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I love you naa

4 साल बाद,,

एक छोटे से फ्लैट में एक 3 साल का लड़का जो की बेड पर लेटा हुआ था। और उसकी आंखें पूरी तरह से बंद थी। वह लगातार अपनी आंखें खोलने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसे अपनी आंखें खोली नहीं जा रही थी। उस लड़के का चेहरा पूरी तरह से पीला पड़ चुका था।उसे इस वक्त हद से ज्यादा फीवर था और एक लड़की उसके माथे पर ठंडे पानी की पट्टियां कर रही थी। और इस वक्त उसे लड़की के चेहरे पर परेशानी झलक रही थी। वह लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली कुछ नहीं होगा तुम्हें मेरे बच्चे अभी ठीक हो जाएगा बस अपनी आंखें खोलो।

तभी पीछे से एक औरत की आवाज आई। कल रात ही तुझे बोला था इस दवाई दिला दे पर तुम भी सुनती कहां है। तुझे तो अपने काम की पड़ी रहती काम काम काम,, उसे औरत की बात पर वह लड़की जो कि उसे लड़के के माथे पर पट्टियां कर रही थी वह तड़प उठी,,, और उसकी आंखों में इनकी नामी छाने लगी वह रोते हुए बोली कैसी बातें करती है मां,,, मेरा बच्चा है वो,, अगर मैं काम करने नहीं जाऊंगी तो वह स्कूल कैसे जाएगा,, तभी वह औरत जो उसे लड़की को डांट रही थी,,

हां जाना काम पर अब भुगत,, देख मेरे फूल जैसे बच्चे का क्या हाल हो गया है बुखार से कितना तप रहा है। इतना कहते हुए वह औरत जो की 50-55 साल की थी। वह से छोटे से बच्चों के पास आकर दूसरी तरफ से बैठ गई और उसे लड़की के हाथ से पट्टी छीन कर अपने हाथ में लेकर उसे लड़के के माथे पर रखने लगी,, वही वह लड़की फीका सा मुस्कुरा कर बोली मां,, आपको बुरा नहीं लगता क्या,, उसकी बात पर वह औरत जो की उसे लड़के के माथे पर पट्टियां कर रही थी उनके हाथ रुक गए और अब उनकी आंखों में नमी तैरने लगी,, उन्होंने अब सामने बैठी लड़की की तरफ देखा जो कोई और नहीं बल्कि ध्वनि थी।

और जो औरत उसके सामने बैठी थी वह ध्वनि की मॉम कुसुम जी थी। कुसुम जी अब नम आंखों से उसे देखते हुए उन्होंने एक हाथ उसके गाल पर रखते हुए बोली इसमें तेरी क्या गलती मेरी बच्ची जब तेरा बलात्कार हुआ,,, उसकी बात पर ध्वनि की आंखों में आंसू लबालब बहने लगे,, वह रोते हुए बोली मॉम जो हुआ सो हुआ लेकिन थी तो एक गलती ही ना,, अब औरत गहरी सांस लेकर बोली बस हो गया तुझे कहा ना जो भी था एक गलती था अब उसे भूल जा,, और अब वह इंसान जिंदा ही नहीं है अब अपने आगे की जिंदगी की सोच,, इतना कहकर उन्होंने उसके सर पर बड़े प्यार से हाथ फेरा,, और बड़े प्यार से बोली चल जा सुबह के 9 बजने को आ रहे हैं।

तेरे काम पर जाने का वक्त हो गया है तभी ध्वनि नहीं मॉम आज में नहीं जाऊंगी अरिहंत को मेरी जरूरत है। तभी उसकी मॉम पागल हो गई है क्या आज छुट्टी करेंगी तो वह तेरे पैसे काट लेगा और अरिहंत की दवाई ली आई है ना तू बस फर्क पड़ जाएगा उसे कुछ देर की बात है अभी तक रहा है दवाई दी है ना तूने,, तो फर्क पड़ जाएगा उसे अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अरिहंत जो की ध्वनि का बेटा था। उसने धीरे-धीरे कर आंखें खोली और अपनी नानी नानी उंगलियों से अपनी मॉम ध्वनि के हाथों को पड़कर, बड़े प्यार से बोल मामा अनिहंत टीक है आप जाओ,,

उसे छोटे से बच्चे को इस तरह से देखकर ध्वनि की आंखों में नमी और ज्यादा हो गई ऐसा लग रहा था कभी भी उसकी नमी उसके गालों पर आ सकती थी। उसे अपने बेटे पर बहुत प्राउड फील हो रहा था कि छोटा सा बच्चा अपनी मां को कितना ज्यादा समझता है और यह सोचकर ही उसकी आंखों में नमी उसके गालों पर आ चुकी थी अब अरिहंत उठने को हुआ तभी ध्वनि उसे ना में सिर हिलाते हुए बोली नहीं बेटा उठो नहीं अभी रेस्ट करो मामा आपको शाम को मिलेगी ठीक है इतना कह कर ध्वनि ने उसके माथे को चूम लिया और अब अपनी जगह से खड़ी हुई और पर्स ढूंढने लगी जैसे ही उसने पर्स ढूंढने को हुई तो ध्वनि की मॉम कुसुम जी उसे घूरते हुए बोली फिर से तूने कर दिया ना वही कांड अपना पर्स इधर-उधर फेंक देती और मैं ढूंढ कर दूं तुझे,,

इतना कहकर वह अपनी जगह से उठी वही ध्वनि मुंह बनाते हुए बोली मॉम आप भी ना अब मैं क्या करूं रहती हूं बिजी हूं रात को आता हूं तो अरिहंत के साथ लग जाती हूं तो मेरा तो वक्त गया ना,, उसकी बात पर कुसुम जी मुंह बनाकर बोली हां हां बड़ी आई अरिहंत को संभालने वाली चल मेरे बच्चे का झूठा नाम मत लगा,, इतना कहकर कुसुम जी ने अब उसका पर्स उसके हाथ में पकड़ा दिया और बोली चल जल्दी जा कम पर नहीं तो बस तेरा बोलेगा निठल्लू कहीं का,,

उसकी बात पर ध्वनि दांत निकलते हुए बोली अच्छा-अच्छा जा रही हूं मन इतना कहकर जल्दी से ध्वनि ने अपने कदम बाहर की तरफ बढ़ा दिए कुछ ही देर में ध्वनि एक ऑटो लेकर वहां से निकल गई,,

तकरीबन आधे घंटे बाद उसका ऑटो,,

होटल पैराडाइस के आगे आकर रुका,,

अगले ही पल उसने अपना बैग उठाया और अंदर की तरफ चली गई,, अंदर जाते ही वहां पर एक लड़का,, जो कि ध्वनि का दोस्त हरप्रीत था वह उसे देखकर बोला तूने आज बड़ी देर कर दी ध्वनि क्या बात हुई,, हरप्रीत की बात पर ध्वनि परेशान होते हुए बोली वह मेरे बेटे को बहुत तेज बुखार था इसीलिए उसकी बात सुनकर हरप्रीत परेशानी से बोला आप वह कैसा है। उसकी बात पर धोनी ने हां में से हिलाते हुए बोली अब ठीक है तभी ध्वनि उसकी तरफ देखकर बोली boss आए तो नहीं ना,, तभी हरप्रीत नाम है सिर हिलाते हो बोल नहीं बस थोड़ी देर में आने वाले हैं उनका पता नहीं कोई दोस्त आने वाला है जो की काफी पुराना दोस्त है पता नहीं क्या नाम बता रहे थे उनका मुझे तो नाम ही याद भूल गया,,,

तभी ध्वनि बोली अच्छा ठीक है थोड़ी बहुत डेकोरेशन हो गई क्या अंदर की,, ध्वनि की बात पर हरप्रीत हमें सिर हिलाते हुए बस बस हो गई अभी वह बोल ही रहे थे कि तभी 5,,6 गाड़ियां लाइन वाइज होटल के आगे आकर रुक गई, उन गाड़ी में से एक लड़का बाहर निकाल,, जो की कोई और नहीं इस होटल का मालिक,, प्रतीक खन्ना था। प्रतीक आगे की तरफ आया तो उसकी सीधी नजर ध्वनि पर गई एक पल के लिए उसकी नजर ध्वनि पर ठहर गई इस वक्त ध्वनि ने,, फ्रॉक सूट पहना हुआ था जो कि उसे पर बेहद खूबसूरत लग रहा था प्रतीक अब उसके करीब आकर उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला तुम आज फिर लेट ही होना,,

प्रतीक की बात पर ध्वनि का चेहरा मुरझा गया तभी हरप्रीत प्रतीक से वह बस उनकी अभी वह बोल ही रहा था कि तभी प्रतीक गुस्से में गरजते हुए मैंने तुमसे नहीं कुछ पूछा है और जो अंदर जाकर काम बहुत है मुझे इससे बात करनी है आज,, उसकी बात पर हरप्रीत अब चुप हो गया और उसने सर झुका लिया और हां में से हिलाते हुए वहां से अंदर की तरफ चला गया वहीं प्रतीक अब उसकी तरफ देखते हुए चलो मेरे साथ ऑफिस में इतना कहते हुए प्रतीक ने ध्वनि का हाथ पकड़ा और उसे खींचते हुए ऑफिस की तरफ ले गया वहीं ध्वनि तो बस हैरानी से प्रतीक की तरफ देखे जा रही थी,,

जिस तरह से प्रतीक ने उसका हाथ पकड़ा था उसे बहुत ज्यादा अजीब लग रहा था। तकरीबन 5 मिनट में ही प्रतीक उसे अपने ऑफिस में लेकर आया और अगले ही पल उसने रिमोट से दरवाजा बंद कर ध्वनि को डोर से सटा दिया,, और खुद उसके ऊपर झुक गया जिस तरह से प्रतीक उसके ऊपर झुका था। ध्वनि को बहुत ज्यादा अजीब लग रहा था उसने अपनी नज़रें पूरी तरह से झुका ली थी। वह लड़का लड़की हुई आवाज में बोली ऐसा मत कीजिए प्रतीक मुझे अच्छा नहीं लग रहा तभी प्रतीक मुंह बनाते हुए बोला और कम ऑन ध्वनि मैं तुमसे कितनी बार कहा है आई लव यू ना क्यों नहीं मेरा प्रपोज एक्सेप्ट कर लेती यह सारा होटल ही तुम्हारा नाम कर दूंगा,,

उसकी बात पर ध्वनि ने अपनी नज़रें और भी नीचे झुकते हुए बोली तुम भी क्यों नहीं समझते मैं एक बच्चे की मां हूं और मैं ऐसे ही तुमसे,, अभी वह बोल ही रही थी की प्रतीक ने उसकी कमर पर हाथ रखकर और भी करीब हो गया और उसके चेहरे पर धीरे-धीरे झुकने लगा जिससे ध्वनि का दिल जोरो से धक-धक करने ल

गा,,

To be continue....

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