
Antonio,,,
धानी इस वक्त बेड पर उल्टे मुंह लेटी हुई थी। और मृत्युंजय उसकी पीठ पर पूरी तरह से झुका हुआ था और अभी भी उसे ass fuck कर रहा था। दोनों के बदले पसीने से इस वक्त लथपथ हुए पड़े थे। मृत्युंजय तो इस वक्त पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और अब उसका बदन पूरी तरह से अकड़ने लग गया था। देखते ही देखते वो growl करने लगा था। इस वक्त मृत्युंजय की सांस हद से ज्यादा गहरी चल रही थी वही ध्वनि ने अपने हाथों को पूरी तरह से तकिए पर कस रखा था क्योंकि,, उसे अभी भी हल्का दर्द महसूस हो रहा था। वही मृत्युंजय अब पूरी तरह से वाइल्ड हो चुका था वह लगातार अपने dick को उसकी ass में मूव करते हुए,, वह पिछले दो घंटे से,, धानी को ass fuck कर रहा था और अब उसकी मूवमेंट और भी ज्यादा तेज हो चुकी थी जिसे धानी का चेहरा लाल होने लगा था।
Oooohhhhh fuck shygirl oooooohhhhhhhhhh your fucking little hole make me crazy,,ooooohhhhh yeah.....dammam........ooooohhhhh god....
कितना कहते हुए उसने तीन हार्ड स्टॉक मारे,, और अब मृत्युंजय का सीमन धानी की ass में निकल चुका था। धानी को अपनी ass में sticky cmm feel हो रहा था। अभी भी मृत्युंजय का dick उसकी ass में ही था। मृत्युंजय अब पूरी तरह से धानी के ऊपर निढाल होकर लेटा हुआ था। और उसकी गर्म सांसे धानी की गर्दन पर पढ़ रही थी। जिस वजह से धानी के रोंगटे एक बार फिर से खड़े होने शुरू हो गए थे।
वही मृत्युंजय अबाउट उसके साइड में लेता और अगले ही पल उसने उसे बाहों में भरा और कुछ ही देर में वह गहरी नींद में चला गया,, जब धानी को उसकी गहरी सांस अपने गर्दन पर महसूस हुई तो उसने पलट कर मृत्युंजय की तरफ देखा,, और मृत्युंजय के चेहरे को देखकर अब उसकी आंखों में एक बार फिर से नमी उतरने लगी थी। वही मृत्युंजय ना जाने कितनी ही देर बाद ऐसे चैन की नींद सोया था पिछले दो साल से वह आराम से सोया तक नहीं था हर रात तो वह जाकर बीतता था अगर सोता भी था तो एक-दो घंटे के लिए अपनी नींद लेट और फिर से उठ जाता जिस वजह से उसकी आंखें हद से ज्यादा लाल हो चुकी थी,,
मैं दूसरी तरफ धानी अब उसे आंखों में नमी भरकर देख रही थी। वह तड़पकर बोली मैं नहीं जानती कि past में क्या हुआ लेकिन पता नहीं क्यों यह दिल आपके साथ जीने को करता है और अब मैं आपके साथ जीना चाहती हूं इतना कहकर उसने मृत्युंजय का चेहरा अपने हाथों में भारत और उसके माथे को चूम लिया। और उसकी बाहों में सिमट गई और देखते ही देखते धानी भी गहरी नींद में चली गई।
इन दोनों की नींद आज इतनी सुकून भरी थी कि शायद ही इन्होंने कभी इतनी गहरी और सुकून भरी नींद ली होगी इन पिछले दो सालों में तो बिल्कुल भी नहीं आज दोनों की तड़प शांत हो चुकी थी। दोनों के बदन एक हो चुके थे और दर्द जुड़ चुके थे एक बार फिर से,,
अगली सुबह,,
धानी की आंख मृत्युंजय के फोन बजाने की आवाज से खुली और अगले ही पल उसने जल्दी से फोन पर हाथ रखकर उसे साइलेंट कर दिया क्योंकि मृत्युंजय इस वक्त गहरी नींद में सो रहा था। अब उसने मृत्युंजय के फोन के तरफ देखा तो एक अननोन नंबर से फोन आ रहा था उस नंबर को,, देखकर धानी के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आ गई क्योंकि बहुत कम था कि मृत्युंजय के फोन पर कोई अननोन नंबर पर कॉल आए और अब उसने फोन उठाने को हुई कि तभी मृत्युंजय ने उसके हाथ से अपना फोन लिया,,
और उठकर बालकनी की तरफ चला गया इस वक्त उसके बदन पर कोई भी कपड़ा नहीं था जिस वजह से जाते टाइम उसने साइड पर रखा हुआ टावर भी अपनी कमर पर लपेट लिया था। मृत्युंजय को धानी के हाथों से यूं फोन चिंता देख धानी के चेहरे पर हैरानी भरे एक्सप्रेशन आ चुके थे। इस वक्त वह हैरानी से मृत्युंजय की तरफ देख रही थी जो की बालकनी में किसी से बात कर रहा था लेकिन उसका चेहरा बाहर की तरफ था।
वही मृत्युंजय जो कि किसी से बात कर रहा था इस वक्त उसकी नज़रें पूरी तरह से सर्द हो चुकी थी और जबड़े पूरी तरह से कस चुके थे। और अब अगले ही पल उसने फोन काटा और देखते ही देखते हो अंदर की तरफ आया और अपने कपड़े पहनने लगा मृत्युंजय को यूं अपने कपड़े पहना देखा धानी और भी ज्यादा हैरान हो गई। वह अब ब्लैंकेट को अपने बदन पर लपेटे हुए मृत्युंजय की तरफ आई और उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोली क्या हुआ मिस्टर राठौर,, आप.....
अभी वह बोल ही रही थी कि मृत्युंजय ने उसका हाथ झटक और बाहर की तरफ जाने लगा कि तभी उसकी पॉकेट में से उसका फोन जमीन पर गिर गया और उसने यह चीज ध्यान ही नहीं दी,, देखते ही देखते वह कमरे से बाहर निकल गया और उसको यूं देखकर धानी का दिल एक पल के लिए धक्का सा रह गया। इस वक्त धानी की आंखों में आंसू तेजी से बह रहे थे उसे अपने दिल में एक अजीब सी तड़प महसूस हो रही थी। जो वह पिछले दो सालों से महसूस कर रही थी लेकिन कल रात मृत्युंजय के पास आने पर उसकी उसे तड़प को राहत मिल गई थी लेकिन अब एक बार फिर से उसका दिल तड़प उठा था तभी एक बार फिर से मृत्युंजय का फोन वाइब्रेट हुआ और उसे फोन को देखकर उसकी नज़रें जमीन पर गई और उसने जल्दी से वह फोन उठाया और एक बार फिर से इस नंबर से मृत्युंजय को कॉल आ रहा था।
अब धानी ने उसे कॉल को कान से लगाए,, और अगले ही पल धानी की आंखें बड़ी हो गई। वह रोते हुए बोली नहीं नहीं आप ऐसा नहीं कर सकते,, आप मेरी मिस्टर राठौर है सिर्फ मेरे किसी और के नहीं हो सकते आप,,
No.....no..... नहीईई....
इतना कहते हुए उसने फोन समीर पर पटक दिया था और जोर से चिल्ला रही थी और उसका चेहरा रोने की वजह से पूरी तरह से लाल हो चुका था।
To be continue.... ।







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