
हाईवे पर,,
एक गाड़ी तेजी से हाईवे पर दौड़ रही थी। और इस गाड़ी की स्पीड हद से ज्यादा तेज थी और इसमें चार लड़के बैठे हुए थे और पीछे एक लड़की पूरी तरह से बेहोश थी और यह लड़की कोई और नहीं बल्कि नेहा थी। वही आगे बैठे हुए लड़के संजीव राहुल हातिम और समीर बैठे हुए थे,, पीछे बैठे राहुल की गहरी नजरे इस वक्त नेहा पर थी । वह नेहा को बेहद गहरी नजरों से देख रहा था।
उसकी नजर बार-बार नेहा के सीने पर जा रही थी। और नेहा के सीने को देखकर वह अपनी जब अपने होठों पर घूम रहा था। दूसरी तरफ हातिम यह चीज देखकर हंस रहा था वह बोला थोड़ी देर वेट तो कर ले और कुछ देर की बात है अपने अड्डे पर पहुंचने वाले हैं हम लोग,, उसकी बात पर राहुल बेहद बेशर्मी से हंसते हुए बोला अरे यार साबरी तो नहीं हो रहा दिल तो कर रहा है यहीं पर शुरू हो जाओ,, क्या करूं साली खूबसूरत इतनी है दिल कर रहा है अभी इसका रस निचोड़ लू, तकरीबन आधे घंटे बाद उनकी गाड़ी एक होटल के आगे आकर रुकी वह होटल इतना लग्जरियस नहीं लग रहा था वह कोई लोकल होटल लग रहा था जहां पर लोग जैसे रेस्ट करके अगले दिन वहां से चले जाते हो या फिर दो-चार घंटे रहते हो और उसके बाद चले जाते हो वह इस तरह का होटल लग रहा था जो की शरीफ खानदान का तो बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि जिसमें शरीफ खंडार रह सके,,,,
तभी संजीव गाड़ी से बाहर निकाला और होटल की तरफ देखा जहां पर साफ-साफ लिखा हुआ था चांदनी होटल,, अब समझी हो पीछे की तरफ जाने को हुआ कि तभी राहुल उसे हाथ दिखाकर रोकते हुए बोला पहले से मैं उठा कर अंदर लेकर जाऊंगा और पहली बारी भी मेरी होगी क्योंकि इसकी पहरेदारी इतनी देर से मैं कर रहा हूं,, उसकी बात पर संजीव ने मुंह बनाते हुए बोला तेरा मुंह तोड़ दूंगा मैं अभी ज्यादा बोल मत,, इसको सबसे पहले देखा मैंने था इसलिए इसको चुकूंगा भी सबसे पहले मैं तभी हातिम उन दोनों की तरफ देखकर तुम दोनों कॉल लड़ने के अलावा कोई काम नहीं है क्या अरे चलो यार हम अपना काम करने आए हैं और तुम लोग यहां पर लड़े जा रहे हो अब तक तो हम अंदर पहुंच कर बहुत कुछ कर चुके होते
उसकी बात पर समीर ने मुंह बनाते हुए बोला तू भी ज्यादा सियाना मत बन अब जल्दी से निकल यहां से,, तुझे जो आग लगी ना मुझे भी पता है तेरे अंदर ही अंदर जल रहा होगा तू भी, इतना कहकर समीर पीछे की तरफ ,, और नेहा को अपनी गोद में उठा लिया वहीं संजीव और राहुल लड़ते ही रह गए और समीर उसे उठाकर अंदर की तरफ भी ले गया, कुछ ही देर में उन चारों ने एक कमरा बुक किया और उसमें ले जाकर नेहा को लेट दिया,,
उन्होंने नेहा को बेड पर लेटाया और पास में ही टेबल पर आसपास शेयर रखकर बैठ गए और एक शराब की बोतल खोलकर वहीं पर पीनी शुरू कर दी,, चारों कभी शराब पी रहे थे तो कभी हाथ में सिगरेट पकड़ कर होठों में दबाकर उनके लंबे-लंबे कश भर रहे थे।
दूसरी तरफ,,
त्रियांशु की गाड़ी इस वक्त सड़क पर दौड़ रही थी और उसकी नज़रें इस वक्त सड़क पर ही थी वह आसपास बार-बार नज़रें घूम रहा था लेकिन उसे नेहा कहीं नजर ही नहीं आ रही थी उसका दिमाग इस वक्त पूरी तरह से घुमा हुआ था। क्योंकि वह पिछले 1 घंटे से नेहा को ढूंढ रहा था लेकिन उसे नेहा कहीं भी नहीं मिली रही थी और ऊपर से वह प्रेग्नेंट थी। उसे टेंशन ही हो रही थी कि कहीं नेहा को कुछ हो ना जाए,, ओपन त्रियांशु के चेहरे पर ज्यादा परेशानी झलक रही थी क्योंकि पूरी सड़क पर कि कहीं भी नेहा उसे दिखाई नहीं दी थी जबकि नेहा को निकले हुए ज्यादा वक्त नहीं हुआ था जब वह शेखावत पैलेस से निकल गया था उसे लगा था नेहा उसे रास्ते में ही मिल जाएगी लेकिन पूरा रास्ता सुनसान था उसे नेहा कहीं भी नजर नहीं आई अब तक वह बहुत आगे तक निकल आया था।
जब ज्यादा ही आगे तक निकल अब उसके दिमाग में यह बात घूमने लगी की एक बार फिर से वह दोबारा से पीछे की तरफ घूम लेकिन फिर उसके दिमाग में आया क्या पता नेहा फोटो लेकर कहीं घर तो नहीं चलेगी यह सोचकर उसने लैंडलाइन नंबर पर फोन किया ताकि दादी उसका फोन आता है कोई सर्वेंट उठा ले तो लैंडलाइन नंबर पर एक सर्वेंट ने कॉल पिक किया ,, सर्वेंट ने कॉल पिक करते ही आगे से त्रियांशु तेजी से बोल नेहा घर पर आ गई कि नहीं, जैसे ही सर्वेंट के कानों में त्रियांशु की आवाज पड़ी तो सर्वेंट जल्दी से हड़बड़ा गई और वह धीरे से बोली नहीं सर वह तो आपके साथ गई थी और तब से वह वापस ही नहीं आई। जैसे ही सरवत ने यह बात कही त्रियांशु का रंग पूरी तरह से उड़ गया,, अब उसे और भी ज्यादा घबराहट होने लगी उसने जल्दी से कॉल डिस्कनेक्ट किया और दोबारा से उसी रास्ते से धीरे-धीरे घूमता हुआ हर तरफ से नजरे घूमते हुए जा रहा था ताकि नेहा कहीं नजर आए लेकिन उसे नेहा कहीं भी नजर नहीं आ रही थी,,
तभी उसने गाड़ी रास्ते पर आकर रुकी जहां पर चौराहा पड़ रहा था जो कि शेखावत पैलेस पर कुछ ही दूरी पर था। उसका दिमाग पूरी तरह से घुमा हुआ था क्योंकि कहीं पर भी नेहा का पता नहीं चल रहा था । वह बार-बार अपनी नज़रें इधर-उधर घूम रहा था लेकिन तभी उसकी नजर जमीन पर पड़ी जहां पर एक चांदी की पायल पड़ी हुई थी उसे पायल को देखकर त्रियांशु की आंखें बड़ी हो गई। और अगले ही पल उसने वह पायल उठे तो उसे वह पल याद आया जब वह पहली बार नेहा के साथ इंटीमेट हुआ था तो उसने उसे पायल को उतारने को कहा था तो नेहा ने साफ मना कर दिया था क्योंकि वह पायल नेहा की मम्मी की आखिरी निशानी थी।
दूसरी तरफ दूर खड़ा एक शख्स जो की,, सुबह से चाय की टपली लगाए बैठा था वह अब अपनी चाय की तापली बंद कर रहा था। उसने जब उसे शख्स को देखा तो उसके दिमाग में भी वही बात आई की कुछ देर पहले उसने जब चार लड़कों को एक लड़की को ले जाते हुए देखा था। क्या पता शायद यह लड़का उसे लड़की को ढूंढ रहा हो,, जब राहुल संजीव और हातिम समीर नेहा को गाड़ी में बिठाकर ले जा रहे थे तो वह चाय की टपली वाले शख्स ने उन चारों को देखा था। बेचारा बुजुर्ग होने की वजह से आगे की तरफ नहीं आया क्योंकि उसे डर लग रहा था की कहानी वह चारों मिलकर उसकी जान ही ना ले ले,, क्योंकि वह शख्स कोई ज्यादा उम्र का नहीं था कम से कम अधेड़ उम्र का इंसान लग रहा था।
जब उसने त्रियांशु को इस तरह से परेशान होते देखा तो अब वह धीरे-धीरे अपने कदम त्रियांशु की तरफ बढ़ते हुए बोल क्या बात है बेटा किसी को ढूंढ रहे हो क्या उसकी बात पर त्रियांशु ने अब उसे शख्स की तरफ देखा तो त्रियांशु ने अब उसे शख्स को अपनी जेब से फोन निकाला और नेहा की तस्वीर निकाल कर बोला आपने इस लड़की को देखा है क्या,, उसे अधेड़ उम्र के आदमी ने अब जो अपनी आंखों पर चश्मा लगा रखा था अब वह चश्मा ठीक करते हुए बोला बेटा यह लड़की कुछ देर पहले यहां से गुजर रही थी तो चार लड़के इसको जबरदस्ती यहां से ले गए जैसे ही उसे शख्स ने इतनी बात कही तो त्रियांशु का दिल धक सा रह गया उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसका कलेजा उसके मुंह को ही आ जाएगा
वह शख्स अब अपनी धीमी सी आवाज में बोला अगर मैं उनके पास जाता तो हो सकता था यह लोग मुझे ही मार डालते तो इसीलिए मैं उनके पास नहीं गया लेकिन बेटा वह लड़के रोज यही पर बैठे होते हैं और मैं जानता हूं वह ज्यादा से ज्यादा कहां तक जा सकते हैं उनकी गुंडागर्दी तो हर वक्त से सड़क पर चलती ही रहती है लेकिन मैं उनके पास बहुत काम आता हूं वह बहुत बुरे लड़के हैं।
जैसे ही उसे शख्स ने यह बात कही तो त्रियांशु के जान में जान आई और वह जल्दी से बोला वह कहां पर है बताओ जर तभी वह शख्स बोला ज्यादा तो नहीं बता सकता बाबू साहब लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि जैसे वह लड़के हैं और जैसे वह उसे लड़की को उठाकर लेकर गए हैं वह लगता है यही पास में एक गंदा सा होटल है वह उसे लड़की को पक्का वहीं पर लेकर गए होंगे और उसे होटल का नाम बाबू साहब होटल का नाम नहीं मुझे याद आ रहा है इतना कहकर अब वह शख्स त्रियांशु के चेहरे की तरफ देखने लगाा,,, अब त्रियांशु को और भी ज्यादा डर लगने लगा,, अब जल्दी से अपनी गाड़ी में बैठा और उसने गाड़ी को घुमाया, और दोबारा से उसी रास्ते में ले लिया,,
इस वक्त त्रियांशु को इतना डर लग रहा था कि शायद ही उसे कभी इतना डर लगा होगा। आज पहली बार उसे नेहा के लिए इतनी ज्यादा फिक्र हो रही थी। जिस वजह से उसका दिल जोरो जोरो से धड़क रहाथा।
वहीं दूसरी तरफ,,
शेखावत पैलेस,,
अभी-अभी सौम्या ने dhaanisk के हाथ में एक डिब्बी पकड़े थी और देखते ही देखते सौम्या पूरी तरह से बेहोश हो चुकी थी। इससे पहले सौम्या जमीन पर गिरती dhaanisk ने उसे अपनी बाहों में समेट लिया और अब वह dhaanisk की बाहों में झूल रही थी। उसने अब एक अग्नि परीक्षा की बात कही थी। उसके कहने का साफ मतलब था कि अब अग्नि परीक्षा देने की बड़ी dhaanisk की थी। वही सौम्या को इस तरह से अपनी बाहों में झूलती देख इस वक्त dhaanisk का दिल जोरो जोरो से ढक-ढक कर रहा था और अब उसने अपने हाथ में पड़ी हुई शीशी की तरफ देखा तो एक पल के लिए उसकी आंखें फटी की फटी रहगई।
और उसे शीशी को देखकर उसका दिल जैसे धक सा रह गया। और अगले ही पल वह जोरों से चिल्लाया सौम्या...
जैसे ही वह चिल्लाया तो बाहर खड़े AS तक उसकी आवाज गई थी। जिस तरह से दानिश के चिल्लाया था AS का भी दिल एक पल के लिए कहां पर उठा था। dhaanisk की आवाज सुनकर AS ने अपने कदम अभी उसके रूम की तरफ बधाई ही थे कि तभी dhaanisk का हड़बड़ा कर सौम्या को गोद में लिए हुए बाहर की तरफ निकला इस वक्त सौम्या के मुंह से झाग जा रहा था। AS ने जैसे ही सौम्या की यह हालत तो उसकी आंखें बड़ी हो गई वहीं अनन्या और कल्याणी जी की भी यही हालत थी वही कल्याणी जी तो बेहोश होकर गिरने ही वाली थी कि तभी कल्याणी जी तो एक पल के लिए बेहोशी से गिरने ही वाली थी कि तभी अनन्या ने उसे संभाल लिया।
वही dhaanisk जोरों से चलाया गाड़ी निकालो जल्दी,, इतना कहते हुए हो तेजी से बाहर की तरफ भागा,, की तभी आमिर भी जो कि बाहर बैकयार्ड एरिया से आ रहा था उसने जब यह नजारा देखा तो उसके तो जैसे होसी उड़ चुके थे। वह जल्दी से गाड़ी की तरफ भागा और अगले ही पल ड्राइविंग सीट पर बैठ गया वहीं dhaanisk के भी सौम्या को लेकर पीछे की तरफ बैठ गया,, दूसरी तरफ AS भी पैसेंजर सीट पर आकर बैठ चुका था। सब की हालत हद से ज्यादा खराब हो चुकी थी।
वही dhaanisk तो कुछ बोलने सुनने की हालत में ही नहीं था वह तो जैसे पागलों की तरह बस सौम्या को ही देखे जा रहा था वह सौम्या की तरफ देखकर बोला आंखें खोलो आंखें खोलो स्वीट मार्च में लो तुम्हें कुछ नहीं होगा मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा आंखें खोलो,, तुम ऐसे मुझे अकेला छोड़कर नहीं जा सकती तुमने खुद कहा था कि तुम मेरे इश्क के फिटर में पागल हो और इश्क ऐसे नहीं किया जाता जैसे तुम कर रही हो तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकती मैं वादा करता हूं मैं वादा करता हूं कि मैं आज के बाद ऐसा कुछ नहीं करूंगा कि तुम्हें तकलीफ हो यह वादा है मेरा प्लीज जाकर खोलो स्वीट पांच में लो जाकर खोलो अपनी तुम्हें मेरे लिए अपनी आंखें खोलनी होगी,, कितने रहते हुए dhaanisk की आंखों के कौन से आंसू बहने लगे थे और अब उसका दिल कम रहा था बढ़ाते पाल के साथ उसकी दिल की धड़कनें जैसे साथ छोड़ रही थी।
क्योंकि सौम्या का चेहरा पूरी तरह से सफेद पड़ चुका था और जाग उसके मुंह से लगभग से छूटते ही जा रही थी। वही dhaanisk लगातार उसके गाल को थपथपाते हुए उसे उठाने की कोशिश कर रहा था लेकिन सौम्या की आंखें पूरी तरह से बंद हो चुकी थी। उसकी आंखों में जरा सी भी हलचल नहीं हो रही थी तकरीबन 15 20 मिनट बाद उनकी गाड़ी,, मुंबई के फेमस हॉस्पिटल टेक केयर के आगे आकर रुकी,, और अगले ही पाल dhaanisk ने सौम्या को दोबारा से गोद में लेकर गाड़ी से बाहर निकाला और भाग कर अस्पताल में घुस गया। इस वक्त dhaanisk का दिमाग पूरी तरह से सन पड़ चुका था उसे तो जैसे खुद की भी शुद्ध नहीं थी। उसने अब सौम्या को ले जाकर स्टेचर पर लेट आया वही डॉक्टर की टीम पहले ही तैयार थी जो की AS ने तैयार करवा दी थी।
dhaanisk जोकि स्टेचर के साथ ही आईसीयू वार्ड में जा रहा था डॉक्टर ने उसे रुकने को कहा तो dhaanisk ने एक कड़वी नजर डॉक्टर पर डाली तो डॉक्टर एक पल के लिए डर गए,, तो उनकी कुछ भी कहने की हिम्मत ही नहीं हुई इसलिए वह चुप हो गए थे। कुछ ही देर में अनन्या और कल्याणी जी भी अस्पताल पहुंच चुके थे। लेकिन सरगम अभी तक हॉस्पिटल नहीं आई थी। जो की काजल का रूप धर कर बैठी हुई थी।
वहीं दूसरी तरफ अंदर वार्ड में dhaanisk का अभी भी स्ट्रेचर के पास ही खड़ा था और एक टक्कर सौम्या के चेहरे को देख रहा था। उसकी आंखों में आंसू अब रुक गए थे। लेकिन हालात अभी भी खराब हुई पड़ी थी वह बस अपनी सूनी आंखों से स्ट्रक्चर पर पड़ी सौम्या की तरफ देख रहा था। दूसरी तरफ डॉक्टर अपना काम कर रहे थे उन्हें सौम्या के शरीर में से जहर निकलना था जो की नींद की गोलियों की वजह से बन गई थी।
उन्होंने अब dhaanisk कट सौम्या के हाथ से हटाना चाहा तो dhaanisk ने एक बार फिर से सर्द नजर से देखते हुए बोला तुझे जो करना है कर समझ में आई बात अगर अब तूने मेरा हाथ मेरी बीवी के हाथ से हटाया तो तेरे दोनों हाथों की में अभी बाली दे दूंगा समझ में आई बात,, dhaanisk की की धमकी सुनकर डॉक्टर के पसीने छूट गए और वह वहीं पर खड़े-खड़े कांपने लगे इसीलिए अब उनकी हिम्मत नहीं पड़ी कि वह dhaanisk को अपनी जगह से हिला भी पाए,, वैसे भी दानिश का कपूर को कौन नहीं जानता था मुंबई में,,, dhaanisk का कपूर खुद में ही एक बड़ी शख्सियत थी मुंबई में एक बिजनेस टायकून और मुंबई का famous businessman ,, वही डॉक्टर अब सौम्या को पलट कर धीरे-धीरे उसके मुंह से जो गोलियों का जहर बना था वह निकलने लगे जिस वजह से सौम्या की वोमित करवानी बहुत ज्यादा जरूरी थी अगर सौम्या वोमित करेगी तभी तो उसके अंदर से वह जहर निकलेगा,, और इसीलिए डॉक्टर ने सौम्या को इंजेक्शन दिया था,,,
कुछ ही देर में उन्होंने पलट कर सौम्या के अंदर से वह नींद की दवाइयां निकाल दी थी लेकिन फिर भी अभी तक सौम्या की बॉडी में कुछ खास रिस्पांस नहीं किया था जब डॉक्टर ने उसकी हार्टबीट चेक की तो अभी भी सौम्या की हार्टबीट बहुत स्लो चल रही थी तकरीबन एक डेढ़ घंटा डॉक्टर ने उसकी बॉडी में पॉइजन निकाला और उसके बाद थोड़ी बहुत इंजेक्शंस वगैरा दिए लेकिन फिर भी कुछ खास फर्क नहीं पड़ा सौम्या की धड़कन अभी भी मध्म चल रही थी। डॉक्टर ने जब सारी कोशिश है अपना ली तो हर कर अब डॉक्टर ने dhaanisk की तरफ देखते हुए,, बोले
मिस्टर कपूर आपकी वाइफ का कुछ क्लियर कहा नहीं जा सकता लेकिन इनकी हार्टबीट बहुत ज्यादा स्लो चल रही है। अगर इन्हें कल सुबह तक होश नहीं आया तो हो सकता है यह कोमा में चले जाएं,, जैसे ही डॉक्टर ने यह बात कही dhaanisk का चेहरा गुस्से से कांपने लगा अगले ही पल उसने डॉक्टर का कॉलर पकड़ा और दांत पीसकर बोल तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी बीवी के बारे में ऐसी बात करने की,, उसे कुछ नहीं होगा वह सिर्फ बेहोश हुई है उसे अभी होश आएगा समझ में आई और तुम लोग क्या झक मारने के लिए बैठे हो तुम लोग तो डॉक्टर कहलन के लायक नहीं हो,,
किसने दी तुम्हें डॉक्टर की डिग्री निकलो यहां से इतना कहकर उसने धक्का मारते हुए डॉक्टर को बाहर की तरफ धकेल वहीं दरवाजे पर खड़ा AS सब यह चीज देख रहा था जिसे देखकर वह जल्दी से अंदर की तरफ आया क्योंकि अगर AS अंदर नहीं आता तो हो सकता था की बात और भी ज्यादा बिगड़ जाती,, AS ने अब dhaanisk को संभालते हुए बोला खुद को संभालो यह क्या हरकतें लगा रखी है तुमने,, अगर तुम खुद को नहीं संभालोगे तो अभी वह बोल ही रहा था कि तभी dhaanisk ने AS का कॉलर पकड़कर, उसे जग छोड़ते हुए बोला लिसन टू मी वेरी केयरफुल मिस्टर अरुण सिंह शेखावत अगर मेरी बीवी को कुछ भी हुआ तो मैं पूरी मुंबई को जलाकर राख कर दूंगा,, इतना कहते हुए dhaanisk की आंखें हद से ज्यादा लाल थी वही AS तो उसे बस एक्सप्रेशन लैस होकर देख रहा था। अब उसने dhaanisk के हाथ को पकड़ कर नीचे की तरफ किया और गहरी सांस लेकर बोला खुद को संभालो,, AS की बात पर dhaanisk का अब गहरी आवाज में बोला कैसे संभालू खुद को,, कैसे बोलो बताओ मुझे कैसे संभालूं उसे इस तरह देखकर अगर इसकी जगह काजल होती तो क्या तुम खुद को संभाल पाते,, अरे नहीं जी सकता हूं मैं उसके बिना इतना कहते हुए अब dhaanisk की आंखों में आंसू लबालब बहने लगे थे। dhaanisk कब AS का कॉलर पकड़ कर गिरगिट आते हुए बोला मर जाऊंगा मैं उसके बिना अगर उसे कुछ हो गया तो यह बोल रहे हैं सुबह तक अगर उसे होश ना आया तो वह कोमा में चली जाएगी,, अगर वह कोमा में चली गई तो मुझे इश्क कौन करेगा कौन करेगा इतना कहते हुए dhaanisk के घुटनों के बाल गिर गया था,, dhaanisk की ऐसी हालत देखकर AS को भी हद से ज्यादा बुरा लग रहा था कहीं ना कहीं वह भी जानता था कि dhaanisk सौम्या से हद से ज्यादा प्यार करता है।
AS अब नीचे बैठा और उसके चेहरे को अपने हाथों में जानते हुए बोला तुझे खुद को संभालना होगा अगर तू खुद को नहीं संभालेगा तो वह ठीक कैसे होगी आ जाएगा उसे होश भरोसा रख,,AS अभी बोल ही रहा था कि dhaanisk अगले ही पल उसके गले से लग गया लेकिन अभी भी उसकी आंखों में आंसू तेजी से बह रहे थे।
दूसरी तरफ,,
चांदनी होटल में,,
नेहा की आंखें अब हल्की-हल्की खुलने लगी थी। आंखें खुलती ही उसको अपने सिर में दर्द महसूस होने लगा था और तभी उसकी नजर सामने की तरफ गई जहां पर संजीव राहुल हातिम और समीर शराब पी पीकर टल्ली हो चुके थे। और उन्हें इस तरह से देखकर नेहा की आंखें बड़ी हो चुकी थी।
To be co
ntinue..







Write a comment ...