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नींद की गोलियां

शेखावत पैलेस,

बैकयार्ड एरिया,

आमिर इस वक्त श्रुति के ऊपर झुका हुआ था और उसके होठों को पैशनिटी चूम रहा था. वहीं श्रुति की आंखें इस वक्त बड़ी हो चुकी थी. लेकिन अगले ही पल उसकी आंखें अपने आप धीरे- धीरे बंद होने लगी. वहीं अमीर उसके होठों को चूमते हुए उसकी आंखों की तरफ ही देख रहा था जो की पूरी तरह से बंद हो चुकी थी श्रुति इस वक्त पूरी तरह से नशे में टल्ली हुई पड़ी थी. और यह चीज देखकर आमिर के चेहरे पर डेविल स्माइल आ चुकी थी. श्रुति अब आमिर की kiss में खोने लगी थी. लेकिन जैसे ही वह आमिर की किस में खोने लगी आमिर जल्दी से पीछे की तरफ हो गया और अपनी गहरी नजरों से श्रुति को देख हाथ बांधकर देखने लगा जो वैसे ही पाउट बनाकर खड़ी थी जैसे आमिर अभी भी उसके होठों को चूम रहा हो.

उसके होठों का पाउट बनते हुए देखकर आमिर के होठों के कोने मुङ चुके थे और वह बेहद गहरी आवाज में बोला मेरी Kiss तो , चूमना तो तुम्हें गंदा लगता है तो क्यों अभी भी पाउट बना कर खड़ी हो. उसकी बात पर अगले ही पल श्रुति ने अपनी एक आंख खोली और सामने खड़े आमिर को देखकर मुंह बनाते हुए बोली, यह क्या बात हुई भाई जब मजा आने लगा तो तुम वहां पर जाकर खड़े हो गए, तुम्हें शर्म नहीं आती क्या किसी लड़की को अपनी चुम्मी के लिए तरसाते हुए, उसकी बात पर आमिर की हंसी छूटने वाली थी लेकिन उसने अपने आप को पूरी तरह से कंट्रोल कर रखा हुआ था.

वहीं श्रुति अब उसके बिल्कुल बराबर आकर खड़ी हुई और अपने होठों पर उंगली रखते हुए बोली एक बार फिर से चुम्मी दो ना, सच्ची में बड़ी मीठी थी, उसकी बात पर आमिर की आंखें छोटी हो गई. वह मुंह बनाते हुए बोला मेरी चुम्मी इतनी सस्ती नहीं है जो तुम्हें वैसे ही दे दूं बांटता नहीं फिरता हूं मैं अपनी चुम्मी, उसकी बात पर श्रुति रोने जैसी शक्ल बनाते हुए, तो क्या तुम मुझे चुम्मी नहीं दोगे देखो ना मेरे होंठ कितने सेक्सी हैं देखो इतना कहते हुए उसने अपने होठों को बड़े ही सिडक्टिव वे में पाउट बनाया,

उसके होठों को देखकर आमिर को अपना गला सूखता हुआ महसूस हो रहा था लेकिन अगले ही पल उसने खुद को संभाला और अपने चेहरे को दूसरी तरफ घूमा कर बोला इतने भी खास नहीं है तुम्हारे होंठ पीछे करो फटे हुए हैं जैसे, उसकी बात पर श्रुति मुंह बनाते हुए बोली तुम ना बहुत गंदे हो बोलते टाइम देखते नहीं हो कि तुम्हारे सामने कौन खड़ा है इतनी क्यूट लड़की तुम्हारे सामने खड़ी है तुम्हें तो उसका फायदा उठाना चाहिए, उसकी बात पर आमिर की नजरे श्रुति पर और भी गहरी हो गई वह बेहद गहरी आवाज में बोला सीरियसली तुम चाहती हो कि मैं तुम्हारा फायदा उठाउ, तभी श्रुति और हंसी और बोली ऑफकोर्स, तुम जैसा हैंडसम लङका मेरा फायदा उठाये और मैं क्या चाहूंगी इतना कहते हुए उसने अपने हाथों को जोड़कर अपने गालों से लगा लिया था जैसे कि आमिर उसका हसीन ख्वाब हो,

उसकी ऐसी क्यूटनेस भरी हरकतें देखकर एक पल के लिए आमिर उसकी तरफ देखता ही रह गया. उसे अपने दिल में एक अजीब सी हलचल होती हुई महसूस हो रही थी जो कि उसे खुद नहीं समझ आ रही थी आखिर ऐसा उसके साथ हो क्यों रहा था. दूसरी तरफ बार- बार श्रुति उसके बराबर आकर खड़ी हो जाती थी जिस वजह से उसके दिल की धडकनें और भी ज्यादा तेज हो जाती थी. वहीं श्रुति अब एक बार फिर से उसके पास आई और उसके गालों को अपने हाथों में भरते हुए बोली वैसे तुम इतने भी बुरे नहीं हो दिखने में बहुत हैंडसम हो अगर मैं कहूं कि क्या मैं तुमसे शादी कर लूं तो तुम कर लोगे क्या मेरे साथ शादी,

उसकी बात पर आमिर तो बस आंखें फाङे उसे देखे ही जा रहा था. वहीं श्रुति अब अपनी आप बात को आगे जारी रखते हुए बोली, चलो हम शादी शादी खेलते हैं इतना कह कर उसने आमिर का हाथ पकड़ा और इधर- उधर कोई चीज ढूंढने लगी वहीं आमिर सवालियां नजरों से उसे देखने लगा कि आखिर वह ढूंढ क्या रही है तभी श्रुति को साइड में पड़ी हुई आमिर की फेवरेट किताबें दिखी जो कि वह रात को जब वह फ्री होता था तब पञता था. वह किताबें अक्सर आमिर तब ही पङता था जब उसके दिमाग पर बहुत ज्यादा स्ट्रेस होता था. वह सभी किताबें उसकी फेवरेट किताबें थी वहीं श्रुति अब उन किताबों के पास गई और अगले ही पल एक किताब उसने अपने हाथ में उठा ली.

उसको अपनी किताब पकङते हुए देख आमिर एक पल के लिए सोच में पङ गया आखिर यह करने क्या वाली है तभी जो उसने किया उसे देखकर आमिर की आंखें बड़ी हो गई. वह जोरों से चिल्लाया How डेयर You टू Touch माय बुक्स लाइक that, इतना कहते हुए वह श्रुति की तरफ भागा लेकिन तब तक श्रुति ने उसकी किताब पूरी तरह से फाड़ दी थी. वह उसके पन्ने फाङते हुए नीचे की तरफ फेंक रही थी. वहीं आमिर अब जल्दी से उसके पास आया और उसके हाथों से किताब झपटते हुए बोला तुम पागल हो क्या, ऐसे भी कोई भी चीज उठाकर फाड़ दोगी क्या, बेवकूफ औरत कहीं की दिमाग नाम की चीज नहीं है तुम में, oh God, कौन सी घड़ी में इस बेवकूफ को मैं अपने कमरे में ले आया और यार, मेरी फेवरेट किताब का कचरा करके रख दिया इस बेवकूफ लड़की ने इतना कहते हुए उसने श्रुति की तरफ फ्रस्ट्रेशन भरे भाव से देखा,

वहीं श्रुति अब मुंह बनाते हुए बोली बेवकूफ कौन तुमने मुझे बेवकूफ कहा तुम बेवकूफ तुम्हारा पूरा खानदान बेवकूफ, You इडियट मैंने यह किताब इसलिए फाङी ताकि हम आग जलाकर यहां पर फेरे ले सके पागल लड़का कहीं का मैंने क्या कहा था तुमसे तुम हैंडसम हो इसलिए मुझे तुमसे शादी करनी है. लेकिन तुम तो बेवकूफ भी हो, श्रुति की बात पर आमिर दांत पीसकर रह गया और अपने सिर पर हाथ रखते हुए बोला, यार मुझे इसे यहां से किसी तरह से निकालना होगा नहीं तो यह सारी रात मेरा दिमाग खा जाएगी क्या सोचकर मैं इसे यहां पर लेकर आया.

इतना कहकर अब वह आगे की तरफ हुआ और उसने श्रुति का हाथ पकड़ते हुए उसे अपनी तरफ खींच कर बाहर ले जाने को हुआ पर उसने इतनी जोर से खींचा था कि श्रुति एकदम से आमिर के ऊपर आ गई जिस वजह से आमिर भी संभल नहीं पाया और वह दोनों बेड पर जा गिरे, आमिर बेड पर था और श्रुति अब उसके ऊपर थी जो कि अपनी नशे भरी नजरों से उसे देख रही थी. वह बड़ी प्यार से मुस्कुराई और उसने आमिर के गालों को अपने हाथों में भरा और अगले ही पल उसने आमिर के होठों को अपने होठों में ले लिया. जैसे ही आमिर के होठों को उसने अपने होठों में लिया आमिर की आंखें बड़ी हो गई,

उसके दिल की धडकनों ने जैसे एकदम से रफ्तार पकड़ ली. और उसके हाथ इस वक्त श्रुति के कमर पर कस चुकी थे.

वहीं दूसरी तरफ,

शेखावत पैलेस में,

धानिष्क ने इस वक्त अपने ऊपर गन पॉइंट की थी और वह सौम्या को बाहर जाने से रोक रहा था लेकिन सौम्या उसकी बात नहीं मान रही थी वह अब धानिष्क की तरफ देखकर बोली आप यह ड्रामा कब बंद कर रहे हैं मैं जानती हूं आप ड्रामा कर रहे हैं ताकि मैं Garden एरिया में जाकर अपनी इंगेजमेंट ना कर पाऊं, वहीं धानिष्क अब उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला तो ठीक है तुम जा सकती हो अगर मैं मर भी जाऊं तो वापस मत आना, इतना कहकर उसने ट्रिगर पर हाथ रखा, जैसे ही धानिष्क ने ट्रिगर पर हाथ रखा सौम्या की सांस उसके गले में अटक गई, और उसकी आंखें बड़ी हो गई.

वहीं धानिष्क ने अब एकदम से ट्रिगर दबाया तभी वहां पर फायर हुआ. जैसे ही फायर हुआ और दूसरे ही पल एक और थप्पङ की आवाज वहां पर गूंज गई. और यह थप्पङ एक बार फिर से सौम्या ने धानिष्क के गाल पर जङा था , सौम्या ने धानिष्क का हाथ पूरी तरह से ऊपर की तरफ कर दिया था जिससे गन ऊपर सीलिंग की तरफ चली थी. और अगले ही पल सौम्या ने अपने एक जोरदार तमाचा धानिष्क के गाल पर जङ दिया इस वक्त उसका चेहरा गुस्से से कांप रहा था. वहीं धानिष्क के गाल पर सौम्या ने इतनी जोर से तमाचा मारा था कि उसका चेहरा दूसरी तरफ मुङ गया था लेकिन उसके चेहरे पर इस वक्त तिरछी मुस्कुराहट थी.

गुस्सा करने की बजाय धानिष्क के चेहरे पर इस वक्त डेविल स्माइल आ चुकी थी. वहीं बाहर खङे AS ने भी उस गन शॉट की आवाज सुनी थी. जो कि इस वक्त त्रियांशु और रुद्र के साथ खड़ा था. त्रियांशु इस वक्त गहरी नजरों से AS को देख रहा था. और अगले ही पल वह अपनी गहरी आवाज में बोला लगता है आपकी बहन ने कुछ धमाका कर दिया. त्रियांशु की बात पर AS के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट आ गई. वह बेहद एटीट्यूड से बोला यहां पर धमाके करना तो आम बात है Mister राणा शेखावत पैलेस में आए दिन धमाके होते रहते हैं उसकी चिंता आप मत कीजिए,

आप थोड़ा अपनी पर्सनल लाइफ पर ध्यान दीजिए क्योंकि मैंने सुना है. आपकी लाइफ में miss आईना ठाकुर वापस आ चुकी है. और शायद आप उससे शादी भी करने जा रहे हैं. कंग्रॅजुलेशंस Mister राणा आपकी बहुत जल्द शादी होने वाली है. जैसे ही AS ने यह बात कही तभी त्रियांशु की नजरे ना चाहते हुए भी नेहा की तरफ घूम गई. जैसे ही उसने नेहा की तरफ देखा. तो एक पल के लिए वह नेहा की तरफ देखता ही रह गया क्योंकि नेहा की आंखें इस वक्त हद से ज्यादा लाल हो चुकी थी और उनमें से आंसू जैसे बाहर आने को हो रहे थे.

और उसकी नाक भी लगभग से लाल होने लग गई थी. जिससे साफ पता चल रहा था जैसे कि नेहा ने उनके बीच हुई बातें अभी- अभी सुन ली हो, उसने अब अपनी आई रोल करके अपनी नमी को अपनी आंखों में ही रोका और अपने कदम शेखावत पैलेस से बाहर की तरफ बढ़ा दिए देखते ही देखते वह शेखावत पैलेस के दरवाजे से बाहर चली गई.

नेहा को बाहर जाता देख त्रियांशु की नजरे उस पर सर्द हो गई, और उसके जबड़े पूरी तरह से कस गए, त्रियांशु मन ही मन दांत पीसकर बोला इसे क्या लगता है यह रूठ जाएगी , मैं इसे मनाऊंगा इतनी औकात है क्या इसकी, थोड़ा सॉफ्ट क्या हो गया यह तो मेरे सिर पर उठ कर बैठने लगी. जाए जहां दफा होना है. इतना कहकर उसके चेहरे पर इरिटेशन साफ दिखाई दे रही थी. और गुस्से से उसकी आंखें हद से ज्यादा लाल भी हो रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर क्यों नेहा के इस तरह से जाने से उसे इतना ज्यादा फर्क पङ रहा था.

कभी- कभी तो खुद ही समझ नहीं पा रहा था कि आखिर क्यों उसके साथ इस तरह की चीज हो रही थी. पहले वह कभी इस तरह से फील नहीं करता था लेकिन जब से नेहा उसकी जिंदगी में आई थी वह खुद में कभी- कभी रेस्टलेस फील करता था. जैसे उस दिन आईना उसके सीने से आकर लगी थी तब भी वह खुद में रेस्टलेस फील कर रहा था. लेकिन जब नेहा उसके पास आती थी तो अलग सी फिलिंग्स उसके दिल में उठने लगती थी और यह क्या था उसे खुद भी समझ नहीं आ रहा था.

लेकिन फिलहाल के लिए त्रियांशु बहुत ज्यादा फ्रस्ट्रेटेड था. वहीं दूसरी तरफ नेहा शेखावत पैलेस से बाहर निकली और रोते हुए बाहर की तरफ पैदल- पैदल चले जा रही थी इस वक्त उसकी आंखों में आंसू लबालब बहे जा रहे थे वह रोते हुए अपने हाथों से आंसू साफ करते हुए बोली मुझे क्यों इतना बुरा लग रहा है वह सच ही तो कह रहे थे कि आईना दी से उनकी शादी होने वाली है तो मुझे क्यों बुरा लग रहा है आज नहीं तो कल उनकी शादी तो होनी है. इतना कहते हुए उसने अपने पेट की तरफ देखा और रोते हुए बोली बेबी जब आप दुनिया में आओगे क्या आप भी मम्मा को भूल जाओगे जैसे आपके पापा मेरा दिल दुखाते हैं आप भी मेरा दिल दुखाओगे वैसे भी आपके पापा तो आपके होते ही मुझे आपसे दूर कर देंगे, इतना कहते हुए नेहा की आंखों में आंसू और भी तेजी से बहने लगे,

वह लगातार रोते हुए सुबक रही थी रो- रो कर उसकी आंखें और उसका नाक पूरी तरह से लाल हो चुका था. वह अकेली खुद में बङबङाते हुए आगे की तरफ चले जा रही थी रास्ता इतना ज्यादा सुनसान था उसने यह भी ध्यान नहीं दिया कि वह जिस रास्ते से जा रही है वह रास्ता सेफ भी है या नहीं क्योंकि वहीं पर साइड पर एक जीप खड़ी थी जिसमें कुछ लड़के ड्रिंक कर रहे थे. और साथ ही साथ एक दूसरे के साथ प्रैंक भी कर रहे थे कि तभी उनकी नजर नेहा पर पड़ी. जो अकेले में ही बङबङाते हुए आगे की तरफ चल रही थी. तभी उन लड़कों में से एक लङका लीडर जो कि संजीव था दूसरे लड़के की तरफ देखकर बोला वह देख क्या माल जा रहा है.

कितनी खूबसूरत है यार, दिल तो कर रहा है इसे पकङ कर मसल दूं. तभी दूसरा लडका संजीव का बेस्ट Friend हातिम अरे यार कैसी बातें कर रहा है यह भी कोई पूछने की बात है हम भी थोड़े मजे ले लेंगे उसके, उसकी बात सुनकर संजीव के चेहरे पर बेशर्मी भरी मुस्कराहट तैर गई अब उसकी गहरी नजरे नेहा पर थी जो अकेले- अकेले चलते हुए आगे की तरफ आ रही थी, अब उनके फ्रेंड्स, सुमित और राहुल भी गाड़ी के पीछे उठ कर बैठे चल चल जल्दी चल नहीं तो आगे निकल जाएगी, अब चारों अपनी गाड़ी में ठीक होकर बैठे और धीरे- धीरे गाड़ी चलाने लगे,

नेहा आगे आगे चल रही थी और वह अपनी गाड़ी को धीरे- धीरे चला रहे थे कि तभी उन्होंने एकदम से तेजी से गाड़ी चलाकर नेहा के आगे जाकर गाड़ी रोकी जैसे ही गाड़ी को रोका नेहा के कदम वहीं पर रुक गए और वह उन लडकों को देखते हुए बोली, यह क्या बदतमीजी है और ऐसे कैसे तुम लोग मेरे आगे गाड़ी रोक सकते हो, उसकी बात पर संजीव जानेमन अभी तो गाड़ी रोकी है अभी तो तुम्हें रोकने का इरादा है रुक जाओ ना हमारे लिए आ जाओ हमारी गाड़ी में बैठकर हम तुम्हें घुमाने लेकर जाएंगे क्यों रो रही हो,

उसकी बात पर नेहा अब अपने कदम पीछे लेते हुए बोली दूर रहो मुझसे और यह क्या बदतमीजी है तुम्हारे घर पर कोई मां बहन नहीं है क्या, तभी संजीव बेशर्मी से मां बहन तो हैं जोरू नहीं है ए तुझे जोरू बना लूं, इतना कहते हुए संजीव उसकी बाँह पकङने को हुआ कि तभी नेहा पीछे की तरफ भागी उसको पीछे की तरफ भागता हुआ देख संजीव और हातिम जोरो जोरो से हंसे वही राहुल अब संजीव के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला अबे ओ बाद में यह रावण जैसे हंसना चल पहले उस लड़की को पकड़ आज रात अच्छी निकल जाएगी,

उसकी बात पर संजीव ने जल्दी से हां में सिर हिलाया और गाङी आगे की तरफ बढ़ा दी अब नेहा एक बार फिर से पीछे की तरफ भाग रही थी लेकिन इससे पहले वह ज्यादा दूर जाती संजीव ने अपनी गाड़ी इतनी तेजी से उसके आगे लाकर खड़ी की कि नेहा का दिल जैसे एक पल के लिए धड़कना ही भूल गया. अब संजीव आगे की तरफ आया और अगले ही पल उसने अब नेहा का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींचते हुए बोला चल कहां जाती है बहुत भाग लिया तूने इतना कहकर वह जल्दी से नेहा को अपनी गोद में उठाकर गाड़ी में बैठाने को हुआ.

कि तभी नेहा ने उसकी गोद में झटपटाते हुए अचानक से उसके कंधे पर अपने दांत गङा दिए, जिससे संजीव बुरी तरह से तड़प उठा और उसके हाथ से नेहा छूट गई और अगले ही पल नेहा जमीन पर जा गिरी जैसे ही नेहा जमीन पर गिरी नेहा के मुंह से दर्दनाक चीख निकल गई उसे अपने पेट में हद से ज्यादा दर्द हो रहा था वह रोते हुए चिल्ला रही थी, तभी संजीव जिसके कंधे पर नेहा ने अभी- अभी काटा था उसके कंधे से हल्का- हल्का ब्लड आने लगा था और यह चीज देखकर संजीव का चेहरा गुस्से से कांपने लगा और वह गुस्से में दांत पीसकर बोला तेरे साथ कुछ ज्यादा ही प्यार से पेशा लिया तू तभी इतनी मचल रही है चल तेरी मचल निकलता हूं. इतना कहकर वह नीचे की तरफ झुका और नेहा के बालों को कसकर पकङते हुए उसे खड़ा किया जैसे ही उसने नेहा को बालों से पकड़कर उसे खड़ा किया नेहा की दर्द भरी चीख वहां पर गूंज गई. उसकी चीख इतनी तेज थी कि वहां पर सुनसान सड़क होने की वजह से और भी ज्यादा तेजी से गूंजी थी.

अब संजीव ने उसे खड़ा किया और अगले ही पल एक जोरदार थप्पङ उसके गाल पर जङ दिया जिससे नेहा जमीन पर एक बार फिर से गिरी और अब उसके पेट में और भी ज्यादा दर्द होने लगा. वहीं राहुल और हातिम उसकी तरफ देखकर बोले अबे ओ दिमाग खराब हो गया है क्या, पहले लड़की से मार खा लिया अब उस पर गुस्सा उतारना है जल्दी कर कोई आ जाएगा इसको गाड़ी में डाल यहां से चलते हैं. अपने ठिकाने पर लेकर चल इसे, वहीं संजीव अभी उसे अपनी गहरी नजरों से देखते हुए बोला तुझे तो पहले मैं ही ठिकाने लगाऊंगा इतना कहकर उसने एक झटके से नेहा को अपनी गोद में उठाया और पीछे बैठने को हुआ कि तभी नेहा फिर से झटपटाने लगी इस बार संजीव को हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था. वहीं राहुल की नजरे भी अब नेहा पर गहरी होने लगी थी क्योंकि जिस तरह से नेहा झटपटा रही थी. साफ पता चल रहा था कि इस तरह से संजीव उसे कभी भी जीप में नहीं बिठा पाएगा, इसीलिए राहुल ने अब अपनी जेब में से एक छोटी सी शीशी निकाली और अपने रुमाल पर छिडक कर, संजीव के पीछे से गया और नेहा के मुंह पर रूमाल रखकर उसका मुंह दबा दिया.

जिससे नेहा की आंखें हैरत से फैल गई. और देखते ही देखते नेहा पूरी तरह से बेहोश होकर संजीव की बाहों में झूलने लगी. और यह चीज देखकर संजीव के चेहरे पर डेविल स्माइल आ गई वह अब राहुल की तरफ देखकर बोला काम तो बहुत अच्छा किया तूने चल इसका हिसाब अपने ठिकाने पर जाकर करते हैं इतना कहकर अब उन्होंने नेहा को बैक सीट पर लेटाया और अब संजीव आगे की तरफ जाकर गाङी के फ्रंट सीट पर बैठा वहीं राहुल भी नेहा के साथ पीछे ही बैठ गया,

और कुछ ही देर में उनकी गाङी वहां से निकल गई.

वहीं दूसरी तरफ,

शेखावत पैलेस,

त्रियांशु जो अभी भी बार- बार दरवाजे की तरफ देख रहा था वह एक ही चीज सोच रहा था कि शायद नेहा वापस आ जाए लेकिन तकरीबन से पंद्रह बीस मिनट बीत चुके थे लेकिन नेहा वापस नहीं आई थी, और अब उसके चेहरे पर परेशानी झलकने लगी थी. वहीं AS जो कि कब से यह चीज देख रहा था कि त्रियांशु का ध्यान बार- बार दरवाजे की तरफ था अब वह उसकी तरफ देखते हुए बोला Mister राणा, क्या कोई आने वाला है क्या, AS की बात पर त्रियांशु फीका सा मुस्कुरा कर बोला नहीं Mister शेखावत कोई नहीं आने वाला,

तभी AS अपनी गहरी आवाज में बोला सोच लीजिए कहीं कोई आपका चला तो नहीं गया यहां से, उसकी बात पर एक पल के लिए त्रियांशु चुप हो गया और अपनी गहरी नजरों से AS को देखने लगा, वह अब AS की तरफ देखकर अपनी dominating voice, में बोला त्रियांशु राणा को किसी की जरूरत नहीं अगर त्रियांशु राणा का कोई उससे दूर जाता है वह उसका होता ही नहीं है. और जो त्रियांशु राणा का है वह उसे खुद से दूर जाने भी नहीं देता, और मेरी जिंदगी में पत्ता भी मेरी इजाजत के बिना नहीं हिलता,

इतना कहते हुए उसके चेहरे पर एरोगेंस साफ दिखाई दे रही थी. और अब वह अपनी गहरी आवाज में बोला, तो अब मुझे चलना चाहिए Mister शेखावत, त्रियांशु की बात पर AS के चेहरे पर तिरछी मुस्कुराहट तैर गई जैसे कहीं ना कहीं वह त्रियांशु के दिल की बात जानता हो लेकिन, त्रियांशु कहां किसी के सामने अपना दिल खोलने वाला था. अपनी बात कहकर उसने AS की तरफ अपना हाथ बढाया, तो AS ने भी उसके हाथ में आई होप जल्द मुलाकात दोबारा होगी, तभी त्रियांशु AS को गहरी नजरों से देखते हुए बोला ऑफकोर्स Mister शेखावत, after all, बहुत से पर्दे उठने बाकी है इतना कहते हुए उसकी नजरें AS पर और भी ज्यादा गहरी हो गई थी वहीं AS भी कुछ कम नहीं था उसकी भी नजरे इस वक्त त्रियांशु पर बेहद गहरी थी.

दोनों नजरों ही नजरों में जैसे एक दूसरे से जंग लङ रहे हो. त्रियांशु अब पीछे की तरफ हुआ और देखते ही देखते उसने अपने कदम दरवाजे की तरफ बढ़ा दिए और अब वह शेखावत palace से निकल चुका था,

वहीं दूसरी तरफ,

धानिष्क और सौम्या का कमरा,

सौम्या ने अभी- अभी धानिष्क के गाल पर थप्पङ मारा था. क्योंकि धानिष्क कुछ देर पहले खुद को शूट करने वाला था अगर थोड़ी सी भी देर होती तो आज शायद धानिष्क जिंदा ना होता, सौम्या का चेहरा इस वक्त गुस्से से कांप रहा था. अगले पल अब उसने धानिष्क का कॉलर गुस्से से पकड़ा और झकझोरते हुए बोली पागल हो गए हैं आप क्या, अगर आपको कुछ हो जाता तो मैं जीते जी मर जाती. अरे हो क्या गया है आपको, कभी गाडियां जलाते हैं तो कभी खुद को गोली मारते हैं आपका दिमाग तो खराब नहीं हो गया है, उसकी बात पर धानिष्क उसके कंधों से पकड़कर, दांत पीसकर बोला जो तुम्हें मुझसे छीनेगा मैं उसे भी जलाकर राख कर दूंगा यह तो अभी फिर भी गाड़ी थी यह तो मैंने तुम्हें एक डेमो दिया है, उसकी बात पर सौम्या के चेहरे का रंग उङ गया, लेकिन अगले ही पल खुद को संभालते हुए दांत पीसकर बोली तो खुद को गोली क्यों मारने चले थे आपको पता है ना कि अगर आपको कुछ हुआ तो मैं तो वैसे ही मर जाऊंगी,

उसकी बात पर धानिष्क एक्सप्रेशनलेस होकर उसके चेहरे की तरफ देख रहा था. वह अब अपनी गहरी आवाज में बोला झूठ मत बोलो मेरे मरने जीने से तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, धानिष्क की बात पर अब सौम्या का चेहरा और भी गुस्से से लाल होने लगा और अगले ही पल वह उसके चेहरे को अपने हाथों में भरते हुए, अपने ऊपर झुकाते हुए बोली, आपको क्या लगता है. उसकी बात पर धानिष्क अब गहरी नजरों से उसे देखते हुए यही कि मेरे मरने जीने से तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता,

धानिष्क की बात सुनकर सौम्या अब व्यंग्य से मुस्कुराई, और अगले ही पल जोर से तालियां बजाने लगी और ऊंची ऊंची हंसते हुए बोली काश Mister कपूर काश आपके इश्क को भूलना इतना आसान होता, तो आज मैं घुट घुट कर यूं जी ना रही होती, आपने तो मुझे किसी लायक नहीं छोड़ा, और अब कह रहे हैं. कि आपके जीने मरने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, चलिए ठीक है एक एग्जांपल मैं आपको देती हूं. जैसे ही सौम्या ने यह बात कही धानिष्क की एक आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई, और उसके चेहरे पर सवालियां एक्सप्रेशन आ गए, और अब सौम्या उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोली अपना हाथ आगे कीजिए,

उसकी बात पर अब धानिष्क के चेहरे पर अजीब से एक्सप्रेशन आने लगे पता नहीं क्यों धानिष्क को अपने दिल की धड़कन बढ़ती हुई महसूस हो रही थी. तभी सौम्या ने उसके हाथ पर एक शीशी रख दी, और अगले ही पल उसकी आंखों में देखकर बोली बहुत शौक है ना आपको मुझसे दूर जाने का जा रही हूं अब मैं आपसे दूर रोक कर दिखाइए इतना कहते हुए देखते ही देखते वह पूरी तरह से बेहोश होकर गिरने को हुई कि तभी धानिष्क ने उसे अपनी बाहों में संभाल लिया, सौम्या को बेहोश होता हुआ देखकर धानिष्क का दिल जैसे एक पल के लिए धक्क सा रह गया। वहीं धानिष्क को तो अभी समझ ही नहीं आया था कि आखिर सौम्या ने उसे पकङाया क्या और अब उसने अपने हाथों में पकड़ी हुई शीशी को देखा तो अगले ही पल उसके होश पूरी तरह से उङ गए, वह शीशी नींद की गोलियों की शीशी थी जो कि बहुत ज्यादा हाई डोज थी. और इस वक्त इस शीशी में एक भी गोली नहीं थी तो मतलब साफ था कि सौम्या ने वह शीशी पहले ही कहीं खत्म कर दी थी.

और कब यह कोई नहीं जानता था. वहीं धानिष्क अब जोरों से चिल्लाया, सौम्या.

To be continue.

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