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Somya ki bebasi

सुखप्रीत का ट्रक एक जगह पर आकर रुका और जैसे ही सौम्या ने सामने की ओर देखा तो उसका दिल धक सा रह गया क्योंकि इस वक्त सुखप्रीत का ट्रक एक कोठे पर आकर रुका था. और उसे कोठे को देखकर सौम्या को अपने बदन में से जान निकलती हुई महसूस हो रही थी उसके हाथ पैर ठंडे पड चुके थे. और सांस गहरी चलने लगी थी वह अपनी लडखडाती हुई आवाज में बोली ये आप मुझे कहां पर ले आए हैं. उसकी बात पर सुखबीर हंसते हुए, अरे मेमसाहेब आपको नहीं पता कि आप कहां पर आई हैं इतना तो आप भी समझ चुकी होगी कि मैं आपको कहां पर लेकर आया हूं इतना कहते हुए उसके चेहरे पर बेशर्मी साफ झलक रही थी,

उसके चेहरे की एक्सप्रेशन देखकर अब सौम्या की हालत और भी ज्यादा खराब होने लगी क्योंकि वह इतना तो समझ चुकी थी सुखप्रीत जो दिख रहा था दिखाने में लग रहा था वह वैसा इंसान तो बिल्कुल भी नहीं था अब सुखप्रीत बाहर की तरफ निकला और अगले ही पल घूम कर सौम्या की तरफ आया वही सौम्या का दिल अब जोरो जोरो से धडक रहा था उसकी जान उसके सीने से बाहर निकल रही थी जैसे ही सुखप्रीत ने उसकी तरफ का दरवाजा आकर खोला वह जल्दी से पीछे की तरफ होने को हुई लेकिन सुखप्रीत ने उसे पीछे होने नहीं दिया अगले ही पल उसने उसकी बाह पकडी और अपनी तरफ घसीटते हुए, अपने कंधे पर उठा लिया जैसे ही उसने अपने कंधे पर सौम्या को उठाया सौम्या झटपटाते हुए बोली,,,छोडो मुझे छोडो.

तुम ऐसे नहीं कर सकते तुम ऐसे मुझे उठा कर कहीं भी नहीं लेकर जा सकते छोडो मुझे घर जाना है. वापिस, please help me anyone here, इतना कहते हुए वह लगातार अपने मुक्के सुखबीर की पीठ पर बरसाए जा रही थी वही सुखबीर हंसते हुए अब उसने उसकी कमर से पकड कर दबाया और बोला रुक जा अभी तेरे साथ बडे मजे करनी है मुझे. आज की रात हम दोनों के बीच कोई नहीं आने वाला. मिलकर आग लगा देंगे बिस्तर पर इतना कहते हुए उसने अब उसकी कमर पर हल्का सा spank किया.

सुखप्रीत के इस तरह से छूने से और उसकी बातों से सौम्या का दिल पूरी तरह से दहल चुका था उसकी बची कुची जान अब सुखप्रीत की बातें निकल रही थी. वह रोते हुए जोरों से चिल्लाई mister kapoor.

उसकी बात पर सुखबीर जोर- जोरों से हंसते हुए और कोई नहीं आने वाला तेरा Mister कपूर shapoor अब तुझे मेरे साथ ही बितानी पडेगी रात, और आज मैं अपनी खूब मन की करूंगा जनानी तो मुझे खुश करती नहीं मेरी अब तुझसे अपने बदन की आग ठंडी करुंगा इतना कहते हुए अब वह उसे उस कोठी के अंदर तक लेकर आ चुका था. कोठी के बीचो- बीच एक औरत बैठी थी जो की इस वक्त एक मंजी पर बैठी हुई थी. उस औरत के चेहरे पर देखकर पता चल रहा था कि वह औरत बिल्कुल भी अच्छी नहीं थी वह औरत सौम्या को देखते हुए बड़ी अदा से बोली,,,बडा चोखा माल लाया है तू, इतना कहते हुए वह सुखप्रीत के कंधे पर ही सौम्या को स्कैन कर रही थी यह औरत इस कोठे की मालकिन थी और इसका नाम मंदाकिनी बाई था. तभी सुखप्रीत मंदाकिनी की तरफ देखकर,

हां माल चोखा लाया हूं तो पैसे भी चोखे निकलना समझी ना पहले तो मैं ही इससे अपना पेट भर लूं इतना कहते हुए उसने गहरी नजरों से सौम्या की तरफ देखा जो इस वक्त उसने कंधे पर उठाई हुई थी वही सौम्या के तो इस वक्त रोंगटे खडे हो रहे थे. वह एक बार फिर से जोर से चिल्लाने को हुई कि तभी सुखप्रीत उसकी आवाज को बीच में काटते हुए कोई नहीं सुनने वाला यहां पर तेरी सभी यहां पर ऐसी ही लडकी आती हैं और बाद में इस चीज को अपना लेती हैं अब तेरे साथ रोज यही सब होगा इतना कहकर वह सामने बने कमरे में सौम्या को ले गया, वह जैसे ही उसे कमरे में अंदर की तरफ जाने को हुआ सौम्या ने वहां पर एक खिडकी की सलाखों को पकड लिया, जैसे ही उसने से सलाखों को पकडा सुखप्रीत के चेहरे पर अब गुस्सा छलकने लगा वह गुस्से से दांत पीसते हुए बोला सिलाखे को छोड,

नहीं तो भी जो भी करूंगा प्यार से करूंगा अगर तूने सलाखों का नहीं छोड़ा तो तेरा इतना बुरा हाल करूंगा तू सोच भी नहीं सकती। छोड दे सलाखें, लेकिन सौम्या दांत पीसते हुए बोली नहीं छोडूंगी तुम मुझे नीचे उतरो मैं तुम्हारे साथ कहीं नहीं जाऊंगी पर तुम्हारे साथ उस कमरे में तो बिल्कुल नहीं जाऊंगी उसकी बात पर अब सुखप्रीत के चेहरे पर डेविल एक्सप्रेशन आ गए और अगले ही पल उसने सौम्या को नीचे की तरफ खडा किया और उसके हाथों को अपने हाथों में भरकर जोरो जोरो से मसलने लगा जिससे वह सलाखें सौम्या के हाथों में चुभने लगी और सौम्या का चेहरा दर्द से लाल होने लगा उसे इतना ज्यादा दर्द हो रहा था कि अब उसकी चीख निकलने लगी वह रोते हुए चिल्ला कर बोली अगर मेरे Mister कपूर को पता चल गया ना तो वह तुम्हें जिंदा जला देंगे इतना बात याद रखना वह कभी भी यहां तक पहुंचते होंगे और तुम्हारे लिए यह चीज बिल्कुल भी अच्छी नहीं होगी,

उसकी बात पर सुखप्रीत हंसते हुए, देख लेंगे तेरे Mister कपूर को ऐसी कौन सी बला है वह जो यहां पर आएगा तो तूफान आ जाएगा, उसकी बात पर का सौम्या अब व्यंग्य से तूफान नहीं प्रलय आ जाएगा इस कोठे को संभलने तक का मौका नहीं मिलेगा और जलकर राख हो जाएगा यह कोठा, उसकी बात पर सुखप्रीत जोरो जोरो से हंसने लगा दूसरी तरफ बैठी मंदाकिनी भी जोरों से हंसते हुए अरे ऐसी कौन सा बम का गोला है रे तेरा Mister कपूर हम भी तो देखें चल ले जा सुखप्रीत ईसे कमरे में और ऐसा रौंदना की यह याद रखें, मंदाकिनी की बात से सौम्या का दिल जैसे धडकन ही बंद हो गया, वही सुखप्रीत ने अब एक झटका सौम्या के हाथों पर मार के सौम्या के हाथ इस वक्त छुड़ा लिए,

और सौम्या दर्द से तडप उठी उसके हाथ पूरी तरह से लाल पड चुकेथे, और अगले ही पल जो हुआ सौम्या की धडकनों ने जैसे एक पल के लिए उसका साथ छोड दिया हो क्योंकि सुखप्रीत ने उसे गोद में ले जाकर इतनी जल्दी उसे अंदर लेकर गया की सौम्या को संभालने का भी मौका नहीं मिला और ले जाकर उसने उसे बेड पर पटक दिया,

बेड पर पटकते ही सुखप्रीत अब उसे अपनी गहरी नजरों से देखने लगा उसकी नजरें खुद पर पाकर सौम्या को उससे और भी ज्यादा घिन महसूस हो रही थी. वह अब अपनी लडखडाती हुई आवाज में बोली संभल जाओ अगर Mister कपूर आ गए वह तुम्हें जिंदा नहीं छोडेंगे मुझे जाने दो, उसकी बात पर सुखप्रीत अब फिर से हंस और बोला पहले तेरे उस Mister कपूर को आने तो दे तब तक मैं तेरे मजे ले लेता हूं इतना कहकर उसने अब पीछे से दरवाजा बंद किया और अपने कदम सौम्या की तरफ बढा दिए वहीं सौम्या बिस्तर से उठ कर खड़ी हो चुकी थी।अब अपने कदम पीछे लेकर ना में सिर हिलाते हुए, प्लीज रुक जाइए हम आपके आगे हाथ जोडते हैं हम एक इज्जतदार घर की औरत है.

हमें बख्श दीजिए तभी सुखप्रीत हंस और बोला पहले तो बडा दहाड रही थी अब भीगी बिल्ली क्यों बन गई है अभी तो मुझे बहुत कुछ करना है अभी से भीगी बिल्ली बन रही है चल बन जा मुझे क्या है मुझे तो मजे लेने है इतना कह कर अगले ही पल वह सौम्या के बिल्कुल पास आकर खडा हो गया जैसे ही वह सौम्या के बिल्कुल पास आकर खडा हुआ सौम्या को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके बदन में से जान निकल ली हो उसके पैर पूरी तरह से कांपने लगे,

इस वक्त वह बेड के पास ही खडी थी और जैसे ही सुखप्रीत उसके पास पहुंचा था उसके हाथ पैर कांपने लगे थे वह ना में सिर हिलाते हुए प्लीज नो नहीं अभी वह बोल ही रही थी कि सुखप्रीत ने उसके सीने पर हाथ रख उसका पल्लू नीचे की तरफ फेंक दिया था जैसे ही उसने उसका पल्लू नीचे की तरफ फेंका सौम्या अंदर तक कांप उठी वह जोरों से चीख कर बोली नहीं.

इतना कहकर उसने अपने सीने को अपने हाथों से ढक कर, जल्दी से दूसरी तरफ भागने को हुई कि तभी सुखप्रीत ने उसके कंधों को अपने हाथों में पकड कर,, कहां चली सोनपरी, अभी तेरा रस निचोडना है. वैसे तेरा बदन देखकर ही पता चल रहा है की कितनी चाशनी है तुझ में. इतना कहते हुए उसने अपनी नजरें सौम्या की कमर पर डाली, वही सौम्या की हालत तो पहले ही बहुत ज्यादा बुरी हो रही थी जिस तरह से सुखप्रीत अब उसे देख रहा था उसे खुद में एक गंदा सा महसूस हो रहा था कि वह बता नहीं सकती थी. तभी सुखप्रीत ने उसे जोर से धक्का दिया और सौम्या एक बार फिर से बेड पर जा गिरी और बेड पर गिरते ही, सुखप्रीत उसके ऊपर चढ गया, जिससे सौम्या की सांस उसके हलक में अटक गई, और अब उसकी आंखों से आंसू और भी ज्यादा तेजी से बहने लगे वह रोते हुए बोली, तुम ऐसा नहीं कर सकते अगर तुमने अपनी लिमिट क्रॉस की तो तुम नहीं जानते कि तुम्हारी हालत क्या होने वाली है,

तुम्हें Mister कपूर जिंदा नहीं छोडेंगे, इसीलिए बोल रही हूं अपने कदम पीछे ले लो मैं तुम्हें एक मौका और दे रही हूं मैं तुम्हें उनसे बचा लूंगी अभी वह बोल ही रही थी कि तभी सुखबीर बडे सेडक्टिव वे में उसके गले पर हाथ फिरते हुए, अरे मेरी रसपरी तुझे हाथों से कैसे जाने दूंगा, तुझे नहीं छोडना तो अब मेरी सबसे बडी भूख बन चुका है इतना कह कर उसने अपने होठों पर अपनी जीभ घुमाई जैसे ही उसने यह हरकत की सौम्या ने अपना चेहरा दूसरी तरफ घूम लिया क्योंकि उसे इस वक्त सुखप्रीत से बहुत ज्यादा घिन महसूस हो रही थी उसे इस वक्त सुखप्रीत से जितनी ज्यादा नफरत हो रही थी उतना ही ज्यादा गुस्सा खुद पर आ रहा था आखिर क्यों वह अपने गुस्से में अपना आपा खो बैठी ना वह घर से बाहर निकलती और ना वह यहां पर पहुंचती, वह रोते हुए मन ही मन बोली प्लीज Mister कपूर मुझे बचा लीजिए आप कहां पर हो इतना कहते हुए उसकी आवाज पूरी तरह से कांप रही थी. और अगले ही पल जो हुआ उसको ऐसा लगा जैसे किसी ने उसकी जान उसके हलक में हाथ डालकर निकाल ली हो क्योंकि सुखप्रीत ने अपने होंठ उसके गले पर रख दिए थे. जैसे ही सुखप्रीत ने अपने होंठ उसके गले पर रखे उसे अपने आप में घिन महसूस होने लगी.

वह रोते हुए बोली नहीं नहीं मत करो ऐसा, मैं मर जाऊंगी जिस तरह से तुम मुझे छू रहे हो, मैं अपने Mister कपूर के अलावा इस तरह से किसी और कि नहीं हो सकती प्लीज मुझे इस तरह से मत छुओ तुम्हारी एक छुअन से मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं सो मौतें मर रही हूं. इतना कहते हुए वह लगातार सुखप्रीत के सीने पर अपने हाथों को चलाने लगी. उसका रोना बिलखना देखकर सुखप्रीत को जैसे एक अलग ही सुकून दे रहा था वह राक्षसों की तरह हंसते हुए, और बोला और चिल्लाओ मैं भी देखता हूं कि तुम्हें यहां पर कौन बचाने आएगा और रही बात मेरे मरने और जीने की, अगर वह मुझे मारेगा तो मैने भी कौन सा हाथों में चूडियां पहन रखी हैं.

आने दो ऐसा भी कौन सा मर्द का बच्चा है जो सुखप्रीत सैनी को हरा जाए, इतना कहते हुए उसने अब सौम्या के दोनों हाथों को अपने हाथों में भरा और सिर के ऊपर की तरफ लगा दिया और अगले ही पल उसने अपने हाथ सौम्या की कमर पर कस दिए जैसे ही उसने अपने हाथ सौम्या की कोरी कमर पर रखें, सौम्या का दिल एक पल के लिए

धडकन ही भूल गया,

To be continue.

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