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Afsana ka darr

Pathani house,,

अभी-अभी जो सर्वेंट है जिसका नाम रीमा था वह अफसाना को घसीटते हुए अंदर की तरफ लेकर जा रही थी कि तभी उनके आगे एक शख्स आकर खड़ा हो गया। उसे देखकर उन दोनों का दिल धक सा रह गया। वहीं रीमा तो अपनी जगह पर खड़ी-खड़ी कांपने लगी। रीमा को ऐसा लग रहा था जैसे उसका कलेजा ही उसके मुंह को आ जाएगा, लेकिन किसी तरह उसने खुद को संभाल कर अपना चेहरा नीचे की तरफ झुका लिया और अपने हाथ अफसाना के हाथों पर कस दिए।

वहीं अफसाना, जो एक टक सामने खड़े शख्स को देखे जा रही थी, वह तो अपनी जगह पर खड़ी-खड़ी फ्रीज़ हो चुकी थी। उसका दिल इस वक्त जोर-जोर से धक-धक कर रहा था।

क्योंकि सामने इस वक्त अमानत खड़ा था। अमानत की नज़रें एक टक अफसाना पर बनी हुई थीं और उसकी आंखें इस वक्त हैरत से फैल चुकी थीं, क्योंकि उसने अभी कुछ देर पहले ही अफसाना को सड़क के बीचो-बिच भागते हुए देखा था। और अब अफसाना को अपने सामने देखकर उसकी आंखें और भी हैरत से फैल चुकी थीं।

वहीं अफसाना तो अपनी जगह पर जम ही गई थी, क्योंकि उसने भी अभी-अभी अमानत को बाहर देखा था। और अफसाना अमानत की ही गाड़ी के आगे जाकर मरने जा रही थी।

रीमा ने धीरे से सिर झुकाते हुए कहा,

“सर… आपको कुछ चाहिए? मैं अभी आपके रूम में दे देती हूं…”

उसकी बात पर अब जाकर अमानत को होश आया, नहीं तो वह लगातार सिर्फ अफसाना को ही देख रहा था। अफसाना ने अभी भी विधवा की साड़ी पहनी हुई थी। अफसाना का वह मासूम सा चेहरा देखकर अमानत कहीं खो सा गया था।

रीमा की आवाज सुनकर अफसाना ने अपनी नज़रें अगले ही पल झुका ली थीं। उसका दिल इस वक्त बुरी तरह से घबरा रहा था कि कहीं अमानत उससे कोई बात ही न कह दे… उसे डर लग रहा था कि कहीं अमानत उसके बारे में बात ही न दे कि अभी थोड़ी देर पहले वह उसकी गाड़ी के आगे जाकर मरने जा रही थी…

इस वक्त अफसाना अपनी जगह पर खड़ी-खड़ी शिवर कर रही थी। उसके माथे पर पसीने की बूंदें छलक रही थीं। तभी अमानत की नजर रीमा के हाथ पर गई जो अफसाना के हाथ पर कसा हुआ था। जिस तरह से रीमा ने अफसाना का हाथ पकड़ा हुआ था, अमानत की नज़रें ना जाने क्यों उस पर सख्त हो गई थीं।

उसने अब रीमा की तरफ देखा और बोला,

“अभी इसी वक्त मेरे रूम में आओ… तुम दोनों।”

जैसे ही अमानत ने यह बात कही, उन दोनों की सांस गले में अटक गई। वहीं अफसाना का तो जैसे जान निकलनी शुरू हो गई। वह नहीं चाहती थी कि उसकी कोई भी बात रीमा को पता चले। अगर रीमा को पता चल जाती तो शायद आज रात उसकी फिर से पिटाई होती। उसे इस चीज़ से बहुत ज्यादा डर लगता था। इस वक्त उसे अपना गला सूखता हुआ महसूस हो रहा था… और सांसें अटकती हुई महसूस हो रही थीं… उसे ऐसा लग रहा था जैसे किसी भी वक्त उसका कलेजा उसके सीने से बाहर आ जाएगा।

कुछ पाँच मिनट बाद, दोनों अमानत के कमरे में खड़ी थीं और अमानत अपने सोफा पर बैठा हुआ था। उसकी गहरी नज़रें एक टक अफसाना पर बनी हुई थीं। इस वक्त दोनों की जो हालत थी, वह वही दोनों जानती थीं, लेकिन किसी तरह खुद को नॉर्मल रखने की कोशिश कर रही थीं।

रीमा ने अभी भी अफसाना के हाथ पर अपनी पकड़ कसी हुई थी, जिस पर ना चाहते हुए भी अमानत की नज़रे और भी ज्यादा कठोर होती जा रही थीं।

वहीं रीमा तो अपना चेहरा नीचे की तरफ कर खड़ी थी। उसे कुछ भी खबर नहीं थी कि इस वक्त अमानत की नजरे उस पर इतनी ज्यादा गहरी थीं कि वह अंदर तक जल रहा था।

अमानत के जबड़े पूरी तरह से कस चुके थे। वह रीमा की तरफ देखकर बोला,

“तुम… जल्दी जाकर मेरे लिए खाना बना कर लाओ। अभी इसी वक्त। मुझे भूख लगी है।”

उसकी बात सुनकर रीमा हैरानी से उसकी तरफ देखने लगी क्योंकि कभी भी अमानत ने ऐसा नहीं किया था। वह खाना खाता तो सिर्फ एक बार और वह भी रात को… उसके बाद वह कभी खाना नहीं मांगता था।

और इस वक्त तो रात के ढाई बज रहे थे। उसने घड़ी की तरफ देखा—वहीं पर ढाई का टाइम था।

लेकिन अमानत ने कहा था, तो उसे करना ही था। इसलिए उसकी पकड़ अब अफसाना के हाथ पर ढीली हो गई। उसने अफसाना का हाथ छोड़ते हुए कहा,

“चलो… खाना बनाना है।”

जैसे ही उसने अफसाना को यह बात कही, तभी अमानत की आवाज आई—

“मैंने तुमसे कहा था… उसे नहीं। उसे यहीं छोड़कर जाओ।”

जैसे ही अमानत ने यह कहा, अफसाना का दिल धक से रह गया। उसकी आंखें बड़ी हो गईं। वह अपनी जगह पर खड़ी-खड़ी जम गई।

रीमा ने अब सिर झुकाया और हां में सिर हिलाया, लेकिन उसकी तिरछी नज़रें अब भी अफसाना पर थीं… जिन्हें देखकर अफसाना को अपने शरीर में कपकपी सी महसूस हो रही थी।

रीमा उसे घूरते हुए वहां से जा चुकी थी। दूसरी तरफ अमानत की भी नज़रे कंटीन्यूअस अफसाना पर बनी हुई थीं।

जैसे ही रीमा वहां से गई, अफसाना के चेहरे पर फिर से पसीना उभरने लगा, क्योंकि अब वह अमानत के साथ पूरी तरह से अकेली थी।

और तभी उसकी सांसें उसके गले में अटक गईं—

क्योंकि अमानत बिल्कुल उसके पीछे आकर खड़ा हो गया था।

अब अमानत का हाथ सीधा उसके पेट पर था, जिससे उसकी सांस पूरी तरह से अटक चुकी थी। उसका दिल धड़कने से इनकार करने लगा था। हाथ-पैर ठंडे पड़ चुके थे।

अगले ही पल उसने पलटकर देखा…

अमानत की गहरी नज़रें इस वक्त उस पर थीं।

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✦ दूसरी तरफ… ✦

कनिका इस वक्त बाथरूम में खड़ी थी और उसकी आंखों में आंसू लबालब बह रहे थे। शावर का पानी लगातार उसके चेहरे को भिगो रहा था और उसके आंखों से निकलते आंसू उसके गालों पर बह रहे थे, लेकिन शावर की वजह से वह आंसू छुप रहे थे।

अभी वह शावर में भीगी ही रही थी कि तभी बाथरूम का दरवाजा खोलने की आवाज आई। जैसे ही दरवाजा खुला, कनिका की आंखें तुरंत उधर गईं… और उसकी आंखें एक पल के लिए बड़ी हो गईं।

क्योंकि इस वक्त असुर दरवाजे पर खड़ा था… उसके जबड़े पूरी तरह से कस चुके थे।

वह गुस्से से दांत पीसते हुए बोला—

“मरना है क्या? अभी ठंड से बचा रहा हूं और अब फिर से मुंह उठाकर बाथरूम में चली आई तुम?”

इतना कहते हुए उसकी नज़रें एक टक कनिका के चेहरे पर टिकी हुई थीं। मजाल थी कि उसकी नज़रें इधर-उधर भी हों।

हालांकि कनिका पूरी तरह से बेलीबास उसके सामने खड़ी थी… ले

किन असुर को इस चीज़ से जरा भी फर्क नहीं पड़ रहा था।

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To be continue…

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