे से बाहर आने से मना किया था. लेकिन फिर भी उसने उस रूल्स को ब्रेक कर दिया था. अश्की पागलों की तरह भागते हुए लिफ्ट से होते हुए नीचे की तरफ आई. तभी उसकी टक्कर नियति जी से हो गई, जो शायद उसी का ही इंतजार कर रही थी.

नियति जी, जोकि कब से अश्की का वहां पर वेट कर रही थी, जैसे ही उन्होंने अश्की को देखा, तो उनके चेहरे पर डेविल्स स्माइल आ गई. उनकी आंखों में इस वक्त ऐसी चमक थी, जैसे कि वह आज सब कुछ खत्म करने वाली हो. लेकिन अगले ही पल उन्होंने खुद को संभाला और अश्की की तरफ देखकर मन में बोली, मुझे किसी तरह से रात तक इसे यहीं पर उलझा कर रखना होगा, क्योंकि अरमान उसे रात को मारने वाला है. जब तक वह उसे मारने के लिए वहां पर नहीं पहुंचता, मुझे इसे यहीं पर उलझा कर रखना होगा. अभी तो वह फिलहाल छोटे गोदाम गया होगा। इतना सोचते हुए वह खुद से ही बोली, क्या जरूरत थी इतनी जल्दी मुझे चाल चलने की, मुझे क्या पता था, यह इतनी जल्दी नीचे आ जाएगी। इतना कहते हुए नियति जी के चेहरे पर परेशानी झलक रही थी.

वही अश्की, जिसकी आंखों में अभी भी आंसू बहे जा रहे थे. वह रोते हुए बोली, वह आंटी, प्लीज, मुझे उनके पास ले चलिए. मैं मुझे अभी- अभी फोन आया है कि उनको बहुत चोट लगी है. प्लीज, मुझे उनके पास ले चलिए। अश्की को इस तरह से परेशान होता देख नियति जी फ्रस्टेटेड होकर बोली, चुप कर छोरी, तू इस घर की बहू है. कहीं भी मुंह उठा कर चली जाएगी क्या? तुझे कोई भी फोन करेगा, तो ऐसे ही चली जाएगी। तभी अश्की उनकी तरफ देखकर बोली, वह झूठ नहीं बोल रहे थे. उनकी आवाज से पता चल रहा था कि वह सच बोल रहे है. उन्हें, उन्हें चोट लगी है।

तभी नियति जी उसे दांत पीसकर चुप करवाते हुए बोली, चुप कर, चुप एकदम चुप! यह तेरे रोने धोने का ड्रामा मेरे सामने नहीं चलेगा, समझी तू. चल रसोई में, आज तेरी पहली रसोई है. चल चल कर खाना बना। इतना कहकर वह लगातार अश्की को डांट रही थी. जैसे ही नियति जी ने उसे खाना बनाने को कहा, अश्की का चेहरा पूरी तरह से मायूस हो गया. उसने अब एक नजर बाहर के दरवाजे की तरफ देखा, जो कि अभी तक पूरी तरह से खुला था. उसे अब अरमान की चिंता हो रही थी. वह मन ही मन सोच रही थी कि आखिर वह फोन था किसका और कहीं सच में अरमान को चोट तो नहीं लगी. यह सोच सोच कर उसे न जाने क्यों एक अलग ही बेचैनी हो रही थी.

पता नहीं क्यों, ना चाहते हुए भी इन चार दिनों में उसे अरमान से प्यार तो नहीं हुआ था, लेकिन अपने जज्बातों को वह कंट्रोल भी नहीं कर पा रही थी. उसे अपने दिल में एक अजीब सी चुभन महसूस हो रही थी. वही नियति जी, जिन्होंने अपने कदम रसोई की तरफ बढा दिए थे. जब उन्होंने पलट कर अश्की को देखा, जो कि अपनी जगह से हिली भी नहीं थी. अब वह गुस्से से बोली, अब क्या पैरों में मेहंदी लग गई है, जो वहां से हिल नहीं रही है. यहां पर खाना नहीं बनाना, महारानी तो हो नहीं, चल जल्दी चल।

नियति जी की बात सुनकर आशिकी की आंखों में एक बार फिर से नमी तैरने लगी. अब एक बार फिर से उसने दरवाजे की तरफ देखा और दूसरे ही पल अपना सिर झुका कर मायूसी से नियति जी के पीछे चल दी. कुछ ही देर में, अश्की किचन में खाना बना रही थी और नियति जी उसके पीछे खडी खाने को देख रही थी. नियति जी के डेविल एक्सप्रेशन अभी भी उनके चेहरे पर थे. उनकी कुटिल मुस्कुराहट साफ बता रही थी कि आज नियति जी कुछ बहुत ज्यादा बडा करने वाली थी. दूसरी तरफ जानवी जी, जोकि अपने कमरे से बाहर निकली थी. जैसे ही वह किचन में आई और किचन का नजारा देखकर उनकी आंखें हैरत से फैल गई.

वह तो अपनी जगह पर खडी- खडी स्तंभ रह गई, क्योंकि वह तो यही सोच रही थी कि आखिर नियति जी अश्की को नीचे लेकर कैसे आए? क्योंकि अरमान तो कभी अश्की को नीचे भेजता ही नहीं और नियति जी उसे नीचे ले आई. आखिर ऐसा कैसे हो सकता था. यह सोचकर ही उनके चेहरे पर परेशानी झलक रही थी. लेकिन नियति जी को कोई फर्क नहीं पड रहा था. वह लगातार अश्की से काम करवाए जा रही थी. वही अश्की भी बिना माथे पर बल डाले काम किए जा रही थी. उसे काम से कोई प्रॉब्लम नहीं थी. बस उसके चेहरे पर परेशानी इस चीज से झलक रही थी कि अरमान को कहीं कुछ हो ना गया हो. ऐसे ही रसोई में काम करते- करते शाम के सात बज चुके थे.

जैसे ही नियति जी की नजर टाइम क्लॉक पर गई, तो उनकी आंखें बडी हो गई, क्योंकि अरमान अब वहां पर पहुंचने ही वाला था. अब उन्हें किसी तरह से अश्की को वहां तक पहुंचाना था.

वहीं दूसरी तरफ,

इस वक्त एक लैंबॉर्गिनी कार तेजी से हाईवे पर दौड रही थी और उसमें लाउडस्पीकर तेजी से बज रहा था. इस लैंबॉर्गिनी में इस वक्त अध्यक्ष बैठा हुआ था और उसकी आंखों के सामने एक लडकी का चेहरा घूम रहा था. अध्यक्ष के हाथ में इस वक्त बियर की बोतल थी. वह लगातार उस बियर की बोतल को होठों से लगाए पिए जा रहा था. उसकी आंखों में ना चाहते हुए भी नमी आ रही थी वह तडपते हुए बोला, क्यों किया तुमने ऐसा कसक, तुम ऐसी तो नहीं थी। इतना कहते हुए वह लगातार उस बियर को पिए जा रहा था. उसकी गाडी की स्पीड लगभग तेज होते जा रही थी.

कुछ ही देर में उसकी गाडी एक पहाडी इलाके पर आकर रुकी. जैसे ही उसने अपनी गाडी उस पहाड पर लाकर रोकी, तो उसने अपना सिर पीछे सीट पर टिका लिया. इस वक्त उसकी आंखें बहुत दर्द बयां कर रही थी. उसने अब अपनी गाडी में एक बटन लगा हुआ था, उसे प्रेस किया. जिससे उसकी ऊपर की छत पूरी तरह से खुल गई. अब वह खुले आसमान के नीचे था और वह ऊपर की तरफ आसमान में देख रहा था. आसमान को देखते हुए ही उसकी आंखों की नमी उसके गालों पर आ चुकी थी.

अभी वह अपने ही ध्यान में ऊपर आसमान की तरफ देख रहा था. इस वक्त उसके दिमाग में बहुत सी बातें चल रही थी. एक लडकी, जो कि दूसरे लडके को Kiss कर रही थी और वह भी Kiss प्राइवेट Room में. उन दोनों के बदन पर एक भी कपडा नहीं था. यह चीज सोच सोच कर अध्यक्ष की आंखों में पानी लबालब बह रहा था. तभी उसके कानों में किसी की पायल की आवाज सुनाई दी. अगले ही पल उसके चेहरे पर सवालिया एक्सप्रेशन आ गए. उसने अपनी आंखों से आंसू साफ किए और इधर- उधर देखने लगा. जब उसे कुछ देर सभी ओर देखने पर कोई नजर नहीं आया, तो उसने एक बार फिर से अपना सिर गाडी के बैक रेस्ट पर लगाकर ऊपर आसमान की तरफ देखने लगा. इस वक्त अध्यक्ष की आंखें हद से ज्यादा लाल थी.

अभी वह एक बार फिर से अपनी सोच में डूबने ही वाला था कि तभी उसके कानों में किसी के सिसकने की आवाज आई. जैसे ही उसके कानों में किसी के सिसकने की आवाज पडी, तो उसकी आंखें एक बार फिर से बडी हो गई. अब उसने दोबारा से अपना सिर ऊपर की तरफ उठाया और इधर- उधर देखने लगा. इधर- उधर देखते हुए ही उसने गाडी का दरवाजा खोला और अपने आसपास देखने लगा. आसपास देखते हुए भी उसे एक अजीब सा डर महसूस हो रहा था. वह डरते हुए बोला, कहीं मैं किसी डायन की पहाडी पर तो नहीं आ गया. मैंने सुना है, इस वक्त डायन पहाडियों पर घूमती है। इतना कहते हुए अध्यक्ष के चेहरे का रंग उड चुका था. अभी कुछ देर पहले वह अपने इमोशंस को कंट्रोल नहीं कर पा रहा था, लेकिन अब उसका चेहरा पूरी तरह से डर से भर चुका था.

तभी उसके कानों में फिर से किसी के रोने की आवाज पडी. रोने की आवाज सुनकर उसके हाथ पैर पूरी तरह से ठंडे पड चुके थे. वह जल्दी से गाडी की तरफ जाने को हुआ कि तभी उसके कानों में पायल की आवाज तेज हो चुकी थी. जैसे ही वह गाडी की तरफ बढा कि तभी वहां पर एक लडकी दिखी, जिसके लंबे बाल उसके चेहरे पर आ रहे थे. वह भागते हुए पहाडी की तरफ आ रही थी. किसी लडकी के इतने लंबे बाल देखकर और वह भी उसके चेहरे पर, अध्यक्ष की मानो सिट्टी पिट्टी गुल हो गई.

डर के मारे उसने अपने कदम पीछे ले लिए. जैसे- जैसे वह लडकी अध्यक्ष के पास आ रही थी, अध्यक्ष के दिल की धडकन जैसे धडकने से इनकार कर रही थी. उसके माथे पर पसीना आने शुरू हो गया था. जैसे ही वह लडकी बिल्कुल अध्यक्ष के पास आई, अध्यक्ष ने अपने कानों पर हाथ रखकर जोरों से चिल्लाया. वही वह लडकी, जो रोते हुए भागते हुए पहाडी की तरफ आ रही थी. उसने एक नजर अध्यक्ष की तरफ देखा, लेकिन अपने आंसुओं को पोंछते हुए दोबारा से पहाडी की चोटी की तरफ अपने कदम बढा दिए. वही अध्यक्ष, जो कि अपने कानों पर हाथ रखकर चिल्ला रहा था. वह तकरीबन पाँच सेकंड ऐसे ही रहा. जब उसे कुछ भी दर्द का एहसास नहीं हुआ, तो उसने अपनी आंखें खोलकर इधर- उधर देखा, तो उसकी आंखें बडी हो गई. क्योंकि वह लडकी, जो अभी- अभी भाग कर आ रही थी, वह सीधा पहाडी की चोटी ओर बढ चुकी थी. वह उसकी चोटी पर पहुंचने ही वाली थी ऐसा लग रहा था, जैसे वह चोटी से छलांग लगाने वाली हो.

उस लडकी को इस तरह से भागता हुआ देखकर वह इतना तो समझ चुका था कि वह लडकी कोई डायन वायन तो नहीं थी. इसीलिए वह जल्दी से उस लडकी के पीछे भागा. लेकिन जब तक वह उसके करीब आता, वह लडकी जल्दी से उस पहाडी की चोटी से कूद गई. अभी वह गिरती, उससे पहले ही अध्यक्ष ने उसका हाथ पूरी तरह से अपने हाथ में पकड लिया. वह पहाडी की चोटी पर लटक गई जैसे ही वह पहाडी की चोटी पर लटका, उसका गोरा चेहरा अध्यक्ष के सामने था. एक पल के लिए अध्यक्ष उसका चेहरा देखता ही रह गया.

इस वक्त अध्यक्ष का दिल जैसे जोर- जोरों से धक- धक करने लगा. वह बस उसकी तरफ देखता ही रह गया. वही वह लडकी जोर से चिल्ला कर रोते हुए बोली, खनक को छोडो, खनक को छोडो, खनक मर जाना चाहती है। इतना कहते हुए वह एक हाथ से लगातार अपने आंसुओं को साफ किए जा रही थी. उसका वह लाल परेशान चेहरा आज बहुत कुछ बयां कर रहा था, लेकिन क्या, यह तो खनक ही जाने.

वहीं दूसरी तरफ,

अरमान की गाडी एक कसीनो के आगे आकर रुकी. उस कसीनो को देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे कि वह काफी ज्यादा लग्जरियस था. वहां पर काफी रईस खानदान के लडके आते होंगे उस कसीनो के बाहर काफी ज्यादा बाउंसर खडे थे. जैसे ही उन बाउंसर ने अरमान को देखा, तो उन्होंने जल्दी से अरमान के आगे सिर झुका लिया. वही अरमान हमेशा की तरह, उसका चेहरा पूरी तरह से एक्सप्रेशन लैस था. उसे तो जैसे किसी के भी कुछ कहने से कोई फर्क ही नहीं पडता था. अरमान ने अब अपने कदम अंदर की तरफ बढा दिए. यह कसीनो अरमान का खुद का कसीनो था और पिछले पाँच सालों से उसने इस कसीनो को अपने बलबूते पर इस कगार पर लाकर खडा किया था. यहीं पर ही लडकियों की तस्करी, ओर भी कई रैकेट चलाए जा रहे थे. आज भी अरमान यहां काम को करने और लडकियों की डील फाइनल करने आया था. उसके बाद उसे ड्रग्स की शिप पर भी जाना था.

अरमान, जो की कसीनो के वीआईपी एरिया में जाकर नीचे बेसमेंट में पहुंच चुका था. उस बेसमेंट में उसने अपनी काली दुनिया के कुछ रहस्य छुपा कर रखे थे. वैसे तो यह पूरा कसीनो ही काली दुनिया का उसका काला चिट्ठा था. लेकिन इस कसीनो के अलावा भी उसके और भी काले सच थे. अरमान अब पूरी तरह से बेसमेंट में आकर एक किंग साइज सोफा पर बैठ गया. इस वक्त वहां पर एक शख्स जमीन पर खून से लथपथ लेटा हुआ था. उसे देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ने उसको बहुत ज्यादा मारा हो. मार मार कर उसकी चमडी उधेड दी हो. तभी उस शख्स के कानों में अरमान की आवाज पडी, कैसे हो कर्मा?

तुमने तो कहा था कि तुम मुझे जमीन में गाडने वाले हो. लेकिन देखो, आज मैं तुम्हें खुद जमीन में गाडने आया हूं। इतना कहते हुए अरमान के चेहरे पर डेविल एक्सप्रेशन थे. वह डेविल एक्सप्रेशन इस कदर थे कि सामने वाले की जान लेने के लिए काफी थे. वही कर्मा अपने सामने अरमान को देखकर दांत पीते हुए बोला, हो लो खुश, कितने दिन हो लोगे? सुना है तुम्हारी कमजोरी भी है? कर्मा ने अभी इतना ही कहा था कि तभी वहां पर एक गन शॉट की आवाज हुई. जिससे अगले ही पल कर्मा की डेड बॉडी वहीं पर जमीन पर पडी हुई थी.

अरमान की गहरी नजरे इस वक्त कर्मा की डेड बॉडी पर थी. वह कर्मा की बॉडी की तरफ देखते हुए बोला, उस तक पहुंचने की इजाजत तो मैंने हवा तक को नहीं दी, और तुम जैसे तो.

इतना कहकर अरमान चुप हो गया. लेकिन अरमान की लाल आंखें ही बता सकती थी कि इस वक्त उसका गुस्सा Kiss लेवल पर था.

अब उसने पलट कर जावेद की तरफ देखा. जैसे ही जावेद ने अरमान की नजरे खुद पर महसूस की, वह जल्दी से हडबडा कर बोला, वह बॉस, लडकियां रेडी है. वह पिछले Room में है। इतना कह कर जावेद ने अरमान के आगे सिर झुका लिया. वही अरमान अब अपनी जगह पर खडा हुआ और अपने कदम दूसरे Room की तरफ बढा दिए.

वहीं दूसरी तरफ,

एक Room में बहुत सी लडकियां बंद की गई थी, जो कि लगभग से बीस तेईस साल की होगी. कुछ तो उससे भी कम की थी. कुछ तो सोलह सत्रह साल की भी थी. उन लडकियों में से एक लडकी बेहद खूबसूरत एक साइड पर खडी थी. उस लडकी की आंखों में आंसू लबालब बहे जा रहे थे. उसका दिल कर रहा था कि कमरे की दीवारों में छेद हो जाए और वह उसी में गड जाए. इस वक्त उस लडकी को जबरदस्ती एक ड्रेस पहनाई गई थी, जो वह पूरी तरह से नीचे खीं

च रही थी. वह शर्म से डूब कर मरे जा रही थी.

To be continue.

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