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सच! एक पहेली?

पठानी हाउस,,

कनिका और असुर इस वक्त दोनों बाथरूम में थे और उन दोनों की गहरी सांस बाथरूम में गूंज रही थी। कनिका जोकि बाथरूम की दीवार से लगी हुई अपनी पैरों की एड़ियों को उचका कर खड़ी थी इस वक्त उसके पैर बुरी तरह से कांप रहे थे। असुर पूरी तरह से कनिका की कमर पर झुका हुआ था और उसे चूम रहा था। जिससे कनिका का दिल जोरो जोरो से धक-धक कर रहा था। उसकी सांसे बढ़ाते पाल के साथ गहरी होती जा रही थी। और इस वक्त उसके हाथ असुर के बालों में उलझे हुए थे। और वह असुर को खुद की तरफ पुश कर रही थी। वही असुर तो खुद कनिका में इस वक्त खोया हुआ था। बढ़ते पल के उन दोनों को होश नहीं रहा था कि वह क्या कर रहे हैं। असुर भले ही कनिका की कमर पर झुका हुआ था लेकिन उसकी मदहोशी भारी नजरे कनिका के चेहरे पर थी जो की पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठा हुआ था। और उसके आंखें ऊपर की तरफ रोल हो रही थी।

कुछ ही देर में कनिका का बदन पूरी तरह से शिवर करने लगा। और उसकी सांसे और भी ज्यादा गहरी होने लगी वही असुर की पकड़ उसकी कमर पर और भी ज्यादा कस चुकी थी। उसकी पकड़ इतनी ज्यादा कमर पर कई हुई थी कि कनिका अब बुरी तरह से हंसने लगी थी। वही उसकी इस तरह से हंसता हुआ देखकर असुर का अपना बदन अब पकड़ने लगा था। उसके चेहरे पर अब अजीब से एहसास आने लगेथे। अगली पाल अब वह उसकी कमर पर से उठा और उसकी आंखों में मदहोशी भर देखते हुए उसके चेहरे पर झुकने लगा,,,

इस वक्त कनिका का पूरा चेहरा मदहोशी से भरा हुआ था जिस वजह से उसके गाल पूरी तरह से लाल थे उसके होंठ हल्के हल्के फड़फड़ा रहे थे। जिस वजह से वह इस वक्त बहुत ज्यादा रूमानी लग रही थी। उसकी और देखकर असुर को अपना गला सूखता हुआ महसूस हो रहा था। और ऊपर से शावर की बूंदे उसके होठों पर जम चुकी थी। जिस तरह से उसके होठों पर शावर की बूंदे,, किसी और की तरह जमी हुई थी असुर का दिल उसको पीने का कर रहा था। वही कनिका जो कि कब से असुर की नजरे खुद पर बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही थी अब उससे और यह चीज बर्दाश्त नहीं हुई इसलिए उसने अपनी चेहरा दूसरी तरफ घुमा दिया उसको इस तरह से चेहरा घूमता ,, असुर का दिल एक पल के लिए जैसे धड़क उठा,,,

उसने आज तक कनिका की यह साइड कभी नहीं देखी थी जो आज वह देख रहा था। उसे अपने बदन में एक अलग ही हलचल महसूस हो रही थी अब उसने आगे बढ़कर कनिका के गाल पर अपना हाथ रखा और बेहद प्यार से बोल,, तुमने ऐसा क्यों किया क्यों तुमने मेरी दीदी को... इतना कहकर वहीं पर चुप हो गया,,, और अब उसकी आंखों में गहरी लाली आने लगी जिससे उसकी हाथों की मुठिया कने लगी उसकी आंखों के सामने एक बार फिर से वही पल घूमने लगा जब उसकी बड़ी बहन उसके बाहों में दम तोड़ रही थी उसे पाल को याद करते ही उसके जबड़े अब दोबारा से करने लगे थे। वही कनिका जो कि दूसरी तरफ मुंह घुमा कर खड़ी थी जैसे ही उसके कानों में यह बातें पड़ी उसकी आंखें बड़ी हो गई और आंखों में नमी तैर गई,,

वही असुर ने अब दोबारा से उसे पूछा क्या एक बार भी तुम बताओ कि नहीं कि आखिर तुमने ऐसा क्यों किया वही कनिका ने एक नजर उसकी तरफ देखा और अगले ही पल अपनी नज़रें पूरी तरह से झुका दी,, उसका इतना ही था की असुर अगले ही पल व्यंग्य से हंसा और बोला,, तुमसे और उम्मीद भी क्या कर सकता हूं इसीलिए तो अब इश्क से नफरत हो गई है क्योंकि तुम्हारा नाम एक वक्त पर मैं इश्क रखा था और तुम उसे इश्क के काबिल नहीं इतना कहकर अब वह बाथरूम के दरवाजे की तरफ घुमा और अपने कदम आगे बढ़ाने को हुआ के तभी कनिका ने उसका हाथ पकड़ लिया,,

कनिका अभी भी वैसे ही सर झुकाए खड़ी थी इस वक्त उसकी आंखों से आंसू लबालब बह रहे थे चेहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था,, वही असुर का दिल तो जैसे जोर-जोरों से धक-धक करने लगा,, उसे एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी वह क्या थी यह वह खुद नहीं समझ पा रहा था वही कनिका अब अपनी धीमी आवाज में बोली,,, क्या आपको अपने इश्क पर भरोसा नहीं,, मैं आपको पूरी बात तो नहीं बता सकती पर एक बात जरूर कहूंगी की एक बार भरोसा करके देखिए,, कुछ चीजें दिखने में जैसी हूं वैसी होती नहीं है। आपके इश्क का तो पता नहीं लेकिन मुझे सिर्फ इतना पता है कि मैं आपसे बेइंतहा इश्क करती हूं। और शायद यह मरकर भी कभी खत्म नहीं होगा। उसकी बात पर एक पल के लिए असुर का दिलधड़क उठा,,

और उसके चेहरे पर अब अजीब सी बेचैनी होने लगी लेकिन अगले ही पल उसने कनिका का हाथ झटक और दांत पीसते हुए बोला अगर इतना ही है तो सच बात क्यों नहीं देती अगर तुम... अभी वह बोल ही रहा था कि तभी कनिका उसके होठों पर अपनी उंगली रखते हुए, कुछ बातें बताई नहीं जाती असुर बाबू,, उन्हें समझना पड़ता है क्या आपको लगता है कि मैं उसे दिन दी को वहां पर लेकर गई मेरी आंखों में देखकर एक बार कह दीजिए कि आपको लगा हो कि मैं दी को वहां पर लेकर गई हूं। उसकी बात पर असुर एक पल के लिए चुप हो गया और अपनी गहरी नजरों से उसकी आंखों में देखनेलगा,, जैसे-जैसे असुर उसकी आंखों में देख रहा था उसे एक अलग ही बेचैनी महसूस हो रही थी इस वक्त उसके दिल और दिमाग में जंग छिड़ी हुई थी। ना दिमाग दिल की सुन रहा था ना दिल दिमाग की,,

और अगले ही पल असुर ने उसका हाथ झटक और बाहर की तरफ चला गया लेकिन उसने अब कनिका की तरफ नहीं देखा क्योंकि उसका दिल अब हद से ज्यादा बेचैन होने लगा था और सांस हद से ज्यादा गहरी,,, वह बाहर की तरफ आया और अगले ही पल दरवाजे से बाहर निकल गया,, देखते ही देखते वह पठानी हाउस से बाहर निकाला और गाड़ी में बैठा और गाड़ी में बैठकर ही उसने अपने असिस्टेंट अजीत को कॉल किया,, अजीत जोकि असुर का असिस्टेंट था वह अभी-अभी ऑफिस वर्क से लौट कर घर आया था क्योंकि काफी देर हो चुकी थी की असुर ऑफिस नहीं आता था जिस वजह से ऑफिस का सारा काम अजीत संभाल रहा था और अमानत तो वैसे भी ऑफिस का काम नहीं संभालता था जैसे ही अजीत ने असुर का फोन देखा तो उसकी आंखें हैरत से फैल गई अब उसने जल्दी से फोन उठाया और दूसरी तरफ से ससुर ने कुछ कहा जिसे सुनकर अजीत की आंखें बड़ी हो गई और उसके चेहरे पर पसीना छलकने लगा वही असुर ने अपनी बात कहकर फोन पूरी तरह से काट दिया था।।

दूसरी तरफ,,

असुर जो की बड़ी तेजी से अपनी गाड़ी ड्राइव कर रहा था। वह अपनी लाल आंखों से जबड़े करते हुए बोला अगर तुम्हारी बात में इतनी सी भी सच्चाई है तो कसम से जिसकी वजह से यह सब कुछ हुआ है ना यह असुर सिंह पठानी उसे जिंदा जला देगा यह वादा है तुमसे और तुम्हें इतना कहकर असुर चुप हो गया..

दूसरी तरफ,,

अमानत का पर्सनल विला,, अफसाना इस वक्त अमानत की गोद में बैठी हुई थी और अफसाना का दिल इस वक्त जोर-जोरों से ढक-ढक कर रहा था वह बार-बार अमानत के आगे गिड़गिड़ा रही थी कि किसी तरह अमानत उसे छोड़ दे लेकिन अमानत उसे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। वह अमानत के आगे जितना बिगड़ रही थी अमानत को एक पल के लिए उन लोगों पर गुस्सा आ रहा था जो उसे तकलीफ दे रहे थे जिस वजह से अब उन पर खतरा बन रहा था और इस चीज से अनजान अमानत लगातार उसके आगे गिड़गिड़ाते हुए,, प्लीज मुझे छोड़ दीजिए मैं आपका क्या बिगाड़ा है जो आप मुझे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहे हैं मैं एक विधवा हूं आप क्यों नहीं समझते हैं। उसने इतना ही कहा था की अमानत ने अपनी एक उंगली उसके होठों पर रख दी,, जैसे ही उसने अपनी उंगली अफसाना के होठों पर रखी अफसाना के रोंगटे खड़े हो गए,, उसके बदन में गूसेबंप्स आ रहे थे।क्योंकि जिस तरह से अमानत ने अपना एक हाथ उसकी कमर को पकड़ा हुआ था और दूसरा उसके होठों पर रखा था और इस वक्त उसके चेहरे पर कोई एक्सप्रेशन नहीं थी। लेकिन फिर भी उसका यह अंदाज देखकर,,इस वक्त अफसाना की सांस हद से ज्यादा गहरी चल रही थी उसे अमानत से हद से ज्यादा डर लग रहा था वही अमानत जो के सामने पड़े खान की तरफ देख रहा था उसकी खुशबू से ही पता चल रहा था कि खाना काफी ज्यादा अच्छा बना हुआ है।

अमानत ने अब एक नजर खान की तरफ देखा और दूसरी नजर अफसाना की तरफ देखा जो उसकी गोद में अपना सिर झुकाए बैठी हुई थी अभी कुछ देर पहले उसने बहुत कोशिश की लेकिन अमानत में उसे छोड़ ही नहीं है इसीलिए उसने अब गहरी सांस ली और चुपचाप अपना सर झुका कर बैठ बैठ गई,, वही अमानत में अब सामने पड़े खाने में देखने निवाला बनाया,, और अफसाना के मुंह की तरफ बढ़ा दिया जैसे ही उसने निवाला अफसाना की तरफ बढ़ाया अफसाना की आंखें बड़ी हो गई,, वह तो बस अमानत की तरफ देखते

ही रहगई,,

To be continue...

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