
शेखावत पैलेस,,
सौम्या इस वक्त बर्थडे पर अंधे मुंह लेटी हुई थी। और उसने अपने मुंह को तकिए में दबा रखा था। और उसकी आंखों से आंसू लबालब बहे जा रहे थे। इस वक्त उसके चेहरे से ही देखकर पता चल रहा था कि वह इस वक्त कितने दर्द में थी। उसकी लाल आंखें जो की सूज चुकी थी। तू खुद में ही रोते हुए बड़बड़े ही मैं आपको कभी माफ नहीं करूंगी मिस्टर कपूर,, आपने सोच भी कैसे लिया कि आप मुझे छोड़कर जाएंगे,, कितना कहते हुए अब उसने अपनी आंसू पूछे और अपनी जगह से उठने को ही की तभी उसके रूम का दरवाजा खुला और dhaanishk के अंदर की तरफ आया,,
जैसे ही dhaanishk सिकंदर की तरफ आया सौम्या जो कि अपना चेहरा साफ कर रही थी उसे देखकर अब सौम्या के चेहरे पर एक्सप्रेशन सख्त हो गए,, वह दांत पीसकर बोली आप मेरे कमरे में क्या कर रहे हैं। उसकी बात पर dhaanishk उसे गहरी नजरों से देखते हुए यह तुम्हारी अकेली का कमरा नहीं है यह मेरा भी कमरा है। उसके बाद पर सौम्या जी नहीं यह सिर्फ मेरा कमरा है। आप यहां से जा सकते हैं और जहां तक मुझे पता है कि हमारा तलाक हो चुका है मैंने पेपर्स पर साइन करती हैं आपकी ख्वाहिश पूरी कर दी है। इतना कहते हुए उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ घूम लिया था क्योंकि उसकी आंखों में नमी तैरने लगी थी वह जितना मर्जी चाहे लेकिन तलाक के नाम पर उसकी आंखें भर ही आती थी।
और यह चीज dhaanishk को भी पता थी। dhaanishk कन्या अब अपने कदम सौम्या की तरफ बढ़ाए,, सौम्या को भी पता चल चुका था कि dhaanishk उसकी तरफ आ रहा है इसलिए उसने भी अपनी कमर मार्केट हुए बाथरूम की तरफ जाने लगी जैसे ही उसने एक बार फिर से अपने कमर मटकाई तो dhaanishk ने इस बार अपने लोअर लिप को दांतो तले दबते हुए बोला इसकी यह मटकनी कमर आज मेरी जान लेकर मानेगी,, वही सौम्या अब तक बाथरुम के दरवाजे तक पहुंच चुकी थी अब उसने एक बार पलट कर dhaanishk की तरफ देखा जो उसे यह अपनी गहरी नजरों से देख रहा था। लेकिन अगले ही पल उसने dhaanishk को इग्नोर करके दोबारा से पीछे की तरफ घूमी और वार्डरोब में चली गई उसको वार्डरोब में ज्यादा देखा dhaanishk ने अपनी एक आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई।
वही सौम्या अबोव वार्डरोब के अंदर जाकर उसने अंदर से दरवाजा लॉक करते हुए बोली में बाहर ही नहीं आऊंगी,, इतना कहकर वह अब वार्डरोब की तरफ घूमी और अपने लिए कपड़े निकालने लगी कपड़े निकालते हुए उसने अपनी साड़ी को रिमूव करना शुरू कर दिया था क्योंकि जो साड़ी उसने इस वक्त पहनी हुई थी उसे उसे साड़ी के ब्लाउज में से लगी हुई एसेसरी उसे चुभ रही थी इस वजह से वह अब अपनी साड़ी उतारने में लगी हुई थी। उसे कहां पता था कि dhaanishk को शेखावत पैलेस के हर कमरे का एक्सेस मिला हुआ है क्योंकि AS मैं dhaanishk के फिंगरप्रिंट सौम्या के रूम के हर एक दरवाजे पर लगवा दिए थे।
और यह बात सौम्या को बिल्कुल भी नहीं पता थी। वेरी सौम्या जो कि अपने ही ध्यान अपने कपड़े रिमूव कर चुकी थी। तभी उसे अपने ऊपर किसी की गहरी नजर महसूस हुई यह महसूस करते ही उसका दिल जैसे एक पल के लिए धड़कन ही भूल गया अब उसने पीछे की तरफ पलट कर देखा तो उसकी आंखें बड़ी हो गई। और सांस मानो उसके गले में ही अटक गई क्योंकि दरवाजे पर खड़ा dhaanishk की उसे अपनी गहरी नजरों से देख रहा था। और इस वक्त उसकी नजर सौम्या की कमर पर थी। सौम्या की कमर को देखकर dhaanishk को अपने बदन में एक अलग ही हलचल महसूस हो रही थी। जो कि उसकी पेंट से ही पता चल रहा था।
दूसरी तरफ सौम्या उसको इस तरह दरवाजे पर देखकर उसका दिल जोरो जोरो से धक-धक करने लगा। अगले ही पल उसने नीची पड़ी हुई साड़ी को अपने बदन पर पूरी तरह लपेटे हुए यह क्या बदतमीजी है इस वक्त सौम्या के जबड़े पूरी तरह से कसे हुए थे। जैसे ही सौम्या ने dhaanishk को यह बात कही dhaanishk ने अब अपने कदम उसकी तरफ बढ़ा दिए जिस वजह से सौम्या की हालत अब और भी ज्यादा खराब होने लगी वह अपना सुरियावा गटकते हुए पीछे की तरफ होने लगी। इस वक्त वही जानती थी कि उसकी हालत क्या हो रही थी क्योंकि कहीं ना कहीं वह dhaanishk को चाहती भी थी और यह भी चाहती थी कि dhaanishk उसके बिल्कुल भी करीब ना है वह इस वक्त थोड़ी देर के लिए dhaanishk से स्पेस जाती थी। जो की dhaanishk उसे बिल्कुल भी दे नहीं रहा था। वह रोते हुए बोली प्लीज चले जाइए यहां से मिस्टर कपूर,, मैं आपसे रिक्वेस्ट करती हूं। आप तो पहले से ही मुझे छोड़ कर जाना चाहते थे लेकिन अब मैं आपको कहती हूं आप मुझे छोड़कर जा सकते हैं प्लीज आप जाइए यहां से,, सौम्या की बात सुनकर dhaanishk का चेहरा सख्त हो गया। अब अगले ही पल वह सौम्या के बिल्कुल पास आकर खड़ा हुआ और उसके चेहरे की तरफ देखकर बोला। तुम्हें जो करना है करो लेकिन मैं कहीं नहीं जाने वाला ,, और यह बात बात पर तलाक वाली बात छोड़ दो क्योंकि तलाक के पेपर्स मैं फाड़ दिए हैं। और दोबारा मुझे तलाक के पेपर पर साइन करने भी नहीं है और ना मैं तुम्हारे होने दूंगा,, तभी सौम्या जबड़े करते हुए बोली आप चाहते क्या है आखिर हर बार आपकी मनमानी चलेगी क्या हर बार आप मुझे दबाएंगे क्या और मैं दबती जाऊंगी बिल्कुल भी नहीं इस बार में दबाऊंगी नहीं,, मेरा दम घुटता है हर वक्त आपकी डोमिनेंस सह सह,, उसकी बात पर dhaanishk उसे गहरी नजरों से देखते हुए बोला वह तुम्हें बर्दाश्त करनी पड़ेगी और सारी उम्र बर्दाश्त करोगी यह चीज तुम,, क्योंकि dhaanishk कपूर को झेलना इतनी आसान बात नहीं है। और dhaanishk का कपूर को तुम्हारे सिवा कोई झील भी नहीं सकता।
उसकी बात पर सौम्या की आंखों में नमी उतर आई और अगले ही पल वो रोते हुए बोली इसीलिए आप मुझे छोड़कर जाना चाहते थे ना तभी तो आपने मेरे इश्क की कदर नहीं की हर वक्त मुझे और मेरी भावनाओं को ठेस पहुंचाई मानती हूं मुझसे गलती हुई लेकिन आपने क्या किया आप मुझे छोड़ कर चले गए बिना मुझे बताएं आखिर ऐसी क्या वजह थी जो आपको मुझे छोड़कर जाना पड़ा बताइए,,, अरे दीवानी हूं मैं आपकी लेकिन फिर भी आपको इस चीज का अंदाजा नहीं है। मुझे आपसे कितना इश्क है। जाना चाहेंगे कितना इश्क करती हूं मैं आपसे,, उसकी बात पर dhaanishk के की इकाई ब्रो ऊपर की तरफ फूट गई जैसे जानना चाहता हूं कि आखिर वह कितना इश्क करती है और अगले ही पल वह बेहद सेडक्टिव वॉइस ने बोला बताओ ना कितना प्यार करती हो इतना कहते हुए उसने अपना एक हाथ सौम्या के गाल पर रखना चाहा लेकिन सौम्या अगले ही पल पीछे की तरफ हो गई। और यह चीज देखकर दानिश की हाथों की मुठिया बंद गई,,
सौम्या अब उसकी तरफ देखते हुए रुकिए बताती हूं इतना कहकर वह बाहर की तरफ ए वही dhaanishk अभी भी वहीं पर खड़ा था उसे समझ नहीं आ रहा था आखिर सौम्या करना क्या चाहती है। तभी तो मैं उसके सामने आकर खड़ी हुई और उसने अपने हाथों में पड़ी हुई गन अपने माथे पर रखकर बोली अभी साबित करती हूं इतना कह कर उसने अपना उंगली गण के ट्रिगर पर रख दी,, ऐसा लग रहा था जैसे सौम्या का दिमाग इस पल पूरी तरह से घुमा हुआ था। वही जब दानिश ने उसे अपने माथे पर गन रखते देखा तो उसकी आंखें बड़ी हो गई उसे ऐसा लगा जैसे उसकी जान उसके गले में आ गई हो। दूसरे ही पाल वहां पर गण चलने की आवाज आई जो कि बाहर खड़ी अनन्या और कल्याणी जी ने भी सुनी थी और वहां पर खड़ी सरगम को भी यह आवाज आई थी। जिसे सुनकर सरगम के चेहरे पर शातिर से मुस्कुराहट आ चुकी ,,थी। वह खुद में ही बड़बड़े लगता है किसी की मौत हो गई है घर में कोई चल बसा है इतना कहते हुए उसके चेहरे पर,,, एक्साइटमेंट साफ दिखाई दे रही थी दूसरी तरफ कमरे में,, सौम्या जो कि नीचे जमीन पर गिरी हुई थी इस वक्त उसकी गाल पर उंगलियों के पांच निशान छपे हुए थे जो की dhaanishk करके थे और दानिश के इस वक्त गुस्से से कांप,, वह दांत पीसते हुए अब उसने सौम्या के बालों को मुट्ठी में भारत और अपने बराबर खड़े करते हुए उसे अपना दूसरा हाथ उसके गले पर रखकर वार्डरोब से सटा दिया और उसके चेहरे पर झुक कर बोला,
इस इश्क साबित करना कहते हैं यह इश्क साबित कर रही हो तुम मुझ मेरे साथ ऐसे,, अगर ऐसे इश्क साबित करना होता ना तो मैं कब का कर चुका होता और मेरा सीन पूरी तरह से गोलियों से छलनी हो चुका होता,, उसकी बात पर नेहा व्यंग्य से हंसी और बोली बस कीजिए मिस्टर कपूर बहुत सुन ली मैंने आपकी बातें नहीं सुनना मुझे कुछ भी आपको मुझसे कोई इश्क नहीं था आप तो बस मुझे अपनी उंगलियों पर नचा रही थी आपको तो बस मेरे जिस्म की भूख थी जैसे ही सौम्या ने यह बात कही dhaanishk ने अगले ही पल उसके गले से अपनी उंगलियां ढीली कर दी और अपना हाथ नीचे की तरफ कर लिया। और अब dhaanishk के चेहरे पर बेहद सख्त भाव आ चुकेथे। वह अब सौम्या की तरफ देखकर सख्त आवाज में बोला ठीक है तुम दूर जाना चाहती हो ना जाओ अब मैं तुम्हें परमिशन देता हूं। और वादा रहा मैं तुम्हारे करीब बिल्कुल नहीं आऊंगा तुम्हें जो करना है तुम कर सकती हो,,
तुम्हें मुझे तलाक चाहिए रात तक तलाक के पेपर तुम्हारे पास पहुंच जाएंगे इतना कहकर dhaanishk ने अब एक नजर उसके चेहरे को देखा जो अब बिल्कुल सुना पढ़ चुका था। उसके चेहरे को देख अगले ही पल dhaanishk ने अपने कदम वार्डरोब के बाहर बढ़ा दिए, बाहर आते ही उसकी नजर दरवाजे पर पड़ी जो की बाहर से कल्याणी जी और अन्य खटखटा रही थी वह इस वक्त बेहद घबराई हुई थी! वह लगातार दरवाजा बजाते हुए सौम्या को पुकार रही थी लेकिन अंदर तक आवाज नहीं आ रही थी.। dhaanishk का बाहर की तरफ आया और उसने दरवाजा खोलकर सामने सौम्या और कल्याणी जी की तरफ देखा,,
दूसरी तरफ वार्डरोब में जैसे ही dhaanishk उसे छोड़कर गया। सौम्या अपने घुटनों के बाल गिर पड़ी और अगले ही पल उसका रोना और भी ज्यादा तेज हो गया और वह फूट-फूट कर रोने लगी और बोली क्यों मिस्टर कपूर क्यों आखिर क्यों आपको मानना नहीं आता हर बार में मनाऊं आखिर चाहते क्या है आप प्यार का इजहार आपको नहीं करना आता। अगर मैं थोड़ी देर के लिए आपसे दूरियां मांग ली आपने तो सच में मुझे दूरी बना ली और मुझे तलाक देने तक का फैसला कर लिया इतने पत्थर दिल कैसे हो सकते हैं आप इतना कह कर उसने अपने मुंह को दबाकर वही अलमीरा के पास फूट-फूट कर रोने लगी,,
दूसरी तरफ dhaanishk के जो कि इस वक्त दादी और अन्य के सामने खड़ा था,, कल्याणी जी अब उसके गाल पर हाथ रखकर बोली क्या बात है बेटा और यह गन की आवाज कहां से आई थी सौम्या ठीक तो है ना कुछ हुआ तो नहीं तुम दोनों के बीच,, तभी dhaanishk की दादी के हाथ को बड़े प्यार से पढ़ते हुए अरे कुछ नहीं दादी वह बस ऐसे ही जिद कर रही थी कि एक निशान लगाना निशाना लगाना है वही बस हाथ में गण पकड़ कर मैंने उसे निशाना लगाया था अभी मुझे कोई काम है बाहर जा रहा हूं शाम तक आ जाऊंगा,, dhaanishk की आंखें इस वक्त हद से ज्यादा लाल थी जो की कल्याणी जी को भी अजीब लग रही थी उसने एक नजर अन्य की तरफ देखा और दूसरे पल दोबारा से dhaanishk की तरफ देखा जो अब वहां से निकल चुका था,, कल्याणी की अन्य की तरफ देखकर बोली मुझे क्यों लग रहा है इन दोनों का रिश्ता ठीक नहीं चल रहा है। उसकी बात पर सौम्या भी हां में श्री लाते हुए बोली हां दादी मुझे भी कुछ ऐसा ही लग रहा है। इतना कहते हुए उन दोनों के चेहरे पर इस वक्त
परेशानी झलक रही थी।
To be continue....







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