
सिडनी,
Blood cure hospital,
पारुल इस वक्त कसक को देख रहा था और उसका चेहरा इस वक्त पीला पडा हुआ था कसक के आसपास डॉक्टर की टीम खडी हुई थी जो कि उसे एग्जामिन कर रही थी लेकिन कसक किसी तरह से होश में नहीं आ रही थी, एक घंटा हो चुका था. कसक को उठाने की हर मुमकिन कोशिश की जा चुकी थी लेकिन कसक ने अपनी आंखें नहीं खोली थी. वही पारुल का दिल इस वक्त जोर- जोरों से धक धक कर रहा था. पारुल को अपनी सांसे गहरी होती हुई महसूस हो रही थी,
वही डॉक्टर की टीम अपना काम कर रही थी वह लगातार कसक को एग्जामिन कर रही थी और इस वक्त कसक के मुंह पर ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था, तभी डॉक्टर ने जो कहा उसे सुनकर पारुल के हाथ पैर फूलने लगे, एक सीनियर डॉक्टर पारुल की तरफ घूमते हुए इन्हें कोई ऐसा ड्रग दिया गया है जिस वजह से उनकी जान जा सकती थी लेकिन अब इन पर सिर्फ चौबीस घंटे तक खतरा बना हुआ है अगर यह चौबीस घंटे तक होश में आ गई तो यह ठीक हो जाएंगी, जो यह पिछले तीन साल से इस अस्पताल के बेड पर लेटी हुई है शायद वह भी ठीक हो जाए लेकिन अगर इस ड्रग ने अपना उल्टा असर दिखाया तो हो सकता है उनकी जान चली जाए कुछ कहा नहीं जा सकता, इतना कहकर डॉक्टर ने अब एक इंजेक्शन कसक को दिया और पारुल का कंधा थपथपा कर वहां से चले गए,
लेकिन पारुल अपनी जगह पर जमा खडा रह गया क्योंकि इस वक्त उसकी आंखों के सामने वह पल घूम रहा था जब से कसक इस अस्पताल में आई थी कसक जब उस अस्पताल में आई थी उसकी हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि उसके sir से बुरी तरह से खून बह रहा था और उसके गले पर जलने का निशान था जिसे देखकर पारुल को उस दिन बहुत बुरा लगा था लेकिन उसके सिर की चोट के कारण वह इतनी देर से अस्पताल में किसी जिंदा लावारिस लाश की तरह पडी हुई थी. इस वक्त पारुल के चेहरे पर परेशानी बेहद झलक रही थी उसके माथे पर अब पसीने आने लगे थे वह चुपचाप कसक का हाथ पकड कर एक साइड पर जा बैठा,
और चुपचाप उसके पास बैठकर उसका चेहरा देखने लगा इस वक्त उसका मन इतना ज्यादा बेचैन था कि वह बता नहीं सकता था, उसने एक नजर कसक के चेहरे की तरफ देखा जो कि पूरा बेजान नजर आ रहा था और अब उसने उसके sir पर हाथ फेरते हुए, जल्दी ठीक हो जाओ कसक अगर तुम सही में ठीक हो गई तो वादा है मेरा मैं तुमसे शादी कर लूंगा, इतना कहकर उसकी आंखों में हल्की- हल्की नमी आ चुकी थी,
वहीं दूसरी तरफ
मुंबई,
राणा industries,
इस वक्त नेहा बच्चों की तरह त्रियांशु के सामने रो रही थी और अपने पैरों को पटक रही थी. और नेहा को ऐसे देखकर त्रियांशु एक पल के लिए उसे देखता ही रह गया, लेकिन अगले ही पल उसने खुद को संभाला और दांत पीसकर बोला यह क्या बच्चों जैसी हरकतें कर रही हो, तभी नेहा ईईईईई आपने मुझे Kiss किया आपको शर्म नहीं आती एक लडकी को ऐसे Kiss करते हुए ऊपर से मुझे इतना गंदा फील हो रहा है आई एम ऑन माय पीरियड्स और ऊपर से मैं अपना सामान भी नहीं लेकर आई और हम इस कमरे में फंस चुके हैं और आपको रोमांस सूझ रहा है. उसकी बात पर त्रियांशु ने एक बार फिर से अपनी आंखें कसकर बंद कर ली, वह अपने मन ही मन Kiss बेवकूफ को गलती से मैंने Kiss कर दिया क्या सूझा था मुझे मैंने इसे Kiss किया अभी यह सोचकर वह अपने माथे पर अपना हाथ मार रहा था इस वक्त उसका दिल कर रहा था कि अपना sir किसी दीवार पर दे मारे, वही नेहा बस लगातार बच्चों की तरह पर पटकते हुए रोए ही जा रही थी,
जब नेहा ज्यादा देर तक चुप नहीं की तो त्रियांशु को अब गुस्सा आने लगा उसने अगले ही पल नेहा की बांह पकडकर मरोडते हुए पीठ पीछे लगा दिया और इस वक्त नेहा का सीना त्रियांशु के सीने से लगा हुआ था त्रियांशु पूरी तरह से नेहा के चेहरे पर झुका हुआ था, वही नेहा की तो जैसे सांस ही उसके गले में अटक चुकी थी और दिल जोर- जोर से धक- धक करने लगा वह लडखडाती हुई आवाज में बोली प्लीज छोड दीजिए अब दोबारा से ऐसा मत कीजिएगा नहीं तो मैं फिर से रोने लग जाऊंगी,
उसकी बात पर त्रियांशु अब दांत पीसकर बोला तुम्हें Kiss करने से अच्छा ना मैं किसी गधे को जाकर चूम लूं, और अगर अब तुमने अपना गला फाडा ना तो कसम से मैं इस गले को ही दबा के रख दूंगा जब तुम्हारा गला ही दब जाएगा तो आवाज कहां से निकलेगी, उसकी बात पर एक पल के लिए नेहा उसके चेहरे की तरफ देखते ही रह गई, वही त्रियांशु ने अब एक झटके से उसे छोडा और अब एक बार फिर से उसकी नजरें दरवाजे पर अटक चुकी थी क्योंकि इस वक्त वह पूरी तरह से उस केबिन में stuck हो चुके थे दरवाजा खुलने का नाम नहीं ले रहा था, उसे समझ नहीं आ रहा था कि वॉचमैन भी ऊपर अभी तक क्यों नहीं आ रहा था क्योंकि एक बार तो वॉचमैन अपनी ड्यूटी देते हुए ऊपर राउंड के लिए आएगा ही लेकिन अभी तक वॉचमैन ने एक राउंड भी नहीं दिया था जो सोच कर उसके चेहरे पर अब परेशानी झलकने लगी थी,
वह किसी तरह से वॉचमैन के आने का ही वेट कर रहा था, वहीं नेहा जो कि एक साइड पर खडी थी अब उसे और भी ज्यादा अनकंफरटेबल फील होने लगा था क्योंकि अब उसका पीरियड्स क्लोट तेज होने लगा था जिससे उसके स्टेंस अब और भी ज्यादा बढने लगे थे, उसके चेहरे पर अब पसीना छलकने लगा था वह चुपचाप से एक साइड पर सुन होकर खडी थी, जब त्रियांशु ने उसे चुपचाप सुन होकर खडे देखा अब वह उसके पास आकर बेहद डोमिनेटिंग वॉइस में, क्या बात है कोई सांप सूंघ गया है क्या जो इस तरह से चुपचाप खडी हो त्रियांशु ने उसे कहा तो लेकिन उसने आगे से कुछ भी जवाब नहीं दिया बस sir झुका कर खडी रही इस वक्त उसकी आंखों से लबालब पानी गिर रहा था जो कि त्रियांशु ने अभी तक नहीं देखा था क्योंकि उसका चेहरा पूरी तरह से नीचे था, नेहा का इस तरह से कुछ भी जवाब ना देना त्रियांशु को अजीब लगा तो उसने एक बार फिर से उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोला कुछ बोलोगी क्या बात है.
लेकिन नेहा ने उसकी बात का कोई भी जवाब नहीं दिया उसका इस तरह का रवैया देख कर त्रियांशु को थोडा अजीब लगा लेकिन अब उसने उसके दूसरे कंधे पर भी अपना हाथ रखा जैसे ही उसने दूसरे कंधे पर अपना हाथ रखा अब धीरे से नेहा ने अपना चेहरा ऊपर की तरफ उठाया और जैसे ही त्रियांशु ने उसका चेहरा देखा एक पल के लिए वह उसके चेहरे की तरफ देखता ही रह गया, नेहा का रो रो के लाल हो चुका चेहरा देखकर त्रियांशु की नजरे उसके चेहरे पर ही टिक गई थी,
त्रियांशु अब उसे फिर से रोते हुए देखकर बोला क्या हुआ इतना क्यों रो रही हो, उसकी बात पर नेहा ने अब एक बार फिर से अपना चेहरा पूरी तरह से नीचे की तरफ झुक लिया उसको इस तरह से नीचे चेहरा झुकाता देख त्रियांशु को कुछ समझ नहीं आया, अब उसने एक बार नेहा की थोडी के नीचे अपनी उंगलियां रख उसका चेहरा ऊपर की तरफ उठाया और उसकी आंखों में देखकर बोला कुछ बोलोगी, वही नेहा ने रोते हुए सिर्फ ना में sir हिला दिया. नेहा को ना मे सिर हिलाता देखकर त्रियांशु ने अब आगे एक बार फिर से उसे कुछ पूछने को हुआ लेकिन तभी उसे बाहर से किसी के फुट स्टेप की आवाज आई. और किसी के पैरों की आवाज सुनकर त्रियांशु की आंखें बडी हो गई. वह जल्दी से दरवाजे की तरफ बडा और दरवाजे को खटखटाते हुए कोई है बाहर, कोई है अगर कोई है तो दरवाजा खोलो बाहर से यह दरवाजा पूरी तरह से अटक चुका है.
अभी त्रियांशु बोल ही रहा था कि तभी दरवाजा खुलने की आवाज आई जैसे ही दरवाजा खुलने की आवाज आई नेहा और भी ज्यादा अनकंफरटेबल हो गई और पूरी तरह से दीवार से सट गई, वही बाहर सिक्योरिटी गार्ड ने ही दरवाजा खोला था जैसे ही सिक्योरिटी गार्ड ने दरवाजा खोला त्रियांशु उसे घूरते हुए तुम्हें तुम्हारी ड्यूटी का टाइम नहीं पता कि Kiss टाइम पर तुम्हें राउंड देने आना है, त्रियांशु की बात सुनकर सिक्योरिटी र्गाड ने सिर झुकाते हुए कहा लेकिन sir मैं तो अपने टाइम पर ही आया हूं अपना फोन Check कर लीजिए, तभी त्रियांशु दांत पीसते हुए बोला मेरा फोन मेरे पास होता तो मैं तुम्हें इतनी बात बोलता,
इतना कहकर वह अंदर की तरफ घुमा और उसने अब नेहा की तरफ देखा और अब नेहा को देखकर उसकी आंखें पूरी तरह से सिकुड गई क्योंकि नेहा पूरी तरह से दीवार से सटी हुई थी जिस तरह से अपना चेहरा नीचे की तरफ झुकाया हुआ था ऐसा लग रहा था जैसे त्रियांशु ने पता नहीं कितना उसे टॉर्चर किया हो, पर सच तो यह था कि नेहा अपने पीरियड्स की वजह से बहुत ज्यादा परेशान हो गई थी, अब त्रियांशु ने एक बार फिर से उसकी तरफ अपने कदम बढाए जैसे ही त्रियांशु के कदम नेहा की तरफ बडे नेहा ने अपनी आंखें कसकर बंद कर ली और अपनी कुर्ती को मुट्ठियों में भरते हुए देखिए sir प्लीज में अभी आपके साथ नहीं जा सकती आप चले जाइए मैं बाद में आ जाऊंगी, उसने बडी मुश्किल से अपनी बात त्रियांशु के सामने रखी थी.
लेकिन त्रियांशु जिसने नेहा की बात सुन तो ली थी लेकिन उसने पूरी तरह से नेहा की बात को इग्नोर करते हुए उसकी तरफ बडा और अगले ही पल नेहा को अपनी गोद में उठा लिया जैसे ही उसने नेहा को अपनी गोद में उठाया नेहा की आंखें बडी हो गई वह त्रियांशु की तरफ देखकर रोते हुए बोली प्लीज sir मुझे नीचे उतार दीजिए प्लीज आई रिक्वेस्ट यू, लेकिन प्रियांशु ने उसकी बात पूरी तरह से इग्नोर कर दी वहीं बाहर खडा सिक्योरिटी र्गाड भी यह चीज देख रहा था और त्रियांशु को नेहा को इस तरह से उठाते देख एक पल के लिए सिक्योरिटी र्गाड भी हैरान था. क्योंकि त्रियांशु कभी भी नेहा को पसंद नहीं करता था और आज जिस तरह से त्रियांशु ने नेहा को गोद में उठाया था यह चीज बेहद हैरान करने वाली थी, त्रियांशु ने अब नेहा को उठाया और उसे गोद में उठाते हुए ही वह लिफ्ट में आया और देखते ही देखते वह अपनी गाडी तक लाकर नेहा को साथ वाली सीट पर बैठाकर खुद ड्राइविंग सीट पर आ गया,
वही नेहा का तो दिल जैसे जोर- जोरों से धक- धक कर रहा था उसे अपना गला सूखता हुआ महसूस हो रहा था. इस वक्त उसे इतना डर लग रहा था क्योंकि त्रियांशु ने आज तक उसके साथ ऐसा बिहेव नहीं किया था और आज जिस तरह से त्रियांशु उसे गोद में उठाकर लेकर आया था. उसे त्रियांशु आज अलग ही वाइब दे रहा था.
दूसरी तरफ त्रियांशु अब गाडी में बैठा और देखते ही देखते उसने अपनी गाडी राणा इंडस्ट्रीज से निकाल ली, तकरीबन आधे घंटे तक जब, एक लेफ्ट साइड वाला रोड आया जहां पर उन्हें सीधे जाना था तो त्रियांशु ने लेफ्ट साइड वाला रास्ता चूस कर दिया और यह देखकर नेहा की आंखें बडी हो गई और उसका दिल जैसे धडकना ही भूल गया वह अपनी लडखडाती हुई आवाज में बोली sir हमें तो सीधे जाना था ना.
जैसे ही नेहा ने यह बात कही त्रियांशु के चेहरे पर डेविल एक्सप्रेशन आ गए और उसके चेहरे के भाव देखकर नेहा की सांस उसके गले में ही अटक गई,
वहीं दूसरी तरफ,
AS इस वक्त गाडी में बैठा हुआ था और उनकी गाडी इस वक्त हाईवे पर तेजी से दौड रही थी साथ ही में काजल भी बैठी हुई थी कि तभी AS का फोन बजा, जैसे ही एस का फोन बजा उसने अपने फोन की तरफ देखा तो, Mister खुराना का फोन आ रहा था Mister खुराना उनके जाने- माने डीलर थे. जिनके साथ उनकी डील्स होती ही रहती थी यह AS के लीगल काम में शामिल थे और इनका हर एक Call AS लिए बहुत ज्यादा इंपोर्टेंट होता था. AS ने अब गहरी सांस ली और अगले ही पल फोन उठा कर अपने कान से लगाया, दूसरी तरफ से Mister खुराना की आवाज आई,
हेलो Mister शेखावत, तभी AS जी Mister खुराना, तभी Mister खुराना, आपको अर्जेंटली सिडनी आना पडेगा क्योंकि हमारी सिडनी में शेयर्स बहुत जल्दी गिर रहे हैं और मैं आपसे एक छोटी सी हेल्प चाहता हूं क्या आप मेरी उन शेयर्स को ठीक करने में मेरी हेल्प करेंगे, Mister खुराना की बात सुनकर एक पल के लिए AS सोच में पड गया क्योंकि इस वक्त उसे मुंबई जाना था और शायद उसे कोई जरूरी काम भी था. लेकिन अब Mister खुराना उसके सबसे बडे डीलर थे तो अब उसने कुछ सोचते हुए, कब तक आना है सिडनी यही कल तक, Mister खुराना की बात पर अब AS ने गहरी सांस ली, ok I will be there tomorrow,
जैसे ही AS ने यह बात कही आगे बैठे आमिर की आंखें बडी हो गई. अब उसने जल्दी से पलट कर AS की तरफ देखा और उसकी तरफ देखकर बोला आप तो मुंबई जा रहे थे ना, जा रहा था लेकिन अब सिडनी जाना है बहुत जरूरी काम है. इतना कहते हुए AS की आवाज बेहद सख्त थी जिसे सुनकर आमिर की बोलती वहीं पर बंद हो चुकी थी. उसकी बात पर आमिर ने गहरी सांस ली और अब वह उसकी तरफ देखकर बोला तो अब जेट सिडनी की तरफ जाएगा? उसकी बात पर अब AS ने अपनी आईब्रो ऊपर की तरफ उठा दी, और AS का इतना इशारा ही काफी था कि आमिर को बताने के लिए, कि अब उसे कहाँ जाना था,
कुछ ही देर में उनकी गाडी एक खाली ग्राउंड के आगे आकर रुकी जहां पर उसका जेट खडा था. दूसरी तरफ बैठी हुई काजल भी अब गाडी से बाहर निकलने को हुई तभी AS सर्द आवाज में तुम यहीं पर रहोगी मैं सिर्फ दो दिन में वापस आ जाऊंगा फिर हम मुंबई चलेंगे, उसकी बात पर एक पल के लिए काजल अपनी जगह पर खडी रही फिर अगले ही पल उसने हां में से हिला दिया,
उसे AS से एक अजीब सी वाइब आ रही थी लेकिन वह कुछ बोली नहीं और गाडी में बैठ गई.
AS ने आमिर की तरफ देखकर, दिव्यांश को इसके बारे में बता दो और तुम मेरे साथ चलो, इतना कहकर AS ने अपने कदम जेट की तरफ बढा दिए, और देखते ही देखते AS जेट में चढ चुका था. कुछ ही देर में उसका जेट हवा में था. वहीं दूसरी तरफ काजल जो कि गाडी में बैठी थी इस वक्त उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी. और अगले ही पल उसके चेहरे पर एक तिरछी मुस्कराहट तैर गई,
दूसरी तरफ,
सिडनी में,
सारा दिन बीत चुका था लेकिन अभी तक कसक को होश नहीं आया था यह चीज पारुल को हद से ज्यादा बेचैन कर रही थी वही बाहर ही काशवी भी खडी थी जो यह चीज कब से देख रही थी और पारुल को बेचैन देख कर काशवी भी बेचैनी से उधर इधर- उधर चक्कर लगा रही थी. पारुल का यह हाल kaashvi से देखा नहीं जा रहा था उसका दिल इस वक्त जोर- जोर से धडक रहा था और आंखों में बार- बार नमी आ रही थी वह इस वक्त पारुल के पास जाना चाहती थी लेकिन इस वक्त उसके दिल ने उसे बांध रखा था अगर वह पारुल के सामने जाती तो हो सकता था पारुल उस पर और भी ज्यादा भडक जाता,
इसी वजह से वह पारुल के सामने नहीं जा रही थी लेकिन उसकी बेचैनी बढते पल के साथ बढती ही जा रही थी. वहीं अंदर पारुल का हाल भी कुछ ऐसा ही था पारुल की नजर एक टक कसक पर बनी हुई थी. जिसने सुबह से एक बार भी आंख नहीं खोली थी अब तक रात के नौ बज चुके थे. लेकिन कसक ने अपनी आंखें नहीं खोली थी और यह चीज देखकर पारुल का दिल जोरो जोरो से धडक रहा था. वो अपने सीने पर हाथ रखते हुए कुछ नहीं होगा कुछ भी नहीं होगा तुम्हें कसक मैं तुम्हें कुछ होने ही नहीं दूंगा इतना कहते हुए वह खुद से ही गहरी सांस लिए जा रहा था,
ऐसे ही धीरे- धीरे वक्त बितता रहा. ऐसे ही बेचैनी में ही सारी रात बीत गई लेकिन कसक को एक पल के लिए भी होश नहीं आया था. सुबह के साढे छह बजे, पारुल इस वक्त कसक के पास बैठा हुआ था और कसक का हाथ पडकर उसके बिस्तर पर अपना सिर रख कर सो गया था, उसे भी पता नहीं चला था कि इस कब सुबह उसकी आंख लग चुकी थी बाहर काशवी भी टेबल पर बैठी बैठी अपना सिर टेढा कर सो चुकी थी, और अंदर अब कसक की आंख हल्की- हल्की पर फडफडाई कसक की आंख फडफडाते ही धीरे- धीरे उसने अपनी आंखें खोलने शुरू की, जैसे ही कसक ने अपनी आंखें खोलकर पास में पडे पारुल को देखा उसकी आंखें बडी हो गई और वह अपनी जगह से उठकर बैठने को हुई लेकिन उससे बैठा ही नहीं गया, क्योंकि इस वक्त उसका शरीर बहुत ज्यादा कमजोर हो चुका था, और उसका दिल इस वक्त जोर- जोर से धडक रहा था वह आसपास देख रही थी जैसे ही कसक उठने को हुई, तभी पारुल की आंख भी खुल गई जैसे ही पारुल ने कसक को उठते देखा उसकी आंखें बडी हो गई,
और उसका दिल जैसे एक पल के लिए रुक सा गया था. वक्त एक पल के लिए जैसे रुक सा गया था. इस वक्त पारुल के कसक को देखकर रोंगटे खडे हो रहे थे, ऐसा लग रहा था जैसे उसके बदन में जान ही ना बची हो अब उसने किसी तरह से अपने हाथ को ऊपर की तरफ उठाकर कसक के गाल पर रखने को हुआ लेकिन अगले ही पल जो हुआ उसे देखकर एक पल के लिए पारुल का दिल जैसे धडकना ही भूल गया क्योंकि कसक जल्दी से पीछे की तरफ होकर खुद में सिमट गई, हालांकि वह अपनी जगह से उठ नहीं पा रही थी. क्योंकि पिछले तीन साल से वह बिस्तर पर लेटी हुई थी और अब उसके बदन में जैसे जान ना के बराबर थी दवाइयों के सिर पर वह जिंदा रह रही थी जिस वजह से उसके शरीर में इतनी ज्यादा कमजोरी आ चुकी थी कि उसे अपनी जगह से उठना भी भारी लग रहा था,
To be continue.







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