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Ashki ka darr

त्रेहान फार्महाउस,

अमानत जो कि अभी- अभी बालकनी के दरवाजे पर आकर खडा हुआ था. उसने अश्की की हर एक बात बात साफ- साफ सुनी थी. उसने जब अपना नाम अश्की के मुंह से सुना तो एक पल के लिए उसकी नजरें अश्की पर गहरी हो गई, और अब उसने बेहद गहरी आवाज में बोला और मैं अच्छा हो भी नहीं सकता, दिलरुबा.

अरमान की आवाज सुनकर अश्की की सांस उसके जैसे हलक में ही अटक गई, और हाथ पैर पूरी तरह से ठंडे पड गए, उसके माथे पर अब पसीने की बूंदे एक बार फिर से उभरने लगी थी और आंखों में आंसू जैसे वहीं पर जम गए थे, उसने अब पलट कर अरमान की तरफ देखा, वहीं अरमान अभी भी उसे गहरी नजरों से घूर रहा था. अरमान को यूं खुद को घूरता पाकर अश्की की सांस जैसे फूलने लगी, जिस तरह से अश्की की सांस इस वक्त फूल रही थी! साफ पता चल रहा था कि उसे इस वक्त अरमान से कितना ज्यादा डर लग रहा था और अरमान उसके डर को भांप भी रहा था.

और अब अरमान जो कि बालकनी के दरवाजे से टेक लगाकर खडा था अब वह सीधा होकर खडा हुआ और उसे गहरी नजरों से देखते हुए उसने अपने कदम अश्की की तरफ बढा दिए, वहीं अमानत को खुद की तरफ आता देख अश्की की सांस जैसे हलक में अटक गई एक बार फिर से उसकी आंखों के सामने कल का नजारा घूमने लगा जब अरमान ने उसकी आंखों के सामने किसी शख्स को मारा था. उस शख्स की मौत का मंजर याद करके अश्की का दिल एक बार फिर से कांपने लगा, एक बार फिर से उसकी आंखें खौफ से भर गई,

वहीं अरमान अब अश्की की तरफ कदम बढा रहा था तो वहीं अश्की अपने कदम पीछे की तरफ ले रही थी. देखते ही देखते अश्की पूरी तरह से रेलिंग से सट चुकी थी और अब पीछे अकेली रेलिंग को देखकर अश्की अब कांपने लगी, अरमान को अपने पास आता देख अश्की के रोंगटे खडे हो रहे थे. कुछ ही सेकंड में अरमान बिल्कुल उसके बराबर आकर खडा हुआ और उसे अपनी गहरी नजरों से देख उसने अपना हाथ बेहद सिडक्टिव वे में अश्की के चेहरे पर रखा तो आशिक का चेहरा कांपने लगा वह तिरछी नजरों से उसके हाथ की तरफ देख रही थी जो कि अरमान उसके चेहरे पर फेर रहा था,

अगले ही पल अरमान उसके होठों पर अपना अंगूठा रगडते हुए बोला वैसे मेरा नाम तुम्हारी जुबान पर बहुत सेक्सी लगता है. उसकी बात सुनकर अश्की की सांसों ने और भी तेजी से शोर मचाना शुरू कर दिया था. और अब एक बार फिर से उसकी आंखों में नमी तैरने लगी थी. और अब वह अपनी लडखडाती हुई आवाज में बोली नहीं वो वो मैं वो मैं, बस.

अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अरमान सपाट लहजे में उसे ऊपर से नीचे देखते हुए कपडे चेंज करो और अच्छे से कपडे पहनो, आज तुम मेरे साथ त्रेहान पैलेस चल रही हो त्रेहान पैलेस का नाम सुनकर, अश्की के चेहरे पर सवालियां एक्सप्रेशन आ गए, उसके सवालियां एक्सप्रेशन को देखकर अरमान उसके चेहरे पर झुका, और उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला, ऐसे सवालियां नजरों से मत देखा करो मुझे दिलरुबा सवालों का जवाब ढूंढोगी तो नहीं मिलेगा, समझने की कोशिश करो उसी में तुम्हारी भलाई है.

उसकी बात सुनकर अश्की ने अपनी नजरें पूरी तरह से झुका ली जिस तरह से अश्की ने अपनी नजरें झुकाई थी अरमान की नजरे उस पर ठहर सी गई थी. एक पल के लिए उसे अपने दिल में एक हलचल सी महसूस हुई लेकिन उसने पूरी तरह से उस चीज को इग्नोर कर अश्की को गहरी नजरों से देखते हुए बोला, जब मैं बात करता हूं तो नजरे कम झुकाया करो मेरी आंखों में देखकर बात किया करो, अरमान की बात पर अश्की ने हां में सिर हिला दिया लेकिन उसकी आंखों में अभी भी नमी तैर रही थी उसने अपनी साडी को अपनी मुट्ठी में भींच रखा था.

इस वक्त उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसके पैरों में जान ही ना हो जब तक अरमान उसके पास खडा रहा उसकी सांसे उसके गले में ही अटकी रही अब अरमान पीछे की तरफ हटा और बाहर की तरफ जाते हुए बोला पाँच मिनट है तुम्हारे पास जल्दी से रेडी होकर बाहर आ जाओ, इतना कहकर वह Room से बाहर की तरफ चला गया उसके जाते ही अश्की ने अब दरवाजे की तरफ देखा और अपने मुंह पर हाथ रखकर फूट- फूट कर रोने लगी. इस वक्त वही जानती थी कि वह अरमान के सामने कैसे खडी थी उसे अरमान से कितना ज्यादा डर लग रहा था.

उसने अपने मुंह पर हाथ रखकर अपने मुंह को अच्छी तरह से दबाया हुआ था ताकि उसकी आवाज Room से बाहर ना जा सके अब वह रोते- रोते वहीं जमीन पर बैठ चुकी थी हालांकि अरमान ने उसे सिर्फ पाँच मिनट का वक्त दिया था. वह रोते हुए खुद में ही बोली क्यों भगवान क्यों मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया और क्यों इस रक्षस के पल्ले मुझे बांध दिया, इतना भयानक दरिंदा मैंने आज तक कभी नहीं देखा इतना कहते हुए उसकी आंखों के सामने कल वाला भयानक मंजर एक बार फिर से घूम गया और उस मंजर को याद कर एक बार फिर से अश्की कांप उठी,

अब उसे याद आया कि अरमान ने उसे पाँच मिनट का वक्त दिया है, उसे याद करते ही अब वह जल्दी से हडबडा कर अपनी जगह से उठकर अंदर की तरफ आई और तैयार होने लगी,

वहीं दूसरी तरफ,

अरमान जो कि इस वक्त गाडी के पीछे की तरफ बैठा हुआ था. इस वक्त वह अश्की का वेट कर रहा था और उसकी नजरें इस वक्त फोन में टिकी हुई थी. गाडी में आगे ड्राइवर भी बैठा हुआ था जो कि बाहर की तरफ देख रहा था. तकरीबन पंद्रह मिनट बाद अश्की घर से बाहर निकली, अश्की को बाहर निकलता देख ड्राइवर ने तुरंत पार्टीशन ऑन कर दिया, वहीं अरमान जो कि फोन में कुछ कर रहा था. उसके कानों में अश्की की पायल की आवाज सुनाई तो दी लेकिन उसने अपनी नजरे उठाकर ऊपर की तरफ नहीं देखा, वह कंटिन्यूस फोन में कुछ कर रहा था.

अश्की जब गाडी के पास आई वहीं अरमान जो कब से फोन में लगा हुआ था अब उसने फोन को साइड पर फेंका और अगले ही पल उसकी नजर अश्की पर गई, अश्की को देख एक पल के लिए अरमान की नजरे उस पर ठहर सी गई. अश्की के वह लंबे बाल जो कि उसकी कमर से नीचे तक आ रहे थे थोडे से बाल उसने दोनों तरफ से आगे किए हुए थे. और ऊपर से रेड Color की साडी जो उसने पहले ही पहनी हुई थी उसे थोडा सा ठीक कर लिया था और ऊपर से रेड लिपस्टिक और मांग में भरकर सिंदूर और छोटी सी बिंदी, इसके अलावा अश्की ने कुछ नहीं चेहरे पर लगाया हुआ था और वह हद से ज्यादा खूबसूरत लग रही थी. भाई अरमान तो बस उसे देखे ही रह गया था.

उसका दिल कर रहा था कि वह दोबारा से एक बार फिर से अश्की को अंदर की तरफ ले जाए, और अपने बेड पर लेजाकर बेड पर पटक दे और फिर उसके ऊपर वह सितम ढाए कि अश्की बेड से ही ना उठ पाए, लेकिन अगले ही पल उसने अपनी नजर अश्की से हटा गाडी से उतरते हुए दूसरी तरफ जाकर दरवाजा खोला जिसे देखकर एक पल के लिए अश्की उसे देखते रह गई कि अरमान Kiss तरह से उसे डोमिनेट भी करता था और पैंपर भी पहले भी अरमान ने उसे अपनी गोद में बिठाकर खाना खिलाया था और अब इस तरह से दरवाजा खोलना, उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अरमान का असली रूप है क्या,

वह जो कल उसने जब उस शख्स को मारते हुए अरमान को देखा था या फिर वह जो आज सुबह जिस तरह से अरमान उसे खाना खिला रहा था. और अब दरवाजा खोल रहा था या फिर वह जब अध्यक्ष अश्की के पास आया था और अरमान अश्की को पूरी तरह से डोमिनेट कर रहा था. वह अरमान को समझने की कोशिश कर रही थी लेकिन उतना ही उसके लिए मुश्किल होता जा रहा था.

वह बस अपनी जगह पर खडी अपने ही ख्यालों में गुम थी. उसे यह भी नहीं पता था कि अरमान उसे इस वक्त गहरी नजरों से देख रहा था. तभी उसके कानों में अरमान की गहरी आवाज पडी. मत करो समझने की कोशिश मैं समझ में आने वाली चीज नहीं हूं. इतना कहकर उसकी आवाज बेहद गहरी थी जिसे सुनकर अश्की के रोंगटे खडे हो रहे थे. अब वह जल्दी से हडबडी से गाडी में आकर बैठी और अगले ही पल अरमान ने गाडी का दरवाजा बंद किया और दूसरी तरफ आकर बैठ गया.

गाडी में बैठते ही अरमान ने अश्की की कमर पर हाथ रखकर उसे अपनी गोद में खींच लिया और अगले ही पल अश्की उसकी गोद में बैठ गई, अरमान ने जिस तरह से अश्की को अपनी गोद में बिठाया था अश्की की धडकन एक पल के लिए skip हो गई थी. उसने अपना चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ झुका लिया था. वहीं अरमान उसको चेहरा झुकाते हुए देखकर उसकी नजरें उस पर और भी ज्यादा गहरी होने लगी थी. अश्की का दिल इस वक्त जोर- जोरों से धडक रहा था वह अरमान की गहरी नजर खुद पर बहुत अच्छी तरह से महसूस कर पा रही थी.

उसने अपनी साडी को अपने हाथों में भींच रखा था और अपनी आंखें भी कसकर बंद कर ली थी. दूसरी तरफ अरमान अब उसके चेहरे के ऊपर झुका और उसके कान के पास आकर हल्की सी गहरी सांस छोडते हुए उसने उसका कान अपने होठों में हल्का सा दबाया और उसे चूमने लगा उसके कान को वह कुछ इस तरह से चूम रहा था कि अश्की की सांस हद से ज्यादा गहरी होनी शुरू हो गई थी. उसे अपने शरीर में एक अलग ही झुनझुनी सी उठती हुई महसूस हो रही थी.

वहीं अरमान अब लगातार उसके कान को चूमते हुए उसके गले तक आया और उसके गले को बेहद सिडक्टिव वे में अपनी जीभ चलाते हुए गहरी आवाज में बोला, बहुत जल्द तुम्हें इसकी आदत पड जाएगी दिलरुबा, उसकी बात सुनकर एक पल के लिए अश्की का दिल और भी तेजी से धडकने लगा, अब एक बार फिर से अरमान के होंठ अश्की की गर्दन पर चलने लगे थे.

दूसरी तरफ,

त्रेहान पैलेस में,

त्रेहान पैलेस की अपनी ही एक शख्सियत थी. त्रेहान पैलेस खुद में ही एक महल से कम नहीं था. त्रेहान पैलेस इतना ज्यादा बडा था कि पूरा मुंबई के बंगलो भी त्रेहान पैलेस के सामने छोटे थे. और त्रेहान पैलेस के चर्चे दूर- दूर तक सुनने को मिलते थे. त्रेहान पैलेस में जितनी भी चीज थी सब एंटीक पीस थी. जो कि बेहद महंगी किसी आम आदमी के लिए वह चीज किसी खजाने से कम नहीं थी. वहां की हर चीज का दाम करोडों में था.

त्रेहान पैलेस के centre hall में इतना बडा झूमर था कि उस झूमर की रोशनी पूरे हॉल में फैली हुई थी. और वहां का हाल किसी बडे गोदाम से भी बडा था. इस वक्त उस हाल में दो सोफा सेट लगे पडे थे. और दूसरी तरफ एक बूढी औरत जो कम से कम पचास- 55 साल की थी. वह बैठी हुई थी और उनके चेहरे पर इस वक्त गुस्से भरे भाव थे पास में खडा अध्यक्ष यह चीज देखकर उसके चेहरे पर भी परेशानी छलक रही थी.

वह धीरे से बोला लेकिन दादी अब भाई ने शादी कर ली तो क्या अभी वह बोल ही रहा था कि तभी सामने बैठी औरत जो कि, नियति त्रेहान थी. वह अध्यक्ष को अपना हाथ दिखाकर रोकते हुए बोली अब तुम हमे बताओगे कि हमें क्या करना है क्या नहीं, हमने जब कह दिया कि हमें यह शादी नहीं मंजूर तो मतलब नहीं मंजूर, ऐसे ही वह किसी लडकी को ला कर हमारे सिर पर थोप नहीं सकता, और किसने दी उसे इजाजत ऐसे शादी करने की, और रही बात जानवी की तो जानवी ने उसे रश्मि से शादी करने को कहा था ना कि ऐसे ही किसी लडकी को उठाने के लिए,

और हम इस शादी को बिल्कुल नहीं मानते, इतना कहते हुए उस औरत की आवाज बेहद सख्त थी. अभी वह औरत बोल ही रही थी कि तभी बाहर से कुछ गाडियों की आवाज आई और उन गाडियों की आवाज सुनकर उस औरत के भाव बादल गए,

To be continue.

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