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Soft hearted amant

प्राइवेट विला,,

अमानत की गाड़ी अभी-अभी उसके पर्सनल प्राइवेट विला में आकर रुकी थी। वही अमानत के साथ बैठी अफसाना ने जब यह चीज देखी तो उसका चेहरा दर से पीला पड़ गया और उसकी पकड़ अपने कपड़ों पर काश गई। अफसाना का दिल इस वक्त जोर-जोरों से धक धक कर रहा था। नहीं अमानत अब दूसरी तरफ से गाड़ी से बाहर निकाला और अगले ही पल वो घूम कर अफसाना की तरफ आया और गाड़ी का दरवाजा खोलने को हुआ कि तभी अफसाना जल्दी से पीछे की तरफ खींसकते हुए,, ना में सिर हिलाते हुए,, प्लीज हम आगे आगे हाथ जोड़ते हैं अभी वह दरवाजा खोल ही रहा था जब उसने अफसाना की मीठी सी आवाज सुनी तो एक पल के लिए उसका हाथ रुक गया,,

वही अफसाना रोते हुए प्लीज हमें अच्छा नहीं लग रहा। आपको क्या मिल जाएगा ,, एक विधवा के साथ इस तरह से पेश आकर हमें छोड़ दीजिए,, वह भी बोल ही रही थी कि तभी अमानत पूरी तरह से उसके ऊपर झुका और उसे गहरी नजरों से देखते हुए,, तुम भा गई हो मेरे दिल को इतना कह चुप हो गया,, और उसे कुछ देर देखता रहा,, वही अफसाना तो उसकी बात सुनकर उसकी तरफ देखते ही रह गई,, समझ ही नहीं आ रहा था कि वह कैसे अब अमानत से अपना पीछा छुड़ाएं,,, वही अम्मा आना तब अपनी गहरी आवाज में,,इससे ज्यादा मैंने कभी किसी को एक्सप्लेन नहीं दी इतना कहकर उसने अफसाना को अपने कंधे पर उठा लिया और अब अफसाना पूरी तरह से उसके कंधे पर झूल रहीथी,,

जिस तरह से अब अमानत में उसे उठाया था अफसाना का दिल जैसे एक पल के लिए धड़कन ही भूल गया था। वह पूरी तरह से अमानत के कंधे पर लटकी हुई थी लेकिन अगले ही पल उसने खुद को संभाला और उसके पीठ पर मुक्के बरसते हुए बोली छोड़ दीजिए प्लीज मुझे छोड़ दीजिए,, मेरी जिंदगी तो पहले से ही नरक है और आप और नरक क्यों बना रहे हैं छोड़िए मुझे मेक विधवा हूं मनहूस हूं मैं क्यों अपने,, गले में मुसीबत डाल रही है मैं एक मानुष औरत हूं जो अपने पति को खा गई।,, उसकी बात पर अमानत के जबड़े पूरी तरह से कर चुके थे अब तक अमानत वहां पर हाल में पहुंच चुका था,,

वह विला अंदर से इतना ज्यादा खूबसूरत था लेकिन अंदर का सन्नाटा हद से ज्यादा खौफनाक भी था वहां पर देखकर ऐसा लग रहा था जैसे किसी को भी वहां पर बोलने की इजाजत न हो,, इतना गहरा सन्नाटा किसी का भी दिल चीर दे,, उसकी बात पर अमानत को अब उसे ज्यादा गुस्सा आ रहा था लेकिन अभी वह कुछ बोला नहीं उसने अगले ही पल उसे सोफा पर लेटाया और उसके ऊपर पूरी तरह से झुक गया,,, जिस तरह से अमानत उसके ऊपर पूरी तरह से झुका हुआ था अफसाना अंदर तक कांप चुकी थी। इस वक्त दर से उसकी हालत जितनी ज्यादा खराब थी यह वही जानती थी कि वह किस तरह से सांस ले पा रही थी।

बढ़ते पाल के साथ उसकी धड़कने जैसे धड़कने से इनकार कर रही थी। उसके माथे पर पसीने की बूंदे उभरने लगी थी वह रोते हुए बोली,,, आप ऐसा क्यों कर रहे हैं क्या बिगाड़ा है मैं आपका और मैं तो आपको कभी देखा भी नहीं तो क्यों आप मेरे साथ इस तरह से बिहेव कर रहे हैं यहां पर क्यों लेकर आए हैं मुझे प्लीज मुझे बता दीजिए आखिर मुझे कोई गलती हो गई आप तो... इतना कहते हुए वह चुप हो गई,,

वही अमानत अब उसके चेहरे पर अपने होठों को गोल कर हवा छोड़ते हुए बोला,, तुम्हारी गलती कुछ भी नहीं है तुम्हारी गलती यह है कि तुम इस अमानत पठानी को पसंद आ गई हो,, इतना कहते हुए उसने अपने हाथ को बेहद रूमानी तरीके से अफसाना के चेहरे पर घुमाया जिससे अफसाना के सांस जैसे उसके गले में अटक गई उसने तो अपनी सांस इस तरह से गले में रोक रही थी मानो वह वहां पर हो ही ना इस वक्त अफसाना का दिल उसके कलेजे से बाहर आने को फिर रहा था वह अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज से बोली लेकिन मैं इस काबिल नहीं हूं साहिब,,, मैं एक विधवा हूं और विधवा औरत मनहूस होती है। शादी होते ही 1 घंटे बाद में अपने पति को खो गई। इतना कहते हुए उसकी आंखों में नमी तैर रही थी अमानत उसकी तरफ देखते हुए,,

दांत पीसकर बोला बकवास बंद करो,, यह वाहियात बकवास तुम्हें किसने कही,, अमानत की बात पर अफसाना ने अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुकते हुए बोली साहेब सच तो सच ही होता है इसमें बताने वाली कौन सी बात है। तभी अमानत उसके चेहरे को अपने हाथों में भरते हुए ऐसा कुछ नहीं होता यह सब एक मनगढ़ंत कहानी होती हैं तभी अफसाना रोते हुए यह सच बात है साहब तभी तो 1 घंटे बाद मेरा पति मर गया मैं तो कभी अपने पति को एक नजर देखा भी नहीं कि वह कैसे दिखते थे। उसकी बात सुनकर एक पल के लिए अमानत उसकी तरफ देखा ही रह गया। उसे अफसाना की मासूमियत पर इतना ज्यादा प्यार आ रहा था कि वह तो बस उसके चेहरे को देख ही जा रहा था अफसाना बहुत ज्यादा मासूम थी उसे इतनी भी समझ नहीं थी कि मनहूस या फिर ओछे साए जैसी कोई चीज नहीं होती थी।

अमानत तो बस एक तक उसके चेहरे को ही देखे जा रहा था। वही अफसाना आप रोते हुए बोली मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूं प्लीज मुझे वहां पर ले चलिए अगर किसी ने मुझे आपके साथ देख लिया तो वह लोग मुझे और भी ज्यादा परेशान करेंगे इतना कहते हुए वह फूट-फूट कर रोने लगी। अफसाना की बात पर अमानत की मुठिया पूरी तरह से कस चुकी थी। वह इतना तो समझ चुका था कि कोई तो है जो अफसाना को बहुत ज्यादा परेशान कर रहा था और ऊपर से यह जो मनहूस वाली बात थी अब उसे यह पता लगाना था कि आखिर यह बातें अफसाना के मुंह से क्यों निकल रही है। उसे अफसाना की मासूमियत देखकर इतना तो पता चल गया था कि अफसाना यह बातें खुद से नहीं कर सकती जरूर किसी न किसी ने उसके साथ इस तरह से बिहेव किया है तभी अफसाना के मुंह से ऐसी बातें निकल रही थी।

दूसरी तरफ अफसाना लगातार उसके आगे हाथ जोड़ते हुए गिड़गिड़ाई जा रही थी। वही अमानत तो बस उसके चेहरे की तरफ देख ही जा रहा था उसके वह होंठ जो की हल्के हल्के हाल रहे थे। उन्हें देखकर अमानत को अब कुछ-कुछ होने लगाथा। लेकिन उसने अब अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमाया और सीधे होकर सोफा पर बैठ गया उसके सीधे होकर बैठते ही अफसाना की जान में जैसे जान आई अब वह अपनी जगह पर जल्दी से बैठी और पीछे की तरफ होकर कोने में दुबक कर बैठ गई।

इस वक्त उसका चेहरा रो-रो के लाल पड़ चुका था और यह चीज देखकर अमानत को उसके लिए बहुत ज्यादा बुरा लग रहा था,, अमानत अब उसकी तरफ देखते हुए खाना खाया तुमने,, उसकी बात पर अफसाना ने कोई जवाब नहीं दिया लेकिन उसने अपनी नज़रें पूरी तरह से नीचे की तरफझुका ली,, और उसका नजरे झुकना ही यह बात साबित करना था कि उसने कुछ नहीं खाया,, अमानत अब उसकी तरफ देखते हुए बोला कुछ बनाना आता है तुम्हें,, उसकी बात पर अफसाना ने अपनी नज़रें अब उठाकर,, अमानत की तरफ देखा,,

और हां मैं सर हिला दिया तो अमानत ने एक गहरी मुस्कुराहट के साथ बोला चलो फिर आज मुझे कुछ खिलाओ इतना कहकर उसने उसे किचन की तरफ जाने का इशारा किया। अमानत की बात पर अफसाना ने हमें शेर हिलाया और धीरे से अपनी जगह से उठी अभी भी उसे अमानत से डर लग रहा था इसीलिए वह दूसरी तरफ से घूमते हुए किचन की तरफ चली गई और उसका इस तरह से जाना अमानत के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कुराहट आ चुकी थी। कुछ ही देर में अफसाना वहां पर बनाने के लिए कुछ ढूंढ रही थी तभी उसके हाथ में पलक लगी और अगले ही पल उसने फ्रिज में देखा तो उसमें पनीर पड़ा हुआ था तो उसके दिमाग में कुछ चलने लगा अगले ही पल उसने पलक को काटना शुरू किया,, और तकरीबन 15 20 मिनट बाद उसने पालक पनीर की सब्जी रेडी कर ली थी। पालक पनीर की सब्जी की खुशबू उसे पूरे किचन में फैल चुकी थी और उसके अलावा बाहर जहां पर हाल में अमानत बैठा सिगरेट पी रहा था वहां पर भी पालक पनीर की खुशबू पहुंच चुकी थी उसकी खुशबू से ही अमानत के चेहरे पर तिरछी मुस्कराहट तैर गई,,

वही अफसाना अब पालक पनीर बनाकर दूसरी तरफ रोटियां सीखने लगी कुछ ही देर में उसने चार-पांच रोटियां शक्कर एक प्लेट में लगे और एक कटोरी में पालक की सब्जी लेकर बाहर की तरफ आई उसने देखा अमानत सोफा पर लीन होकर सिगरेट पी रहा था। अब वह जल्दी से अमानत के पास आई और अपना सर झुका कर आगे प्लेट रखकर बड़ी धीमी आवाज में बोली साहब खाना,,

जैसे ही उसकी आवाज अमानत के कानों में पड़ी जो की सोफे पर सर रखकर आंखें बंद करके सिगरेट के लंबे केश भर रहा था उसके हाथ वहीं पर रुक गए उसने अब अपना चेहरा उठा कर अफसाना की तरफ देखा जो की अब सर झुकाए अमानत के सामने खड़ी थी। जिस तरह से इस वक्त अफसाना उसके सामने खड़ी थी अमानत की नजरे उसे पर और भी ज्यादा इंटेंस हो गई थी।

अफसाना को भी अमानत की नजरे खुद पर महसूस हो रही थी जिस वजह से उसका दिल जोरो जोरो से धड़क रहा था लेकिन उसने एक बार भी नजर उठाकर अमानत की तरफ नहीं देखा । लेकिन अगले ही पल जो अमानत ने किया उसे अफसाना का दिल एक पल के लिए धक्का सा

रह गया।

To be continue...

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