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Asur ka gussa/ afsana ka sakoon

पठानी हाउस,,

असुर इस वक्त सोफा पर टेक लगाकर अपने दोनों हाथ सोफा की रेस्ट पर रखकर बेलिबास बैठा हुआ था। और इस वक्त उसका पूरा शरीर अकड़ा हुआ था। वहीं सामने बेड पर कनिका को उसने बैठाया हुआ था इस वक्त उसने बेड के साथ कनिका के हाथ और पैर बांधे हुए थे और वह भी पूरी तरह से बेलिबास थी । असुर उसे अपनी गहरी नजरों से देख रहा था उसकी नज़रें इस वक्त कनिका के ऊपर इतनी ज्यादा गहरी थी कि कनिका उसकी नज़रें खुद पर बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी।

लेकिन फिर भी कनिका ने अपनी नज़रें नीची नहीं की,, वहीं असुर ने अपने होंठ को अपने दांतों तले दबकर अब अपनी जगह से खड़ा हुआ और अपने कदम कनिका की तरफ बढ़ा दिए जैसे ही असुर ने अपने कदम कनिका की तरफ बढ़ाए,, कनिका का दिल तेजी से धक-धक करने लगा,, असुर को अपनी तरफ आता देखकर उसे कुछ-कुछ होने लगा था। लेकिन उसके दिमाग में अभी भी सीसी का ख्याल चल रहा था कि अगर सीसी को पता चल गया तो वह टूट जाएगी, कि असुर उसके साथ इस तरह के रिलेशनशिप में है।

उस चीज को सोचकर कनिका ने अब अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया,, कनिका को अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमाता देख,, असुर के चेहरे पर तिरछी मुस्कराहट तैर गई, असुर अब कनिका के पास आया और अगले ही पल वह कनिका के ऊपर झुका जिस तरह से असुर उसके पास आ रहा था कनिका की धड़कनें हद से ज्यादा शोर कर रही थी। जिसकी आवाज असुर को बाहर तक आ रही थी। असुर अब उसके ऊपर झुकते हुए उसके गाल पर हाथ रखकर उसने कनिका का चेहरा अपनी तरफ घुमाया,, और बेहद दिलकश अंदाज में बोला,, चेहरा दूसरी तरफ क्यों घूमा रही हो मेरी मीठी गोली,, जैसे ही कनिका ने असुर के मुंह से मीठी गोली सुना उसका दिल धक्क सा रह गया और उसकी आंखों में आंसू लबालब बहने लगे,,

जब से असुर उसे गलत समझने पर आया था तब से असुर ने उसे मीठी गोली कहकर नहीं पुकारा था और आज उसके मुंह से दोबारा से मीठी गोली सुनकर कनिका का दिल तड़प उठा था उसके कानों को जैसे सुकून मिल गया था क्योंकि वह कितनी देर से यह लव्ज़ असुर के मुंह से सुनना चाहती थी। लेकिन असुर ने यह शब्द बोला भी कब जब उन दोनों में कुछ नहीं हो सकता था असुर की शादी होने वाली थी यह सोच-सोच कर कनिका का दिमाग खराब हो रहा था वह रोते हुए असुर की तरफ देख मासूमियत से बोली आप बहुत बुरे हैं असुर बाबू बहुत बुरे हैं।

इतना कहते हुए अब उसका रोना तेज हो चुका था उसको इस तरह से रोता हुआ देखकर असुर को आज कुछ कुछ हो रहा था। अब उसने अपने अंगूठे को उसके गाल पर रखा उसके आंसू को साफ करते हुए,, अगर मैं बुरा हूं तो तुम ठीक कर दो ना बता दो सच्चाई आखिर सच्चाई है क्या?

क्या पता मैं ठीक हो जाऊं उसकी बात सुनकर कनिका की आंखें बड़ी हो गई,, अगले ही पल वो हड़बड़ा गई और उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घूमाते हुए बोली,, वह वह हमें किचन में काम है हमें खोल दीजिए प्लीज हमें जाना है प्लीज ऐसा मत कीजिए आपकी वाइफ है आप उनके पास जाइए उनको प्यार कीजिए यह क्या हरकत है असुर बाबू,, कनिका को बात बदलते देख असुर के जबड़े पूरी तरह से कस चुके थे। वह दांत पीसकर बोला बकवास बंद करो,, अब यही तुम्हारी औकात है समझी तुम,, क्या सोचा है तुमने कि तुम मुझे सच्चाई नहीं बताओगी तो मुझे सच्चाई नहीं पता चलेगी जिस दिन सच्चाई पता चल गई ना,,

एक एक को आग लगा दूंगा मैं,, उसकी बात सुनकर कनिका के रोंगटे खड़े हो रहे थे। वह अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में बोली कैसी सच्चाई असुर बाबू,, उसकी यह बात सुनकर असुर ने उसके गर्दन पर अपने हाथ रख दिए और अगले ही पल कनिका का चेहरा ऊपर की तरफ उठ गया,, वह दांत पीसकर बोला इतनी मासूम बनने की कोशिश मत करो,,, तभी कनिका बोली अगर मैं चालाक हूं आपको तो चलाक लड़कियों के पास भी नहीं आना चाहिए,,

इतना कहकर वह अपने हाथों को छुड़ाने की कोशिश करने लगी इस वक्त कनिका का दिल बुरी तरह से टूट रहा था और उसकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। क्योंकि कहीं ना कहीं उसे यह चीज बहुत ज्यादा तकलीफ दे रही थी कि असुर की नजरों में उसकी कीमत सिर्फ उसके बेड तक की रह गई थी। और दूसरा वह किसी और से शादी कर रहा था और यह चीज उसे अंदर तक तोड़ रही थी वह चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी।

वह मन ही मन बोली ,, आपका कोई कसूर नहीं असुर बाबू कसूर तो मेरा है। जो आपसे बेइंतहा इश्क कर बैठे दीवानी हूं ना मैं आपकी क्या करूं आपके सिवा कुछ सूझता भी तो नहीं,, लेकिन मैं आपको इस तरह से अपने पास नहीं आने दे सकती क्योंकि अगर यह सब चलता रहा तो बहुत बुरा हो जाएगा,, वह अब असुर की तरफ देखकर बोली प्लीज हमें छोड़ दीजिए असुर बाबू उसकी बात पर अब असुर ने उसके सिर के पीछे अपना हाथ ले जाकर उसके बालों को मुट्ठी में भरा और गहरी आवाज में बोला,,,

पहले मुझे सेटिस्फाइड करो फिर दफा हो जाना यहां से,, उसकी बात सुनकर कनिका को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके कानों में जलता हुआ लावा डाल दिया हो,, वह रोते हुए बोली आप ऐसे कैसे बोल सकते हैं असुर बाबू,, उसकी बात पर असुर दांत पीसकर बोला ठीक वैसे ही जैसे तुम किसी का कत्ल कर सकती हो,, असुर की बात सुनकर कनिका ने अपनी आंखें कसकर बंद कर ली,, क्योंकि वह अब असुर की और बात सुनना नहीं चाहती थी क्योंकि असुर जब भी उसे सुनाने पर आता था तो जली कटी सुनाता था लेकिन आज तो वह उसके दिल के जख्मों को कुरेद रहा था। अब असुर ने अगले ही पल कनिका के बालों को छोड़ा उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोलने को हुआ,,

कि तभी दरवाजे से सीसी की आवाज आई असुर असुर..

दरवाजा खोलो असुर मुझे तुमसे कोई जरूरी बात करनी है। जैसे ही सीसी की आवाज कनिका के कानों में पड़ी कनिका की आंखें बड़ी हो गई और दिल जैसे रुक सा गया,, उसने अब असुर की तरफ देखा जो बिना एक्सप्रेशन के कनिका की तरफ देख रहा था। वहीं कनिका का शरीर अब कांपने लगा था क्योंकि इस वक्त उसके बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था और ऊपर से असुर के बदन पर भी कोई कपड़ा नहीं था और तीसरा सीसी दरवाजे पर खड़ी थी।

और शायद सीसी यह जानती भी थी कि अंदर असुर और कनिका दोनों है। और इस चीज को सोचते ही कनिका का शरीर कांपने लगा था डर के मारे अब उसकी हालत खराब होती जा रही थी। उसकी हालत देखकर असुर के चेहरे पर devil स्माइल आ चुकी थी। उसने अब अपने कदम वार्डरोब की तरफ बढ़ाए और देखते ही देखते वार्डरोब से अपने लिए कुर्ता पजामा निकाला और 5 मिनट में वह कुर्ता पजामा पहनकर बाहर की तरफ आया कनिका तो बस उसे सावलियां नजरों से देखे जा रही थी और अब असुर ने अपने कदम दरवाजे की तरफ बढ़ा दिए जैसे ही असुर ने अपने कदम दरवाजे की तरह बढ़ाए कनिका का दिल जैसे धड़कना ही भूल गया। उसका रंग पूरी तरह से पीला पड़ चुका था।

इस वक्त कनिका को इतना ज्यादा डर लग रहा था उसे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसका खून ही निचोड़ लिया हो,

वहीं दूसरी तरफ,,

पठानी फार्महाउस,,

अमानत इस वक्त बालकनी में खड़ा cigarette पी रहा था और इस वक्त उसकी गहरी नजरे बेड पर सिकुड़ कर बैठी हुई अफसाना पर थी। वहीं अफसाना भी अंदर उसकी गहरी नजरे खुद पर महसूस कर सकती थी जिस वजह से वह और भी ज्यादा खुद में सिमटने लगी थी। उसे ऐसा लग रहा था जैसे अमानत उसकी पूरी बॉडी को स्कैन कर रहा हो,, वहीं अमानत जो कि उसे गहरी नजरों से देख रहा था उसकी नज़रें इस वक्त अफसाना की आंखों पर थी वह हद से ज्यादा खूबसूरत आंखें उसकी गहरी काली आंखें जिनमे बिना काजल के ही ऐसा लग रहा था कि जैसे काजल लगाया हो,,

अफसाना की आंखें हद से ज्यादा खूबसूरत थी और ऊपर से उसकी आइब्रो के में एक छोटा सा तिल था। वह कुदरती तिल ऐसा लग रहा था जैसे कि कोई काली बिंदी हो जो कि नजर से बचने के लिए लगाई गई हो,, अमानत अफसाना के चेहरे को तराशते हुए ही उसके होठों तक आया,, अफसाना के होंठ भी बेहद खूबसूरत थे ऊपर का होंठ थोड़ा उभरा हुआ और नीचे का थोड़ा पतला,, और सुर्ख गुलाबी होंठ जिस पर कोई लिपस्टिक नहीं लगी हुई थी। उसे देखकर अमानत जैसे उसमें कहीं खो गया था कितनी ही देर वह अफसाना को ऐसे ही देखता रहा उसके हाथ में जो सिगरेट पड़ी हुई थी वह ऐसे ही जलकर खत्म होने की कगार पर थी लेकिन उसे तो जैसे होश ही नहीं था।

तभी अचानक से उसे अपनी उंगलियों में कुछ गरम महसूस हुआ तो उसके हाथ से वह सिगरेट नीचे गिर गई,, एक नजर अमानत ने सिगरेट की तरफ देखा और फिर उसने अपनी नज़रें दोबारा से सामने बैठी अफसाना पर गड़ा दी,, अफसाना को देखकर अमानत को अपने बदन में एक हलचल सी महसूस हो रही थी। अब उसने अपने कदम अफसाना की तरफ बढ़ा दिए वहीं अफसाना जो कि अपनी ही सोच में थी कि कैसे वह अपने घर जाकर अपने घर वालों को यह चीज बताएगी उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था।

उसके दिमाग में बस यही बात चल गई रही थी अगर किसी को भी कुछ पता चल गया तो वह उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे,, वह अपने ही ख्यालों में गुम थी जिससे उसे अमानत की नजर भी खुद पर महसूस होनी बंद हो चुकी थी इस वक्त वह इतनी ज्यादा गहरी सोच में डूबी हुई थी। लेकिन अगले ही पल जो हुआ वह पूरी तरह से कांप उठी, क्योंकि अमानत बिल्कुल उसके पीछे आकर बैठ गया था और उसने उसके लंबे बाल जो कि उसके पीठ से नीचे आ रहे थे। उन्हें साइड पर करके उसकी पीठ पर अपने होंठ रख दिए थे और अमानत के होठों को अपनी पीठ पर महसूस कर अफसाना को ऐसा लग रहा था । जैसे किसी ने उसके बदन से उसकी जान निकाल ली हो,,

और अगले ही पल उसकी सिसकी उसके होठों से निकल गई और आंखें पूरी तरह से बंद हो गई,, और उसकी आंखों में से आंसू का कतरा उसके गालों पर आ गया,, वह अपनी धीमी पर तड़प भरी आवाज में बोली मत कीजिए साहब मैं एक मामूली नौकर हूं अगर किसी को भी इस चीज की भनक लग गई तो तो प्रलय आ जाएगा,, हम आपके आगे हाथ जोड़ते हैं प्लीज हमें छोड़ दीजिए किसी को कुछ नहीं पता चलेगा कि हम यहां पर आए भी थे या नहीं या फिर हमारे बीच कुछ भी हुआ हम इस शादी को अभी वह बोल ही रही थी कि तभी अमानत ने अपना हाथ उसके आगे किया और उसे देख कर अफसाना की आंखें बड़ी हो गई। क्योंकि अमानत के हाथ में एक रेड कलर की साड़ी थी और उस पर कुछ गहने रखे हुए थे। उसने एक नजर अमानत के हाथ की तरफ देखा जिसमें साड़ी थी और एक नजर अब अमानत के चेहरे की तरफ देखा,,

अमानत ने अब बड़े प्यार से उसके गाल पर हाथ रखते हुए बोला जाओ इसे पहन कर आओ मैं तुम्हें इनमें देखना चाहता हूं। आखिर शादी हुई है हमारी,, और आज हमारी फर्स्ट नाइट है अमानत की बात सुनकर अफसाना पूरी तरह से कांप उठी थी उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह करें तो करे क्या,, क्योंकि अमानत तो उसकी एक भी बात सुन ही नहीं रहा था वह सिर्फ अपनी ही बातें अफसाना से मनवा रहा था। अफसाना अब ना में ही सिर हिलाते हुए बोली नहीं बाबू साहब क्यों आप एक नौकरानी को अपने....

अभी वह बोल ही रही थी कि तभी उसके मुंह से आह निकल गई क्योंकि अमानत ने उसके गाल पर रखा हुआ हाथ उसके बालों में फंसा कर उसके बालों को मुट्ठी में भरते हुए दांत पीसकर बोला कितनी बार कहना होगा तुम्हें बकवास बंद रखो और जितना कहा गया है उतना करो, और जल्दी से कपड़े बदल कर आओ मुझे यह विधवा के कपड़े तुम पर चुभ रहे हैं अब तुम सुहागन हो,, तभी अफसाना रोते हुए बोली नहीं है हम सुहागन नहीं मानते हम इस शादी को क्यों नहीं मान रहे हैं आप क्यों मेरे लिए मुसीबतें बढ़ा रहे हैं बाबू साहब आप समझ क्यों नहीं रहे,,

तभी अमानत ने एक बार फिर से उसके गाल पर हाथ रखा और बेहद नॉर्मल टोन में बोला तुम जा रही हो कपड़े पहनने या फिर मैं यहीं पर तुम्हें पहनाऊं,, उसकी बात सुनकर अफसाना का दिल जैसे धड़कना ही भूल गया ,, वह अमानत के चेहरे की तरफ देखते ही रह गई। वहीं अमानत उसकी आंखों में देखते हुए बोला जल्दी जाओ और कपड़े पहन कर आओ और इस बार मैं कहूंगा नहीं इस बार मैं खुद तुम्हें यह कपड़े पहनाऊंगा और वह भी अपने तरीके से,,

अमानत की बात सुनकर अफसाना के रोंगटे खड़े हो रहे थे। और उसे अपना गला सूखता हुआ महसूस हो रहा था। वहीं अमानत की नजरे उस पर गहरी हो गई थी। अफसाना ने अब अपने कांपते हुए हाथों से वह साड़ी को पकड़ा इस वक्त अफसाना की आंखों में आंसू लबालब बह रहे थै और अब वह अपनी जगह से खड़ी हुई और साड़ी को लेकर वार्डरोब की तरफ चली गई,, दूसरी तरफ अमानत की नजरे अभी भी वार्डरोब पर थी।

और वह खुद से ही गहरी आवाज में बोला पुरी दुनिया से प्रोटेस्ट में करूंगा,, और अब तो तुम हो ही मेरी जिसकी भी नजरे तुम पर आई उसकी आंखें न निकाल दी तो मेरा नाम भी अमानत सिंह पठानी नहीं,, इतना कहते हुए अमानत के चेहरे पर बेहद सख्त एक्सप्रेशन थे। तकरीबन 15 20 मिनट बाद अफसाना वार्डरोब से बाहर आई तो अमानत की नजरे वार्डरोब के दरवाजे पर टिक गई जहां पर इस वक्त अफसाना खड़ी थी। अफसाना ने इस वक्त पूरी तरह से पलके झुका रखी थी और वह हद से ज्यादा खूबसूरत लग रही थी हालांकि अभी भी उसने मेकअप नहीं किया था वह साड़ी और ऊपर से उसकी मांग में भरा हुआ सिंदूर ही उसे हद से ज्यादा खूबसूरत बना रहा था। अफसाना को इस तरह से देखकर अमानत का दिल एक पल के लिए धड़क उठा था।

वहीं अफसाना का भी इस वक्त बुरी हालत हो रही थी। इस वक्त अफसाना का दिल जोरो जोरो से धक धक कर रहा था। अमानत अब अपनी जगह से खड़ा हुआ और अपने कदम अफसाना की तरफ बढ़ाने लगा जैसे ही अफसाना ने अमानत के कदम खुद की तरफ बढ़ते हुए महसूस किये उसकी सांसे गहरी होने लगी और उसने अपने कदम पीछे की तरफ लेना शुरू कर दिए,, अफसाना की सांसों ने इस वक्त शोर मचाना शुरू कर दिया था जो कि उस कमरे में बखूबी गूंज रहा था। वह पीछे की तरफ होते हुए,, दीवार से लगने को हुई कि तभी उससे पहले ही अमानत ने उसकी कमर पर हाथ रखा और खुद से सटा लिया,,

और अब एक बार फिर से अमानत उसे गहरी नजरों से देखते हुए उसके ऊपर झुका और बोला मेरी आंखों में देखो उसकी बात सुनकर अफसाना की आंखों में नमी तैरने लगी थी और वह आंखें झुकाए हुए ही ना में ही सिर हिलाने लगी,, उसको ना में सिर हिलता देखकर अमानत के चेहरे पर तिरछी मुस्कराहट तैर गई और अब उसने अफसाना की थोडी के नीचे हाथ रखा और उसका चेहरा ऊपर की तरफ उठाया जैसे ही अमानत ने अफसाना का चेहरा ऊपर की तरफ उठाया दोनों की आंखें आपस में मिल गई,,

जैसे ही अफसाना की नजरे अमानत की नजरों से मिली अफसाना के रोंगटे खड़े हो गए क्योंकि अमानत की नजरे उस पर बेहद इंटेंस थी। वह अब उसके चेहरे को अपने हाथों में भरते हुए बोला,, जिस चीज से तुम डर रही हो ना दुनिया जमाना उस जमाने को आग लगने की हिम्मत रखता है यह अमानत सिंह पठानी और तुम्हारे लिए उस जमाने को आग लगा देगा जिसने तुम पर उंगली उठाई उसकी बात सुनकर अफसाना के रोंगटे खड़े होने लगे और एक पल के लिए वह तो सिर्फ अमानत के चेहरे की तरफ देखते ही रह गई,,, आज पहली बार अफसाना को अपने लिए कुछ प्रोटेक्टिव feel हो रहा था।

और अमानत ने अभी-अभी जो बात कही थी उसे सुनकर अफसाना को जो कुछ देर पहले बहुत ज्यादा डर लग रहा था अब जैसे एक पल के लिए वह डर कहीं गायब हो गया था वह बस अमानत की नजरों में ही कहीं खो गई थी। दोनों की नजरे आपस में मिली हुई थी कि तभी अमानत ने उसके होठों पर हल्के से अपने होंठ रख दिए जिससे अफसाना की आंखें अपने आप बंद हो गई,, और एक बार फिर से उसकी धड़कनों ने शोर मचाना शुरू कर दिया था। अमानत ने सिर्फ अपने होठों को अफसाना के होठों पर रख दिया था लेकिन वह उन्हें किस नहीं कर रहा था वह बस अपनी खुली आंखों से अफसाना का रिएक्शन देख रहा था वहीं अफसाना ने अपनी आंखें बंद कर ली थी उसके हाथ पूरी तरह से नीचे की तरफ लटक रहे थे अभी तक उसने अमानत को बाहों में भरा तक नहीं था।

वहीं अमानत ने अब अपना चेहरा पीछे की तरफ किया और अफसाना ने भी अपनी आंखें खोल ली लेकिन अब एक बार फिर से उसने अपनी आंखें नीचे की तरफ झुका ली थी अब अमानत ने भी उसका चेहरा ऊपर की तरफ करने की कोशिश नहीं की वह बस अफसाना की तरफ देखते हुए बोला मेरी आंखों में देखो उसने इतना ही कहा था कि अफसाना की नजरे इस बार खुद ब खुद ऊपर की तरफ उठ गई। आज पहली बार अफसाना को इतना ज्यादा सुरक्षित महसूस हो रहा था। पता नहीं क्यों जो लफ्ज़ उसे अमानत ने कहे थे जैसे उसके दिल को छू गए थे।

जैसे ही अफसाना ने अपनी आंखें ऊपर की तरफ उठाकर अमानत की आंखों में देखा,, अमानत का दिल जैसे जोरों से धड़क उठा और अगले ही पल उसने अपने होंठ दोबारा से अफसाना के होठों पर रख दिए और उसे इस बार चूमने लगा वहीं अफसाना ने अब एक बार फिर से उसके होंठ अपने होठों पर महसूस कर अपनी आंखें बंद कर ली और इस बार उसने अमानत को अपनी बाहों में भर लिया,

, जिससे अमानत को जैसे एक पल के लिए चैन मिल गया,,

To be continue..

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