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Bechaniya

अमानत का पर्सनल विला,

इस वक्त अफसाना अमानत की गोद में बैठी हुई थी. अमानत का एक हाथ उसकी कमर पर पूरी तरह से कसा हुआ था और दूसरे हाथ से अभी- अभी उसने अफसाना के लिए एक बाइट बनाई थी जो उसके मुंह की तरफ बढा दी थी. जिस तरह से अफसाना के मुंह की तरफ उसने व्हाइट बधाई थी अफसाना की आंखें बडी हो चुकी थी और वह अपनी बडी- बडी आंखों से अमानत को देख रही थी आज तक उसके साथ किसी ने भी इतने प्यार से ट्वीट नहीं किया था हालांकि अमानत थोडा डोमिनेटिंग था पर जिस तरह से उसने उसके लिए निवाला बनकर उसके मुंह की तरफ किया था अफसाना की आंखें नम होने लगी थी न जाने क्यों उसे एक अजीब सी बेचैनी अपने मन में होने लगी थी.

उसकी आंखों में नमी देखकर अमानत की आंखें सर्द हो गई और जबडे पूरी तरह से कस गए, वह अपने सर्द आवाज में बोला खबरदार अगर आंखों से आंसू आए बहुत हो गया जब से देख रहा हूं आंखों से पानी लाई जा रही हो, तुम्हारी आंखों में नल चालू है क्या जब मर्जी बहाने शुरू हो जाते हैं. उसकी बात पर अफसाना ने अपना sir पूरी तरह से नीचे झुकते हुए बोली अपने आप आ जाते हैं रोना नहीं चाहती हूं मैं, कोई उसकी बात सुनकर अमानत के चेहरे की एक्सप्रेशन एक पल के लिए नॉर्मल हो गए अब वह दोबारा से अपने निवाला अफसाना के चेहरे की तरफ बढते हुए जल्दी मुंह खोलो पता नहीं कब से खाना खाया है तुमने कब से नहीं,

तभी अफसाना नाम है सिरी लाते हुए बोली प्लीज हम आपके आगे हाथ जोडते हैं बाबू साहब हमें जाने दीजिए हम एक विधवा है अगर किसी को पता चल गया कि हम आपके साथ यहां पर आए तो आफत आ जाएगी वह लोग मुझे छोडेंगे नहीं इतना कहकर उसने अपना चेहरा ऊपर की तरफ उठाया और दोबारा से उसकी आंखों में पानी बहने लगा और यह चीज देखकर अमानत का गुस्सा अब और भी पढने लगा वह दांत पीसते हुए बोला पहले तो रोना बंद करो, जिस तरह से अमानत उसके साथ बोला था एक पल के लिए अफसाना डर गई क्योंकि अमानत चाहे बोल धीरे से था लेकिन उसकी आवाज में जो गुस्सा था उसे देखकर अफसाना बहुत ज्यादा डर चुकी थी और अब वह उसकी गोद में बैठी हुई कहां पर रही थी,

उसको इस तरह से कमता हुआ देखकर असुर ने अपनी आंखें कसकर बंद कर ली, और एक गहरी सांस लेकर उसे देखते हुए बोल जल्दी मुंह खोलो, अमानत की बात पर अफसाना ने सुबकते हुए, मेरी बात तो सुनिए बाबू साहिब, उसकी बात पर अमानत की आंखें उसे पर गहरी हो गई जैसे ही अमानत की आंखें उसे पर गहरी हुई अफसाना की आवाज उसके गले में अटक गई उसने जल्दी से अब अपना मुंह खोला तो अमानत ने अब अपनी हाथों में पडी हुई बीते उसके मुंह में रख दी, जैसे ही अमानत ने उसके मुंह में बीते राखी अफसाना अब खाना खाने लगी भूख तो अफसाना को बहुत लगी थी लेकिन हालातो के कारण जैसे उसकी भूख मर चुकी थी पहले तो उसके पति का उसकी जिंदगी से चला जाना और दूसरी बात उसकी ननद का उसे इतना ज्यादा तंग करना, जिससे वह हर वक्त परेशान रहती थी उसकी नजर तो उसे ठीक से खाना भी तक नहीं खाने देती थी.

और आज जिस तरह से अमानत उसे उठाकर घर से बाहर लेकर आया था उसकी सोच सोच कर जान निकल रही थी कि पता नह रीमा उसका क्या हाल करेगी उसे सोच- सोच करी उसे हद से ज्यादा डर लग रहा था जिस वजह से उसके रोंगटे भी खडे हो रहे थे क्योंकि रीमा ने कई बार उसे टॉर्चर सेक्शन दिया था. जिससे उसे बहुत दर्द होता था. कई बार तो रीमा उसे पतले से कपडों में बाहर सर्दी में खडा कर देती थी जिससे सारी सारी रात उसकी ठंड में बीत जाती थी लेकिन रीमा को उसे पर तरस नहीं आता था. रीमा माइक अंडर विच वास के चलते की उसके भाई की मौत के पीछे अफसाना का हाथ था इस सोच में वह अपनी हदें पार करती गई वही अफसाना भी उसकी हर मनमानी सहन करती गई अब तो जैसे उसे आदत सी हो गई थी. और वही चीज याद करके अफसाना के रोंगटे खडे हो रहे थे वही अमानत एक्सप्रेशंस होकर उसे खाना खिला रहा था लेकिन उसका ठंडा पडता बदन देखकर अमानत को समझ में आ रहा था को कुछ तो गडबड है कि अफसाना अभी भी किसी चीज में खोई हुई है. कुछ ही देर में अमानत ने उसे खाना जल्दी से खिलाकर अब उसे गहरी नजरों से देखते हुए मुझे भी खिलाओ जैसे ही उसने कहा अफसाना जो अपनी ही ख्यालों में घूमती अब जाकर वह अपने ख्यालों से बाहर आई और अब उसने अमानत की तरफ देखा,

और अपनी मासूमियत से बोली आप खुद खा लीजिए ना आपकी कौन सा हाथ नहीं है उसकी बात सुनकर अमानत की एक आईब्रो ऊपर की तरफ उठ गई उसके होठों के कोने एक पल के लिए मुड गए, वह अब उसके कान के पास झुका और बेहद गहरी आवाज में बोला हां तो है पर वह अभी किसी और चीज में बिजी हैं इतना कहकर उसने अपना दूसरा हाथ भी उसकी कमर पर रख उसे सहलाने लगा जिससे अफसाना का दिल जोरो जोरो से धक- धक करने लगा, अफसाना को अपना गला सूखता हुआ महसूस हो रहा था उसकी अपनी बॉडी में गूसेबंप्स आने शुरू हो गए थे. वही अमानत अब उसे खाने की तरफ इशारा करते हुए जल्दी करो मुझे भूख लगी है, नहीं तो मैं तुम्हें कच्चा चबा जाऊंगा उसकी बात सुनकर अफसाना के रोंगटे और भी ज्यादा खडे होने लगे उसने जल्दी से सामने पडी रोटी का निवाला बनाया और अमानत की तरफ बढा दिया जैसे ही अमानत दे उसके हाथ में रोटी का निवाला देखा तो उसके हाथों की उंगलियों को भी अपने मुंह में ले लिया, और हल्का सा व्हाइट कर दिया जिससे अफसाना की सिसकी निकल गई, अमानत को इस तरह से खाता देखा अफसाना मुंह बनाते हुए बोली यह कौन सा तरीका हुआ मेरी उंगलियां cut गई है अभी इतना कह कर उसने अपने हाथ को धीरे- धीरे झटकाके लगी उसको इस तरह से अपने लिए बोलना देखा भारत के चेहरे पर एक बार फिर से छोटी सी मुस्कराहट तैर गई जो कि शायद अफसाना नहीं देख पाई वही अमानत अब अपनी डोमिनेटिंग वॉइस में बोला अभी और भी बहुत कुछ दर्द होगा जल्दी खाना खिलाओ,

उसकी बात सुनकर अफसाना को एक अलग ही बेचैनी महसूस होने लगी वह एक बार फिर से, अमानत को अपनी मासूम आंखों से देखते हुए प्लीज हमें छोड दीजिए हमें यहां से जाने दीजिए हम आपके आगे हाथ जोडते हैं अगर रीमा दी को पता चल गया ना वह हमें जिंदा नहीं छोडेंगे, itna kahkar vah ek bar fir se Amanat ke aage गिडगिड आने लगी, जिस तरह से वह रीमा से डरने लगी थी अमानत को अब रीमा पर हद से ज्यादा गुस्सा आ रहा था वह अपनी लाल आंखों से देखते हुए बोला खाना खिलाओ,

अमानत की बात पर अफसाना ने अपना चेहरा पूरी तरह से झुका लिया और धीरे- धीरे कर उसे खाना खिलाने लगी, कुछ ही देर में सारा खाना खिलाकर जब अफसाना ने अमानत की तरफ देखा तो अमानत उसकी हर बात समझ रहा था उसने अपने हाथ उसकी कमर पर ढीले कर दिए जिससे अफसाना के चेहरे पर राहत के भाव आनी शुरू हो गए और अगले ही पल उठने को हुई कि तभी अमानत ने उसका हाथ दोबारा से पकडा और उसे अपने गोद में खींचते हुए अगले ही पल उसे गोद में उठा लिया, जैसे ही अमानत में उसे गोद में उठाया अफसाना का दिल जोरो जोरो से धक- धक करने लगा,

वह अपनी लडखडाती हुई आवाज में बोली यह आप क्या कर रहे हैं प्लीज मुझे छोडिए मुझे यहां से जाना है अगर रीमा दी उसने इतना ही कहा था की अमानत ने उसे अपनी गहरी नजरों से देखा तो उसकी सांस उसके गले में अटक गई, अमानत अब उसे अपने Room में लेकर आया और उसे बेड पर लेटा दिया जैसे ही उसने बेड पर लेताया अगले ही पल अफसाना बेड पर उठकर बैठ गई और लडखडाती हुई आवाज में बोली देखिए यह सब ठीक नहीं है मैं एक विधवा हूं और विधवा के साथ ऐसी चीज शोभा नहीं देती हैं प्लीज आप पीछे आती है इतना कह कर अपनी जगह से उठकर बेड से उतरने लगी कि तभी अमानत ने उसे अपने ऊपर खींच लिया, उसको इस तरह से अपने ऊपर खींचना देखा अफसाना का दिल धक सा रह गया.

वहीं दूसरी तरफ,

कनिका जो अभी- अभी शावर लेकर बाहर की तरफ आई थी इस वक्त उसकी आंखों में बेहिसाब पानी बह रहा था और अब वह आते ही बेड पर लेट गई इस वक्त उसने अपने बदन पर कुछ नहीं पहना हुआ था हालांकि उसका बदन हल्का- हल्का गीला था लेकिन उसे इस चीज से भी कोई फर्क नहीं पड रहा था. वह जल्दी से आई और बेड पर आकर लेट गई. रोते रोते खुद में ही बडबडे आखिर क्यों आपको मुझ पर भरोसा नहीं है असुर बाबू मैने भी आपसे बेइंतहा इश्क किया है. काश आप मेरे बिना कहीं मेरी बातें समझ जाते, हां जानती हूं कुछ गलती मेरी है लेकिन इतना बडा गुनाह तो मैं नहीं कर सकती आपको इतना तो होना चाहिए था. इतना कहते हुए फूट- फूट कर रोने लगी,

खुद से ही वह बातें किए जा रही थी. सुबकते हुए बोली काश काश मुझे इश्क हुआ ही नहीं होता अगर इश्क ना किया होता तो इतनी दुविधा में ना होती शकर भी आपको तकलीफ नहीं दे सकती असुर बाबू आपने तो जो देखा वह मान लिया लेकिन मैं तो आपसे इश्क करना भी नहीं छोड पाई आपकी नफरत पी गई, मुझे आपके बिना कभी जीना आया ही नहीं लेकिन आपने तो मेरे बिना जीना सीख लिया ससुर बाबू इतना कहकर अब उसका रोना और भी ज्यादा बढ गया था, तकरीबन पौना घंटा रोते- रोते ही उसकी नींद लग गई,

रात के तीन बजे,

असुर की गाडी पठानी हाउस के आगे आकर रुकी, और इस वक्त उसकी आंखों में गहरी लाली छाई हुई थी. पठानी हाउस इस वक्त जो कि अंधेरे में डूबा हुआ था उसकी गहरी नजरे उसे पर थी और उसकी आंखों के सामने इस वक्त कनिका का चेहरा घूम रहा था जो कुछ घंटे पहले उसने बातें कही थी वह अभी भी अमानत के कानों में कहीं ना कहीं गूंज रही थी उसका You बार- बार कहना हर देखी हुई चीज सच नहीं होती वह चीज उसके दिल को हर बढाते पाल के साथ जैसे छलनी कर रही थी. उसकी गहरी लाल आंखों से देखकर साफ पता चल रहा था कि उसने इस वक्त बहुत ज्यादा ड्रिंक की हुई है. लेकिन फिर भी उसके कदम बिल्कुल भी लडखडा नहीं रहे थे. अब वह अपने धीरे- धीरे कदमों से अंदर की तरफ बढने लगा जैसे- जैसे वह अंदर की तरफ बढ रहा था उसके दिल की बेचैनी उसके चेहरे पर आ रही थी.

वह खुद में ही बडबडाया इश्क तो मैं तुमसे करता था पर अब नहीं करता हूं मैं जानता हूं तुम अपने गुनाह छुपाने की कोशिश कर रही हो सब समझता हूं मैं तुम मेरा प्यार पाना चाहती हो तुम मेरे पैसे पर राज करना चाहती हो इसीलिए मेरे सामने इस तरह की सफाई पेश कर रही हो मुझे पता है अगर इतना ही है तो मुझे सच बताओ कि आखिर हुआ क्या है इतना बढ बढाते हुए वह आगे की तरफ बढ रहा था. कुछ ही देर में असुर पूरी तरह से अंदर की तरफ आया और अपने Room की तरफ बढ गया, Room के पास जाकर जैसे ही उसने दरवाजा खोल उसकी आंखें सामने बेड पर लेटी हुई कनिका पर टिक गई जो की बेलिबाज ब्लैंकेट से कवर गहरी नींद में सो रही थी लेकिन गहरी नींद में भी उसके चेहरे पर उसकी बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी और रो- रो कर उसके गालों पर जो आंसू सूख चुके थे उसकी लकीरें अभी भी दिखाई दे रही थी. वही असुर जो की अभी दरवाजे पर ही खडा था उसे कनिका को देखकर अब और भी ज्यादा अजीब सा लगने लगा.

वह खुद में ही बडबडाया यह क्यों मुझे अपनी तरफ खींच रही है क्यों मेरा दिल इसके पास जाने को तडपता है इतना कहते हुए असुर के बेचैनी उसके चेहरे पर और भी ज्यादा झलकने लगी, तभी बिस्तर पर पडी कनिका ने करवट ली और करवट लेते ही उसकी ब्लैंकेट एक तरफ खिसक गई जैसे उसका बदन एक बार फिर से उसके सामने था. और यह देखकर असुर का दिल जैसे धक सा रह गया,

To be continue.

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